| प्रस्तावना |
वित्तीय समावेशन भारत के एकसमान विकास के दृष्टिकोण का केंद्रबिंदु है। बीते एक दशक में, भारत ने बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, क्रेडिट, बीमा, पेंशन और निवेश के अवसरों तक पहुंच का विस्तार किया है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक-केंद्रित सुधारों ने इस परिवर्तन को गति प्रदान की है। भारत ने सार्वभौमिक बैंक खाता स्वामित्व से आगे बढ़कर औपचारिक वित्तीय प्रणाली में सक्रिय भागीदारी की ओर कदम बढ़ाया है। इस बदलाव ने लाखों परिवारों, उद्यमियों और व्यवसायों का सशक्तिकरण किया है।
| भारत में वित्तीय समावेशन के प्रमुख संकेतक |
कई संकेतक पूरे भारत में वित्त की पहुंच, इंफ्रास्ट्रक्चर और भागीदारी के विस्तार में हुई महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाते हैं।

आरबीआई का वित्तीय समावेशन (एफआई) सूचकांक
आरबीआई का एफआई सूचकांक वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता, इस्तेमाल और गुणवत्ता के संदर्भ में वित्तीय समावेशन की सीमा को मापता है। यह देश भर में औपचारिक वित्तीय सेवाओं के विस्तार में हुई प्रगति का एक व्यापक संकेतक है। एफआई सूचकांक मार्च 2017 में 43.4 से बढ़कर मार्च 2026 में 70.0 हो गया, जो तीनों आयामों में व्यापक सुधार को दर्शाता है।
विश्व बैंक ग्लोबल फिंडेक्स
ग्लोबल फिंडेक्स डेटाबेस वित्तीय समावेशन पर डेटा का विश्व का अग्रणी स्रोत है। यह विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में वयस्कों की ओर से वित्तीय सेवाओं तक पहुंच और उनके इस्तेमाल का आकलन करता है। ग्लोबल फिंडेक्स 2025 भारत की वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित करता है। 2011 से खाता स्वामित्व 89% तक पहुंच गया, जो बीते दशक में औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच और सक्रिय खाता इस्तेमाल में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी को दर्शाता है।
बैंकिंग पहुंच नेटवर्क
बैंक शाखाएं भारत की औपचारिक बैंकिंग प्रणाली की आधारशिला बनी हुई हैं। ये पूरे देश में बचत, ऋण और अन्य वित्तीय सेवाएं प्रदान करती हैं। भारत में (17 जुलाई 2026) 1.81 लाख से अधिक बैंक शाखाएं हैं।
बैंकिंग सेवाएं शाखाओं, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) आउटलेट्स के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं। 6 मार्च 2026 तक, देश के 99.92% गांवों में 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग आउटलेट्स उपलब्ध हैं।
आईपीपीबी 1.65 लाख (17 जुलाई 2026) से अधिक डाकघरों के माध्यम से अंतिम छोर तक बैंकिंग सेवाओं को सुदृढ़ करता है। यह 5.57 लाख गांवों और कस्बों में फैले 11 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करता है।
बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स (बीसी) उन क्षेत्रों में घर-घर जाकर बैंकिंग सेवाएं प्रदान करते हैं, जहां बैंकिंग सुविधाएं न के बराबर हैं या कम हैं। भारत में (17 जुलाई 2026) 17.36 लाख से अधिक बीसी (बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स) घर-घर जाकर बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रहे थे।
| वित्तीय समावेशन के स्तंभ |
भारत का वित्तीय समावेशन तंत्र परस्पर जुड़े नीतिगत और संस्थागत स्तंभों पर आधारित है। ये स्तंभ औपचारिक वित्तीय प्रणाली में सार्वभौमिक पहुंच और सार्थक भागीदारी को प्रोत्साहन देते हैं।
| सार्वभौमिक बैंकिंग |
प्रधानमंत्री जन–धन योजना (पीएमजेडीवाई)
- पीएमजेडीवाई (2014) के अंतर्गत प्रत्येक बिना बैंक खाता वाले वयस्क को एक बुनियादी बचत बैंक खाता प्रदान किया जाता है, जिसमें न्यूनतम शेष राशि बनाए रखना अनिवार्य है।
- इसके अंतर्गत बचत, धन प्रेषण, ऋण, बीमा, पेंशन और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
- पीएमजेडीवाई खाताधारकों को एक रुपे डेबिट कार्ड और दुर्घटना बीमा कवर प्रदान किया जाता है। 28 अगस्त 2018 के बाद खोले गए खातों पर ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध है, जबकि 28 अगस्त 2018 से पहले खोले गए खातों पर ₹1 लाख का दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध है। पात्र खाताधारक आवश्यकता पड़ने पर अधिकतम ₹10,000 तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा का भी लाभ उठा सकते हैं।
- इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), अटल पेंशन योजना (एपीवाई) में नामांकन और मुद्रा लोन प्राप्त करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

जेएएम ट्रिनिटी
- जेएएम ट्रिनिटी जन धन खाता, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी को एकीकृत करके वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करती है।
- यह सरकारी लाभों के पारदर्शी और कुशल वितरण के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) को सक्षम बनाती है। डीबीटी से रिसाव (लीकेज) में कमी आती है, फर्जी लाभार्थियों को हटाया जाता है तथा कल्याणकारी योजनाओं के लाभ वितरण में बिचौलियों की भूमिका न्यूनतम हो जाती है।
- जेएएम ट्रिनिटी औपचारिक बैंकिंग तक पहुंच को मजबूत करती है और डिजिटल वित्तीय सेवाओं पर भरोसे को बढ़ावा देती है।
| कुल प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण | योजनाओं की संख्या | शामिल मंत्रालयों की संख्या |
| (10 अगस्त, 2026 तक) | ||
| ₹ 52,89,019 करोड़ | 320 | 56 |
| सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा |
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई)
- पीएमजेजेबीवाई (2015) एक वार्षिक नवीकरणीय जीवन बीमा योजना है, जो 18-50 वर्ष की आयु के लोगों को ₹2 लाख का जीवन बीमा कवर प्रदान करती है।
- यह योजना ₹436 के वार्षिक प्रीमियम पर उपलब्ध है, जो ग्राहक के बैंक खाते से अपने आप डेबिट हो जाता है।
- यह बीमित व्यक्ति की मृत्यु की स्थिति में परिवारों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है।
- यह योजना आकस्मिक मृत्यु के लिए तत्काल कवर और गैर-आकस्मिक मृत्यु के लिए 30 दिन की प्रतीक्षा अवधि प्रदान करती है।
| कुल नामांकन | प्राप्त दावों की संख्या | भुगतान किए गए दावों की संख्या |
| (30 जून 2026 तक) | ||
| 27.78 करोड़ | 11,31,505 | 10,97,751 |
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई)
- पीएमएसबीवाई (2015) 18 से 70 वर्ष की आयु के बचत बैंक खाताधारकों के लिए एक वार्षिक नवीकरणीय दुर्घटना बीमा योजना है।
- यह आकस्मिक मृत्यु या पूर्ण विकलांगता के लिए ₹2 लाख का बीमा कवर तथा आंशिक स्थायी विकलांगता की स्थिति में ₹1 लाख का बीमा कवर प्रदान करती है।
- यह बीमा ₹20 के वार्षिक प्रीमियम पर उपलब्ध है, जो लिंक किए गए बैंक खाते से अपने आप डेबिट हो जाता है।
| कुल नामांकन | प्राप्त दावों की संख्या | भुगतान किए गए दावों की संख्या |
| (30 जून 2026 तक) | ||
| 58.66 करोड़ | 2,56,526 | 1,89,057 |
अटल पेंशन योजना (एपीवाई)
- एपीवाई (2015) असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक अंशदायी पेंशन योजना है, जिसे 2015 में शुरू किया गया था।
- यह योजना 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद ₹1,000 से ₹5,000 तक की सुनिश्चित (गारंटीकृत) मासिक पेंशन प्रदान करती है।
- अंशदान नामांकन के समय ग्राहक की आयु और चुनी गई पेंशन राशि पर आधारित होते हैं।
- इस योजना के अंतर्गत नामांकन बैंकों और डाकघरों के माध्यम से आसान बनाया गया है, जिससे कम आय वाले श्रमिकों के बीच पेंशन कवरेज का विस्तार होता है।
| कुल उपभोक्ता | पुरुष उपभोक्ता | महिला उपभोक्ता | ट्रांसेजेंडर उपभोक्ता |
| (30 जून 2026 तक) | |||
| 9.29 करोड़ | 4.72 करोड़ (50.8%) | 4.56 करोड़ (49.16%) | 26,599 (0.028%) |
| समावेशी क्रेडिट |
पीएम मुद्रा योजना
- पीएम मुद्रा योजना (2015) विनिर्माण, व्यापार, सेवाओं और इससे जुड़ी कृषि गतिविधियों में शामिल गैर-कॉरपोरेट, गैर-कृषि सूक्ष्म और लघु उद्यमों को ₹20 लाख तक का बिना गारंटी वाला लोन प्रदान करती है।
- मुद्रा लोन आय सृजन और रोजगार निर्माण को प्रोत्साहन देने वाली गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए दिए जाते हैं।
- यह उद्यम विकास के आधार पर चार ऋण श्रेणियां: शिशु, किशोर, तरुण और तरुण प्लस, प्रदान करती है।
| स्वीकृत ऋणों की संख्या | स्वीकृत राशि |
| (27.03.2026 तक) | |
| 57.79 करोड़ | ₹ 40.07 लाख करोड़ |
पीएम स्वनिधि
- पीएम स्वनिधि सरकार समर्थित क्रेडिट गारंटी सहायता के साथ स्ट्रीट वेंडर्स पर केंद्रित अपनी तरह की पहली माइक्रो क्रेडिट पहल है।
- यह योजना ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 की तीन क्रमिक किश्तों (ट्रांच) में बिना जमानत (कोलेटरल-फ्री) ऋण प्रदान करती है।
- यह योजना पात्र स्ट्रीट वेंडर्स को ब्याज सब्सिडी और क्रेडिट गारंटी मदद प्रदान करती है।
| कुल लाभार्थी | वितरित लोन | लोन की कुल राशि |
| (मई 2026 तक) | ||
| 75.5 लाख से अधिक | 1.12 करोड़ से अधिक | ₹17,800 करोड़ से अधिक |
किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी)
- केसीसी बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से किसानों को समय पर और पर्याप्त क्रेडिट प्रदान करता है।
- यह एटीएम-सक्षम डेबिट कार्ड, एक बार के दस्तावेजीकरण और लचीली निकासी की सुविधा प्रदान करता है।
- केसीसी फसल की खेती, कटाई के बाद की जरूरतों, विपणन, कृषि रखरखाव, घरेलू खर्चों और संबंधित गतिविधियों के लिए क्रेडिट प्रदान करता है।
| केसीसी/ आईएसएस आवेदनों की कुल संख्या (10 अगस्त 2026 तक) | ||
| वाणिज्यिक बैंक | ग्रामीण बैंक | सहकारी बैंक |
| 763.6 लाख | 368.6 लाख | 1242.0 लाख |
जन समर्थ
- जन समर्थ सरकारी योजनाओं से जुड़ी क्रेडिट योजनाओं के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
- यह लाभार्थियों को सीधे लेंडर्स से जोड़ता है, जिससे सरकारी क्रेडिट प्राप्त करना आसान हो जाता है।
- इस प्लेटफॉर्म पर 16 पंजीकृत क्रेडिट योजनाएं, 8 लोन श्रेणियां और 300 से अधिक लेंडर्स हैं।
| आवेदन की संख्या | आवेदन की राशि |
| (1 जून 2026 तक) | |
| 54.10 लाख | ₹ 3,00,951 करोड़ |
| डिजिटल वित्तीय समावेशन |
यूपीआई
- यूपीआई भारत में डिजिटल भुगतान तंत्र की रीढ़ बनकर उभरा है, जो वित्तीय समावेशन और डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहन दे रहा है।
- वित्त वर्ष 2016-17 और वित्त वर्ष 2025-26 के बीच लेन–देन की मात्रा में लगभग 12,000 गुना और लेन–देन मूल्य में लगभग 4,000 गुना की बढ़ोतरी हुई है।
- आईएमएफ ने यूपीआई को लेन–देन की मात्रा के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी त्वरित समय पर भुगतान प्रणाली के तौर पर मान्यता दी है, जो भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में नेतृत्व को उजागर करता है।
| लेन–देन की संख्या | लेन–देन का कुल राशि | यूपीआई पर लाइव बैंकों की संख्या |
| (जुलाई 2026 तक) | ||
| 2,365.8 करोड़ | 29,87,880.49 करोड़ | 741 |

| वित्तीय साक्षरता |
राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा केंद्र (एनसीएफई)
- यह केंद्र राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा रणनीति के अंतर्गत समाज के सभी वर्गों में वित्तीय शिक्षा और जागरूकता को प्रोत्साहन देता है।
- यह वित्तीय साक्षरता को सुदृढ़ करने के लिए सेमिनार, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित करता है।
- यह वित्तीय बाजारों और डिजिटल वित्तीय सेवाओं को कवर करने वाली लक्षित वित्तीय शिक्षा सामग्री भी तैयार करता है।
| आयोजित वर्कशॉप | लाभार्थी | पुरुष | महिलाएं |
| (10 अगस्त, 2026 तक) | |||
| 31,082 | 10,68,571 | 373,999 (35%) | 694,572 (65%) |
वयस्क वित्तीय शिक्षा कार्यक्रम (एफईपीए)
- एफईपीए को सितंबर 2019 में एनसीएफई की ओर से वयस्कों में वित्तीय जागरूकता को प्रोत्साहन देने के लिए शुरू किया गया था।
- यह कार्यक्रम किसानों, महिला समूहों, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वयं सहायता समूहों, कर्मचारियों और कौशल विकास प्रशिक्षुओं को शामिल करता है।
- यह राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा रणनीति के अनुरूप विशेष लक्षित जिलों (एसएफडी) पर केंद्रित है।
| आयोजित वर्कशॉप | कुल लाभार्थी |
| (10 अगस्त, 2026 तक) | |
| 19,266 | 6,48,512 |
राष्ट्रव्यापी वित्तीय समावेशन व्यापक अभियान
- चार महीने का यह अभियान 1 जुलाई, 2025 को 2.7 लाख ग्राम पंचायतों और स्थानीय स्थानीय निकायों (यूएलबी) में वित्तीय समावेशन का विस्तार करने के लिए शुरू किया गया था।
- अभियान के दौरान गांवों और कस्बों में 2.67 लाख से अधिक शिविर आयोजित किए गए।
- इस अभियान के अंतर्गत 5.19 करोड़ केवाईसी का दोबारा सत्यापन, 1.2 करोड़ नामांकन अपडेशन पूरे किए गए और पीएमजेजेबीवाई/ पीएमएसबीवाई के अंतर्गत 92,066 दावों का निपटान किया गया।
| खोले गए पीएमजेडीवाई खाते | पीएमजेजेबीवाई नामांकन | पीएमएसबीवाई नामांकन | एपीवाई नामांकन |
| (31 अक्टूबर 2025 तक) | |||
| 1.11 करोड़ | 1.40 करोड़ | 2.86 करोड़ | 44.43 लाख |
| पहुंच से सशक्तिकरण की ओर |
भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा खाता स्वामित्व के विस्तार से लेकर सार्थक वित्तीय भागीदारी को सक्षम बनाने तक विकसित हुई है। बैंकों के सुदृढ़ नेटवर्क, डिजिटल इंफ्रस्ट्रक्चर और सरकारी योजनाओं ने औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच को व्यापक बनाया है। पीएमजेडीवाई, जेएएम ट्रिनिटी, सामाजिक सुरक्षा और समावेशी क्रेडिट ने समाज के विभिन्न वर्गों में वित्तीय लचीलेपन को मजबूत किया है। डिजिटल भुगतान और वित्तीय साक्षरता नागरिकों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में आत्मविश्वासपूर्वक भाग लेने में और अधिक सक्षम बना रही है। ये सभी पहलें मिलकर एक अधिक सुलभ, लचीला और समावेशी वित्तीय इकोसिस्टम का निर्माण कर रही हैं, जो समावेशी विकास में सहयोग करता है।
संदर्भ
वित्त मंत्रालय
एनपीसीआई
संचार मंत्रालय
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
विश्व बैंक
पीआईबी बैकग्राउंडर्स
अन्य
एनएफसीई का वित्तीय साक्षरता ऐप
पीआईबी शोध
भारत में वित्तीय समावेशन: हर नागरिक को बैंकिंग सुविधा, प्रत्येक परिवार का सशक्तिकरण
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