ईरान युद्ध का असर दुनिया के बाजारों पर पड़ा है। ऐसे में भारत कैसे अछूता रह सकता है। कच्चे तेेल के दाम में बेतहाशा वृद्धि के कारण रोजमर्रा की वस्तुओं की महंगाई बढ़ती जा रही है। मगर, सबसे बड़ा संकट रसोई गैस को लेकर पैदा हुआ है। हालांकि, भारत सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, एलपीजी गैस से भरे दो जहाज अगले एक दो दिनों में भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं।
इससे भी राहत की खबर यह है कि ये दोनों भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से आए हैं। मतलब ईरान ने भारतीय जहाजों को होर्मुज से पास करने की इजाजत दे दी है। इसकी जानकारी एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान भारत सरकार अधिकारियों ने दी थी। जानकारी के अनुसार भारतीय जहाज, शिवालिक और नंदा देवी, होर्मुज स्ट्रेट को भारत पहुुंच गए हैं। इन दोनों जहाजों में से हर एक में 46 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा एलपीजी गैस है। अर्थात दोनों मिलकार कुल करीब 93 हजार मीट्रिक टन एलपीजी गैस देश के बंदरगाहों पर पहुंच चुकी है। बताया जा रहा है कि फारस की खाड़ी में फंसे 22 जहाज भी अब धीरे-धीरे निकलने लगे हैं जिनमें से कुछ एलपीजी कैरियर हैं।
हालांकि जानकार बताते हैं कि देश की दैनिक गैस की जरूरत जितनी होती है उसके अनुसार दो जहाजों में जितनी गैस आई है उससे दो दिन की खपत भी पूरी नहीं हो सकती है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग भारत के लिए खुल चुका है जिससे आने वाले दिनों में देश में गैस और तेल की किल्लत की जो आशंका जताई जा रही थी वह दूर होगी। हालांकि, कीमतों में फिलहाल राहत की उम्मीद कम है क्योंकि इस महीने में अब तक कच्चे तेल के दाम में 30 डाॅलर प्रति बैरल से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। ब्रेंट कू्रड का भाव इस समय 100 डाॅलर प्रति बैरल के पार चला गया है।

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