वस्त्र उद्योग विकास परिषद (डीसीटीआई) की पहली बैठक 6 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। सरकार, उद्योग और हितधारकों के शीर्ष परामर्श मंच के रूप में गठित परिषद ने वस्त्र उद्योग की व्यवस्थित वृद्धि और विकास के संबंध में सरकार को परामर्श देने से संबंधित अपने अधिदेश पर विचार-विमर्श किया।

इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग संघों, निर्यात संवर्धन परिषदों, अनुसंधान संघों, राज्य सरकारों और वस्त्र क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

परिषद को संबोधित करते हुए अध्यक्ष महोदया ने रेखांकित किया कि वस्त्र और परिधान क्षेत्र देश में रोजगार के सबसे बड़े सृजकों तथा निर्यात आय के प्रमुख स्रोतों में बना हुआ है। उन्होंने उत्पादन, नवाचार और वैश्विक बाजार तक पहुंच के लिए संपूर्ण मूल्य श्रृंखला के स्तर पर समन्वित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। बैठक में निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया:
उत्पादन और उत्पादकता: रेशा, यार्न, वस्त्र, प्रोसेसिंग और परिधान क्षेत्रों में क्षमता विस्तार, आधुनिकीकरण, बड़े पैमाने पर उत्पादन तथा लागत प्रतिस्पर्धात्मकता, साथ ही संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में मौजूद कमियों को दूर करने पर जोर।
अनुसंधान एवं विकास: उद्योग और अनुसंधान के बीच संबंधों को सुदृढ करना, नई पीढ़ी के रेशों और तकनीकी वस्त्रों में नवाचार को बढ़ावा देना तथा अनुसंधान संघों और संस्थानों के माध्यम से अनुसंधान एवं विकास के शीघ्र वाणिज्यीकरण को सुगम बनाना।
निर्यात और बाजार तक पहुंच: उत्पादों और बाजारों में विविधता लाना, व्यापार समझौतों का लाभ तथा निर्यातकों के सामने आने वाली गुणवत्ता, अनुपालन और रसद संबंधी बाधाओं का समाधान करना।
कच्चे माल और इनपुट की उपलब्धता: प्रभावी बाजार जानकारी के सहयोग से कपास, मानव-निर्मित रेशों, यार्न, रंगों और रसायनों की स्थिर एवं प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्धता सुनिश्चित करना।
निवेश, कौशल विकास और सतत विकास: कारोबार सुगमता को बढ़ावा देना, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए सहायता को सुदृढ़ करना, कार्यबल के कौशल विकास तथा सतत और चक्रीय पद्धतियों को अपनाने को बढ़ावा देना।
सदस्यों ने उपरोक्त प्रत्येक विषय पर क्षेत्र-विशिष्ट सुझाव साझा किए और परिषद द्वारा उपलब्ध कराए गए संस्थागत उद्योग-सरकार संवाद मंच का स्वागत किया।
परिषद ने प्राथमिकता वाले विषयों पर कार्य समूहों/उप-समितियां गठित करने और प्रगति की समीक्षा के लिए नियमित अंतराल पर बैठकें आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की। परिषद की अनुशंसाएं मंत्रालय के नीतिगत और कार्यक्रमगत हस्तक्षेपों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेंगी तथा उनका उद्देश्य निम्नलिखित है:
घरेलू उत्पादन में वृद्धि, उत्पादकता में सुधार तथा अधिक एकीकृत और बड़े पैमाने पर उत्पादन उन्मुख मूल्य श्रृंखला का विकास;
अनुसंधान के परिणामों को उद्योग की कार्यप्रणाली में शीघ्रता से लागू करना, जिसमें तकनीकी वस्त्र और नई पीढ़ी के रेशे भी शामिल हैं।
व्यापक बाजार और उत्पाद विविधीकरण के माध्यम से वस्त्र और परिधान निर्यात में निरंतर वृद्धि; तथा
अधिक निवेश, रोजगार सृजन तथा अधिक मजबूत और अधिक सतत घरेलू इकोसिस्टम का निर्माण।
अध्यक्ष महोदया ने सदस्यों के बहुमूल्य सुझावों के लिए उनका आभार व्यक्त किया और वस्त्र क्षेत्र की निरंतर वृद्धि के लिए सहयोगात्मक तथा उद्योग-केन्द्रित दृष्टिकोण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
Comments (0)