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हितधारकों ने हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला में हाल की प्रगति पर चर्चा की

राष्ट्रीय हाइड्रोजन और ईंधन सेल दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यशाला में प्रख्यात वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, प्रौद्योगिकीविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला में हुए हाल के विकास, नए अवसरों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

चेन्नई के आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क में आयोजित कार्यशाला में एआरसीआई के निदेशक डॉ. आर. विजय ने बताया कि भारत हाइब्रिड हाइड्रोजन और ईंधन-सेल प्रौद्योगिकियों के लिए उन्नत सामग्रियों के अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इनमें इलेक्ट्रोकैटलिस्ट, बाइपोलर प्लेट्स, मेम्ब्रेन इलेक्ट्रोड असेंबली, फ्यूल-सेल स्टैक और हाइड्रोजन उत्पादन के लिए अल्कलाइन इलेक्ट्रोलाइजर जैसी तकनीकें शामिल हैं।

केंद्र सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत स्वायत्त अनुसंधान एवं विकास केंद्र इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स (एआरसीआई) द्वारा 13 अक्टूबर, 2026 को आयोजित इस कार्यशाला में हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण, शुद्धिकरण और इसके उपयोग पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चाओं में विशेष रूप से ईंधन-सेल प्रौद्योगिकियों, गतिशीलता अनुप्रयोगों, सुरक्षा, मानकों और औद्योगिक तैनाती के पहलुओं पर बल दिया गया।

आईआईटी दिल्ली-अबू धाबी के प्रोफेसर आर.आर. सोंडे ने ऊर्जा स्वतंत्रता, आर्थिक विकास, शुद्ध शून्य उत्सर्जन और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, सार्वभौमिक ऊर्जा पहुंच और स्वच्छ पर्यावरण से संबंधित पांच संप्रभु प्रतिबद्धताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने घरेलू हाइड्रोजन तंत्र की स्थापना में तेजी लाने, एक मजबूत हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था विकसित करने और राष्ट्रीय ऊर्जा स्वतंत्रता को सुदृढ़ करने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बायोमास पर आधारित हाइड्रोजन उत्पादन के विविध मार्गों का उपयोग करने के महत्व को रेखांकित किया।

चित्र 1 : गणमान्य व्यक्तियों, आमंत्रित वक्ताओं और प्रतिभागियों की समूह तस्वीर

एआरसीआई की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. आर. सुबास्री ने पर्यावरण की रक्षा करने और भावी पीढ़ियों के लिए धरती को सुरक्षित रखने के लिए स्वच्छ और अधिक टिकाऊ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की ओर रूपांतरण के बढ़ते महत्व पर बल दिया।

हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला में हालिया प्रगति पर केंद्रित 9वीं कार्यशाला में लगभग 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें शिक्षा क्षेत्र, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, और उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ शामिल थे, जिन्होंने तकनीकी सत्रों के दौरान अपने विचार साझा किए।

कार्यशाला में हुई चर्चाओं और विचार-विमर्शों ने सामूहिक रूप से हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी विकास की बहुविषयक प्रकृति को प्रतिबिंबित किया, जो मौलिक सामग्री अनुसंधान और उन्नत घटक इंजीनियरिंग से लेकर हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण, सिस्टम एकीकरण और औद्योगिक तैनाती तक फैली हुई है।

चित्र 2 : कार्यशाला के उद्घाटन सत्र के दौरान विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर आर.आर. सोंडे को एआरसीआई के निदेशक डॉ. आर. विजय द्वारा सम्मानित किया जा रहा है।

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