विकास की नींव रखना
पिछले 12 सालों में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बहुत बड़ा बदलाव आया है। परिवहन और लॉजिस्टिक्स से लेकर आवासीय और पानी तक, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास अब एकीकृत योजना और बड़े पैमाने पर विस्तार की ओर बढ़ रहा है। इससे कनेक्टिविटी बेहतर हुई है, जरूरी सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है और लगातार आर्थिक विकास की नींव पड़ी है। इस तरक्की को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक पूंजी खर्च वित्त वर्ष 2014–15 के लगभग ₹2 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026–27 में ₹12.2 लाख करोड़ हो गया है।
रेल यात्रा का नया दौर
भारतीय रेलवे तेज, सुरक्षित और ज्यादा आधुनिक यात्रा प्रणाली की ओर बढ़ रहा है। विद्युतीकरण, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, हाई-स्पीड रेल और नई पीढ़ी की ट्रेनें रेल नेटवर्क को नया रूप दे रही हैं।
- रेल बजट 2014–15 में ₹32,000 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026–27 में ₹2.78 लाख करोड़ हो गया।
- रेलवे के विद्युतीकरण का काम 2014 से पहले के लगभग 20% से बढ़कर जुलाई 2026 तक 99.6% हो गया।
- 162 वंदे भारत, 2 वंदे भारत स्लीपर सर्विस और 72 अमृत भारत सर्विस ने कनेक्टिविटी और यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाया है।
- जुलाई 2026 तक 2,633 रूट किलोमीटर पर ‘कवच’ वर्जन 4.0 लागू किया जा चुका है।
- मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को 508 किलोमीटर के रूट पर विकसित किया जा रहा है, जिसकी डिजाइन स्पीड 350 किमी प्रति घंटा है।
- अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चुने गए 1,340 स्टेशनों में से, 18 जुलाई 2026 तक 261 स्टेशनों का पुनर्विकास पूरा हो चुका है।
- जुलाई 2026 में देश में बनी पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को लॉन्च किया गया। यह 10 कोच वाली ट्रेन है जिसमें लगभग 2,600 यात्रियों के बैठने की क्षमता है और यह जींद–सोनीपत सेक्शन पर चलती है। यह ट्रेन खुद अपनी बिजली बनाती है और इससे निकलने वाले एकमात्र बाई-प्रोडक्ट (उप-उत्पाद) पानी की भाप और गर्मी हैं।

भारत को जोड़ने वाली सड़कें और राजमार्ग
सड़कों का एक बड़ा और बेहतर नेटवर्क अलग-अलग इलाकों को एक-दूसरे के करीब ला रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग, ग्रामीण सड़कों और मुख्य कॉरिडोर के विस्तार से लोगों और सामान की आवाजाही आसान हो रही है।
- कुल 63.73 लाख किलोमीटर लंबाई के साथ, भारत का सड़क नेटवर्क दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा है।
- नेशनल हाईवे की लंबाई में लगभग 61% की बढ़ोतरी हुई है; यह वित्त वर्ष 2014 में 91,287 किलोमीटर थी जो मार्च 2026 तक बढ़कर 1,46,572 किलोमीटर हो गई।
- चार-लेन और उससे ज्यादा लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2014 में 18,371 किलोमीटर से बढ़कर 45,516 किलोमीटर हो गई।
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत, सड़कों की लंबाई 2000–2014 की 3.86 लाख किलोमीटर से बढ़कर 2014–2026 में 4.11 लाख किलोमीटर हो गई। सितंबर 2024 से पीएमजीएसवाई-IV शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य 2029 तक 25,000 ऐसी बस्तियों को सड़क संपर्क से जोड़ना है जहां अभी तक सड़क नहीं पहुंची है।
- भारतमाला योजना के तहत, 31 मार्च 2026 तक 22,590 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है।
पुल और सुरंगें: इंजीनियरिंग के नए आयाम
इंजीनियरिंग की नई उपलब्धियां भारत की सबसे मुश्किल भौगोलिक चुनौतियों से पार पा रही हैं। ये परियोजनाएं मुश्किल इलाकों में नए रास्ते खोल रहे हैं।
- चिनाब ब्रिज (2025): दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज, जो चिनाब नदी से 359 मीटर ऊपर बना है; 1,315 मीटर लंबा स्टील का ढांचा जो जम्मू-श्रीनगर के बीच संपर्क को बेहतर बनाता है।
- अंजी खड्ड ब्रिज (2025): जम्मू-कश्मीर में भारत का पहला केबल-स्टेयड रेलवे ब्रिज।
- पंबन ब्रिज (2025): भारत का पहला वर्टिकल-लिफ्ट रेलवे सी-ब्रिज (समुद्री पुल), जो रामेश्वरम को मुख्य भूमि से जोड़ता है; 2.07 किलोमीटर लंबा, जिसमें 72.5 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है।
- जेड-मोर्थ/सोनमर्ग सुरंग (2025): 12 किलोमीटर लंबी सुरंग जो जम्मू-कश्मीर में बर्फ़ीले तूफान (एवलांच) के खतरे वाले इलाकों से होकर हर मौसम में आवाजाही की सुविधा देती है और लद्दाख की ओर जाने-आने में सुधार करती है।
- सुदर्शन सेतु (2024): 2.32 किलोमीटर लंबा पुल जो गुजरात में ओखा को बेट द्वारका से जोड़ता है।
- अटल टनल (2020): 9.02 किलोमीटर — 10,000 फ़ुट से ज्यादा ऊंचाई पर बनी दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग, जो मनाली और लाहौल-स्पीति को जोड़ती है।
- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी टनल (2017): जम्मू और श्रीनगर के बीच 9 किलोमीटर लंबी टनल जो हर मौसम में खुली रहती है और यात्रा के समय को लगभग 2 घंटे कम करती है।



नागरिक उड्डयन और क्षेत्रीय हवाई संपर्क
हवाई संपर्क अब ज्यादा शहरों, कस्बों और दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच रहा है। हवाई अड्डों के विस्तार, उड़ान (UDAN) रूट और डिजिटल यात्री सेवाओं की वजह से पूरे देश में हवाई यात्रा करना आसान हो गया है।
- 15 जुलाई 2026 तक, उड़ान ने 679 रूटों के ज़रिए 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम को जोड़ा है, जिससे 1.68 करोड़ से ज़्यादा यात्रियों को फायदा हुआ है।
- चालू हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 थी, जो जुलाई 2026 में बढ़कर 165 हो गई।
- 2014 के बाद 25 ग्रीनफ़ील्ड हवाई अड्डों को मंजूरी दी गई है।
- ‘डिजी यात्रा’ 38 हवाई अड्डों पर चालू है। इस ऐप के 2.4 करोड़ से ज़्यादा डाउनलोड हुए हैं और इसने 10 करोड़ से ज़्यादा आसान यात्राओं को संभव बनाया है।
- क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने के लिए, मार्च 2026 में वित्त वर्ष 2026–27 से 2035–36 तक के लिए ₹28,840 करोड़ के बजट के साथ ‘संशोधित उड़ान’ को मंजूरी दी गई है। इसके तहत 100 नए हवाई अड्डे और 200 आधुनिक हेलीपैड बनाने की योजना है।
मेट्रो: शहरी परिवहन का विस्तार
भारत का शहरी परिवहन नेटवर्क बड़े पैमाने पर फैल रहा है। मेट्रो कनेक्टिविटी अब ज़्यादा शहरों तक पहुंच गई है और नए-नए सिस्टम शहरी परिवहन के लिए नई संभावनाएं खोल रहे हैं।
- मेट्रो नेटवर्क 2014 में 248 किमी से बढ़कर 2026 में 1,155 किमी से ज्यादा हो गया।
- मेट्रो कनेक्टिविटी वाले शहरों की संख्या 5 से बढ़कर 26 हो गई, और रोजाना यात्रियों की संख्या 1.15 करोड़ से ज़्यादा हो गई।
- कोलकाता ने 2024 में भारत की पहली अंडरवाटर मेट्रो टनल शुरू की।
- कोच्चि ने भारत का पहला वॉटर मेट्रो सिस्टम शुरू किया, जिसकी पहली बोट दिसंबर 2021 में लॉन्च की गई थी।
भारत की समुद्री ताकत में बढ़ोतरी
भारत अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था और बढ़ते व्यापार को सहारा देने के लिए अपनी समुद्री क्षमता को मजबूत कर रहा है। बंदरगाहों, जलमार्गों और समुद्री बुनियादी ढांचे में निवेश से एक ज्यादा सक्षम और आपस में जुड़ा हुआ इकोसिस्टम तैयार हो रहा है।
- बड़े बंदरगाहों की कार्गो संभालने की क्षमता 2014 में 873 एमएमटीपीए से लगभग दोगुनी होकर 2026 में 1,728 एमएमटीपीए हो गई।
- जहाजों के टर्नअराउंड समय में सुधार हुआ; यह 94 घंटे से घटकर 2025-26 में 48.8 घंटे रह गया।
- बड़े बंदरगाहों ने मिलकर वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 915.17 एमटी कार्गो संभाला, जो वित्त वर्ष 2014-15 के 581 एमटी से अधिक है।
- सागरमाला कार्यक्रम ने बंदरगाह-आधारित विकास, तटीय संपर्क और लॉजिस्टिक्स एकीकरण को मजबूत किया।
- राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या 2014 में 5 से बढ़कर 2026 में 111 हो गई, जिनमें से 32 चालू हैं।
- भारत 2025 में दुनिया का नंबर 1 जहाज-रीसाइक्लिंग देश बन गया। इसमें वैश्विक हिस्सेदारी 30.1% (2024) से बढ़कर 35.4% (2025) हो गई-जिसमें 2.99 मिलियन ग्रॉस टन (जीटी) की रीसाइक्लिंग हुई, जो 2024 के 1.86 मिलियन जीटी से लगभग 60% अधिक है।
- विश्व बैंक द्वारा प्रकाशित कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (सीपीपीआई) 2025 के अनुसार, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट 22वें स्थान पर रहा।
- भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल (बीएमआईपी) 12 मई 2026 को लॉन्च किया गया। यह 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का घरेलू बीमा पूल है, जिसमें 1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर (₹12,980 करोड़) की सरकारी गारंटी है। यह भारतीय झंडे वाले/नियंत्रित जहाजों के लिए हल और मशीनरी, कार्गो, सुरक्षा और क्षतिपूर्ति और युद्ध जोखिम को कवर करता है। 29 जुलाई 2026 तक, इस पूल के तहत कार्गो युद्ध जोखिम और हल युद्ध जोखिम को कवर करने वाली कुल 1608 पॉलिसी जारी की गई हैं।
लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक क्षमता को मजबूती देना
इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना अब इस तरह बनाई जा रही है कि वह उद्योग और व्यापार को सहारा देने वाला एक आपस में जुड़ा हुआ नेटवर्क बने। गतिशक्ति से लेकर औद्योगिक कॉरिडोर तक, तालमेल, कार्यक्षमता और विनिर्माण क्षमता को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
- पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान ने 3,291 से ज़्यादा डेटा लेयर्स का इस्तेमाल करके 58 मंत्रालयों और विभागों में एकीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग की।
- 11 अगस्त 2026 तक, नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप मैकेनिज्म के ज़रिए लगभग ₹18.66 लाख करोड़ की कुल अनुमानित लागत वाले 396 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओँ का मूल्यांकन किया गया है। इनमें से 256 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और 198 परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
- राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति ने मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स की क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण को मजबूत किया है।
- प्रगति (PRAGATI) ने ₹85 लाख करोड़ से ज्यादा कीमत वाली 382 परियोजनाओं की समीक्षा की और 2,958 मुद्दों को सुलझाया।
- इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (आईआईएलबी) पर 4,220 से ज़्यादा औद्योगिक पार्कों को मैप किया गया है।
- देश भर में 272 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क काम कर रहे हैं।
- 7 औद्योगिक कॉरिडोर में 20 औद्योगिक स्मार्ट सिटीज़ को मंजूरी दी गई है।
- 100 नए प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित करने के लिए मार्च 2026 में भव्य (BHAVYA) योजना को मंजूरी दी गई है।
- 24 जुलाई 2026 को ₹3,030 करोड़ के बजट के साथ भव्य रसायन योजना को मंज़ूरी दी गई। यह योजना पांच साल तक, यानी वित्त वर्ष 2026–27 से वित्त वर्ष 2030–31 तक लागू की जाएगी।
- विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 7 प्रधानमंत्री मित्र (MITRA) पार्क्स का प्रस्ताव रखा गया है।
पानी, आवास और शहरी विकास
इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की यह पहल सीधे लोगों के घरों और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी है। नल से जल की सुविधा और किफायती घरों से लेकर शहरी इलाकों के कायाकल्प तक, ये कोशिशें ग्रामीण और शहरी भारत में रहने की बेहतर स्थितियां बना रही हैं।
- जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत, ग्रामीण इलाकों में नल से जल की सुविधा पाने वाले घरों की संख्या 2019 में 3.23 करोड़ से बढ़कर 10 अगस्त 2026 तक लगभग 15.91 करोड़ हो गई है।
- मार्च 2026 में जेजेएम 2.0 को मंजूरी दी गई। इस मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है और इसके लिए ₹8.69 लाख करोड़ का बजट रखा गया है।
- प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) के तहत, 12 अगस्त 2026 तक 99.25 लाख घर बनकर तैयार हो चुके हैं। पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत लगभग 96% घर महिलाओं को आवंटित किए गए हैं।
- प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत, मंजूर किए गए 3.91 करोड़ घरों में से 12 अगस्त 2026 तक 3.13 करोड़ घर बनकर तैयार हो चुके हैं। पीएमएवाई-जी के तहत मंजूर किए गए लगभग 75% घर या तो महिलाओं के नाम पर हैं या संयुक्त स्वामित्व में हैं।
- 2019 में शुरू किए गए स्वामी (SWAMIH) फंड के जरिए जून 2026 तक 63,000 से ज़्यादा घर उपलब्ध कराए गए, जिससे लगभग 2.52 लाख लोगों को फायदा हुआ।
- अमृत (AMRUT) और अमृत 2.0 के तहत, 2015 से अब तक लगभग ₹2.79 लाख करोड़ की लागत वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
- स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत, मार्च 2026 तक कुल 7,790 परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं, जिनकी कुल लागत ₹1,56,257 करोड़ है।
एक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार भारत के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर
भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर का सफर राष्ट्रीय विकास के पैमाने और महत्वाकांक्षा में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। अब ध्यान ऐसे मजबूत और ज्यादा क्षमता वाले सिस्टम बनाने पर है, जो न सिर्फ आज तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को सहारा दें, बल्कि भविष्य की जरूरतों का भी ध्यान रखें। ये सभी पहल मिलकर एक ज़्यादा कुशल, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार भारत की नींव मजबूत कर रही हैं।
संदर्भ
प्रधानमंत्री कार्यालय
मंत्रिमण्डल
रक्षा मंत्रालय
वित्त मंत्रालय
नागरिक उड्डयन मंत्रालय
रेल मंत्रालय
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
सूचना और प्रसारण मंत्रालय
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2098788®=3&lang=2
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
https://indiaindustriallandbank.gov.in/login1
जल शक्ति मंत्रालय
विद्युत मंत्रालय
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
बदलते भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़कों से आगे, क्षमता निर्माण की ओर
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