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गांधी जयंती पर आयोजित विशेष ग्राम सभाओं के हिस्से के रूप में, ‘जल जीवन मिशन 2.0’ के अंतर्गत ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों पर समुदाय के स्वामित्व को मजबूत करने के लिए ग्रामीण भारत की 1,850 से अधिक ग्राम पंचायतों में ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम आयोजित किया गया


पहली बार, ‘जल अर्पण’ मॉड्यूल के माध्यम से ग्राम पंचायतों को क्षेत्रीय भाषाओं में ‘हर घर जल’ प्रमाण पत्र जारी किए गए


गांधी जयंती और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित विशेष ग्राम सभाओं के अवसर पर, 1,850 से अधिक ग्राम पंचायतों/गांवों ने ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम में भाग लिया। यह ‘जल जीवन मिशन 2.0’ के तहत एक महत्वपूर्ण सुधार है, जो ग्रामीण पेयजल प्रणालियों का नियंत्रण समुदायों को सौंपता है। इसके तहत पूरी हो चुकी ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं को औपचारिक रूप से ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्लूएससी) को सौंपा गया। यह कदम मिशन के उस बदलाव को प्रतिबिंबित करता है, जिसके तहत पेयजल सेवाओं का प्रबंधन समुदाय के नेतृत्व में और टिकाऊ तरीके से किया जाएगा। 

पहली बार, ‘जल अर्पण’ मॉड्यूल ने पात्र ग्राम पंचायतों और गांवों के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में ‘हर घर जल’ प्रमाण पत्र जारी करने की सुविधा भी प्रदान की। पात्र ग्राम पंचायतों और गांवों के लिए 346 ‘हर घर जल’ प्रमाण पत्र तैयार किए गए और क्षेत्रीय भाषाओं में जारी किए गए। इससे प्रमाणन प्रक्रिया अधिक सुलभ और नागरिक-केंद्रित बनी है और साथ ही पेयजल सेवाओं पर समुदाय का स्वामित्व और मजबूत हुआ है। ‘जल अर्पण’ मॉड्यूल में अब हिंदी, अंग्रेजी और 17 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं, जिनमें असमिया, बंगाली, बोडो, गुजराती, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओडिया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु और उर्दू शामिल हैं, में ‘हर घर जल’ प्रमाण पत्र जारी करने की सुविधा है, जिससे समुदाय अपनी भाषाओं में कार्यक्रम की जानकारी और प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं।

‘जल अर्पण’ कार्यक्रमों में ग्रामीण भारत भर की ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं, महिला स्वयंसेवकों और समुदाय के सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। निर्धारित पूर्व परीक्षण अवधि के बाद सफलतापूर्वक शुरू की गई ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं को संचालन, रखरखाव और दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए औपचारिक रूप से ग्राम पंचायतों और वीडब्लूएससी को सौंप दिया गया। कई गांवों में जल संकल्प, जल बंधन, फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) का इस्तेमाल करके पानी की गुणवत्ता की जांच के प्रदर्शन, जागरूकता कार्यक्रम और समुदाय में योगदान देने वालों को सम्मानित करने जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेयजल सेवाओं की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए पानी की गुणवत्ता की निगरानी तथा मॉनसून के बाद जल स्रोतों की गुणवत्ता की जांच से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की गईं। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के ज़रिए समुदाय के नेतृत्व में पानी की गुणवत्ता की निगरानी को सुदृढ़ किया जा रहा है।

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ‘सुजलम भारत’ के माध्यम से डिजिटल शासन और परिसंपत्ति प्रबंधन को मजबूत किया जा रहा है, जिसमें जलापूर्ति से जुड़ी परिसंपत्तियों और पाइप से जल आपूर्ति के स्रोतों को जियो-टैग किया जा रहा है। इसी मौके पर, देश भर में लगभग 700 स्रोतों सहित जलापूर्ति से जुड़ी  2691 परिसंपत्तियों को जियो-टैग किया गया। ये प्रयास बेहतर निरी निर्माण, निगरानी और ग्रामीण जलापूर्ति प्रणालियों के दीर्घावधि स्थायित्व में मदद कर रहे हैं, साथ ही पेयजल परिसंपत्तियों की एक व्यापक डिजिटल वस्तुसूची भी तैयार कर रहे हैं।

पानी के मामले में आत्मनिर्भर बनने की देश की यात्रा में, अब तक 15.96 करोड़ से ज़्यादा ग्रामीण परिवारों को – जो देश के ग्रामीण परिवारों का 82% से ज़्यादा हिस्सा हैं – जल जीवन मिशन के तहत पेयजल के नल कनेक्शन मिल चुके हैं। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और वास्तविक समय पर निगरानी लाने के लिए, पेयजल और स्वच्छता विभाग ने जल जीवन मिशन के तहत एक खास ‘जल अर्पण’ डिजिटल मॉड्यूल विकसित किया है। यह मॉड्यूल योजना के हस्तांतरण का एक व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड देता है और ग्रामीण पेयजल प्रणालियों के ग्राम पंचायत-आधारित प्रबंधन में मदद करता है। भारत सरकार राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि हर ग्रामीण परिवार को सुरक्षित, पर्याप्त और भरोसेमंद पेयजल सेवाएं मिलना सुनिश्चित किया जा सके।

‘जल अर्पण’ का आयोजन महात्मा गांधी की सामुदायिक भागीदारी, स्थानीय स्व-शासन और सामूहिक जिम्मेदारी के विजन को प्रतिध्वनित करता है, जिसमें ग्राम पंचायतें और ग्रामीण समुदाय पेयजल सेवाओं को बनाए रखने और लंबे समय तक पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।

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