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एग्रीविजन–2026 के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन का नई दिल्ली में आयोजन


भारतीय कृषि को उत्पादन-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर कृषि-खाद्य मूल्य शृंखलाओं की ओर अग्रसर होना चाहिए: डॉ. एम. एल. जाट

एग्रीविजन का 10वां राष्ट्रीय अधिवेशन–2026, 13–14 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित आईसीएआर-एनएएससी परिसर, पूसा में आयोजित किया जा रहा है। यह अधिवेशन एग्रीविजन और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के कृषि शिक्षा प्रभाग के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। एग्रीविजन के दसवें राष्ट्रीय अधिवेशन के रूप में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसमें कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारक एक साझा मंच पर एकत्रित हुए हैं। अधिवेशन में 25 राज्यों के कृषि एवं संबद्ध विज्ञान के लगभग 450 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। इनके साथ प्रख्यात वक्ता, वैज्ञानिक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि उद्यमी और किसान भी शामिल हैं।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट उपस्थित रहे। अन्य गणमान्य व्यक्तियों में आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डॉ. वाई. एस. मलिक, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल के कुलपति डॉ. अनुपम मिश्रा तथा रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए. के. सिंह शामिल रहे।

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. एम. एल. जाट ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय कृषि को केवल उत्पादन-केंद्रित दृष्टिकोण तक सीमित न रखते हुए व्यापक कृषि-खाद्य प्रणाली और मूल्य शृंखला के परिप्रेक्ष्य में आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने बाजार अनुसंधान और बाजार संबंधी जानकारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कृषि उत्पादन को बाजार की मांग के अनुरूप बनाने तथा किसानों की लाभप्रदता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कृषि उत्पादन को विपणन और मूल्य संवर्धन से जोड़ने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. अनुपम मिश्रा और डॉ. ए. के. सिंह ने एग्रीविजन की गतिविधियों की सराहना की तथा विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में उद्यमिता, नवाचार और रोजगार सृजन के अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने शिक्षण, अनुसंधान और कृषि प्रसार के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों के महत्व को भी रेखांकित किया।

यह अधिवेशन विद्यार्थियों, प्रख्यात वैज्ञानिकों, वरिष्ठ अधिकारियों, उद्यमियों और किसानों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने तथा कृषि मूल्य शृंखला से जुड़े विभिन्न पक्षों के विचारों एवं अनुभवों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान कर रहा। अधिवेशन में कृषि शिक्षा, तकनीकी परिवर्तन, अनुसंधान, बाजारोन्मुख कृषि, उद्यमिता और किसान-केंद्रित विकास जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

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