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‘इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2026’ के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ


केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी डॉ. जितेंद्र सिंह जी, देश के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार अजय सूद जी, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित सभी वैज्ञानिकगण, अन्य सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आज यहां Science और Technology की दुनिया के इतनी बड़ी तादाद में delegates मौजूद हैं। हमारे युवा innovators भी हैं। यहां आने से पहले मैंने कुछ स्टार्टअप्स के साथियों से बातचीत की। भारत के युवा जिस स्केल पर सोच रहे हैं, जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वो उत्साह बढ़ाने वाला है।

साथियों,

मैं इस कॉन्क्लेव में पिछली बार भी आया था। इस बार हम Emerging Science  and Technology विषय पर चर्चा कर रहे हैं। दशकों पहले एक समय था, जब भारत के लिए Science और Technology का मतलब था catch up दुनिया में कुछ innovate होता था, तो कुछ साल बाद वो टेक्नोलॉजी हम तक पहुंचती थी। हम उसे adopt करते थे या उसमें कुछ छोटे मोटे सुधार करके आगे बढ़ा देते थे, लेकिन आज 21वीं सदी का भारत एक नई सोच और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब हमारा लक्ष्य भारत के लिए, दुनिया के लिए, आज के लिए, आने वाले कल के लिए, नई टेक्नोलॉजी बनाना, उसकी दिशा तय करना और दुनिया की समस्याओं के समाधान देने की शक्ति विकसित करना है। कोरोना काल में हमने इसका उदाहरण देखा है। जब दुनिया के अनेक देश वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर के चुनौतियों को सामना कर रहे थे, भारत ने अपनी वैक्सीन विकसित की, भारत ने बड़े स्तर पर vaccination किया, और दूसरे देशों को भी वैक्सीन भेजी। यही 21वीं सदी के भारत का आत्मविश्वास है। हम प्रथम प्रयास में ही मंगल ग्रह तक पहुंचते हैं। हम चंद्रमा के उस साउथ पोल पर पहुंचते हैं, हम चंद्रमा के उस साउथ पोल पर पहुंचते हैं, जहां कोई नहीं पहुंच पाया और इसलिए ही मेरा विश्वास है – India must embrace the technology after future innovate boldly and lead the world in creating them.

साथियों,

जीरो की खोज से लेकर number system और astronomy तक भारत की परंपरा ज्ञान और खोज की रही है। आज हम अपनी इसी वैज्ञानिक विरासत को आधुनिक टेक्नोलॉजी और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। बीते एक वर्ष के कुछ उदाहरणों से ये बदलाव और बेहतर समझ आता है। 30 अक्तूबर को देश डॉ होमी जहांगीर भाभा की जन्मजयंती मनाएगा। इसलिए शुरूआत nuclear energy से करते हैं।

साथियों,

आप सभी जानते हैं कि विकसित भारत के निर्माण के लिए हमें बड़ी मात्रा में nuclear energy की जरूरत होगी। nuclear fuel के लिए आयात पर निर्भरता हमारी ऊर्जा सुरक्षा के सामने एक चुनौती है। इसलिए भारत अपनी Fast Breeder Reactor Technology पर तेजी से काम कर रहा है। कुछ महीने पहले ही देश का 500-Megawatt Prototype Fast Breeder Reactor, First Criticality तक पहुंच चुका है। यह Nuclear Energy के क्षेत्र में हमारी Long Term Strengths को मजबूत करने की दिशा में एक अत्यंत बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है।

साथियों,

एनर्जी सेक्योरिटी हो या टेक्नॉलजी में आत्मनिर्भरता, भारत का लक्ष्य केवल अपनी जरूरतें पूरी करना नहीं है। हमारा लक्ष्य Critical Technologies में अपनी शक्ति का विस्तार करना भी है। इसी वर्ष भारत ने Space Sector में भी नई उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत के एक Space Start-up ने Made in India रॉकेट से, पहली ही कोशिश में Satellite को Orbit में स्थापित किया। भारत ने Satellite Docking की क्षमता भी हासिल की। आज भारत के अनेक Start-ups, Space Science में नए समाधान लेकर आए हैं। स्पेस सेक्टर में युवा वैज्ञानिकों और उद्यमियों की भागीदारी भी बहुत बड़ी मात्रा में बढ़ रही है।

साथियों,

भारत जितने अलग-अलग सेक्टर्स में सफलताएं हासिल कर रहा है, वो अभूतपूर्व है। इसी वर्ष भारत ने AI Impact Summit आयोजित की और अपना Model भी लॉन्च किया। भारत में तैयार Chips के पहले Shipments अब दुनिया तक पहुंचने शुरू हो चुके हैं। Battery Storage के क्षेत्र में भी हम ऐसी Capacity Building पर काम कर रहे हैं, जो भारत में उपलब्ध Raw Materials पर ही आधारित हो। 

साथियों,

Nuclear से Space तक, AI से Semiconductors तक, इन सभी क्षेत्रों की जरूरतें अलग हैं। लेकिन इनका संदेश एक है। भारत Emerging Technology में अपनी शक्ति और अपना भरोसा, दोनों बढ़ा रहा है। भारत का एक और सामर्थ्य है, Solution at Scale. भारत में कोई Solution सफल होता है, तो उससे दुनिया के अनेक देशों की समस्याओं का समाधान होने का रास्ता भी बनता है। हमारा Digital Stack इसका शानदार उदाहरण है। हमारी 5G Technology भी इसका उदाहरण है। भारत ऐसे Secure Solutions विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंच सकें।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, Science और Technology की दुनिया में हमेशा से एक चुनौती रही है, इसे Weapon के रूप में देखा जाना। जबकि भारत की सोच है कि, Science और Technology मानवता की सेवा का माध्यम हैं। Science की असली सफलता तब होती है, जब वह Lab से निकलकर सामान्य नागरिक के जीवन को बेहतर बनाती है। Lab to land. Technology की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि वह कितनी Advanced है। उसकी असली ताकत इस बात में है, कि वह कितनी बड़ी समस्या का समाधान करती है,  इतना ही नहीं और वो कितने लोगों के जीवन में बदलाव लाती है। इसलिए हमारे लिए Emerging Science and Technology का मतलब ऐसे Solutions हैं, जो Health सेक्टर को मजबूत करें, जो Agriculture सेक्टर को Transform करें, जो शिक्षा और रोजगार के नए अवसर बनाएं, जो आपदाओं से बचाव में काम आएं। मुझे संतोष है कि भारत की Start-up Revolution में ऐसे सवालों को प्राथमिकता मिल रही है। एक Start-up, Wearable E.E.G Technology पर काम कर रहा है, जो Brain Activity को समझने में मदद करती है। भारतीय कंपनियां स्वदेशी Wireless और Satellite Communication Solutions विकसित कर रही हैं। Nutrition के क्षेत्र में विशेष डायटरी Needs को ध्यान में रखकर Products तैयार किए जा रहे हैं। Semiconductor Sector में भारतीय कंपनियां नई Technologies पर काम कर रही हैं। स्टील स्लैग जैसे Industrial Waste के उपयोग के समाधान की भी खोजे हमारे यहां हो रही हैं। 

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, मुझे चेन्नई जाने का अवसर मिला था। मैं वहां का अनुभव भी आपसे शेयर करना चाहता हूं। वहां मैंने I.I.T. मद्रास में एक आधुनिक ब्रेन सेंटर’ का लोकार्पण किया। इस सेंटर ने एक brain imaging technology platform बनाया है, जो दुनियाभर के लिए मिसाल है। ये ब्रेन सेंटर मानव मस्तिष्क की High-resolution digital 3D तस्वीरें डेवलप करने में जुटा है। इस मिशन की सफलता, मस्तिष्क से जुड़ी अनेक बीमारियों की जटिलताओं को सुलझाने में मदद करेगी। Science for Society, Technology for Transformation, यही हमारे Scientific Progress की कसौटी होनी चाहिए। और भारत इसी कसौटी पर खुद को परखते हुए आगे बढ़ रहा है।

साथियों,

हम सभी जानते हैं, किसी देश की Technology  और  Technology  Creation Capability उसकी Research पर निर्भर करती है। Research वह शक्ति है, जो किसी देश को अपनी समस्याओं के समाधान खोजने, और Critical Technologies में आत्मनिर्भर बनने की ताकत देती है। और  इसीलिए मैंने कहा है – जय विज्ञान, जय अनुसंधान! विकसित भारत के लिए हम अपना Research सेक्टर लगातार मजबूत कर रहे हैं। इसी संकल्प के साथ Anusandhan National Research Foundation को गति दी जा रही है। पिछले वर्ष इसी मंच पर, Research, Development and Innovation के लिए एक लाख करोड़ रुपए की व्यवस्था का संकल्प लिया था। और आज इसके परिणाम भी सामने आ रहे हैं। पिछले एक वर्ष में करीब 12 हजार करोड़ रुपए ऐसी Technologies के लिए Commit किए जा चुके हैं, जो लैब से निकलकर Market की ओर बढ़ने के लिए तैयार हैं। और इसमें Private Investors भी बराबर से partnership कर रहे हैं। सरकार की ओर से 12 हजार करोड़ रुपए के Commitment के साथ, Private Sector भी 12 हजार करोड़ रुपए का Investment कर रहा है। यानी, सिर्फ एक वर्ष में Research and Development के लिए कुल 24 हजार करोड़ रुपए की नई Commitment हुई है। 

साथियों,

भारत के Research Ecosystem में भी निरंतर विस्तार दिखाई दे रहा है। Patent Applications में भी बहुत बड़ी वृद्धि हुई है। दस वर्ष पहले सालभर में 50 हजार से भी कम Patent Applications दाखिल होते थे। पिछले वर्ष यह संख्या करीब डेढ़ लाख तक पहुंच गई। ये आंकड़े केवल बढ़ती हुई संख्या नहीं दिखाते। ये उस बदलाव का संकेत हैं, जिसमें भारत में Research और Innovation एक मजबूत Culture बनकर के उभर रहा हैं। 

साथियों,

21वीं सदी के इस सेकेंड क्वार्टर में, एक और सवाल बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। AI के इस दौर में Scientific Judgement कैसे विकसित होगा? हमारी Laboratories का नेतृत्व कर रहे Scientists ने वर्षों के Experience से अपनी योग्यता को संवारा है। हमारे मंच पर भी दुनिया के बड़े बड़े वैज्ञानिक, Nobel पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक मौजूद हैं। हम सब जानते हैं, उन्होंने छोटी-छोटी समस्याओं को सुलझाते हुए, Experiments करते हुए और अपनी असफलताओं से सीखते हुए अपनी समझ विकसित की है। एक वैज्ञानिक केवल उपलब्ध जानकारी को दोहराता नहीं है। वह स्थापित Patterns उस पर सवाल करता है। Solutions को नए तरीके से देखता है। वह उन पहलुओं को पहचानता है, जिन पर दूसरों का ध्यान नहीं गया। इसी प्रक्रिया से Scientific Judgement विकसित होता है। लेकिन आज AI के दौर में हमारे सामने एक नई चुनौती भी है। AI अनेक Routine Tasks को बहुत तेजी से पूरा कर सकता है। इससे Research की Productivity बढ़ सकती है। लेकिन हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा, कि AI वैज्ञानिकों की सोच और Independent Thinking को सीमित न करे, बल्कि उसे और समृद्ध बनाए। AI से बचने वाले समय का उपयोग अधिक Challenging Problems पर काम करने, नए Experiments करने और Ideas को परखने में होना चाहिए। AI हमें जवाब जल्दी दे सकता है। लेकिन जवाब की सत्यता परखने की जिम्मेदारी वैज्ञानिक की ही होनी चाहिए। 

साथियों,

हमें अपने Scientists और Institutions को आज की जरूरतों के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार करते रहना है। Semiconductors, Quantum Technologies, Biotechnology, Advanced Materials, Robotics, Space, Clean Energy और Next-Generation Communications ये ऐसे क्षेत्र हैं, जो Future को Shape करेंगे। भारत इन क्षेत्रों में मजबूत Scientific Foundations तैयार कर रहा है। इसके लिए अलग-अलग National Missions भी शुरू किए गए हैं। हमारा प्रयास है इन क्षेत्रों में नए Breakthroughs भारत से भी आएं। और हमारी जिम्मेदारी केवल Innovation तक सीमित नहीं है। AI हो, सिंथेटिक बायोलॉजी हो या Autonomous Systems, इनमें Safety और Security को प्राथमिकता देनी होगी। AI के इस दौर में, साइबर सिक्यॉरिटी को लेकर भी, नए चैलेंजेस, नए थ्रेट जन्म ले रहे हैं। हमारे फाइनेंशियल नेटवर्क से लेकर, हमारी नेशनल सिक्यॉरिटी तक, सबके सामने ये चुनौती है। इसलिए जरूरी है कि हम ऐसे AI बेस्ड सॉल्यूशंस पर काम करें, ऐसे क्वांटम सिक्यॉरिटी सॉल्यूशंस पर आगे बढ़ें, जो इस खतरे से देश की व्यवस्था को सिक्योर करे।  हमारा लक्ष्य ऐसी Technologies विकसित करना है, जो भारत को सशक्त करें और मानवता की समस्याओं के समाधान में भी योगदान दें। 

साथियों,

इस Conclave में उपस्थित, प्रत्येक Researcher, Industry Leader, Start-up Founder और युवा विद्यार्थियों से मेरा आग्रह है, कि वह अपने लिए एक ठोस लक्ष्य तय करे। अगले तीन वर्षों में वह कौन-सी Technology, कौन-सा Prototype, कौन-सा Pilot Project या वो कौन-सा product विकसित करने में योगदान देगा? हम ऐसे इनोवेशंस करें, जो भारत को विकसित भारत बनाने में सहयोग दें। जो हमें दुनिया के सॉल्यूशंस का सेंटर पॉइंट बनाए। इसलिए मेरी कामना है, यह Conclave केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित न रहे। ये Measurable Outcomes का मंच बने। 

साथियों,

आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। हमारे पास प्रतिभा है। कुछ नया करने का संकल्प है। हमें ऐसी पीढ़ी तैयार करनी है, जो Emerging Science and Technology में केवल भागीदार न हो, बल्कि उसका नेतृत्व करे। हमारी भावना हो, We will do it. We will do it. हमारा विश्वास हो, We will do it. आप सभी को इस Conclave की सफलता के लिए एक बार फिर मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद!

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