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नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास ने सीसीआरएएस-एनआईआईएमएच हैदराबाद का दौरा किया


प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास ने भारत की चिकित्सा विरासत के लिए वैश्विक मानकों एवं अधिक पहचान दिलाने का आह्वान किया

भारत सरकार के नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास ने आयुष मंत्रालय के अंतर्गत हैदराबाद स्थित केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद- राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (सीसीआरएएस-एनआईआईएमएच) का दौरा किया। उनके साथ नीति आयोग के ओएसडी (स्वास्थ्य) डॉ. शोभित कुमार और नीति आयोग की यंग प्रोफेशनल डॉ. जानवी प्रजापति भी मौजूद थीं।

डॉ. एन. श्रीकांत, उप महानिदेशक, केंद्रीय आयुर्वेदिक अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस), नई दिल्ली ने प्रोफेसर श्रीनिवास का स्वागत किया और उन्हें संस्थान की पहलों, डिजिटल पोर्टल, संग्रह एवं पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में ऐतिहासिक अनुसंधान की जानकारी दी। उन्होंने भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत का दस्तावेजीकरण एवं संरक्षण में एनआईआईएमएच की रणनीतिक भूमिका पर भी बल दिया। डॉ. गोली पेंचला प्रसाद, प्रभारी सहायक निदेशक, एनआईआईएमएच ने संस्थान की गतिविधियों, प्रमुख सफलताओं एवं उपलब्धियों का संक्षिप्त परिचय दिया।

अपनी यात्रा के दौरान, प्रोफेसर श्रीनिवास ने संग्रहालय, पुस्तकालय एवं अनुसंधान विभागों का दौरा किया और अधिकारियों एवं परियोजना कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने एसएएचआई परियोजना प्रोजेक्ट के तहत अगल्या और रानी रुद्रमादेवी शिलालेख पर संस्थान द्वारा निर्मित डॉक्यूमेंट्री भी देखी।

प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास ने अपने संबोधन में दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण करने, ऐतिहासिक वैज्ञानिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और आधुनिक सूचना प्रणालियों एवं शोध पोर्टलों के माध्यम से भारत की चिकित्सा विरासत के संरक्षण को मजबूत करने की दिशा सीसीआरएएस-एनआईआईएमएच के प्रयासों की सराहना की।

प्रोफ़ेसर श्रीनिवास ने संग्रहालय के संरक्षण एवं रखरखाव के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं एवं मानकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत के संरक्षण के लिए क्षमता बढ़ाने और कुशल कार्यबल तैयार करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण कोर्स, सर्टिफ़िकेट कोर्स और मिलकर चलाए जाने वाले संयुक्त पोस्ट-डॉक्टरल कार्यक्रम शुरू करने के महत्व पर भी बल दिया।

प्रोफ़ेसर श्रीनिवास ने एनआईआईएमएच को चिकित्सा एवं उससे जुड़े क्षेत्रों के छात्रों और पेशेवरों के लिए शैक्षिक पर्यटन के केंद्र के रूप में स्थापित करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने संस्थान की पहचान और वैश्विक स्तर पर उसकी ख्याति बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एनआईआईएमएच को छात्रों एवं संकाय से जुड़ने के लिए राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआईएसएम) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) जैसी नियामक संस्थाओं के साथ सहयोग करना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आईआईटी और अन्य राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में लघु संग्रहालय विकसित किए जाएं ताकि भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत का व्यापक प्रसार हो सके।

प्रोफ़ेसर श्रीनिवास ने भारत की समृद्ध चिकित्सा विरासत को संरक्षित करने की दिशा में संस्थान के प्रयासों की सराहना की और इसके क्रियाकलापों को और मज़बूत करने के लिए समर्थन का भरोसा दिलाया। विज़िटर्स बुक में, उन्होंने एनआईआईएमएच को भारत के समृद्ध चिकित्सा इतिहास को संजोने वाला एक “मंदिर” बताया और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत की सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति इसके नेतृत्व और कर्मचारियों के समर्पण की प्रशंसा की।

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