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स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण जीविकोपार्जन का सुदृढ़ीकरण

ग्रामीण विकास मंत्रालय, दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई – एनआरएलएम) को ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित करने और एक निश्चित अवधि में उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि प्राप्त करने तथा उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार होने तक निरंतर पोषण एवं सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से पूरे देश (दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़कर) में कार्यान्वित कर रहा है। इस मिशन का उद्देश्य चार मुख्य घटकों अर्थात, ग्रामीण गरीबों के स्व-प्रबंधित और आर्थिक रूप से टिकाऊ सामुदायिक संस्थानों का सामाजिक संगठनीकरण, संवर्धन और सुदृढ़ीकरण; ग्रामीण गरीबों का वित्तीय समावेशन; सतत आजीविका; और सामाजिक समावेशन, सामाजिक विकास में निवेश करके अपना लक्ष्‍य प्राप्त करना है। पिछले तीन वर्षों के दौरान डीएवाई -एनआरएलएम के अंतर्गत प्राप्त प्रगति निम्नानुसार है:

क्रम सं.संकेतकवित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान प्रगति
 एसएचजी में शामिल परिवारों की संख्या1,06,33,882
 गठित एसएचजी की संख्या7,58,243
 गठित ग्राम संगठनों की संख्या1,07,677
 गठित क्लस्टर स्तरीय संघों की संख्या9,324
 एसएचजी, ग्राम संगठनों और क्लस्टर स्तरीय संघों को पूंजीगत सहायता (रु. करोड़ में)33,335.92
 संवितरित बैंक ऋण (रु. करोड़ में)6,38,339.43
 निष्क्रिय आस्तियां % (एनपीए)1.85%
 कृषि-पारिस्थितिकीय पद्धतियों के अंतर्गत महिला किसानों की संख्या (रु. लाख में)248
 सहायता प्राप्त उद्यमों की संख्या53,80,137

संचयी रूप से, 10.08 करोड़ महिलाओं को 92 लाख एसएचजी में संगठित किया गया है। डीएवाई -एनआरएलएम के अंतर्गत 2025-26 के दौरान 57.60 लाख महिला एसएचजी को ऋण प्रदान किया गया।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत डीएवाई -एनआरएलएम सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में एसएचजी उत्पादों के लिए बाजार पहुंच को सुदृढ़ कर रहा है। इन प्रयासों में निम्नलिखित शामिल हैं:

(i) ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एसएचजी उत्पादों के संवर्धन हेतु “सरस”, “सरस आजीविका” और “आजीविका” ब्रांडों को पंजीकृत किया है। 25 राज्यों ने राज्य स्तरीय ब्रांड बनाए हैं और इन ब्रांडों के अंतर्गत एसएचजी उत्पादों की बिक्री को सुगम बना रहे हैं, जैसे महाराष्ट्र का उमेद, झारखंड का पलाश और अदिवा, हिमाचल प्रदेश का हिमीरा, तमिलनाडु का माठी आदि।

(ii) सरस ब्रांड को लोकप्रिय बनाने तथा शहरी बाजारों में एसएचजी उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, राज्य और जिला स्तर पर सरस मेलों का आयोजन किया जाता है। प्रतिवर्ष, एसएचजी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए 2 राष्ट्रीय स्तरीय सरस मेले और 1 खाद्य महोत्सव तथा 50 से अधिक राज्य स्तरीय सरस मेलों का आयोजन किया जाता है।

(iii) एसएचजी सदस्यों के चयनित उत्पादों की बिक्री हेतु केंद्रीय दिल्ली में एक खुदरा स्टोर – सरस आजीविका गैलरी संचालित की जा रही है। इसी प्रकार राज्य भी अपने राज्य के ब्रांडों के अंतर्गत खुदरा दुकानें संचालित करते हैं।

(iv) एसएचजी के चयनित उत्पादों की बिक्री के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा एक समर्पित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ई-सरस स्थापित किया गया है। एसएचजी उत्पादों के संवर्धन हेतु अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों, यानी जीईएम, ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी), अमेज़न, फ्लिपकार्ट, मीशो और जियोमार्ट के साथ भी टाई-अप/भागीदारी की गई है।

यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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