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भारत के स्वदेशी तकनीक के प्रयास को मिली गति केन्द्रीय मंत्री श्री एचडी कुमारस्वामी ने नविज्ञान 2026 (Navigyaan 2026) में भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) इंडस्ट्री एक्सीलेटर इम्पैक्ट रिपोर्ट का अनावरण किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत को केवल प्रौद्योगिकी विकास तक सीमित न रहकर ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ना होगा: श्री एचडी कुमारस्वामी

श्री एचडी कुमारस्वामी ने एमएचआई इंडस्ट्री एक्सीलेटर की प्रभाव रिपोर्ट जारी की, परियोजना के सदस्यों को किया सम्मानित

₹35.72 करोड़ की सहायता से 10 प्रौद्योगिकियों को टीआरएल-3 से टीआरएल-9 तक आगे बढ़ने में मदद मिली: श्री एचडी कुमारस्वामी

कॉन्सेप्ट से प्रोटोटाइप और प्रोडक्ट से ग्लोबल मार्केट तक: एचडी कुमारस्वामी ने मजबूत स्वदेशी प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम की जरूरत पर जोर दिया

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री श्री एच. डी. कुमारस्वामी ने बुधवार को नई दिल्ली में नविज्ञान 2026 में भारी उद्योग मंत्रालय इंडस्ट्री एक्सीलेटर प्रोजेक्ट की इम्पैक्ट रिपोर्ट का अनावरण और डिजिटल रूप से शुभारंभ किया। यह भारत के मोबिलिटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास एवं प्रगति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री एच. डी. कुमारस्वामी ने कहा कि यह कार्यक्रम एमएचआई इंडस्ट्री एक्सीलेटर प्रोजेक्ट के समापन का प्रतीक है। उन्होंने घरेलू तकनीकी और विनिर्माण क्षमताओं के निर्माण के महत्व पर भी बल दिया।

उन्होंने कहा, ‘आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत सरकार ने घरेलू तकनीकी और विनिर्माण क्षमताओं के निर्माण पर विशेष बल दिया है।’

श्री एच. डी. कुमारस्वामी  ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के लिए आवश्यक है कि भारत उन्नत प्रौद्योगिकियों के केवल एक बड़े बाजार के रूप में सीमित न रहे, बल्कि उन्हें बनाने और निर्यात की क्षमता विकसित करे।

श्री कुमारस्वामी ने कहा, ‘आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना एक ऐसे भारत का आह्वान करती है जो न केवल अत्याधुनिक तकनीकों का एक विशाल बाजार बने, बल्कि स्वयं उनका विकास, निर्माण और वैश्विक निर्यात भी करे।

भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना – चरण II, के तहत दी गई सहायता के व्यापक दायरे को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹1,207 करोड़ है। इसका उद्देश्य सामान्य प्रौद्योगिकी विकास और सेवा अवसंरचना को सहयोग प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 33 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है।

इन पहलों में से एक, एमएचआई इंडस्ट्री एक्सीलेटर प्रोग्राम ने 10 प्रौद्योगिकियों के लिए अनुदान-सहायता के रूप में ₹35.72 करोड़ प्रदान किए, जिसका उद्देश्य उन्हें टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल 3 (टीआरएल-3) से लेवल 9 (TRL-9) तक आगे बढ़ाने में सहयोग देना था।

श्री कुमारस्वामी ने ध्यान दिलाया कि इस कार्यक्रम के तहत सहायता प्राप्त प्रौद्योगिकियाँ फ्यूचर मोबिलिटी के कई क्षेत्रों को कवर करती हैं, जिनमें इलेक्ट्रिक पावरट्रेन, हाई-वोल्टेज मोटर कंट्रोल और एनर्जी स्टोरेज शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इसका एक महत्वपूर्ण परिणाम शुरुआती स्तर के प्रोटोटाइप से तकनीकों का व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक उत्पादों की ओर बढ़ना रहा है।

प्रौद्योगिकी विकास में सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए श्री कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार, उद्योग जगत, अनुसंधान संस्थानों, अकादमिक संस्थानों, स्टार्टअप्स और एआरएआई जैसी संस्थाओं में से प्रत्येक के इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा, “सरकार पॉलिसी का ढांचा और खास मदद दे सकती है। इंडस्ट्री बाज़ार की समझ और मैन्युफ़ैक्चरिंग की क्षमता लाती है। रिसर्च और एकेडमिक संस्थान ज्ञान और टेक्नोलॉजी का योगदान देते हैं। स्टार्टअप नए आइडिया और तेज़ी लाते हैं।

उन्होंने प्रौद्योगिकी विकास, वैलिडेशन और इंडस्ट्री अडॉप्शन के बीच की दूरी को कम करने में एआरएआई जैसी संस्थाओं की भूमिका पर भी विशेष बल दिया।

श्री कुमारस्वामी ने कहा कि जैसे-जैसे भारत ‘विकसित भारत@2047’ की ओर बढ़ रहा है, हमारा ध्यान देश के भीतर क्षमताओं के विकास और भारतीय प्रौद्योगिकियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक ले जाने पर केंद्रित रहना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हमें इसी इकोसिस्टम को और मज़बूत करने की ज़रूरत है। जैसे-जैसे हम ‘विकसित भारत@2047’ की ओर बढ़ रहे हैं, हमारा फ़ोकस साफ़ होना चाहिए: भारत में शिक्षा, इनोवेशन, मैन्युफ़ैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी को अपनाना और भारतीय टेक्नोलॉजी को ग्लोबल मार्केट तक ले जाना।”

श्री कुमारस्वामी ने इस बात पर भी बल दिया कि आत्मनिर्भरता को केवल इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूशन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका ध्यान भारतीय इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, मजबूत सप्लाई चेन और कुशल मानव संसाधनों के विकास पर केंद्रित होना चाहिए।

श्री कुमारस्वामी ने कहा, “आत्मनिर्भरता का उद्देश्य केवल आयातों को प्रतिस्थापित करना नहीं है। इसका उद्देश्य भारतीय बौद्धिक संपदा, आपूर्ति श्रृंखलाओं और कुशल मानव संसाधनों का निर्माण करना है।”

उन्होंने उभरती हुई प्रौद्योगिकी आवश्यकताओं की पहचान करने, उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने और भविष्य की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम प्रतिभाओं को विकसित करने के निरंतर प्रयासों का आह्वान किया।

अपने संबोधन का समापन करते हुए, श्री कुमारस्वामी ने कहा कि भारत को एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना चाहिए जो नवाचारों को विकास के हर चरण से कुशलतापूर्वक आगे बढ़ने में सक्षम बनाए।

उन्होंने कहा, “आइए हम एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना जारी रखें जिसमें भारतीय इनोवेशन कॉन्सेप्ट से प्रोटोटाइप, प्रोटोटाइप से प्रोडक्ट और प्रोडक्ट से ग्लोबल मार्केट तक कुशलतापूर्वक पहुँच सके।”

श्री कुमारस्वामी ने एमएचआई इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर प्रोजेक्ट के सदस्यों को भी सम्मानित किया। उन्होंने टेक्नोलॉजी को डेवलपमेंट और वैलिडेशन के चरण से आगे ले जाकर इंडस्ट्रियल इस्तेमाल और कमर्शियलाइज़ेशन तक पहुँचाने में योगदान दिया था। ARAI-AMTIF द्वारा लागू किए गए एमएचआई इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर प्रोजेक्ट के समापन के तौर पर आयोजित इस कार्यक्रम में सरकार, इंडस्ट्री, एकेडेमिया, रिसर्च और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम से जुड़े सभी पक्ष शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान, कुमारस्वामी ने स्टार्टअप प्रदर्शनी का दौरा किया और एक्सीलरेटर पहल के तहत समर्थित नवाचारों की समीक्षा की। इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित प्रौद्योगिकियों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, हाई-वोल्टेज सिस्टम, एनर्जी स्टोरेज, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, सेंसर और एडवांस्ड सरफेस इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र शामिल थे।

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