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केंद्रीय ग्रामीण क्षेत्र की योजनाओं का मूल्यांकन

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में नीति आयोग के विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ) के माध्यम से दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) सहित केंद्रीय ग्रामीण क्षेत्र की योजनाओं का मूल्यांकन कराया है। इस अध्ययन में 11 राज्यों और 2 संघ राज्य क्षेत्रों के 36 जिलों एवं 216 गांवों के अंतर्गत 2,206 ग्रामीण परिवारों को शामिल किया गया। थिंक टैंक द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के निष्कर्ष निम्नानुसार हैं:-

अध्ययन में यह उल्लेख किया गया है कि दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) ने लगभग 92 लाख एसएचजी में 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को संगठित किया है तथा महिलाओं के सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और वित्तीय सेवाओं तक उनकी पहुंच में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अध्ययन यह भी दर्शाता है कि यह कार्यक्रम अत्यधिक प्रासंगिक है, जो गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुकूल है।

नीति आयोग की मूल्यांकन रिपोर्ट ने महत्वपूर्ण सकारात्मक परिणाम प्रदर्शित किए हैं, जिसके तहत औसत पारिवारिक आय में 49% की वृद्धि दर्ज की गई है। इसने महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण में भी योगदान दिया है, जिसमें 58% महिलाओं ने आत्मविश्वास बढ़ने की बात कही है, 52% महिलाओं ने आय-सृजन के अवसरों तक बेहतर पहुंच का अनुभव किया है, और 46% महिलाएं अपने बैंकिंग लेनदेन का स्वतंत्र रूप से प्रबंधन करने में सक्षम हुई हैं। इसके अतिरिक्त, महिला-संचालित उद्यमों ने सिलाई, बकरी पालन और कृषि-व्यापार सहित आजीविका गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला में विविधीकरण किया है, जिससे आय के स्रोतों को मजबूती मिली है तथा टिकाऊ ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा मिला है।

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि एसएचजी से जुड़े ऋण का मुख्य रूप से आजीविका संबंधी उद्देश्यों के लिए उपयोग किया गया था। अपने पहले ऋण के उद्देश्य की जानकारी देने वाले उत्तरदाताओं में से, 34.0% ने आजीविका गतिविधियों की स्थापना का और 29.1% ने मौजूदा आजीविका गतिविधियों में सहायता का उल्लेख किया।

इसके अलावा, रिपोर्ट में यह पाया गया है कि समूह-स्तरीय गतिविधियां शुरू करने वाले स्वयं सहायता समूहों में से 51.7% ने अपनी समूह-स्तरीय गतिविधियों को प्रारंभ करने के लिए ऋण लिया है। प्राथमिक सर्वेक्षण के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि विभिन्न राज्यों के 75% उत्तरदाताओं ने रिपोर्ट किया है कि स्वयं सहायता समूहों ने गांव में सामाजिक और सामुदायिक विकास में योगदान दिया है। साथ ही, बहुसंख्यक उत्तरदाताओं (54.6%) ने कमजोर तथा गरीब महिलाओं को संगठित करने में अपनी भागीदारी का उल्लेख किया।

सरकार ने दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत एक व्यापक निगरानी, मूल्यांकन और शिक्षण (एमईएल) ढांचा लागू किया है, जिसमें तृतीय-पक्ष मूल्यांकन, लोकोस के माध्यम से वास्तविक समय एमआईएस-आधारित निगरानी, आवधिक डेटा सत्यापन एवं क्षेत्र-स्तरीय सत्यापन तथा परिणाम-आधारित निगरानी शामिल है। पारदर्शिता, जवाबदेही और साक्ष्य-आधारित कार्यक्रम प्रबंधन को बढ़ाने के लिए इन तंत्रों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है और इन्हें सुदृढ़ किया जाता है।

एसएचजी-से जुड़े ऋण के संबंध में, परिक्रामी निधि (आरएफ)/ सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) तथा सामुदायिक उद्यम निधि (सीईएफ) के संवितरण और उपयोग की निगरानी मौजूदा कार्यक्रम निगरानी प्रणालियों के माध्यम से की जाती है। यह कार्यक्रम बैंक सखियों और अन्य सामुदायिक संवर्गों के माध्यम से औपचारिक बैंक ऋण तक पहुंच को भी सरल बनाता है, जिसमें केवाईसी अनुपालन, बैंक खाता-संबंधित प्रक्रियाओं और ऋण सुगमीकरण के लिए सहायता शामिल है। वर्तमान गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) दर 1.85% है, जो स्वयं सहायता समूहों के बीच संतोषजनक पुनर्भुगतान निष्पादन को दर्शाती है। यह बैंकों की 62,946 शाखाओं में सक्षम बनाए गए सामुदायिक-आधारित वसूली तंत्र के सहयोग से संभव हो सका है। बैंकों की विभिन्न शाखाओं में 55,371 बैंक सखियों को तैनात किया गया है, जो बैंकों और महिला स्वयं सहायता समूहों के बीच सुविधाप्रदाता के रूप में कार्य करती हैं।

इसके अलावा, मंत्रालय ने लखपति दीदी पोर्टल बनाया है, जो स्वयं सहायता समूह परिवारों की वार्षिक आय की व्यवस्थित ट्रैकिंग और निगरानी को सक्षम बनाता है। यह प्लेटफॉर्म जिला-वार और राज्य-वार आंकड़े प्रदान करता है, जिससे साक्ष्य-आधारित आयोजना को सरल बनाया जा सकता है तथा आय वृद्धि से जुड़े कार्यकलापों की निगरानी को सुदृढ़ किया जा सकता है।

यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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