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राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस 2026 नियमित स्वैच्छिक रक्तदान के आह्वान के साथ मनाया गया


डॉ. एम. श्रीनिवास ने स्वैच्छिक रक्तदान को मजबूत बनाने और रक्त के विभिन्न घटकों के उचित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने में योगदान के लिए राज्य रक्त आधान परिषदों, गैर-सरकारी संगठनों और अन्य संस्थाओं को सम्मानित किया गया।

राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस (एनवीबीडीडी) 2026 आज नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (एल एच एम सी) के स्वर्ण जयंती सभागार में मनाया गया। इस अवसर पर देशभर में रक्त और रक्त के विभिन्न घटकों की सुरक्षित, पर्याप्त और निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नियमित, स्वैच्छिक और बिना किसी पारिश्रमिक के रक्तदान की संस्कृति को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया गया।

इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन केंद्र सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के रक्त आधान सेवा प्रभाग द्वारा लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध अस्पतालों, नई दिल्ली के सहयोग से किया गया। राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस 2026 की थीम थी — “मानवता की एक बूंद। रक्तदान करें। जीवन बचाएं।”

डॉ. एम. श्रीनिवास, सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और इस अवसर पर आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. लोवेनीश जी. कृष्णा, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पतालों की निदेशक डॉ. हिमानी अहलूवालिया, स्वास्थ्य सेवाओं के वरिष्ठ अधिकारी, रक्त आधान चिकित्सा के विशेषज्ञ, स्वास्थ्यकर्मी, राज्य रक्त आधान परिषदों, रक्त केंद्रों, स्वैच्छिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि तथा स्वैच्छिक रक्तदाता शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वैच्छिक रक्तदान शिविर के उद्घाटन से हुई। इसके बाद लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वैच्छिक रक्तदान का संदेश दिया और जीवन बचाने में इसके महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में स्वैच्छिक रक्तदान की शपथ दिलाना, गणमान्य व्यक्तियों के संबोधन तथा रक्तदान को बढ़ावा देने में योगदान के लिए राज्यों, संगठनों और संबंधित हितधारकों को सम्मानित करना भी शामिल था। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत और उसके बाद राष्ट्रगान के साथ हुआ।

डॉ. एम. श्रीनिवास ने सभा को संबोधित करते हुए पर्याप्त और निरंतर रक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने में स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने स्वैच्छिक रक्तदान को मजबूत बनाने के लिए नागरिकों और सभी संबंधित हितधारकों की सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया।

डॉ. श्रीनिवास ने अपने संबोधन की शुरुआत में स्वैच्छिक रक्तदान की शपथ दिलाई। उन्होंने नागरिकों से नियमित रूप से रक्तदान करने के साथ-साथ अपने समुदायों में जागरूकता फैलाने और अधिक से अधिक लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

रक्तदान संगठनों और स्वयंसेवकों के राष्ट्र और मानवता के प्रति योगदान की सराहना करते हुए डॉ. श्रीनिवास ने बताया कि देश में लगभग 75 प्रतिशत रक्त संग्रह स्वैच्छिक रक्तदान के माध्यम से होता है। उन्होंने रक्त की मांग और उपलब्धता के बीच के अंतर को दूर करने तथा स्वैच्छिक रक्तदान का दायरा बढ़ाने के लिए सरकार, स्वास्थ्यकर्मियों, गैर-सरकारी संगठनों, स्वैच्छिक संगठनों और युवा संगठनों के संयुक्त प्रयासों का आह्वान किया।

उन्होंने रक्त और उसके विभिन्न घटकों के विवेकपूर्ण और उचित उपयोग के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रक्त स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को केवल रक्तदान तक सीमित न रखते हुए पोषण और एनीमिया जैसे संबंधित विषयों तक भी विस्तारित किया जाना चाहिए, विशेष रूप से महिलाओं और किशोरियों के बीच।

डॉ. श्रीनिवास ने स्वास्थ्य संस्थानों, स्वैच्छिक संगठनों और सामुदायिक समूहों से इन संदेशों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने तथा रक्त, रक्त के विभिन्न घटकों और स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने में योगदान देने का आग्रह किया।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. लोवेनीश जी. कृष्णा ने देशभर में रक्त आधान सेवाओं को मजबूत बनाने में लगे स्वैच्छिक रक्तदाताओं, संस्थानों और संगठनों के योगदान की सराहना की।

उन्होंने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा रक्त आधान सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए किए गए विभिन्न उपायों की जानकारी दी। इनमें राष्ट्रीय रक्त नीति का कार्यान्वयन, गुणवत्ता आश्वासन और गुणवत्ता प्रबंधन प्रक्रियाओं को मजबूत करना, रक्तदाताओं के पंजीकरण और निगरानी के लिए ई-रक्तकोष पोर्टल का उपयोग, राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों का विकास तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों का संचालन शामिल है।

डॉ. कृष्णा ने कहा कि व्यवस्था और बुनियादी ढांचा आवश्यक हैं, लेकिन रक्त की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इनके साथ लोगों की निरंतर स्वैच्छिक भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं की अधिक भागीदारी के साथ नियमित, स्वैच्छिक और बिना पारिश्रमिक के रक्तदान की संस्कृति को मजबूत बनाने का आह्वान किया।

रक्तदान के मानवीय पक्ष को रेखांकित करते हुए डॉ. कृष्णा ने कहा कि रक्त की प्रत्येक यूनिट के पीछे एक मरीज, प्रत्येक मरीज के पीछे एक परिवार और प्रत्येक रक्तदाता के पीछे मानवता की भावना होती है। उन्होंने सभी हितधारकों से स्वैच्छिक रक्तदान को मजबूत बनाने और इसे जिम्मेदार नागरिकता का अभिन्न अंग बनाने में योगदान देने की अपील की।

लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ने सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण रक्त सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पतालों की निदेशक डॉ. हिमानी अहलूवालिया ने सेवा, शिक्षा और सामुदायिक जिम्मेदारी के अपने मूल मूल्यों के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण रक्त सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने बताया कि लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज लगभग 700 पंजीकृत थैलेसीमिया रोगियों को निःशुल्क उपचार और रक्त आधान संबंधी सहायता प्रदान करता है। यह सेवा देश के सरकारी अस्पतालों में इस प्रकार की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है।

डॉ. अहलूवालिया ने स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए संस्थान द्वारा की जा रही विभिन्न पहलों की भी जानकारी दी। इनमें नियमित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर, जागरूकता अभियान, नुक्कड़ नाटक और समुदाय तक पहुंच बनाने वाली अन्य गतिविधियां शामिल हैं।

वर्ष 2025 में रक्त संग्रह के प्रदर्शन के लिए राज्यों को सम्मानित किया गया

राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2025 में रक्त संग्रह के प्रदर्शन और स्वैच्छिक रक्तदान को मजबूत बनाने में योगदान के लिए राज्य रक्त आधान परिषदों को सम्मानित किया गया।

– पूर्वोत्तर राज्यों में: मिजोरम ने प्रथम और सिक्किम ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

– केंद्र शासित प्रदेशों में: चंडीगढ़ ने प्रथम और दिल्ली ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

– अन्य राज्यों में: हरियाणा ने प्रथम, उत्तराखंड ने द्वितीय और पंजाब ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

यह सम्मान रक्तदाताओं को प्रोत्साहित करने, स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भागीदारी बढ़ाने और स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए राज्य रक्त आधान परिषदों द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों की पहचान है।

स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने और रक्त आधान सेवाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले गैर-सरकारी संगठनों तथा अन्य संस्थाओं को भी सम्मानित किया गया। इनमें थैलेसीमिक्स इंडिया, अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद, आकाशवाणी और भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी सहित अन्य संगठन शामिल थे।

देशव्यापी मेगा स्वैच्छिक रक्तदान अभियान

यह राष्ट्रीय आयोजन देशभर में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चलाए जा रहे देशव्यापी मेगा स्वैच्छिक रक्तदान अभियान का हिस्सा है।

इस अभियान का उद्देश्य नियमित स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना, स्वैच्छिक रक्तदाताओं का आधार मजबूत करना और नागरिकों, संस्थानों तथा समुदायों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करना है। इस अभियान में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभाग, राज्य रक्त आधान परिषदें, रक्त केंद्र, स्वास्थ्य और  शैक्षणिक संस्थान, सरकारी विभाग, स्वैच्छिक संगठन और सामुदायिक समूह शामिल हो रहे हैं।

अभियान में युवाओं की भागीदारी, जमीनी स्तर पर जनसंपर्क, जागरूकता बढ़ाने और जनभागीदारी पर विशेष बल दिया जा रहा है। रक्तदाताओं के पंजीकरण और रक्त संग्रह संबंधी गतिविधियों की निगरानी के लिए ई-रक्तकोष पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। व्यापक जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए माईगव सहित डिजिटल मंचों के माध्यम से स्वैच्छिक रक्तदान की शपथ को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

स्वैच्छिक रक्तदान: जनस्वास्थ्य के प्रति एक आवश्यक जिम्मेदारी

राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस प्रत्येक वर्ष 1 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना और स्वस्थ एवं पात्र व्यक्तियों को नियमित रूप से रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

शल्य चिकित्सा, दुर्घटना और आघात के उपचार, गंभीर एनीमिया, कैंसर और रक्त संबंधी विकारों के प्रबंधन, मातृ स्वास्थ्य देखभाल तथा जीवन बचाने वाली अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं में रक्त और उसके विभिन्न घटकों की आवश्यकता होती है। चूंकि रक्त का कृत्रिम निर्माण नहीं किया जा सकता, इसलिए इसकी उपलब्धता पात्र रक्तदाताओं की स्वैच्छिक भागीदारी पर निर्भर करती है।

इसलिए, नियमित स्वैच्छिक रक्तदान जरूरतमंद मरीजों के लिए समय पर रक्त और उसके विभिन्न घटकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस 2026 की थीम “मानवता की एक बूंद। रक्तदान करें। जीवन बचाएं।” स्वैच्छिक रक्तदान की मानवीय भावना को रेखांकित करती है और पात्र नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं, से इस जीवनरक्षक कार्य में योगदान देने का आह्वान करती है।

कार्यक्रम का समापन नागरिकों, स्वास्थ्य संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी विभागों, स्वैच्छिक संगठनों और अन्य हितधारकों से पूरे वर्ष नियमित, स्वैच्छिक और बिना पारिश्रमिक के रक्तदान को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रखने की अपील के साथ हुआ।

देशव्यापी मेगा स्वैच्छिक रक्तदान अभियान 2 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। इसके अंतर्गत शामिल होने वाले राज्य, केंद्र शासित प्रदेश, रक्त केंद्र और संगठन देशभर में रक्तदान शिविरों, रक्तदाताओं को प्रोत्साहित करने तथा जागरूकता संबंधी गतिविधियों के माध्यम से स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को और मजबूत बनाने के लिए प्रयास करेंगे।

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