एबीएस के माध्यम से 278 करोड़ रुपये से ज़्यादा जारी किए गए; जैव-विविधता संरक्षण एवं सामुदायिक लाभ के लिए 200 करोड़ रुपये से ज़्यादा वितरित
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) कल यानी दिनांक 01.10.2026 को अपना 23वां स्थापना दिवस मनाएगा, जिसमें जैव विविधता संरक्षण एवं स्थानीय समुदायों के लिए पहुंच और लाभ साझाकरण (एबीएस) को ठोस परिणामों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को रेखांकित किया जाएगा। एनबीए ने 2008 से एबीएस के माध्यम से 278 करोड़ रुपये से ज़्यादा जारी किए हैं और देश भर में समुदायों, किसानों, संस्थानों और अन्य लाभार्थियों और जैव-विविधता के संरक्षण के लिए 200 करोड़ रुपये से ज़्यादा वितरित किए हैं। यह प्रगति भारत के एबीएस संरचना के मज़बूत होने और जैविक संसाधनों के इस्तेमाल को संरक्षण और लाभ के समान बंटवारे से जोड़ने की उसकी क्षमता का प्रदर्शन करती है। भारत एबीएस को लागू करने में अग्रणी बनकर उभरा है, जिसे जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अनुसार तीन-स्तरीय संस्थागत संरचनाओं का समर्थन प्राप्त है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर एनबीए, राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड (एसबीबी) और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदें (यूटीबीसी), तथा स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियां (बीएमसी) शामिल हैं।
जैसा कि एनबीए कल अपना 23वां स्थापना दिवस मना रहा है, यह प्रगति एबीएस के उस विकास को दर्शाती है जिसके अतर्गत यह जैविक विविधता के मूल्य को संरक्षण कार्यों और समुदाय को प्राप्त होने वाले लाभों में बदलने का एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है। इसका प्रभाव लाभार्थियों के एक बड़े नेटवर्क में दिखाई देता है। एनबीए द्वारा वितरित 200 करोड़ रुपये से ज़्यादा की राशि ने देश में जैव विविधता के संरक्षण, सतत उपयोग, अनुसंधान, क्षमता निर्माण और समुदाय-केंद्रित गतिविधियों के लिए 10,500 से ज़्यादा बीएमसी, 28 एसबीबी, 7 यूटीबीसी, 6 वन विभागों और 58 अनुसंधान संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों की मदद की है। दिनांक 01.09.2025 और दिनांक 31.08.2026 के बीच, एनबीए को एबीएस के रूप में 12.93 करोड़ रुपये मिले और उसने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, संस्थानों, किसानों, स्थानीय समुदायों और अन्य लाभार्थियों को 132.01 करोड़ रुपये जारी किए। जारी की गई रकम में पहले जमा हुई एबीएस की रकम भी शामिल थी, जिससे संरक्षण एवं आजीविका से जुड़ी कई तरह की पहलों में मदद मिली।
एबीएस तंत्र जैविक संसाधनों की एक विविध श्रृंखला को कवर करता है, जिसमें कृषि एवं बागवानी की फसलें, पौधों के आनुवांशिक संसाधन, औषधीय एवं सुगंधित पौधे, पालतू जनसंख्या के आनुवांशिक संसाधन, लाल चंदन एवं सूक्ष्मजीव शामिल हैं। योगदान बीज, आयुष, फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, जैव प्रौद्योगिकी, सौंदर्य प्रसाधन, रसायन, जैव ईंधन, और खाद्य एवं पेय पदार्थों सहित क्षेत्रों से प्राप्त हुए हैं। विभिन्न कंपनियों ने लागू कानूनी संरचना के अनुसार एबीएस तंत्र में योगदान दिया है जिसमें नुनहेम्स इंडिया, ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया, पायनियर ओवरसीज़ कॉर्पोरेशन, बायर बायोसाइंस, हिमालय वेलनेस कंपनी, डाबर इंडिया, ऑर्गेनिक इंडिया, लॉरस लैब्स, अकाय नेचुरल इंग्रीडिएंट्स, नोवोज़ाइम्स साउथ एशिया, एडवांस्ड एंजाइम्स और लोरियल इंडिया शामिल हैं।
इसके लाभ ज़मीनी स्तर पर तेज़ी से पहुंच रहे हैं, जिससे मक्का, चावल, हल्दी, आंवला, सरसों, करेला, कपास, भिंडी और मिर्च, साथ ही कालमेघ, इलायची, तुलसी, गुग्गुल गोंद, नीम, गार्सिनिया, अश्वगंधा, काली मिर्च और लौंग जैसे औषधीय एवं सुगंधित संसाधनों के संरक्षण एवं सतत उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। हाल ही में जारी की गई रकम में कपास की 25,431 किस्मों के लिए 6.67 करोड़ रुपये, सरसों से जुड़े संरक्षण के लिए 15.52 करोड़ रुपये और भिंडी की 139 किस्मों व 28 हाइब्रिड किस्मों के लिए 3.51 करोड़ रुपये शामिल हैं। आंध्र प्रदेश वन विभाग और आंध्र प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड के ज़रिए लाल चंदन के संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए भी लगभग 100 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह दर्शाता है कि किस प्रकार एबीएस जैविक संसाधनों की कीमत को ठोस संरक्षण परिणामों में बदल सकता है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के स्तर पर, जैविक संसाधनों के वाणिज्यिक उपयोग के लिए एसबीबी और यूटीबीसी द्वारा धारा सात की संस्थाओं (भारतीय संस्थाओं) को दी गई एबीएस मंज़ूरियों से 51 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई हुई है।
एबीएस निधि लोगों के जैव विविधता रजिस्टर, आवास पुनर्स्थापन, पारंपरिक किस्मों का संरक्षण, औषधीय पौधों का संरक्षण, सामुदायिक जीन बैंक, क्षमता निर्माण और सतत आजीविका गतिविधियों का भी समर्थन कर रहे हैं। जहां व्यक्तिगत लाभार्थियों की पहचान नहीं की जा सकती, वहां इस संरचना के तहत जैविक संसाधनों के उत्पत्ति वाले क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए निधि का उपयोग किया जाता है। नियामक सुधार एवं डिजिटलीकरण ने व्यापार करने में आसानी और अनुपालन की सुविधा को मजबूत किया है, साथ ही जैव विविधता संरक्षण एवं न्यायसंगत लाभ वितरण के उद्देश्यों को सुरक्षित रखा है। एबीएस ई-फाइलिंग प्रणाली ने आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया है और पारदर्शिता एवं ट्रैकिंग को बेहतर किया है। अब तक, एनबीए को 11273 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 6,074 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए/मंजूरी प्रदान की गई और 2,098 प्रमाण-पत्र जारी किए गए। मॉडल समझौतों, मानकीकृत प्रक्रियाओं एवं ऑनलाइन सेवाओं ने एबीएस प्रक्रिया को और अधिक पूर्वानुमेय और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनया है। एनबीए द्वारा निष्पादित समझौतों में एबीएस दायित्वों को शामिल किया जाता है, जिससे लागू एबीएस विनियमों के तहत लाभ-साझाकरण भुगतानों के लिए एक स्पष्ट आधार मिलता है।
जैव विविधता संरक्षण को सतत आजीविका के साथ जोड़कर, एबीएस स्थानीय मूल्य संवर्द्धन, जैविक संसाधनों के सतत उपयोग, सामुदायिक भागीदारी एवं आजीविका के अवसरों में योगदान दे रहा है, विशेषकर जैव विविधता-समृद्ध ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में। यह विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में भी योगदान देता है और पीएम-जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन और वन धन जैसी पहलों का भी पूरक है जो जनजातीय कल्याण एवं प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित आजीविका को बढ़ावा देते हैं। भारत का एबीएस संरचना नागोया प्रोटोकॉल के सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप देता है और एनबीएसएपी 2024–2030 तथा केएमजीबीएफ के तहत देश की प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाता है, विशेष रूप से निष्पक्ष एवं न्यायसंगत लाभ-साझाकरण से संबंधित लक्ष्य 13 को। संरक्षण, सतत उपयोग और सामुदायिक लाभों के माध्यम से, एबीएस केएमजीबीएफ के लक्ष्यों 4, 5 और 9 का भी समर्थन करता है और प्रासंगिक एसडीजी में योगदान देता है, जिससे जैव विविधता, आजीविका और सतत विकास के बीच संबंध मजबूत होता है।
जैव विविधता अधिनियम, 2002 (जिसमें 2023 में संशोधन किया गया), जैव विविधता नियम, 2024 और जैव विविधता (पहुंच एवं लाभ साझाकरण) विनियम, 2025 के साथ, भारत एक पारदर्शी, पूर्वानुमेय एवं प्रभावी एबीएस प्रणाली को मजबूत कर रहा है, जो वैध पहुंच एवं अनुपालन को सुगम बनाते हुए यह सुनिश्चित करता है कि जैविक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभ संरक्षण एवं समुदाय कल्याण में योगदान दें। जैसा कि कल यानी दिनांक 01.10.2026 को एनबीए अपना 23वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस अवसर पर, वह एबीएस के लागू होने की प्रक्रिया को और मज़बूत बनाने के लिए एसबीबी, यूटीबीसी,बीएमसी, संबंधित विभागों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग, स्थानीय समुदायों एवं अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा। भारत का अनुभव दर्शाता है कि एबीएस जैव विविधता संरक्षण, सतत उपयोग, नवाचार एवं समुदाय के हितों के बीच एक व्यावहारिक पुल का काम कर सकता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि भारत की जैविक संपदा से उत्पन्न मूल्य इसके संरक्षण और पोषण करने वाले लोगों तक पहुंचे।
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