वन हेल्थ पर वैज्ञानिक संचालन समिति की छठी बैठक 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-3 में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय के. सूद की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
बैठक की शुरुआत में प्रारंभिक अभिसरण रूपरेखा से आगे बढ़ते हुए वन हेल्थ दृष्टिकोण को क्रियान्वित करने की दिशा में हुई महत्वपूर्ण प्रगति को रेखांकित किया गया। प्रो. सूद ने स्पष्ट संस्थागत स्वामित्व, परिणामोन्मुख लक्ष्यों और निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई के महत्व पर जोर दिया, ताकि समिति की सिफारिशें जमीनी स्तर पर कार्रवाई में परिवर्तित हो सकें। उन्होंने समानांतर संरचनाएं बनाने के बजाय मौजूदा कार्यक्रमों, स्थापित प्लेटफॉर्मों और वर्तमान संस्थागत क्षमताओं के आधार पर आगे बढ़ने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। प्रो. सूद ने कहा कि इस प्रकार का समन्वय मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के क्षेत्रों में सूचना के प्रवाह में सुधार, समन्वित निर्णय लेने में सहायता और समय पर कार्रवाई को सक्षम करेगा।
बैठक के दौरान बीएसएल-3/4 प्रयोगशालाओं के लिए न्यूनतम मानक आवश्यकताओं (एमएसआर) संबंधी दस्तावेज जारी किया गया, जिसे बीएसएल 3/4 प्रयोगशालाओं पर सलाहकार एवं समीक्षा समिति द्वारा विकसित किया गया है। यह दस्तावेज शीघ्र ही व्यापक प्रसार और संदर्भ के लिए सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराया जाएगा।

समिति ने एक इंटरऑपरेबल वन हेल्थ डैशबोर्ड विकसित करने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की और उन क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया, जिनमें निरंतर अंतर-क्षेत्रीय समन्वय की आवश्यकता है। समिति ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा एकीकृत स्वास्थ्य सूचना प्लेटफॉर्म (आईएचआईपी) के अगले चरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की और कहा कि एकीकृत स्वास्थ्य सूचना प्लेटफॉर्म तथा प्रस्तावित वन हेल्थ डैशबोर्ड के बीच संभावित समन्वय और परस्पर पूरकता के अवसर मौजूद हैं। सदस्यों ने मौजूदा प्रणालियों व तंत्रों को सुदृढ़ करने तथा राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तरों पर वन हेल्थ प्राथमिकताओं के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।
अपने समापन संबोधन में प्रो. सूद ने एक इंटरऑपरेबल वन हेल्थ डैशबोर्ड विकसित करने में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने मंत्रालयों और विभागों से सहयोगात्मक सहभागिता बनाए रखने, अनुवर्ती प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने और उन क्षेत्रों की पहचान करने का आग्रह किया, जहां अधिक समन्वय और सहयोग कार्यान्वयन में तेजी ला सकता है। उन्होंने जोर दिया कि एक इंटरऑपरेबल वन हेल्थ डैशबोर्ड न केवल संपूर्ण-सरकार के प्रयास को दर्शाता है, बल्कि संपूर्ण-देश दृष्टिकोण को भी प्रतिबिंबित करता है, जो विभिन्न क्षेत्रों में एकीकृत दृश्यता प्रदान करता है और यह सुनिश्चित करता है कि स्वास्थ्य संबंधी खतरों का अलग-अलग नहीं, बल्कि समग्र रूप से समाधान किया जाए।

बैठक ने समन्वित, अंतर-क्षेत्रीय कार्रवाई के माध्यम से एकीकृत वन हेल्थ दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने और राष्ट्रीय तैयारियों को सुदृढ़ करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की।
बैठक में डॉ. परविंदर मैनी, वैज्ञानिक सचिव, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (ओपीएसए) तथा संबंधित मंत्रालयों/विभागों के सचिवों ने भाग लिया, जिनमें डॉ. राजीव बहल, सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) तथा महानिदेशक (डीजी), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर); प्रो. उमेश वाघमारे, सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी); डॉ. मांगी लाल जाट, सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) तथा महानिदेशक (डीजी), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर); वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय; डॉ. वी. नारायण, अध्यक्ष, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो); तथा डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्मला, सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय शामिल थे। प्रतिभागियों में डॉ. राकेश गुप्ता, अपर सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय; डॉ. नवीन बी. महेश्वरप्पा, पशुपालन आयुक्त, पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) तथा आईसीएमआर के अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि; वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय; रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) एवं सुरक्षा सेवाएं; डीएएचडी; आईसीएआर; औषधि विभाग; आयुष मंत्रालय; राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी); मत्स्य विभाग; राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए); राष्ट्रीय वन हेल्थ संस्थान (एनआईओएच); ओपीएसए तथा गुजरात राज्य के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
इसके अतिरिक्त, सलाहकार एवं समीक्षा समितियों के अध्यक्षों—लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. माधुरी कनितकर (बीएसएल-3/4 प्रयोगशाला नेटवर्क), डॉ. एन.के. अरोड़ा (प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी), तथा डॉ. विजय चंद्रू (डेटा एकीकरण एवं डेटा साझाकरण)—और वन हेल्थ डैशबोर्ड के तकनीकी कार्य समूह के सदस्यों ने भी बैठक में भाग लिया।
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