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शिक्षा मंत्रालय के विद्यालयी शिक्षा और साक्षरता विभाग ने प्रशस्त (पीआरएएसएचएएसटी) पार्टल के माध्यम से समावेशी शिक्षा संबंधी जागरुकता मॉड्यूल की राष्ट्रव्यापी स्क्रीनिंग आयोजित की


60,000 से अधिक विद्यालयों ने भाग लिया; 72 लाख से अधिक शिक्षक पहले ही जागरूक किए जा चुके हैं

शिक्षा मंत्रालय के विद्यालयी शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने देशभर के विद्यालयों में ‘प्रशस्त’ (पीआरएएसएचएएसटी) पोर्टल के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए समावेशी शिक्षा पर 30 मिनट के जागरुकता और अभिमुखीकरण मॉड्यूल की राष्ट्रव्यापी स्क्रीनिंग आयोजित की।

इस पहल का उद्देश्य समावेशिता के लिए एक समग्र विद्यालयी दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है, ताकि शिक्षक, विशेष शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) की जरूरतों को समझ सकें तथा एक सुरक्षित, सुलभ और सहायक विद्यालयी वातावरण तैयार करने में योगदान दे सकें।

यह मॉड्यूल व्यावहारिक उदाहरणों और सहभागितापूर्ण गतिविधियों का उपयोग करता है ताकि विद्यालय के कर्मचारी उपयुक्त और सम्मानजनक व्यवहार एवं कार्य-पद्दतियां अपना सकें। यह 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है और विद्यालय प्रमुखों, शिक्षकों, विशेष शिक्षकों तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों, जिनमें आया, ड्राइवर, लिपिकीय कर्मचारी, रिसेप्शनिस्ट, डीन और वार्डन शामिल हैं, के लिए तैयार किया गया है।

विद्यालयी शिक्षा और साक्षरता विभाग पिछले तीन महीनों से ‘प्रशस्त’ के माध्यम से समावेशी शिक्षा के संबंध में सामान्य शिक्षकों को निरंतर जागरूक कर रहा है। 72 लाख से अधिक शिक्षक पहले ही इस समर्पित मॉड्यूल के माध्यम से जागरूक किए जा चुका हैं।

‘प्रशस्त’ एक विद्यालय-आधारित डिजिटल टूल है, जिसका उपयोग दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (आरपीडब्ल्यूडी) के अंतर्गत आने वाली संभावित दिव्यांगता संबंधी स्थितियों वाले बच्चों की पहचान करने के लिए किया जाता है। इसकी दो-भाग वाली चेकलिस्ट शिक्षकों को देखे जा सकने वाले संकेतकों के आधार पर विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग करने में सक्षम बनाती है, जबकि विशेष शिक्षक मामलों का सत्यापन करते हैं और जहाँ आवश्यक हो, वहाँ वे चिकित्सिय जाँच के लिए रेफरल की सुविधा प्रदान करते हैं।

राष्ट्रव्यापी स्क्रीनिंग में 60,000 से अधिक विद्यालयों ने भाग लिया और इस महीने के दौरान भागीदारी में और वृद्धि होने की उम्मीद है।

यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि समावेशी शिक्षा एक साझा जिम्मेदारी है।  विद्यालय में बच्चे की हर बातचीत- चाहे वह कक्षा, कार्यालय, परिवहन या अन्य सार्वजनिक स्थानों में हो- उसके समावेशिता के अनुभव में योगदान देता है।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 और आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम, 2016 के अनुरूप  न्यायसंगत, सुलभ और समावेशी शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए शिक्षा मंत्रालय के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।

इस मॉड्यूल को प्रशस्त पोर्टल https://prashast.education.gov.in/  के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है।

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