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वेव्स ओटीटी और माईवेव्स


सार्वजनिक प्रसारण से जनभागीदारी तक

वेव्स प्रसार भारती के पारंपरिक प्रसारण से एकीकृत डिजिटल लोक-सेवा पारितंत्र की ओर बदलाव को दर्शाता है। वेव्स ओटीटी लाइव टेलीविजन, रेडियो, मांग आधारित कार्यक्रम, आर्काइव्‍स (अभिलेखागार), शिक्षा, भक्ति संबंधी सामग्री और प्रकाशनों को एक डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराता है। 1.2 करोड़ पंजीकृत उपयोगकर्ताओं, 1.5 करोड़ से अधिक डाउनलोड और 24,000 से अधिक शीर्षकों के साथ, यह विभिन्न उपकरणों और भाषाओं में पहुंच का विस्तार कर रहा है। माईवेव्स रचनाकारों को सामग्री प्रस्तुत करने, खोजने और प्रदर्शित करने के लिए एक संस्थागत मंच प्रदान करता है, जबकि जॅम्स ऑफ इंडिया जिला स्तर की कहानियों और प्रतिभाओं को बढ़ावा देता है। नई सामग्री-संग्रहण और वितरण व्यवस्थाएं भागीदारी का और विस्तार कर रही हैं। वेव्स शिखर सम्मेलन के पारितंत्र के साथ मिलकर, ये पहल भारत की प्रसारण विरासत और उभरते रचनाकारों को व्यापक दर्शकों और वैश्विक बाजारों से जोड़ती हैं।

डिजिटल पीढ़ी के लिए सार्वजनिक प्रसारण

दशकों से, दूरदर्शन और आकाशवाणी ने कहानियों, समाचारों, संस्कृति और संगीत के माध्यम से लाखों लोगों को जोड़े रखा है। आज दर्शक तेजी से स्मार्टफोन, स्मार्ट टेलीविजन और डिजिटल मंचों के माध्यम से सामग्री तक पहुंच बना रहे हैं। इसलिए सार्वजनिक प्रसारण ने बदलते प्रारूपों, भाषाओं और देखने की आदतों के अनुरूप डिजिटल, ओवर-द-टॉप या ओटीटी मंच के तौर-तरीके को अपनाते हुए स्वयं को विकसित किया है। इस मॉडल के तहत वीडियो, ऑडियो और संदेश संबंधी सामग्री को केबल, उपग्रह और सेवा प्रदाताओं की आवश्यकता के बिना इंटरनेट के माध्यम से सीधे दर्शकों तक प्रसारित किया जाता है। प्रसार भारती द्वारा 20 नवंबर 2024 को शुरू किया गया वेव्स ओटीटी इसी परिवर्तन की प्रतिक्रिया है। यह टीवी और रेडियो के अभिलेखीय खजाने, समकालीन कार्यक्रमों और सीधे प्रसारण को एक बहुभाषी डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराता है। माईवेव्स नागरिकों को अपनी मूल सामग्री तैयार करने और साझा करने में सक्षम बनाकर इस बदलाव को और आगे बढ़ाता है।

यह परिवर्तन भारत की सृजनात्मक अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और मीडिया तथा मनोरंजन क्षेत्र में अवसरों का विस्तार करने के व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा है। इसे बढ़ावा देने और व्यापक पहचान दिलाने में वेव्स शिखर सम्मेलन की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसकी परिकल्पना एक ऐसे मंच के रूप में की गई है, जो दुनियाभर के रचनाकारों, उद्योग जगत के अग्रणी लोगों, नीतिनिर्माताओं और निवेशकों को एक साथ लाकर साझेदारियों, व्यावसायिक अवसरों और अंतरराष्ट्रीय संवाद को बढ़ावा देता है। वेव्स शिखर सम्मेलन का पहला संस्करण वर्ष 2025 में आयोजित किया गया था। विभिन्न मंचों के माध्यम से इस शिखर सम्मेलन ने रचनाकारों और स्टार्ट-अप को समर्थन देने, निवेश को सुगम बनाने तथा मीडिया और मनोरंजन पारितंत्र में वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करने में योगदान दिया है।

वेव्स ओटीटी: सार्वजनिक प्रसारण को दिया डिजिटल रूप

ब्रॉडकास्‍ट आर्काइव्‍स से डिजिटल एक्‍सेस तक

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वेव्स ओटीटी का शुभारंभ 20 नवंबर 2024 को गोवा में आयोजित 55वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में किया गया था। इसे प्रसार भारती के सार्वजनिक सेवा ओटीटी मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस शुभारंभ के साथ भारत की प्रसारण विरासत को आधुनिक डिजिटल क्षेत्र से जोड़ा गया। वाणिज्यिक ओटीटी मंचों के विपरीत, वेव्स ओटीटी केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। यह विश्वसनीय जानकारी, शिक्षा, संस्कृति, समाचार और चुनिंदा मनोरंजन सामग्री को एक साथ उपलब्ध कराता है। यह सार्वजनिक प्रसारण को निर्धारित समय-सारिणी और पारंपरिक टेलीविजन सेटों की सीमाओं से आगे ले जाता है। दर्शक अपनी सुविधा के अनुसार राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सामग्री देख सकते हैं।

यह प्रसार भारती के व्यापक आर्काइव को युवा और दर्शकों की एक बड़ी संख्‍या तक भी पहुंचाता है। इसकी आसान उपलब्‍धता प्रमुख शहरों और सशुल्क स्ट्रीमिंग सेवाओं से परे लोगों तक पहुंचने में मदद करती है। साझेदारियां, सबटाइटल और बेहतर खोज संबंधी जानकारी क्षेत्रीय सामग्री को आसानी से खोजने योग्य बनाते हैं। इसका शुभारंभ तीन व्यापक उद्देश्यों का समर्थन करता है: व्यापक डिजिटल पहुंच, सांस्कृतिक संरक्षण और भाषाई विविधता। यह दर्शाता है कि एक राष्ट्रीय संस्थान अपनी सार्वजनिक सेवा की भावना को बनाए रखते हुए किस प्रकार आधुनिक रूप अपना सकता है।

इसलिए, वेव्स ओटीटी केवल एक अन्य स्ट्रीमिंग मंच से कहीं अधिक है। यह प्रसार भारती द्वारा सामग्री के वितरण, दर्शकों तक पहुंच बनाने तथा रचनाकारों, निर्माताओं और सामग्री साझेदारों के साथ कार्य करने के तरीके में व्यापक सुधार का प्रतीक है।

मंच एक, अनुभव अनेक

वेव्स ओटीटी टेलीविजन, रेडियो, स्ट्रीमिंग, लर्निंग और डिजिटल प्रकाशनों को एक ही मंच पर उपलब्ध कराता है। इसकी बढ़ती सामग्री लाइब्रेरी में अब 24,000 से अधिक शीर्षक और 15,000 घंटे की सामग्री शामिल है।

  • मांग के अनुसार देखें: फिल्में, टेलीविजन कार्यक्रम, वेब सीरीज, वृत्तचित्र और अभिलेखीय कार्यक्रम
  • सीधा प्रसारण देखें और सुनें: 140 से अधिक टेलीविजन चैनल और 220 रेडियो सेवाएं
  • प्रमुख आयोजनों से जुड़े रहें: राष्ट्रीय अवसर, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक प्रसारण
  • सीखें और तैयारी करें: पीएम ई-विद्या चैनल और शैक्षणिक कार्यक्रम विद्यार्थियों और सीखने के इच्‍छुक लोगों की सहायता करते हैं
  • पढ़ें और जानें: ई-पुस्तकें, फोटो संग्रह और योजना  तथा कुरुक्षेत्र  जैसी पत्रिकाएं
  • खेलें और खरीदारी करें: गेम और ओएनडीसी-एकीकृत खरीदारी वेव्स को पारंपरिक स्ट्रीमिंग से आगे ले जाते हैं

यह मंच मनोरंजन को शिक्षा, संस्कृति, विरासत और उपयोगी सार्वजनिक जानकारी के साथ जोड़ता है। प्रसार भारती के आर्काइव्‍स (अभिलेखागार) की हजारों घंटे की सामग्री नए दर्शकों को भारत के प्रसारण इतिहास से भी जोड़ती है।

विभिन्न भाषाओं और स्क्रीन तक पहुंच

वेव्स ओटीटी के वर्तमान में 1.2 करोड़ पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं और इसके 1.5 करोड़ से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं, जो प्रसार भारती की डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है। यह अब 130 से अधिक देशों के दर्शकों तक पहुंचता है।

  • इसका इंटरफेस 10 से अधिक भाषाओं को सपोर्ट करता है। इसकी सामग्री 26 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है।
  • यह मोबाइल एप्लिकेशन, वेबसाइट और कनेक्टेड टेलीविजन के माध्यम से उपलब्‍ध है।
  • इसमें अन्य प्रसारकों के साथ-साथ दूरदर्शन के सभी 35 सैटेलाइट चैनल भी उपलब्ध हैं।
  • इसकी रेडियो सेवाएं आकाशवाणी के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेटवर्क पर आधारित हैं।
  • क्षेत्रीय सामग्री और सबटाइटल विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों के दर्शकों तक पहुंच बनाने में मदद करते हैं।

वेव्स ओटीटी पूरे भारत के दर्शकों, विशेष रूप से युवाओं और डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता देने वाले उपयोगकर्ताओं, क्षेत्रीय और भाषाई समुदायों तथा सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और अभिलेखीय सामग्री की तलाश करने वाले दर्शकों की जरूरतों को पूरा करता है। यह भारतीय प्रवासी समुदाय और दुनियाभर के दर्शकों के लिए भारतीय सामग्री, संस्कृति और सार्वजनिक प्रसारण सेवाओं तक पहुंच भी बढ़ाता है। यह बढ़ती डिजिटल पहुंच भारत के विकसित होते सार्वजनिक प्रसारण पारितंत्र के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में वेव्स ओटीटी को और सुदृढ़ करती है तथा ऐसा मंच उपलब्ध कराती है, जो देश की सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान परंपराओं, क्षेत्रीय विविधता और सृजनात्मक अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करता है।

अधिक सामग्री को मंच उपलब्‍ध कराना

पे-पर-व्यू कंटेंट सोर्सिंग नीति  निर्माताओं और अधिकार धारकों को मंच के लिए गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराने हेतु एक पारदर्शी और विस्तार योग्य तंत्र प्रदान करती है।

वेव्स ने ओएनडीसी एकीकरण और रेलवे से संबंधित डिजिटल वितरण पहलों की भी शुरुआत की है। ये उपाय वितरण के दायरे को व्यापक बनाते हैं, सामग्री साझेदारियों को प्रोत्साहित करते हैं और भारतीय तथा क्षेत्रीय सामग्री को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध कराते हैं।

माईवेव्स: दर्शकों को रचनाकार बनाना

माईवेव्स का शुभारंभ 23 मार्च 2026 को वेव्स ओटीटी के अंतर्गत किया गया। यह मंच सामग्री देखने से आगे बढ़कर सक्रिय जनभागीदारी का अवसर प्रदान करता है। नागरिक एक सुव्यवस्थित राष्ट्रीय मंच के माध्यम से मूल सामग्री तैयार, अपलोड और साझा कर सकते हैं। माईवेव्स लघु वीडियो, वर्टिकल वीडियो और कडि़यों में बनी धारावाहिक सामग्री को समर्थन प्रदान करता है। इसका बहुभाषी इंटरफेस रचनाकारों को भारतीय भाषाओं में कहानियां बताने में सहायता कर सकता है। यह क्रिएट इन इंडिया चैलेंज सहित राष्ट्रीय कार्यक्रमों में प्रतिभागिता को भी समर्थन प्रदान करता है।

यह मंच स्थापित मीडिया नेटवर्क से बाहर के उभरते रचनाकारों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। यह क्षेत्रीय कहानियों, स्थानीय प्रतिभाओं और सामुदायिक अनुभवों को दर्शकों की एक बड़ी संख्‍या तक पहुंचा सकता है। इस प्रकार, माईवेव्स नागरिकों की भागीदारी और भारत की बढ़ती रचनाकार अर्थव्यवस्था, दोनों को सुदृढ़ करता है।

माईवेव्स नागरिकों को केवल दर्शकों से आगे बढ़ाकर भारत की डिजिटल कहानी कहने की यात्रा में सक्रिय भागीदार बनाता है।

जॅम्स ऑफ इंडिया: माईवेव्स की पहल

जॅम्स ऑफ इंडिया चैलेंज यह दर्शाता है कि माईवेव्स देशभर के रचनाकारों को किस प्रकार सहयोग प्रदान कर सकता है। इसके प्रायोगिक चरण का शुभारंभ 21 जुलाई 2026 को छह प्रायोगिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया गया। रचनाकार वेव्स ओटीटी के माईवेव्स खंड के माध्यम से एक से तीन मिनट की मूल वीडियो प्रस्तुत कर सकते थे। प्रायोगिक चरण के लिए प्रस्तुतियां 1 से 31 अगस्त 2026 तक स्वीकार की गईं।

इस चुनौती में नागरिकों को अपने जिलों के बारे में कहानियां बताने के लिए आमंत्रित किया जाता है। विषयों में शामिल हैं:

  • संस्कृति, विरासत और ऐतिहासिक स्थल
  • पर्यटन, प्रकृति और कम ज्ञात पर्यटन स्थल
  • लोक परंपराएं, त्योहार और प्रदर्शन कलाएं
  • हस्तशिल्प, हथकरघा और क्षेत्रीय व्यंजन
  • स्थानीय व्यक्तित्व, नवाचार और उपलब्धियां

इस पहल में प्रसार भारती, माई भारत तथा राज्य और जिला प्रशासन शामिल हैं। सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थान रचनाकारों की भागीदारी और सामग्री के विकास में सहयोग करते हैं। इसके अलावा, यूट्यूब और मेटा भी अपने रचनाकार समुदायों के माध्यम से जनसंपर्क गतिविधियों में सहयोग कर रहे हैं।

इस कार्यक्रम के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विस्‍तृत होने की उम्मीद है। इसका व्यापक उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्यरत डिजिटल रचनाकारों का देशव्यापी नेटवर्क तैयार करना है। इससे भारत की विविध स्थानीय पहचानों का एक डिजिटल संग्रह भी तैयार किया जा सकता है।

सामग्री, रचनाकारों और सृजनात्मक अर्थव्यवस्था को जोड़ना

भारत का डिजिटल मीडिया बदलाव केवल सामग्री को ऑनलाइन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। यह पहुंच का विस्तार करने, भागीदारी को प्रोत्साहित करने और प्रतिभाओं के लिए अवसर सृजित करने से भी जुड़ा है।

प्रत्येक पहल भारत की सृजनात्मक यात्रा के एक अलग पहलू पर केंद्रित है। वेव्स ओटीटी  ब्रॉडकास्टिंग आर्काइव्‍स को संरक्षित करता है और उन्हें नए दर्शकों के लिए उपलब्ध कराता है। इसकी बहुभाषी सामग्री विभिन्न क्षेत्रों और उपकरणों पर सूचना, शिक्षा और मनोरंजन को सुलभ बनाती है।

माईवेव्स नागरिकों को अपनी आवाज देने के माध्यम से इस पहुंच को और आगे बढ़ाता है। यह क्षेत्रीय रचनाकारों को स्थानीय संस्कृतियों, परंपराओं, स्थानों और उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण करने में सक्षम बनाता है। जो कहानियां कभी स्थानीय समुदायों तक ही सीमित थीं, अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है।

व्यापक वेव्स पारितंत्र
वर्ल्‍ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेन्‍मेंट समिट (वेव्स) मीडिया और मनोरंजन के लिए भारत का वैश्विक मंच है। इसका पहला संस्करण 1 से 4 मई 2025 तक मुंबई में आयोजित किया गया, जिसमें रचनाकारों, व्यवसायों, निवेशकों, नीतिनिर्माताओं और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अग्रणी लोगों को एक साथ लाया गया। इसमें ब्रॉडकास्‍टिंग और इन्‍फोटेन्‍मेंट , एवीजीसी-एक्सआर, डिजिटल मीडिया और फिल्मों को शामिल किया गया।वेव्स 2025 एक नजर में100+ देश | 10,000+ प्रतिनिधि | 1,000 रचनाकार | 300+ कंपनियां | 350+ स्टार्ट-अप | एक लाख से अधिक प्रतिभागीप्रमुख मंचग्लोबल मीडिया संवाद ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाया, जबकि क्रिएटोस्फियर और क्रिएट इन इंडिया चैलेंजेस ने सृजनात्मक प्रतिभाओं की पहचान की और उन्हें प्रदर्शित किया। वेव्स बाजार ने परियोजनाओं को खरीदारों और निवेशकों से जोड़ा, जबकि वेवएक्स ने मेंटरशिप, इनक्यूबेशन और निवेश के अवसरों के माध्यम से मीडिया-टेक स्टार्ट-अप को सहायता प्रदान की। भारत मंडप और ज्ञान सत्रों ने भारत की कहानी कहने की परंपराओं तथा उभरती क्षमताओं को प्रस्तुत किया।प्रमुख परिणामवेव्स घोषणा-पत्र को 77 देशों द्वारा अपनाया गया।क्रिएट इन इंडिया चैलेंजेस में 60 से अधिक देशों से लगभग एक लाख पंजीकरण हुए, जिनमें से 750 से अधिक फाइनलिस्ट और 150 से अधिक पुरस्कार विजेता रहे।वेव्स बाजार ने 3,000 से अधिक बैठकों के माध्यम से 1,328 करोड़ रुपये के कारोबारी लेनदेन किए।व्यूइंग रूम में आठ देशों की 100 फिल्में प्रदर्शित की गईं, जबकि 30 से अधिक स्टार्ट-अप ने वेवएक्स के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किए।वेव्स अपने रचनाकार, व्यवसाय और स्टार्ट-अप मंचों के माध्यम से शिखर सम्मेलन के बाद भी निरंतर आगे बढ़ रहा है। ये पहलें पूरे वर्ष प्रतिभाओं को बाजारों, निवेश और वैश्विक अवसरों से जोड़ती हैं।

वेव्स शिखर सम्मेलन ने इन प्रयासों को वैश्विक सृजनात्मक उद्योग पारितंत्र से जोड़ा है, जिससे रचनाकारों का व्यवसायों, निवेशकों, नीतिनिर्माताओं और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अग्रणी लोगों के साथ संपर्क स्थापित हुआ है। अपने मार्केटप्लेस, रचनाकार चुनौतियों और स्टार्ट-अप मंचों के माध्यम से, यह प्रतिभाओं को पेशेवर नेटवर्क, दर्शकों और वैश्विक अवसरों तक पहुंच बनाने के रास्ते प्रदान करता है। इन पहलों की ताकत इनके आपसी जुड़ाव में निहित है। आर्काइव्‍स भारत की सांस्कृतिक स्मृति को संरक्षित करते हैं, क्षेत्रीय मंच विविध कहानियों को व्यापक पहुंच प्रदान करते हैं और नई प्रतिभाओं को सृजन एवं नवाचार के अवसर दिए जाते हैं। ये सभी मिलकर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उसके विकसित होते सृजनात्मक भविष्य से जोड़ते हैं, जिससे सार्वजनिक प्रसारण अधिक सुलभ और सामग्री निर्माण अधिक समावेशी बनता है।

मौजूदा कथाओं को संरक्षित करने के साथ-साथ नई आवाजों को अवसर प्रदान करके, ये पहल वैश्विक मीडिया और मनोरंजन परिदृश्य में भारत की बढ़ती उपस्थिति में योगदान दे रही हैं। ये ऐसी सृजनात्मक अर्थव्यवस्था को आकार देने में मदद कर रही हैं, जो स्थानीय सांस्कृतिक पहचानों में निहित है, राष्ट्रीय मंचों के माध्यम से जुड़ी हुई है और वैश्विक मंच पर लगातार अधिक दिखाई दे रही है।

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