LIVE

जल शक्ति मंत्रालय ने सुजलाम भारत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के अंतर्गत डेटा साझा करने, अंतरसंचालनीयता और हितधारकों की पहुँच संबंधी नीति जारी की

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस), जल शक्ति मंत्रालय ने आज सुजलाम भारत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (डीपीर्आके अंतर्गत डेटा साझा करनेअंतरसंचालनीयता और हितधारक पहुँच संबंधी नीति जारी की। इस नीति के माध्यम से राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों, स्थानीय शासन संस्थाओं और अनुमोदित क्षेत्रीय हितधारकों के बीच ग्रामीण पेयजल संबंधी डेटा को साझा करने और उनके प्रबंधन के लिए एक सुरक्षित, सम्बद्ध (फेडरेटेड), अंतरसंचालनीय और जवाबदेह ढाँचा स्थापित किया गया है।

यह नीति भारत के ग्रामीण पेयजल क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे के निर्माण से आगे बढ़कर सुनिश्चित, जवाबदेह और सेवा-उन्मुख पेयजल आपूर्ति की दिशा में हुए महत्वपूर्ण विकास को दर्शाती है। इसमें बुनियादी ढाँचे के जीवन-चक्र प्रबंधन, जल स्रोतों की स्थिरता, सेवा की सुनिश्चितता, नागरिक-केन्द्रित जवाबदेही और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान किया गया है। यह नीति सुजलाम भारत डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के अंतर्गत डेटा साझा करने, अंतरसंचालनीयता और हितधारकों की पहुँच के लिए शासन संबंधी सिद्धांत भी स्थापित करती है। यह साझा पहचानकर्ताओं, मानकीकृत मेटाडेटा, अंतरसंचालनीय रजिस्ट्रियों और सुरक्षित डिजिटल सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा देती है, ताकि संस्थागत जवाबदेही, निजता और साइबर सुरक्षा को बनाए रखते हुए सूचनाओं का निर्बाध आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जा सके।

इस नीति का प्रमुख उद्देश्य पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस), राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों, ग्राम पंचायतों, सरकारी संगठनों और अधिकृत क्षेत्रीय हितधारकों के बीच सुव्यवस्थित एवं अंतरसंचालनीय डेटा के आदान-प्रदान को सक्षम बनाना है। यह ढाँचा ग्रामीण जल इकोसिस्टम में पंचायत-केन्द्रित शासन, नागरिक सहभागिता, शिकायत निवारण, सहभागी परिसंपत्ति निगरानी और सेवा संबंधी जवाबदेही को मजबूत करता है। अनुमोदित एवं उद्देश्य-आधारित पहुँच तंत्र के माध्यम से हितधारक संचालन एवं रखरखाव, जल गुणवत्ता निगरानी, बुनियादी ढाँचा प्रबंधन, पूर्वानुमानित रखरखाव, भू-स्थानिक नियोजन, डिजिटल ट्विन्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित विश्लेषण और निर्णय-सहायता प्रणालियों से संबंधित नवोन्मेषी समाधान विकसित कर सकते हैं।

डिजिटल इकोसिस्‍टम में विश्वास के महत्व को ध्यान में रखते हुए, नीति में निजता, व्यक्तिगत डेटा संरक्षण, साइबर सुरक्षा, डेटा वर्गीकरण, पहुँच संबंधी शासन और जनहित सुरक्षा उपायों से संबंधित मजबूत प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसमें डेटा तक पहुँच के लिए एक स्तरीय ढाँचा अपनाया गया है, ताकि संवेदनशील बुनियादी ढाँचे और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करते हुए सूचनाओं का सुरक्षित, जिम्मेदार और निर्धारित उद्देश्य तक सीमित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

यह नीति ग्रामीण जल उपयोगिता शासन के लिए सुजलाम भारत को दीर्घकालिक सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना के रूप में स्थापित करती है, जो पारदर्शिता, नवाचार, परिचालन दक्षता और सतत सेवा वितरण को बढ़ावा देगी। इस नीति के जारी होने के साथ विभाग ने ग्रामीण पेयजल शासन के लिए एक विश्वसनीय डिजिटल आधार तैयार करने तथा देशभर के ग्रामीण समुदायों के लिए भरोसेमंद, टिकाऊ और जवाबदेह जल सेवाओं की आपूर्ति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

Comments

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »