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सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग में “स्वच्छता से सभ्यता” सत्र आयोजित


स्वच्छता अभियान 6.0 स्वच्छता, आंतरिक मूल्यों और जन भागीदारी पर केंद्रित

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी में स्थित मंत्रालय में ब्रह्मा कुमारियों के सहयोग से ‘स्वच्छता से सभ्यता’ नामक एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया।

यह सत्र जन भागीदारी  पर केंद्रित देशव्यापी स्वच्छता अभियान 6.0 के अंतर्गत आयोजित किया गया था।

ब्रह्मा कुमारी सिस्टर विदार्थी ने अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए आंतरिक मूल्यों और आस-पास की स्वच्छता के बीच संबंध की चर्चा की।

उन्होंने जैसी अवस्था, वैसी व्यवस्था के  सिद्धांत का उल्‍लेख करते हुए समझाया कि किसी व्यक्ति की मन की स्थिति उसके आस-पास की व्यवस्था को आकार देती है, चाहे वह घर पर हो, कार्यस्थल पर हो या व्यापक समुदाय में हो।

सिस्टर विदार्थी ने “स्वच्छता ईश्वर के समान है” कहावत को संदर्भित करते हुए  प्रतिभागियों को स्वच्छता को आत्म-सम्मान और आंतरिक पवित्रता में निहित एक अभ्यास के रूप में और नागरिक जिम्मेदारियों के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने प्रकृति के प्रति सम्मान, सामाजिक संवेदनशीलता और सादा जीवन जीने पर बल दिया। उन्‍होंने कहा कि स्थायी शारीरिक स्वच्छता को विचारों, वाणी और आचरण में स्वच्छता से सहायता मिलती है।

सिस्टर विदार्थी ने पुनर्चक्रण को एक व्यावहारिक आदत के रूप में भी रेखांकित किया जो संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देती है और बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन में योगदान देती है।

सत्र के समापन पर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूरे वर्ष अपने कार्यस्थलों और समुदायों में स्वच्छता बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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