कपड़ा मंत्रालय ने परिधानों/गारमेंट्स और मेड-अप्स के निर्यात के लिए आरओएससीटीएल योजना को मौजूदा दरों और प्रचलित दिशानिर्देशों के तहत 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक तीन महीने की और अवधि के लिए बढ़ा दिया है।
यह योजना 7 मार्च 2019 से लागू है, जिसके तहत पात्र छिपे हुए राज्य और केंद्रीय करों व शुल्कों से छूट प्रदान की जाती है जो अन्य माध्यमों से रिफंड नहीं किए जाते। निर्यात को जीरो-रेटिंग देने के सिद्धांत पर आधारित, इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे घरेलू कर निर्यातित उत्पादों पर बोझ न बनें, जिससे भारत के परिधान और मेड-अप्स क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हो।
वर्ष 2025–26 के दौरान, इस योजना से 444 से अधिक जिलों के 15,400 से अधिक निर्यातकों को लाभ मिला, जिसमें लाभार्थियों में मुख्य रूप से एमएसएमई शामिल थे। इसकी व्यापक भौगोलिक पहुंच एक फैली हुई विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करने और वैश्विक बाजारों में छोटे व मध्यम निर्यातकों की भागीदारी को मजबूत करने में योजना की भूमिका को रेखांकित करती है।
यह विस्तार निर्यातकों के लिए नीतिगत निरंतरता और पूर्वानुमान सुनिश्चित करेगा, साथ ही तेजी से प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यापारिक माहौल में भारत के श्रम-प्रधान और मूल्य-वर्धित परिधान व मेड-अप्स क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखेगा।
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