डीपीआईआईटी के स्टार्ट-अप इंडिया पोर्टल के अनुसार भारत में करीब 440 अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप पंजीकृत हैं। इन-स्पेस ने विभिन्न अंतरिक्ष गतिविधियों के संचालन के लिए 52 गैर-सरकारी संस्थाओं को 113 प्राधिकार प्रदान किए हैं। इनमें 18 स्टार्ट-अप शामिल हैं। इसका विवरण अनुलग्नक-1 में दिया गया है।
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के माध्यम से अंतरिक्ष स्टार्ट-अप को दी जा रही वित्तीय, तकनीकी और इनक्यूबेशन सहायता का विवरण अनुलग्नक-2 में दिया गया है।
इसके अलावा एनएसआईएल, इन-स्पेस के समन्वय से इसरो और अंतरिक्ष विभाग द्वारा विकसित विभिन्न प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण कर रहा है। अब तक एनएसआईएल ने इसरो और अंतरिक्ष विभाग द्वारा विकसित 83 प्रौद्योगिकियों को भारतीय उद्योगों को हस्तांतरित करने के लिए 118 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
इसमें लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) प्रौद्योगिकी, भारतीय मिनी सैटेलाइट-1 (आईएमएस-1) बस, इसरो लेजर गायरो (आईएलजी), ट्राई-बैंड (एस, एक्स, केए) एंटीना फीड, सिरेमिक सर्वो एक्सेलेरोमीटर (सीएसए), एक्स बैंड मिनी-एसएआर और कम तापमान सह-फायर सिरेमिक (एलटीसीसी) मल्टी चिप मॉड्यूल प्रौद्योगिकी जैसी महत्वपूर्ण अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।
एनएसआईएल ने अंतरिक्ष क्षेत्र के कई भारतीय स्टार्ट-अप को विभिन्न प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित की हैं और उन्हें इन तकनीकों को सफलतापूर्वक अपनाने तथा व्यावसायिक उपयोग में लाने के लिए आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया है। इसके अलावा एनएसआईएल विभिन्न भारतीय उद्योगों और सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों को उनके द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी या उत्पाद के सत्यापन के लिए इसरो की तकनीकी सुविधाओं के उपयोग में भी सहायता करता है।
अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण के बाद सरकार ने उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण सेवाओं, डाउनस्ट्रीम अनुप्रयोगों और अंतरिक्ष आधारित प्रौद्योगिकियों में स्टार्ट-अप की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई सक्रिय कदम उठाए हैं।
- भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 भारतीय अंतरिक्ष इकोसिस्टम से जुड़े सभी पक्षों की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं।
- भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के विकास के लिए अगले दस वर्षों की दृष्टि और रणनीति तैयार की गई है।
- अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए उदारीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति लागू की गई है।
- गैर-सरकारी संस्थाओं को इसरो की सुविधाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने के लिए रियायती मूल्य निर्धारण नीति लागू की गई है।
- अंतरिक्ष स्टार्ट-अप को सहायता देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड स्थापित किया गया है।
- स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के विकास, प्रदर्शन और व्यावसायीकरण में तेजी लाने के लिए 500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड शुरू किया गया है।
- निजी क्षेत्र के विकास में सहायता के लिए इसरो के बुनियादी ढांचे, तकनीकी विशेषज्ञता और मार्गदर्शन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में बदलती मानव संसाधन जरूरतों को पूरा करने के लिए कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।
- अंतरिक्ष प्रणालियों के लिए किफायती परीक्षण, सत्यापन और सिमुलेशन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तकनीकी केंद्र स्थापित किया गया है।
- व्यावसायीकरण के लिए इसरो द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को उद्योगों को हस्तांतरित करने की व्यवस्था की गई है।
- पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के सत्यापन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- स्वदेशी उपग्रह प्लेटफॉर्म की क्षमता विकसित करने और उपग्रहों के विकास में तेजी लाने के लिए “सैटेलाइट बस एज ए सर्विस पहल शुरू की गई है।
- विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों को मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और साझा परीक्षण सुविधाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
आज तक आंध्र प्रदेश में अतिरिक्त अंतरिक्ष इनक्यूबेशन केंद्र, परीक्षण सुविधाएं या इनोवेशन हब स्थापित करने या उन्हें सहायता देने का कोई प्रस्ताव या योजना नहीं है।
अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण के बाद सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इन उपायों में नीतिगत और नियामक सुधार, बुनियादी ढांचे तक पहुंच, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, वित्तीय सहायता और कौशल विकास के माध्यम से क्षमता निर्माण शामिल हैं। इनका उद्देश्य देश में एक मजबूत और सक्रिय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र का इकोसिस्टम विकसित करना है।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
इन-स्पेस उद्योगों को उपलब्ध इसरो प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण में सहायता कर रहा है। साथ ही भविष्य में प्रौद्योगिकियों के विकास और हस्तांतरण के लिए उद्योगों की तकनीकी जरूरतों की पहचान और उन्हें एकीकृत करने का काम भी किया जा रहा है। अब तक एनएसआईएल के माध्यम से 118 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते किए जा चुके हैं।
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुगम बनाने के लिए एनएसआईएल पारदर्शी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रक्रियाओं और उद्योग-अनुकूल नीतियों के माध्यम से निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ा रहा है। उपग्रह निर्माण, एकीकरण, परीक्षण और डाउनस्ट्रीम सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में उद्योग भागीदारी, क्षमता निर्माण और अवसरों के जरिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इसके अलावा, इन-स्पेस ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचक राकेट (पीएसएलवी) और प्रमोचक राकेट मार्क-3 (एलवीएम-3) प्रौद्योगिकियों के नियोजित हस्तांतरण को आगे बढ़ा रहा है इसका उद्देश्य प्रक्षेपण यान के निर्माण और संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना है।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश
सरकार ने अंतरिक्ष स्टार्ट-अप के लिए निवेश को बढ़ावा देने वाली कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें Iइन-स्पेस सीड फंड योजना, टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड और 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड शामिल हैं। इन नीतिगत उपायों और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के परिणामस्वरूप, 31 मार्च 2026 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप में कुल निवेश करीब 61 करोड़ 85 लाख अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। निवेश का रुझान धीरे-धीरे शुरुआती चरण के सीड फंडिंग से बढ़कर बड़े ग्रोथ-स्टेज निवेश दौर की ओर बढ़ रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक बाजार तक पहुंच
इन-स्पेस स्टार्टअप सहित भारतीय वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और सुविधाजनक बनाने के लिए विदेशी सरकारों, अंतरिक्ष एजेंसियों, उद्योग और अन्य हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। इन-स्पेस द्वारा की गई प्रमुख पहलों में शामिल हैं:
- प्रमुख अंतरिक्ष क्षेत्र में आगे बढ़ रहे देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय साझेदारी को मजबूत करना।
- वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष उद्योगों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, बिजनेस फोरम, प्रतिनिधिमंडल दौरों, बी2बी बैठकों और उद्योग से जुड़ी गोलमेज बैठकों में भागीदारी को सुगम बनाना।
- सरकार-से-सरकार वार्ताओं में भारतीय वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करना और उभरती अंतरिक्ष अर्थव्यवस्थाओं के साथ साझेदारी को बढ़ावा देना, ताकि निर्यात, प्रौद्योगिकी सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारतीय कंपनियों के एकीकरण को बढ़ावा मिल सके।
इन पहलों के माध्यम से भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को 30 से अधिक देशों के हितधारकों के साथ सहयोग के वसर मिले हैं।
यह जानकारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
****
अनुलग्नक-I
लोक सभा के भाग (क) के उत्तर में संदर्भित अनुलग्नक अतारांकित प्रश्न संख्या 4049 का उत्तर दिनांक 12.08.2026 को दिया जाएगा
| क्रम संख्या | स्टार्ट-अप की सूची |
| 1 | अग्निकुल कॉसमॉस प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई |
| 2 | अक्षत एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु |
| 3 | अज़ीस्ता बीएसटी, हैदराबाद |
| 4 | बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड, बैंगलोर |
| 5 | कॉस्मोसर्व स्पेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बैंगलोर |
| 6 | ध्रुव स्पेस प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद |
| 7 | दिगंतरा रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, बैंगलोर |
| 8 | गैलेक्सआई स्पेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, बैंगलोर |
| 9 | हेक्स20लैब्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, तिरुवनंतपुरम |
| 10 | इनऑर्बिट स्पेस टेलीकम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली |
| 11 | मनस्तु स्पेस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, नवी मुंबई |
| 12 | एनएसस्पेस टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, तेनाली |
| 13 | ऑर्बिटएड एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई |
| 14 | पियरसाइट स्पेस प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद |
| 15 | पिक्सलस्पेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु |
| 16 | स्काईरूट एयरोस्पेस लिमिटेड, हैदराबाद |
| 17 | स्पेस किड्ज़ इंडिया, चेन्नई |
| 18 | टेकमी2स्पेस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, केवी रंगा रेड्डी |
अनुलग्नक-II
लोक सभा के भाग (ख) के उत्तर में संदर्भित अनुलग्नक अतारांकित प्रश्न संख्या 4049 का उत्तर दिनांक 12.08.2026 को दिया जाएगा
पिछले तीन वर्षों के दौरान 31.07.2026 तक प्रदान की गई वित्तीय सहायता का विवरण
(लाख रुपये में)
| क्रम संख्या | योजना का नाम | परियोजना/योजना लिफाफा | वित्तीय वर्ष | संचयी | ||
| वित्तीय वर्ष2024-25 | वित्तीय वर्ष2025-26 | वित्तीय वर्ष2026-27 | ||||
| 1 | इन-स्पेस सीड फंड स्कीम/पीआईई | 6500 | 88.3 | 225 | 20 | 333.30 |
| 2 | वेंचर कैपिटल फंड | 100000 | सेबी अनुमोदन: 31-10-2025 | 605.64 | 18287.40 | 18893.04 |
| 3 | प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए फंड | 50000 | प्रौद्योगिकी के विकास के लिए 03 एनजीई का चयन किया गया | शून्य | शून्य | शून्य |
| 4 | एक सेवा के रूप में सैटेलाइट बस (एस.बी.ए.एस) | 7500 | 03 एनजीई विकास के लिए चुने गए | शून्य | 750 | 750 |
| 5 | सामान्य तकनीकी सुविधाएं | 50000 | गुजरात और तमिलनाडु सरकार के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए | शून्य | शून्य | शून्य |
| कुल | 214000 | 88.30 | 830.64 | 19057.40 | 19976.34 | |
लॉन्च स्लॉट और परीक्षण पहुंच सहित इन–स्पेस द्वारा स्टार्ट–अप को प्रदान की गई तकनीकी सुविधा का विवरण, वर्ष–वार निम्नानुसार है
| क्रम संख्या। | सालों | स्टार्ट–अप का विवरण | सुविधा प्रदान की गई |
| 1 | 2022 | अग्निकुल कॉसमॉस, स्काईरूट एयरोस्पेस, पिक्सल | फ्लेक्स सील और ध्वनिक परीक्षण, एस/एक्स-बैंड एंटीना आरएफ परीक्षण, सब-ऑर्बिटल लॉन्च एक्सेस (विक्रम-एस), लॉन्च व्हीकल टीएम रिसेप्शन। |
| 2 | 2023 | ध्रुव स्पेस, पिक्सलस्पेस, स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, स्पेसकिड्ज़, अज़ीस्टा बीएसटी | अग्निबन एसओआरटीईडी लॉन्च एक्सेस, आरएएमएन-I और II इंजन परीक्षण, अज़ादीसैट-2 पर्यावरण परीक्षण, स्थिर चरण परीक्षण, ग्राउंड स्टेशन सपोर्ट। |
| 3 | 2024 | स्काईरूट एयरोस्पेस, पिक्सलस्पेस, मानस्तु स्पेस, पियरसाइट स्पेस, एन स्पेस टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड | स्टेज-1 कास्टिंग और प्रणोदक आपूर्ति, हार्डवेयर-इन-लूप सिमुलेशन, पीओईएम पेलोड ईएमआई/ईएमसी और शॉक टेस्टिंग। |
| 4 | 2025 | अग्निकुल कॉसमॉस, ध्रुव स्पेस, पियरसाइट, गैलेक्सी, सैटलियो लैब्स, स्काईरूट एयरोस्पेस | क्रायोजेनिक पंप पीडीआर समीक्षा, एक्स/यूएचएफ-बैंड डाउनलिंक समर्थन, टीवीएसी/आउटगैसिंग परीक्षण, प्रक्षेपवक्र सत्यापन, शीतलन गर्भनाल आपूर्ति। |
| 5 | 2026 | TakeMe2Space, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस, स्काईरूट एयरोस्पेस, ऑर्बिटएड एयरोस्पेस, ध्रुव स्पेस प्राइवेट लिमिटेड, | विक्रम-1 के लिए पहला लॉन्च पैड (एफएलपी) उपयोग, डॉकिंग मैकेनिज्म लैब टेस्टिंग, एसआरएस शॉक टेस्टिंग, माइक्रो-थ्रस्टर्स के लिए सिलिसाइड कोटिंग। |
इन–स्पेस की विभिन्न योजनाओं के तहत जिन स्टार्ट–अप्स/व्यक्तियों को सहायता प्रदान की गई है, उनका विवरण इस प्रकार है
| क्रम संख्या | स्टार्ट–अप का नाम | डोमेन | स्थान |
| 1 | ए आर एम एस 4 ए आई | कृषि | दिल्ली |
| 2 | मिस्टईओ | कृषि | केरल |
| 3 | अगस्त (कपड़ा) | आपदा | कर्नाटक |
| 4 | हाइस्पेस | शहरी | कर्नाटक |
| 5 | ज़ोवियन | आपदा | कर्नाटक |
| 6 | सीगल | शहरी | गुजरात |
| 7 | सुहोरा | समुद्री | उत्तर प्रदेश |
| 8 | क्लाउडोन एआई रोबोटिक्स | स्मार्ट कंप्यूटिंग और नियंत्रण के लिए पूर्ण मिशन वर्चुअलाइजेशन | केरल |
| 9 | ड्रीम एयरो | तमिलनाडु | |
| 10 | औले स्पेस | कर्नाटक | |
| 11 | यूएलईओ स्पेस | गुजरात | |
| 12 | एन स्पेस टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड | शहरी | तेलंगाना |
| 13 | एसएआर स्पेस प्राइवेट लिमिटेड | आपदा और समुद्री | गुजरात |
| 14 | एच स्क्वायर इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड | आपदा | कर्नाटक |
| 15 | थज़ल जियोस्पेशियल एनालिटिक्स प्राइवेट लिमिटेड | शहरी | तमिलनाडु |
| 16 | कावा स्पेस | समुद्री | कर्नाटक |
| 17 | क्लाइमाक्रू | समुद्री | महाराष्ट्र |
| 18 | सन्यार्क स्पेस | स्मार्ट कंप्यूटिंग और नियंत्रण के लिए पूर्ण मिशन वर्चुअलाइजेशन | तेलंगाना |
| 19 | गैलेक्सआई स्पेस | कर्नाटक | |
| 20 | टेकमीटूस्पेस | तेलंगाना | |
| 21 | दिगंतरा | कर्नाटक | |
| 22 | स्पेस अनलॉक | गुजरात | |
| 23 | ऑर्बिटल ग्रिड | तेलंगाना |
उन स्टार्ट–अप/व्यक्तियों का विवरण जिन्हें प्रीइन्क्यूबेशन एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (पीआईई) का समर्थन करना है
| अनुदान प्राप्तकर्ता | स्थान |
| मनीष नगर | उत्तराखंड |
| अमेया मारकरकैंडी | महाराष्ट्र |
| कन्नन पांडी | तमिलनाडु |
| रोसनी एजी इंफॉर्मेशन प्राइवेट लिमिटेड | हरियाणा |
| मैटरक टेक्नोलॉजीज | कर्नाटक |
| वेंकटेश एस | तमिलनाडु |
| प्रथमेश रामडे | महाराष्ट्र |
| उज्जवल सिंह | उत्तर प्रदेश |
| ड्रीमएयरोस्पेस टेक्नोलॉजीज प्रा. | कर्नाटक |
| ऑटोस्काई एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड | तमिलनाडु |
Comments (0)