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केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी के साथ सी-डॉट के 43वें स्थापना दिवस समारोह की शोभा बढ़ाई


श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने सी-डॉट के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवा अधिकारियों की सराहना की; आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी नवाचार और अगली पीढ़ी की दूरसंचार प्रौद्योगिकियों पर बल दिया

केंद्रीय संचार और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया; संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी और दूरसंचार विभाग के सचिव तथा डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन के चेयरमैन श्री अमित अग्रवाल ने अन्य वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और गणमान्य अतिथियों के साथ ‘सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलीमैटिक्स’ (सी-डॉट) के 43वें स्थापना दिवस समारोह में भाग लिया।

भारत सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (डीओटी) के प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने आज डॉ. अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र, नई दिल्ली में अपना 43वां स्थापना दिवस मनाया। यह अवसर 1984 में अपनी स्थापना के बाद से स्वदेशी दूरसंचार तकनीकों के विकास में सी-डॉट के 42 वर्षों के योगदान का प्रतीक है।

स्थापना दिवस प्रदर्शनी का उद्घाटन श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी द्वारा किया गया। प्रदर्शनी में प्रदर्शित उत्पादों ने दूरसंचार के विभिन्न क्षेत्रों में सी-डॉट की स्वदेशी तकनीकों और समाधानों को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया। इसके बाद गणमान्य व्यक्तियों को विभिन्न स्वदेशी दूरसंचार तकनीकों और समाधानों के बारे में जानकारी दी गई।

मंत्रियों ने ‘क्वांटम प्रोडक्ट्स वॉल’ का भी अनावरण किया, जिसमें सी-डॉट की क्वांटम श्रृंखला के उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। इसमें उभरते क्वांटम युग में भारत के संचार नेटवर्क की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए विकसित स्वदेशी क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (क्यूकेडी) और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (पीक्यूसी) समाधान शामिल हैं।

इसके बाद आयोजित उद्घाटन सत्र के दौरान, मंत्रियों और वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों द्वारा ‘क्वांटम प्रोडक्ट बुकलेट’ (सी-डॉट के स्वदेशी क्वांटम समाधानों का एक संकलन) भी लॉन्च की गई। यह पुस्तिका क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (क्यूकेडी) और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (पीक्यूसी) में सी-डॉट के कार्यों को प्रस्तुत करती है, जो सुरक्षित, लचीली और भविष्य के लिए तैयार संचार प्रौद्योगिकियों को विकसित करने की दिशा में केंद्र के प्रयासों को उजागर करती है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा, “एक ऐसे संगठन के 43वें स्थापना दिवस के अवसर पर उपस्थित होना मेरे लिए वास्तव में बहुत सम्मान की बात है जो देश के हर एक नागरिक के जीवन में गहराई से बसा हुआ है और जो इस संस्थान के डीएनए का हिस्सा है। मैं हमेशा कहता हूं कि हम 4जी में दुनिया से पीछे थे, 5जी में दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चले, लेकिन सी-डॉट जैसे संगठनों के कारण ही आज भारत सरकार और हर गर्वित भारतीय यह कह सकता है कि हम 6जी में दुनिया का नेतृत्व करेंगे।”

श्री सिंधिया ने यह भी कहा, “आज सी-डॉट के 43वें स्थापना दिवस के अवसर पर, मैं इसे इस सभागार में बैठे अपने युवा साथियों को समर्पित करना चाहूंगा। आप ही हैं जो नवाचार, आविष्कार और अदम्य साहस तथा क्षमता के साथ सीमाओं को पार करने की ललक के प्रतीक हैं। यहां मौजूद इस बड़े परिवार में से 50 प्रतिशत से अधिक लोग 30 वर्ष से कम आयु के हैं और यह वह डेमोग्राफिक विस्तार और डेमोग्राफिक डिविडेंड है जिसका यह संगठन लाभ उठा रहा है।”

डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने कहा, “स्थापना के बाद से सी-डॉट के 43 वर्षों के लिए सभी प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को बधाई। सी-डॉट की विरासत, जैसा कि मैं इसका वर्णन करता हूं, भारतीय प्रतिभा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्र की सेवा कर रही है। सी-डॉट भारत के तकनीकी विश्वास का केंद्र है। आप जिस तरह का काम करते हैं, वह कई कंपनियों या सेवा संगठनों द्वारा किए जाने वाले काम जैसा नहीं है और मेरे विचार में, शायद यह दुनिया में सबसे बेहतरीन काम है जो कोई भी कर सकता है।”

स्थापना दिवस समारोह का आयोजन “बियॉन्ड कनेक्टिविटी: सिक्योर, ट्रस्टेड एंड इंटेलिजेंट कम्यूनिकेशन” विषय पर आधारित एक दिवसीय सम्मेलन के तहत किया गया। इसमें उभरती प्रौद्योगिकियों और बदलते संचार परिदृश्य पर विचार-विमर्श करने के लिए वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और शिक्षाविद एक साथ मंच पर आए।

इस तकनीकी सम्मेलन में दूरसंचार के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीन क्षेत्रों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए: साइबर सुरक्षा, 6जी संचार और क्वांटम सुरक्षित संचार। साइबर सुरक्षा सत्रों में आईआईटी जम्मू के निदेशक प्रोफेसर मनोज सिंह गौर और माइक्रोसॉफ्ट के भारत एवं दक्षिण एशिया के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी श्री मंदार कुलकर्णी शामिल हुए। 6जी सत्रों में आईआईएससी बेंगलुरु के प्रोफेसर चंद्र आर. मूर्ति, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर आर. डेविड कोइलपिल्लई और टीएसडीएसआई के महानिदेशक श्री ए.के. मित्तल ने भाग लिया। वहीं क्वांटम सुरक्षित संचार सत्रों में राष्ट्रीय क्वांटम मिशन की विशेषज्ञ समिति की सदस्य प्रोफेसर रूपमंजरी घोष, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी, यूएसए के ईसीई व एप्लाइड फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर तथा ईसीई विभाग के अंतरिम अध्यक्ष प्रोफेसर प्रेम कुमार और एनसीआईआईपीसी के उप महानिदेशक श्री आशीष कुमार मिश्रा ने अपने विचार रखे। इन सत्रों का समापन सी-डॉट के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार दलेला द्वारा साइबर सुरक्षा खंड और सी-डॉट के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. दिलीप कृष्णस्वामी द्वारा क्वांटम सिक्योर कम्युनिकेशन सेगमेंट के मुख्य निष्कर्षों एवं महत्वपूर्ण विचारों को साझा करने के साथ हुआ।

इस अवसर पर बोलते हुए, सी-डॉट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा, “पिछले 42 वर्षों में सी-डॉट की यात्रा राष्ट्र के लिए स्वदेशी तकनीकों को विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता से संचालित रही है। जैसे-जैसे दूरसंचार पारंपरिक कनेक्टिविटी से आगे बढ़ रहा है, हमारा ध्यान सुरक्षित, विश्वसनीय और इंटेलिजेंट कम्युनिकेशन सिस्टम की ओर केंद्रित हो रहा है। साइबर सुरक्षा, क्वांटम-सुरक्षित संचार, 6जी और अन्य उभरते क्षेत्रों में अपने काम के माध्यम से, सी-डॉट भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के विकास में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

वर्षों से, सी-डॉट ने भारत के टेलीकॉम सेक्टर में बदलाव लाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने ग्रामीण कनेक्टिविटी, भारतनेट, 4जी और 5जी प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, अगली पीढ़ी के नेटवर्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नेटवर्क प्रबंधन प्रणालियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया है। इसके अलावा, सी-डॉट 6जी और अन्य उभरते क्षेत्रों में भी खोजपूर्ण अनुसंधान कर रहा है, जो भारत को एक वैश्विक प्रौद्योगिकी अग्रज बनाने के दृष्टिकोण में अपना योगदान दे रहा है।

43वें स्थापना दिवस का यह समारोह स्वदेशी अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने तथा एक सुरक्षित, विश्वसनीय और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल संचार इकोसिस्टम के विकास में योगदान देने की सी-डॉट की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। अपने 43वें वर्ष में प्रवेश करते हुए, सी-डॉट ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण और भारत को अगली पीढ़ी की विश्वसनीय कनेक्टिविटी में एक ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित करने की आकांक्षा के अनुरूप 6जी, क्वांटम-सुरक्षित संचार और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में अपने अनुसंधान एवं विकास प्रयासों को जारी रखे हुए है।

अधिक जानकारी के लिए दूरसंचार विभाग (डीओटीके सोशल मीडिया हैंडल फॉलो करें: –X – https://x.com/DoT_IndiaInsta- https://www.instagram.com/department_of_telecom?igsh=MXUxbHFjd3llZTU0YQ==Fb – https://www.facebook.com/DoTIndiaYoutube: https://youtube.com/@departmentoftelecom?si=DALnhYkt89U5jAaa

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