प्रगति के मार्ग को प्रशस्त करना
भारत की जनसंख्या का 16.6% हिस्सा अनुसूचित जाति (एससी) का है और इन्हें सामाजिक-आर्थिक उन्नति और समावेशन में ऐतिहासिक रूप से बाधाओं का सामना करना पड़ा है। इन असमानताओं को दूर करना सामाजिक न्याय, समान अवसर और भारत के विकास पथ में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन विकास संबंधी कमियों को पहचानते हुए, भारत सरकार ने अनुसूचित जातियों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई) शुरू की।
समावेशी सशक्तिकरण का दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई) वित्त वर्ष 2021-22 में शुरू की गई एक पूर्णतः केंद्र प्रायोजित योजना है। इसका उद्देश्य एक व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण के ज़रिए अनुसूचित जाति समुदायों का सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण करना है। सरकार ने पीएम-एजीएवाई योजना के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण कार्यान्वयन के लिए ‘पीएम-एजेएवाई‘ मोबाइल ऐप और ‘पीएम-एजेएवाई‘ पोर्टल लॉन्च किया है।
पीएम-एजेएवाई तीन पूर्व केंद्र प्रायोजित योजनाओं, अर्थात् प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई), अनुसूचित जातियों के लिए विशेष केंद्रीय सहायता उप योजना (एससीए टू एससीएसपी) और बाबू जगजीवन राम छात्रवास योजना (बीजेआरसीवाई) का विलय करके बनाई गई योजना है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित पीएम-एजेएवाई योजना, सभी के लिए विकास सुनिश्चित करने के अपने व्यापक लक्ष्य को निम्नलिखित तीन मुख्य उद्देश्यों के माध्यम से व्यावहारिक रूप देती है:
- अतिरिक्त रोजगार के अवसर सृजित करके अनुसूचित जाति समुदायों की गरीबी कम करना। यह कौशल विकास, आय सृजन योजनाओं और अन्य पहलों के माध्यम से किया जा सकता है। इन हस्तक्षेपों का उद्देश्य आजीविका के अवसरों को बढ़ाना और लाभार्थियों को स्थायी आय सृजन गतिविधियों से जुड़ने में सक्षम बनाना है।
- अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों में पर्याप्त बुनियादी ढांचा और आवश्यक सेवाएं सुनिश्चित करके सामाजिक-आर्थिक विकास संकेतकों में सुधार करना। यह योजना विकास संबंधी महत्वपूर्ण अंतरों को पाटने और जीवन की बेहतर गुणवत्ता में योगदान देने वाली आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में सुधार लाने का प्रयास करती है।
- साक्षरता बढ़ाना और अनुसूचित जातियों को विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकन के लिए प्रोत्साहित करना। यह गुणवत्तापूर्ण संस्थानों और आवासीय विद्यालयों में पर्याप्त आवासीय सुविधाएं प्रदान करके प्राप्त किया जाता है, विशेष रूप से आकांक्षी जिलों/अनुसूचित जाति बहुल ब्लॉकों और भारत के अन्य हिस्सों में।

पीएम-एजेएवाई से कौन लाभान्वित हो सकता है?
पीएम- एजेएवाई के केंद्र में पात्रता का एक सुविचारित ढांचा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि योजना का लाभ उन व्यक्तियों और समुदायों तक पहुंचे, जिनके लिए यह लक्षित है। तदनुसार, योजना तक पहुंच निम्नलिखित मानदंडों के आधार पर निर्धारित की जाती है:
- जीआईए घटक के तहत लाभार्थियों का चयन करते समय, उन परिवारों/व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिनकी वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं है। अनुसूचित जाति बहुसंख्यक समूह के अनुसूचित जाति सदस्य भी पात्र होंगे।
- अवसंरचना विकास के मामले में, जिन गांवों में अनुसूचित जाति की आबादी 40% या उससे अधिक है और कुल जनसंख्या 500 या उससे अधिक है, वे इस योजना के तहत अनुदान के लिए पात्र हैं।

पीएम- एजेएवाई इन एक्शन
पीएम- एजेएवाई योजना विकास के विभिन्न पहलुओं को संबोधित करने के लिए तीन विशिष्ट घटकों पर आधारित है:
अनुसूचित जाति बहुल गांवों का “आदर्श ग्राम” में विकास
अनुसूचित जाति बहुल गांवों को बुनियादी ढांचे और सेवाओं में मौजूद महत्वपूर्ण कमियों को दूर करके ‘आदर्श ग्राम’ (मॉडल गांव) में परिवर्तित करना। आदर्श ग्राम घटक के अंतर्गत 47,243 गांव शामिल हैं, जिससे देशभर में 47.79 लाख से अधिक नागरिकों को लाभ हुआ है। कुल 46,944 विकास कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 27,032 ग्राम विकास योजनाएं (वीडीपी) तैयार की गई हैं। 8 सितंबर 2026 तक, 18,093 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया गया है, जो अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी ढांचे, मूलभूत सेवाओं और जीवन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।

‘आदर्श ग्राम’ वह है, जहां लोगों को विभिन्न मूलभूत सेवाओं तक पहुंच प्राप्त हो। समाज के सभी वर्गों की न्यूनतम आवश्यकताएं पूरी तरह से पूरी की जाती हैं और असमानताओं को न्यूनतम स्तर तक कम किया जाता है। इन गांवों में गरिमापूर्ण जीवन के लिए ज़रुरी सभी बुनियादी ढांचे और सभी निवासियों के लिए सुलभता सुनिश्चित करने की परिकल्पना की गई है। इससे प्रत्येक निवासी को अपनी पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए अनुकूल वातावरण प्राप्त होता है।
राज्य/जिला स्तर पर सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं के लिए अनुदान सहायता
अनुसूचित जाति (एससी) के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के उद्देश्य से जिला/राज्य स्तरीय परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना। इसमें शामिल हैं:
i) कौशल विकास और संबंधित अवसंरचना सहित व्यापक आजीविका परियोजनाओं के माध्यम से लक्षित आबादी की आय में वृद्धि करना।
ii) अनुसूचित जाति बहुल गांवों में पर्याप्त अवसंरचना का निर्माण करके सामाजिक-आर्थिक विकास संकेतकों में सुधार करना।
iii) आवश्यकतानुसार आवासीय विद्यालय उपलब्ध कराकर साक्षरता बढ़ाना और अनुसूचित जाति के छात्रों को विद्यालयों में नामांकन के लिए प्रोत्साहित करना।
वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26 तक अनुदान सहायता घटक के तहत राज्यों को सीधे ₹1,730 करोड़ से अधिक की राशि जारी की गई है। इससे 2.5 लाख से अधिक व्यक्तिगत और समूह लाभार्थियों को कौशल विकास और आजीविका सहायता प्रदान की गई है।
छात्रावासों का निर्माण/मरम्मत
- अनुसूचित जाति (एससी) के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाने और प्रोत्साहित करने के साधनों में से एक छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत है। देश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के लिए ऐसे छात्रावास अत्यंत लाभकारी हैं। सितंबर 2026 तक कुल 785 छात्र छात्रावासों का निर्माण पूरा हो चुका है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दो छात्रावास परियोजनाओं (एक लड़कियों के लिए और एक लड़कों के लिए) के निर्माण हेतु 61.46 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता आवंटित की है, जिनसे 264 छात्रों को आवास उपलब्ध कराया जा सकेगा।
सशक्तिकरण में निवेश
किसी भी कल्याणकारी पहल के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए निरंतर वित्तीय सहायता आवश्यक है। पीएम-एजेएवाई के अंतर्गत वित्तपोषण ढांचे का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है।
| वित्त पोषण का संक्षिप्त विवरणवित्तपोषण पैटर्न 100% केंद्र द्वारा वित्तपोषित योजनाराज्य/केंद्र शासित प्रदेशों का योगदान:आवश्यकता पड़ने पर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अतिरिक्त संसाधनों से योजना को पूरक कर सकते हैं।घटक-वार आवंटन:50% तक – चयनित आदर्श ग्राम गांवों में कमियों को दूर करने के लिए कार्य।5% तक – केंद्र स्तर पर तकनीकी सहायता समूह (टीएसजी) और परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों (पीआईयू) की स्थापना और संचालन के लिए, साथ ही राज्य और जिला स्तर पर पीआईयू के लिए।2% तक – छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत – केंद्रीय संस्थानों के लिए उपयोग किया जाएगा और मंत्रालय द्वारा सीधे कार्यान्वयन एजेंसियों को जारी किया जाएगा।शेष धनराशि – जिला/राज्य स्तर पर परियोजनाओं के लिए अनुदान सहायता, अनुसूचित जाति की जनसंख्या और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में अनुसूचित जाति की जनसंख्या की तुलना में राज्य एससीएसपी के वार्षिक योजना अनुपात के आधार पर आवंटित की जाएगी।रखरखावइस योजना के अंतर्गत अवसंरचना परियोजनाओं के पूरा होने के बाद, उनका रखरखाव और संचालन संबंधित राज्य सरकारों/ कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा किया जाएगा। |
प्रभावी शासन की ओर एक डिजिटल छलांग

हाल ही में लॉन्च किए गए ‘पीएम-एजेएवाई ‘ मोबाइल ऐप और ‘पीएम-एजेएवाई ‘ पोर्टल का उद्देश्य कागज आधारित कार्यप्रवाह और प्रसंस्करण से पूर्णतः डिजिटल कार्यप्रवाह और वास्तविक समय के आधार पर प्रसंस्करण की ओर परिवर्तन करना है।

सुशासन पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता के सिद्धांतों पर आधारित है। डिजिटल प्रौद्योगिकियों ने सार्वजनिक कार्यक्रमों की योजना, कार्यान्वयन और निगरानी में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। प्रौद्योगिकी-आधारित शासन सूचना तक पहुंच में सुधार करता है, निगरानी को मजबूत बनाता है और डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायक होता है। यह समन्वय, पारदर्शिता और कार्यक्रम कार्यान्वयन की समग्र प्रभावशीलता को भी बढ़ाता है
भारत की विकास गाथा का अगला अध्याय
2047 तक विकसित भारत की यात्रा इस सिद्धांत पर आधारित है, कि विकास के लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचने चाहिए और सभी के लिए प्रगति के अवसर सृजित करने चाहिए। इस प्रयास में, पीएम-एजेएवाई अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सतत आजीविका, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने वाले लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से इस लक्ष्य को हासिल कर रहा है। योजना के विस्तार के साथ-साथ, प्रौद्योगिकी का अधिक उपयोग, मजबूत निगरानी तंत्र और लक्षित अंतिम-मील वितरण इसकी प्रभावशीलता और पहुंच को बढ़ा रहे हैं। व्यक्तियों और समुदायों को उनकी पूरी क्षमता का एहसास कराने और भारत की विकास यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए सशक्त बनाकर, पीएम-एजेएवाई एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत और सशक्त राष्ट्र को बढ़ावा देना जारी रखेगा।
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