- घरेलू स्तर पर सबसे ज़्यादा यात्राएं सामाजिक कारणों से होती हैं।
- बिजनेस ट्रिप्स में सबसे अधिक खर्च दर्ज किया गया है।
- तीर्थयात्रा और धार्मिक उद्देश्य एक प्रमुख कारण के रूप में उभरकर सामने आए हैं।
| संक्षिप्त विवरण :पिछले 365 दिनों के दौरान पूरी की गई प्रत्येक 100 ओवरनाइट यात्राओं (रात भर बाहर रहने वाली यात्राओं) में से लगभग 48 यात्राएं ‘तीर्थयात्रा और धार्मिक’ उद्देश्य से की गईं, जिसके बाद 30 यात्राएं ‘स्वास्थ्य और चिकित्सा’ उद्देश्य से की गईं।पिछले 30 दिनों के दौरान पूरी की गई प्रत्येक 100 ओवरनाइट यात्राओं में से औसतन 89 यात्राएं ‘सामाजिक’ उद्देश्य से की गईं।पिछले 30 दिनों के दौरान ओवरनाइट यात्राओं में परिवारों द्वारा प्रति यात्रा सबसे अधिक औसत खर्च बिजनेस ट्रिप्स (काम के सिलसिले में की गई यात्राओं) पर दर्ज किया गया, जो ₹5,949 था।परिवारों द्वारा उसी दिन (सेम-डे) की जाने वाली यात्राओं में ‘सोशल’ (33%) और ‘शॉपिंग’ (26%) सबसे अधिक बार की जाने वाली दो यात्राएं थीं, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शॉपिंग का खर्च हिस्सा सबसे अधिक रहा। |
A. प्रस्तावना
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा आयोजित घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण (डीटीईएस), मुख्य रूप से घरेलू ओवरनाइट यात्राओं के विवरण जैसे यात्रा की अवधि, परिवहन का साधन, ठहरने का प्रकार और यात्रा व्यय आदि को दर्ज करता है। इसके अतिरिक्त, घरेलू एक दिवसीय (सेम-डे) यात्राओं और उन पर हुए व्यय के बारे में भी कुछ जानकारी एकत्र की जाती है।
वर्तमान सर्वेक्षण जुलाई 2025 से जून 2026 के दौरान एनएसएस के 80वें दौर के एक भाग के रूप में आयोजित किया गया था। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने ‘भारत में घरेलू पर्यटन’ शीर्षक से एक रिपोर्ट के माध्यम से इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष जारी किए हैं।
इस सर्वेक्षण के आंकड़े निम्नलिखित के लिए एकत्र किए गए थे: (i) पिछले 365 दिनों के दौरान पूरी की गई घरेलू ओवरनाइट यात्राएं, जिनके मुख्य उद्देश्य छुट्टी मनाना, विश्राम और मनोरंजन; तीर्थयात्रा और धार्मिक; स्वास्थ्य और चिकित्सा; तथा खरीदारी थे, (ii) पिछले 30 दिनों के दौरान पूरी की गई घरेलू ओवरनाइट यात्राएं, जिनके मुख्य उद्देश्य व्यवसाय, सामाजिक, शिक्षा और प्रशिक्षण तथा अन्य थे, और (iii) पिछले 30 दिनों के दौरान पूरी की गई सेम-डे यात्राएं।
सर्वेक्षण के दायरे, सैंपल डिजाइन आदि के संदर्भ में सर्वेक्षण का एक संक्षिप्त विवरण, पारिभाषिक शब्दावली के साथ एंडनोट में प्रदान किया गया है।
B. मुख्य निष्कर्ष
B1. पिछले 365 दिनों के दौरान पूरी की गई घरेलू ओवरनाइट यात्राएं, जिनके मुख्य उद्देश्य छुट्टी मनाना, विश्राम और मनोरंजन; तीर्थयात्रा और धार्मिक यात्रा; स्वास्थ्य और चिकित्सा; तथा खरीदारी करना था:
- कम से कम एक रात बिताने वाली (ओवरनाइट) यात्रा की रिपोर्ट करने वाले प्रति 100 परिवारों (पर्यटक परिवार) द्वारा पिछले 365 दिनों के दौरान ओवरनाइट यात्राओं की संख्या – प्रति 100 ग्रामीण पर्यटक परिवारों में 127 (2014-15 में प्रति 100 ग्रामीण पर्यटक परिवारों में 118) और प्रति 100 शहरी पर्यटक परिवारों में 132 (2014-15 में प्रति 100 शहरी पर्यटक परिवारों में 121) थी।
- दोनों क्षेत्रों (ग्रामीण और शहरी) द्वारा सबसे अधिक यात्राएं ‘तीर्थयात्रा और धार्मिक‘ उद्देश्य (48%) के लिए दर्ज की गईं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में ओवरनाइट यात्राओं में दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा ‘स्वास्थ्य और चिकित्सा’ उद्देश्यों (38.4%) का था, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह ‘छुट्टी मनाना, विश्राम और मनोरंजन’ (36.4%) का था।
- औसत यात्रा साइज़ प्रति यात्रा 2.03 ओवरनाइट आगंतुक दर्ज किया गया। लगभग 80 प्रतिशत आगंतुकों ने अपनी संबंधित ओवरनाइट ट्रिप के दौरान 5 दिन या उससे कम समय रुकना पसंद किया।
- पिछले 365 दिनों के दौरान छुट्टी मनाने, विश्राम और मनोरंजन के उद्देश्य से की गई घरेलू ओवरनाइट यात्राओं के लिए मई और अक्टूबर पीक महीने रहे।
- ग्रामीण परिवारों के लिए, बस यात्रा का प्रमुख साधन थी, जिसकी आगंतुक-यात्राओं में 32% हिस्सेदारी थी, जबकि शहरी परिवारों द्वारा ऐसी यात्राओं के लिए ट्रेन (35%) सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला साधन था।
- ओवरनाइट आगंतुकों में, होटल और गेस्ट हाउस ठहरने के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प थे, जिनकी आगंतुक-यात्राओं में 36% हिस्सेदारी थी। ग्रामीण क्षेत्रों में, अन्य गैर-व्यावसायिक प्रवास की सबसे बड़ी हिस्सेदारी (28%) रही, जिसमें अपने स्वयं के वेकेशन होम में रुकना, नियोक्ताओं द्वारा प्रदान किया गया अस्थायी आवास, धार्मिक या मिशनरी संगठनों द्वारा नि:शुल्क प्रदान किया गया आवास आदि शामिल थे।
- राज्य के भीतर और अन्य राज्यों से आने वाले दोनों प्रकार के आगंतुकों को मिलाकर, उत्तर प्रदेश की कुल आगंतुक-यात्राओं में सबसे अधिक हिस्सेदारी (15.7%) रही, जिसके बाद तमिलनाडु (13.4%) और राजस्थान (8.0%) का स्थान रहा।
- संदर्भ अवधि के दौरान पूरी की गई सभी यात्राओं में ‘स्वास्थ्य और चिकित्सा’ यात्राओं पर ग्रामीण (₹29,454) और शहरी (₹41,649) दोनों क्षेत्रों में सबसे अधिक खर्च (पैकेज और नॉन-पैकेज दोनों तरह के खर्च को मिलाकर) हुआ।
- ‘छुट्टी मनाना, विश्राम और मनोरंजन’ के मुख्य उद्देश्य से की गई ओवरनाइट यात्राओं के लिए व्यय का सबसे अधिक हिस्सा ट्रांसपोर्ट (यातायात) पर दर्ज किया गया था।

B2. पिछले 30 दिनों के दौरान पूरी की गई ओवरनाइट यात्राएं, जिनके मुख्य उद्देश्य व्यवसाय, सामाजिक, शिक्षा और प्रशिक्षण तथा अन्य थे:
- कम से कम एक रात बिताने वाली (ओवरनाइट) यात्रा की रिपोर्ट करने वाले प्रति 100 परिवारों (पर्यटक परिवार) द्वारा पिछले 30 दिनों के दौरान ओवरनाइट यात्राओं की संख्या – प्रति 100 ग्रामीण पर्यटक परिवारों में 113 और प्रति 100 शहरी पर्यटक परिवारों में 111 थी।
- मुख्य उद्देश्य ‘सामाजिक’ के लिए की गई यात्राओं की ऐसी सभी यात्राओं में सबसे बड़ी हिस्सेदारी (89%) रही।
- औसत यात्रा आकार प्रति यात्रा 1.95 ओवरनाइट आगंतुक दर्ज किया गया, जबकि लगभग 45% आगंतुक-यात्राओं के लिए औसत यात्रा अवधि 2-3 दिन थी।
- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बस यात्रा का सबसे पसंदीदा साधन रही, जिसकी आगंतुक-यात्राओं में क्रमशः 48% और 44% हिस्सेदारी थी।
- ग्रामीण और शहरी दोनों प्रकार के परिवारों के लिए, रिश्तेदारों और दोस्तों का घर रुकने का मुख्य स्थान रहा।
- राज्य के भीतर और अन्य राज्यों से आने वाले दोनों प्रकार के आगंतुकों को मिलाकर, उत्तर प्रदेश ने ऐसी यात्राओं के मुख्य गंतव्य राज्य के रूप में सर्वाधिक आगंतुक-यात्राओं (15.5%) का हिस्सा दर्ज किया, जिसके बाद बिहार (10.5%) और तमिलनाडु (9.6%) का स्थान रहा।
- पिछले 30 दिनों के दौरान पूरी की गई यात्राओं के लिए, ग्रामीण (₹5,179) और शहरी (₹6,934) दोनों परिवारों ने व्यवसाय के मुख्य उद्देश्य से की गई ओवरनाइट यात्राओं पर सबसे अधिक खर्च किया।
B3. पिछले 30 दिनों के दौरान पूरी की गई एक-दिवसीय (सेम-डे) यात्राएं:
- ग्रामीण क्षेत्रों में, पिछले 30 दिनों के दौरान 65.1% (2014-15 में 57.1%) परिवारों ने और शहरी क्षेत्रों में 46.2% (2014-15 में 40.6%) परिवारों ने कम से कम एक एक-दिवसीय (सेम-डे) यात्रा की।
- कम से कम एक एक-दिवसीय (सेम-डे) यात्रा की रिपोर्ट करने वाले प्रति 100 परिवारों (पर्यटक परिवार) द्वारा पिछले 30 दिनों के दौरान यात्राओं की संख्या – प्रति 100 ग्रामीण पर्यटक परिवारों में 185 और प्रति 100 शहरी पर्यटक परिवारों में 156 थी।
- मुख्य उद्देश्यों ‘सामाजिक (ग्रामीण-32%, शहरी-37%)’ और ‘खरीदारी (ग्रामीण-29%, शहरी-17%)’ के लिए की गई एक-दिवसीय (सेम-डे) यात्राएं ग्रामीण और शहरी दोनों परिवारों द्वारा सबसे अधिक बार की जाने वाली दो यात्राएं थीं।
- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सबसे अधिक खर्च ‘शॉपिंग’ के मुख्य उद्देश्य से की गई एक-दिवसीय (सेम-डे) यात्राओं पर देखा गया, जिसके बाद ‘स्वास्थ्य और चिकित्सा’ यात्राओं का स्थान रहा।
- ग्रामीण (51%) और शहरी (41%) दोनों परिवारों द्वारा की गई सभी एक-दिवसीय (सेम-डे) यात्राओं में खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा शॉपिंग मद पर दर्ज किया गया।
एंड नोट: घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण के जियोग्राफिकल कवरेज, सैंपल साइज, सैंपल डिजाइन और संदर्भ अवधियों के बारे में एक संक्षिप्त विवरण।
A. जियोग्राफिकल कवरेज
इस सर्वेक्षण में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उन गांवों को छोड़कर, जहाँ पूरे वर्ष पहुँचना कठिन रहता है, पूरे भारत को शामिल किया गया।
B. सैंपल साइज
इस सर्वेक्षण के लिए अखिल भारतीय स्तर पर कुल 24,778 एफएसयू का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें 14,371 ग्रामीण और 10,407 शहरी एफएसयू शामिल थीं। सर्वेक्षण किए गए परिवारों की कुल संख्या 2,46,113 (ग्रामीण क्षेत्रों में 1,42,603 और शहरी क्षेत्रों में 1,03,510) थी।
C. सैंपल डिजाइन
इस सर्वेक्षण के लिए मल्टी-स्टेज स्ट्रैटिफाइड सैंपलिंग डिजाइन का उपयोग किया गया था, जिसमें गांवों/शहरी ब्लॉकों या इनकी सब-यूनिट्स को फर्स्ट स्टेज यूनिट्स के रूप में और परिवारों को अल्टीमेट स्टेज यूनिट्स के रूप में माना गया था। एफएसयू और यूएसयू दोनों का चयन सिंपल रैंडम सैंपलिंग विदाउट रिप्लेसमेंट (एसआरएसडब्ल्यूओआर) विधि द्वारा किया गया था।
D. डेटा संग्रह तंत्र
एनएसएस के 80वें दौर के घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण के आंकड़े अनुसूची 21.1 के माध्यम से जुटाए गए थे। इस सर्वेक्षण के आंकड़े ‘कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यूइंग’ (सीएपीआई) तकनीक के जरिए टैबलेट का उपयोग करके एकत्रित किए गए थे।
E. इस्तेमाल किए गए शब्दों की शब्दावली:
| ओवरनाइट यात्रा | यह परिवार के एक या अधिक सदस्यों द्वारा अपने सामान्य निवास स्थान (घर) से बाहर किसी मुख्य जगह की ऐसी यात्रा (आना-जाना) को दर्शाता है, जो दो लगातार दिनों में कम से कम 12 घंटे की हो (जिसमें रात 12:00 से सुबह 5:00 बजे का समय शामिल हो) और अधिकतम 180 दिनों तक चले। इस दौरान रुकने का स्थान चाहे कोई भी रहा हो, व्यक्ति अंत में वापस अपने उसी घर लौटता है। |
| घरेलु यात्री | विज़िटर (या आगंतुक) देश में रहने वाला वह व्यक्ति (परिवार का सदस्य) है, जिसने कोई रात्रिप्रवास वाली (ओवरनाइट) या एक-दिवसीय (सेम-डे) यात्रा की हो। |
| मुख्य उद्देश्य | किसी यात्रा का मुख्य उद्देश्य वह वजह होती है जिसके बिना परिवार का कोई भी सदस्य उस यात्रा पर न जाता। यह मुख्य उद्देश्य यात्रा में शामिल सभी सदस्यों के लिए एक ही होता है। |
| एक-दिवसीय यात्रा (या ‘सेम-डे ट्रिप’) | एक-दिवसीय यात्रा (सेम-डे ट्रिप) वह यात्रा है जिसमें रात में ठहरना शामिल नहीं होता, लेकिन बाकी सभी शर्तें रात्रिप्रवास वाली यात्राओं जैसी ही होती हैं—चाहे इसमें कितने भी घंटे लगे हों। ऐसी यात्रा या तो एक ही दिन में पूरी हो जाती है या फिर दो लगातार दिनों तक चल सकती है। |
F. विस्तृत सर्वेक्षण रिपोर्ट:
इस सर्वेक्षण के उद्देश्यों, कार्यक्षेत्र, कॉन्सेप्ट और परिभाषाओं, कार्यप्रणाली और प्रमुख निष्कर्षों की विस्तृत जानकारी के लिए, एनएसओ, एमओएसपीआई द्वारा प्रकाशित एनएसएस रिपोर्ट संख्या 597 ‘डोमेस्टिक टूरिज्म इन इंडिया’ को देखा जा सकता है, जो मंत्रालय की वेबसाइट (https://www.mospi.gov.in) पर उपलब्ध है।
| एमओएसपीआई के प्रकाशनों/रिपोर्ट्स को देखने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करें | ![]() |

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