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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने पहुंच और लाभ-साझाकरण (एबीएस) निधि से 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों, 3 केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर)-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, कर्नाटक को 2.82 करोड़ रुपये जारी किए

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने भारत के जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न होने वाले 2.82 करोड़ रुपये का पहुंच और लाभ-साझाकरण (एबीएस) तंत्र के तहत वितरण किया। इसमें से 2.80 करोड़ रुपये 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों (एसबीबी) और 3 केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों (यूटीबीसी) को जारी किए गए हैं जबकि 2.01 लाख रुपये भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर)-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (आईआईएचआर), कर्नाटक को जारी किए जा रहे हैं।

एनबीए को मेसर्स एडवांटा एंटरप्राइजेज लिमिटेड (पूर्व में मेसर्स यूपीएल लिमिटेड) से एबीएस के तहत 2.94 करोड़ रुपये प्राप्त हुए जिसका उपयोग फूलगोभी (ब्रासिका ओलेरासिया वेर. बोट्राइटिस ) की आठ संकर किस्मों, मिर्च ( कैप्सिकम एनम ) की पांच संकर किस्मों, भिंडी ( एबेलमोस्कस एस्कुलेंटस ) की पांच संकर किस्मों और टमाटर ( सोलनम लाइकोपर्सिकम ) की छह संकर किस्मों से जुड़े आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग के लिए किया जाएगा।

इस मामले में, जैविक संसाधनों तक किसी अन्य कंपनी के अधिग्रहण के माध्यम से पहुंच बनाई गई थी और किसानों, समुदायों या किसी एक पहचान योग्य भौगोलिक स्रोत जैसे लाभ प्राप्तकर्ताओं का पता नहीं लगाया जा सका। इससे पहले, एनबीए ने ऐसे मामलों में लाभ साझाकरण घटक को साझा करने/उपयोग करने के लिए एक उपयुक्त कार्यप्रणाली की सिफारिश करने हेतु एक विशेषज्ञ समिति (ईसी) का गठन किया था और ईसी की सिफारिश को बाद में प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित किया गया था। अनुमोदित कार्यप्रणाली के अनुसार, एनबीए ने 2.80 करोड़ रुपये वितरित किए। यह आवंटन विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संबंधित बागवानी फसलों की खेती को ध्यान में रखते हुए किया गया है। गुजरात, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश प्रमुख प्राप्तकर्ता राज्यों में से हैं जबकि सबसे बड़ा हिस्सा प्राप्त करने वाले दस राज्य इस प्रकार हैं:

क्र.सं.राज्यजारी राशि ( लाख रुपये में)
1गुजरात44.59
2पश्चिम बंगाल41.24
3मध्य प्रदेश32.73
4ओडिशा32.57
5बिहार30.86
6छत्तीसगढ16.54
7उत्तर प्रदेश12.66
8आंध्र प्रदेश10.51
9तमिलनाडु10.49
10महाराष्ट्र07.07
11अन्य (20 एसबीबी/यूटीबीसी)40.55

एसबीबी और यूटीबीसी को जारी की गई धनराशि का उपयोग जन जैव विविधता रजिस्टरों के प्रलेखन और अद्यतन, इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण, खराब हो चुके पारिस्थितिक तंत्रों के पुनर्स्थापन, जैव विविधता विरासत स्थलों को सुदृढ़ करने, जैव विविधता प्रबंधन समितियों के क्षमता विकास और सामुदायिक आजीविका संवर्धन सहित गतिविधियों के लिए किया जाना है, और इस राशि के प्राप्ति के एक वर्ष के भीतर उपयोग प्रमाण पत्र और व्यय विवरण प्रस्तुत करना होगा।

इसके अलावा, एनबीए को सुमितोमो केमिकल इंडिया लिमिटेड, मुंबई (पूर्व में एक्सेल क्रॉप केयर) से दो सूक्ष्मजीव उपभेदों, स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस 1% डब्ल्यूपी (स्ट्रेन आईआईएचआर-पीएफ-2) और ट्राइकोडर्मा हारज़ियानम 1% डब्ल्यूपी (स्ट्रेन आईआईएचआर-टीएच-2) तक पहुंच के लिए एबीएस राशि के रूप में 7.15 लाख रुपये प्राप्त हुए। ये उपभेद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् – भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर- आईआईएचआर), कर्नाटक से अनुसंधान और वाणिज्यिक उपयोग के लिए प्राप्त हुए थे। चूंकि इस मामले में जैविक संसाधन सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान से प्राप्त किए गए थे, इसलिए एबीएस राशि का 30% यानी 2.01 लाख रुपये संबंधित संस्थान आईसीएआर-आईआईएचआर को नियमों के अनुसार वितरित किया जा रहा है और शेष राशि का उपयोग एनबीए द्वारा जैविक विविधता अधिनियम की धारा 27 के अनुसार किया जाएगा।

संस्था को एक वर्ष के भीतर भंडारों के रखरखाव, अनुसंधान और जैव विविधता सर्वेक्षण कार्य, वर्गीकरण और संरक्षण में क्षमता विकास, और जैविक संसाधनों और उनके वन्य संबंधी जीवों के इन-सीटू और एक्स- सीटू संरक्षण सहित कार्यों के लिए धनराशि का उपयोग करना आवश्यक है। यह वितरण जैविक विविधता अधिनियम, 2002 और इसके संबंधित नियामक ढांचे के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने के लिए एनबीए के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि भारत के जैविक संसाधनों के वाणिज्यिक उपयोग से प्राप्त लाभों को जैव विविधता संरक्षण, सतत उपयोग और किसानों, स्थानीय समुदायों और जैविक विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग से जुड़े अन्य लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए किया जाए।

एनबीए द्वारा अब तक जारी की गई एबीएस राशि कुल 185 करोड़ रुपये (यूएसडी 19.34 मिलियन) है। यह पहल जैव विविधता पर सम्मेलन (सीबीडी) और पहुंच एवं लाभ-साझाकरण पर नागोया प्रोटोकॉल, साथ ही कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा (केएमजीबीएफ) के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं में भी योगदान देती है, विशेष रूप से लक्ष्य 13 में, जो आनुवंशिक संसाधनों और आनुवंशिक संसाधनों पर डिजिटल अनुक्रम जानकारी के उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभों के निष्पक्ष और समान बंटवारे को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी उपायों का आह्वान करता है।

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