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भारत ने कॉप-31 को पेरिस समझौते में मौजूद कमियों को दूर करने, प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और इसके कार्यान्वयन में तेजी लाने पर दिया जोर


श्री भूपेंद्र यादव ने ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालू द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यूएनएफसीसीसी की पूर्व-कॉप-31 बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज फिजी में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) की पूर्व-कॉप-31 बैठक में कॉप-31 प्राथमिकताओं पर पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए जलवायु संबंधी समझ में मौजूद कमियों को दूर करने, मौजूदा जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और पेरिस समझौते के कार्यान्वयन में तेजी लाने पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया।

श्री यादव ने अपने संबोधन की शुरुआत में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का बहादुरी से सामना करने और एक सफल उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए तुवालू के लोगों के जज्बे को सलाम किया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से आशा, आत्मविश्वास और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एकजुट होने का संकल्प मजबूत होता है।

मंत्री ने कहा कि यूएनएफसीसीसी और इसके पेरिस समझौते के तहत दीर्घकालिक उद्देश्य और लक्ष्य पहले ही निर्धारित किए जा चुके हैं, जिनमें वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की महत्वाकांक्षा भी शामिल है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने के लिए कार्यान्वयन के उपयुक्त साधनों की आवश्यकता होगी और अब ध्यान इस बात पर केंद्रित होना चाहिए कि विश्व इन लक्ष्यों की ओर अपनी यात्रा को कैसे गति दे सकता है।

श्री यादव ने कॉप-31 की अध्यक्षता में सर्वसम्मति, निर्णय लेने और कार्यान्वयन पर दिए गए जोर का उल्लेख करते हुए कहा कि जलवायु बहुपक्षवाद के दीर्घकालिक लक्ष्यों और दिशा पर समग्र सहमति है। विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान तथा सामुदायिक प्रथाओं के बीच, व्यवहार और नैतिकता के बीच और उपलब्ध संसाधनों तथा आवश्यक जरूरतों के बीच मौजूद समझ की कमियों को पहचानना और उन पर आम सहमति विकसित करना जरूरी है। मंत्री ने कहा कि कॉप-31 को समझ की इन कमियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।

श्री यादव ने निर्णय लेने के विषय पर कहा कि सभी पक्षों से अपेक्षित मुख्य निर्णय यह है कि वे यूएनएफसीसीसी और पेरिस समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को सही मायने में पूरा करें और प्रत्येक पक्ष को इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में सक्षम बनाएं। मंत्री ने कार्यान्वयन के विषय पर उन कमियों को दूर करने का आह्वान किया जहां सबसे अधिक आवश्यकता है और जिसका प्रभाव अधिकांश लोगों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है और महसूस किया जाता है। उन्होंने क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया और सभी पक्षों से आग्रह किया कि वे हर साल ठोस उदाहरण और सफलता की कहानियां प्रस्तुत करें – जो उच्च-प्रभाव वाले शमन, बड़े पैमाने पर अनुकूलन और कार्यान्वयन के साधनों की प्रभावी डिलीवरी को प्रदर्शित करें।

श्री यादव ने कहा कि इस तरह के उदाहरणों को साल दर साल लगातार साझा करने और उनका विस्तार करने से पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने में जमीनी स्तर पर बेहतर परिणाम मिलेंगे। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि अंताल्या में सफलता का आकलन केवल नए लक्ष्यों या घोषणाओं से नहीं किया जाना चाहिए बल्कि इस बात से किया जाना चाहिए कि क्या कार्यान्वयन में तेजी आई है, जरूरतमंदों तक सहायता पहुंची है और क्या मौजूदा समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है।

उल्‍लेखनीय है कि पूर्व-कॉप संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले आयोजित होने वाली एक तैयारी बैठक है, जो इस वर्ष नवंबर में अंताल्या, तुर्की में आयोजित की जाएगी।

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