LIVE

कोयला एवं खान राज्य मंत्री ने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पर तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (एनसीसीएसआर 2026) का उद्घाटन किया


“आर्थिक प्रगति का वास्तविक अर्थ तभी पूर्ण होता है, जब इसके लाभ ‘सशक्त समुदायों, व्यापक अवसरों और अधिक मजबूत क्षेत्रों’ के रूप में दिखाई दें” — राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे

“सीएसआर विकसित भारत के लिए आवश्यक सामूहिक प्रयास का एक महत्वपूर्ण स्वरूप है” — कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल

कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने नई दिल्ली में कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) द्वारा आयोजित कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पर तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (एनसीसीएसआर 2026) का उद्घाटन किया। 6–7 अक्टूबर, 2026 को आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन का विषय था— “री-एनविजनिंग द स्‍पीरिट ऑफ सीएसआर फॉर विकसित भारत: फ्रॉम कम्‍प्‍लायंस टू कमीटमेंट”।

अपने मुख्य संबोधन में कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने राष्ट्रीय आर्थिक विकास, क्षेत्रीय विकास और संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के कल्याण के बीच घनिष्ठ संबंध पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति का वास्तविक अर्थ तभी पूर्ण होता है, जब इसके लाभ “सशक्त समुदायों, व्यापक अवसरों और अधिक सुदृढ़ क्षेत्रों” के रूप में दिखाई दें।

उन्होंने जोर देकर कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय समुदायों से निकटता से जुड़े क्षेत्रों में आर्थिक विकास और सामाजिक विकास को अलग-अलग उद्देश्यों के रूप में नहीं देखा जा सकता। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय कोयला कंपनियों के लिए व्यापक सीएसआर रूपरेखा का औपचारिक रूप से विमोचन किया। यह रूपरेखा कोयला क्षेत्र में अधिक व्यवस्थित, आवश्यकता-आधारित और परिणामोन्मुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों को दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

उद्घाटन सत्र के दौरान इंडिया सीएसआर फैक्टबुक 2024–25 का भी विमोचन किया गया, जो भारत में सीएसआर के बदलते परिदृश्य के संबंध में समेकित जानकारी उपलब्ध कराती है। इस सत्र में कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल, भारत में संयुक्त राष्ट्र महिला (यूएन वूमेन) की कंट्री प्रतिनिधि सुश्री शोको इशिकावा, भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह तथा आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की प्रमुख प्रोफेसर गरिमा दधीच की गरिमामयी उपस्थिति रही।

उद्घाटन भाषण में, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती पल्लवी जैन गोविल ने सीएसआर को भारत के व्यापक कॉर्पोरेट प्रशासन और राष्ट्रीय विकास के ढांचे के संदर्भ में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एनसीसीएसआर 2026 की विषयवस्तु सभी हितधारकों से “वार्षिक दायित्व से आगे बढ़कर देखने” और भारत की विकास यात्रा में जिम्मेदार उद्यमों के व्यापक योगदान पर विचार करने का आह्वान करती है। भारत की विशिष्ट वैधानिक सीएसआर व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह ढांचा वैधानिक दायित्व के साथ-साथ कंपनी-स्तरीय उत्तरदायित्व, निदेशक मंडल की निगरानी, सार्वजनिक प्रकटीकरण और प्रभाव आकलन को एक साथ जोड़ता है। उन्होंने कहा कि सीएसआर विकसित भारत के लिए आवश्यक सामूहिक प्रयास का एक महत्वपूर्ण स्वरूप है। इस अवसर पर उन्होंने इंडिया सीएसआर फैक्टबुक 2024–25 का भी विमोचन किया।

अपने स्वागत भाषण में भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने सीएसआर से संबंधित चर्चाओं को कार्यान्वयन और विकास के प्रत्यक्ष परिणामों पर केन्‍द्रित रखने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सीएसआर सरकार, उद्योग जगत, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, कार्यान्वयन संगठनों, विकास भागीदारों और शिक्षाविदों को एक साथ लाता है। उन्होंने कहा, “निर्णय भले ही निदेशक मंडल के कक्षों में लिए जाते हों, लेकिन उनका वास्तविक महत्व अंततः उन स्कूलों, स्वास्थ्य केन्‍द्रों, आजीविका कार्यक्रमों, गांवों, कस्बों और जिलों में दिखाई देता है, जहां वे लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं।” उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सीएसआर प्रदर्शनी की परिकल्पना केवल परियोजनाओं को प्रदर्शित करने के लिए नहीं, बल्कि उनके परिणामों को सामने लाने तथा सीखने, सफल पहलों को दोहराने और साझेदारी विकसित करने के मंच के रूप में की गई है।

उद्घाटन सत्र के बाद “सोशल स्टॉक एक्सचेंज: उद्देश्य, पूंजी और प्रभाव” विषय पर एक विशेष संवाद आयोजित किया गया, जिसमें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के नीति संबंधी वरिष्ठ सलाहकार श्री शैलेश के. पाठक और प्रोफेसर गरिमा दधीच ने भाग लिया। चर्चा में सामाजिक उद्देश्यों को पूंजी से जोड़ने में सोशल स्टॉक एक्सचेंज की भूमिका तथा सामाजिक क्षेत्र के वित्तपोषण तंत्र को मजबूत बनाने के लिए विश्वसनीय प्रभाव आकलन, पारदर्शिता और संस्थागत विश्वास के महत्व पर विचार-विमर्श किया गया।

दोपहर के भोजन के बाद आयोजित सत्र में कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अपर सचिव श्री अंशुमान पटनायक ने मुख्य वक्तव्य दिया। अपने संबोधन में उन्होंने सीएसआर को कॉर्पोरेट प्रशासन के व्यापक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि कंपनियों को सीएसआर को जिम्मेदार कॉर्पोरेट आचरण और संस्थागत निर्णय-प्रक्रिया के अभिन्न अंग के रूप में अपनाना चाहिए। उन्होंने कंपनियों से सीएसआर एक्सचेंज पोर्टल पर पंजीकरण कराने का भी आह्वान किया। उन्होंने सीएसआर से जुड़े हितधारकों को एक मंच पर लाने और उद्देश्यपूर्ण सहभागिता को सुगम बनाने के एक प्रभावी माध्यम के रूप में इस पोर्टल की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।

मुख्य वक्तव्य के बाद “सीएसआर में बोर्ड का सुशासन और रणनीतिक प्रतिबद्धता” विषय पर उच्चस्तरीय पैनल चर्चा आयोजित की गई। पैनल में सीएसआर की रणनीतिक निगरानी सुनिश्चित करने में निदेशक मंडल और वरिष्ठ प्रबंधन की भूमिका, व्यय को स्पष्ट रूप से पहचानी गई आवश्यकताओं और अपेक्षित परिणामों से जोड़ने के महत्व तथा प्रभावी निगरानी और जवाबदेही तंत्र की आवश्यकता पर चर्चा की गई।

पैनल में डालमिया भारत फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग और राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष श्री अशोक कुमार गुप्ता (सेवानिवृत्त); अमृता विश्व विद्यापीठम की प्रो-वाइस चांसलर प्रो. मनीषा वी. रमेश; ओएनजीसी के निदेशक (उत्पादन) श्री भास्कर चौधरी नेट्टेम; गेल (इंडिया) लिमिटेड के निदेशक (मानव संसाधन) श्री आयुष गुप्ता; इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक (समन्वय एवं सीएसआर) श्री बिभूति रंजन प्रधान; महिंद्रा एग्री सॉल्यूशंस लिमिटेड की स्वतंत्र निदेशक डॉ. पूर्वी मेहता; तथा एचसीएलटेक की उपाध्यक्ष सुश्री रुचि साधना शामिल थीं।

चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि निदेशक मंडल की अधिक सक्रिय भागीदारी से सीएसआर संबंधी निर्णयों की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। इससे परियोजनाओं की प्रासंगिकता, कार्यान्वयन क्षमता, भौगोलिक और विषयगत आवश्यकताओं, निगरानी, मूल्यांकन तथा दीर्घकालिक स्थिरता पर अधिक ध्यान देना सुनिश्चित किया जा सकता है। पैनल ने यह भी रेखांकित किया कि सीएसआर संबंधी प्रतिबद्धताओं को टिकाऊ विकास परिणामों में बदलने के लिए साझेदारियों और पेशेवर संस्थागत तंत्रों का महत्वपूर्ण योगदान है।

 “सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राथमिकताओं के अनुरूप सीएसआर के लिए क्षेत्र-आधारित दृष्टिकोण” विषय पर आयोजित दूसरी पैनल चर्चा में सीएसआर पहलों, विभिन्न क्षेत्रों की विकास प्राथमिकताओं और सतत विकास लक्ष्यों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री अनीता शाह अकेला ने की। अपने मुख्य संबोधन में उन्होंने क्षेत्र-विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो विभिन्न क्षेत्रों की विकास संबंधी चुनौतियों, संस्थागत क्षमताओं और स्थानीय प्राथमिकताओं में अंतर को ध्यान में रखते हों।

पैनल में सरकार के सार्वजनिक उद्यम विभाग के संयुक्त सचिव श्री लुकास एल. कामसुआन; विद्युत मंत्रालय की आर्थिक सलाहकार सुश्री रीतू जैन; कोयला मंत्रालय की उप महानिदेशक डॉ. चेतना शुक्ला; सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सामाजिक सांख्यिकी प्रभाग की उप महानिदेशक सुश्री रुचिका गुप्ता; पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के उप महानिदेशक (डेटा एवं प्रबंधन) श्री राजीव कुमार; तथा आईटीसी के कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं सामाजिक निवेश प्रमुख श्री प्रभाकर एल. शामिल थे। सत्र का संचालन द वाखलू एडवाइजरी के संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री भरत वाखलू ने किया।

पैनल में सीएसआर के लिए एकसमान दृष्टिकोण से आगे बढ़ने तथा विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट विकास परिस्थितियों, कार्यक्षेत्रों और हितधारकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखने की जरूरत पर विचार-विमर्श किया गया। इस संदर्भ में, कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया लिमिटेड के लिए भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) द्वारा विकसित क्षेत्र-विशिष्ट सीएसआर रूपरेखाओं के महत्व को रेखांकित किया गया। ये रूपरेखाएं संबंधित क्षेत्रों की विकास प्राथमिकताओं और सामुदायिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक हैं। इसके अतिरिक्त, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप सीएसआर रिपोर्टिंग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि राष्ट्रीय और वैश्विक विकास प्राथमिकताओं में कंपनियों के योगदान का व्यवस्थित आकलन किया जा सके।

पहले दिन के सत्रों का समापन इस व्यापक सहमति के साथ हुआ कि निदेशक मंडल के स्तर पर निगरानी, साक्ष्य-आधारित परियोजना चयन, क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्ययोजना, विभिन्न पहलों के बीच समन्वय तथा परिणामों की निगरानी और आकलन सहित सीएसआर की संस्थागत गुणवत्ता को मजबूत करने की आवश्यकता है। विचार-विमर्श में सम्मेलन की विषयवस्तु के अनुरूप केवल अनुपालन तक सीमित रहने के बजाय समावेशी और मापनीय विकास के प्रति कॉर्पोरेट क्षेत्र की निरंतर प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया।

इस सम्मेलन में भारत सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, निजी क्षेत्र की कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व की बदलती भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि सीएसआर पहलों का मार्गदर्शन संस्थागत उत्तरदायित्व, स्थानीय विकास संबंधी आवश्यकताओं, मापनीय परिणामों और हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय के आधार पर किया जाना चाहिए।

एनसीसीएसआर 2026 का आयोजन भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट द्वारा किया जा रहा है। इसमें सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, कॉर्पोरेट संगठनों, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

Comments

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »