प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भरता और दूसरों की सेवा के महत्व पर बल देते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया।
“स्वाधीनैव समृद्धिर्जनोपजीव्यत्वमुच्छ्रयश्छाया।
सत्पुंसो मरुभुरिव जीवनमात्रं समाशास्यम्॥”
यह इस बात का संदेश देता है कि सच्ची समृद्धि आत्मनिर्भरता में निहित है, जबकि सच्ची उन्नति दूसरों के लिए जीविका और समर्थन का स्रोत बनने में निहित है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया:
“स्वाधीनैव समृद्धिर्जनोपजीव्यत्वमुच्छ्रयश्छाया।
सत्पुंसो मरुभुरिव जीवनमात्रं समाशास्यम्॥”
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