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विषय: तिलहन एवं दलहन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए उठाए गए कदम

2246. श्री देबाशीष सामंतराय:

क्या कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि:

(क)      देश में तिलहन एवं दलहन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं;

(ख)      विगत तीन वर्षों के दौरान क्या उपलब्धियां हासिल की गई हैं; और

(ग)       इसका आयात पर क्या प्रभाव पड़ा है?

उत्तर

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री (श्री रामनाथ ठाकुर)

(क) से (ग):       घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) की दिशा में आगे बढ़ने के लिए 3 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- तिलहन (एनएमईओ-ओएस) को मंजूरी दी गई थी। मिशन का लक्ष्य प्राथमिक तिलहन उत्पादन को वर्ष 2022-23 के 39 मिलियन टन से बढ़ाकर वर्ष 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन करना है।

सरकार ने दालों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए 11 अक्टूबर, 2025 को ‘दालों में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन’ शुरू किया है। मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दालों के उत्पादन को 242 लाख टन से बढ़ाकर 350 लाख टन करना है।

एनएमईओ-ओएस का क्रियान्वयन क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से किया जा रहा है। देशभर में 600 से अधिक वैल्यू चेन क्लस्टर संचालित किए जा चुके हैं, जिनका प्रबंधन वैल्यू चेन पार्टनर्स जैसे किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), सहकारी समितियों तथा अन्य एजेंसियों द्वारा किया जाता है। इन क्लस्टरों के अंतर्गत किसानों को नवीनतम उच्च उपज देने वाली किस्मों के उच्च गुणवत्ता वाले बीज निःशुल्क उपलब्ध तथा उत्तम कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाता है। मिशन प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों से तेल की प्राप्ति बढ़ाने के लिए कटाई उपरांत अवसंरचना (तेल मिलों) की स्थापना एवं उन्नयन को भी समर्थन प्रदान करता है। मिशन फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन (एफएलडी), क्लस्टर फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन (सीएफएलडी) और ब्लॉक-लेवल डेमोंस्ट्रेशन (बीएलडी) के ज़रिए किसानों को नवीनतम उच्च उपज देने वाली किस्मों तथा उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादकता को बेहतर बनाने पर फोकस करता है। मिशन प्रजनक बीजों की खरीद हेतु 100% सहायता, सार्वजनिक क्षेत्र में बीज उत्पादन एवं भंडारण क्षमता में वृद्धि करने के लिए नए सीड हब तथा विशिष्ट बीज भंडारण इकाइयों की स्थापना के माध्यम से प्रमाणित बीजों की उपलब्धता को सुदृढ़ करता है। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के माध्यम से किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर तिलहन की खरीद भी सुनिश्चित की गई है।

तिलहन मिशन के तहत, वर्ष 2025-26 में वैल्यू चेन क्लस्टर में मुफ़्त बीज वितरण के तहत 13.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया और खरीफ़ 2026 के दौरान अब तक 4.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है। हाल ही में जारी की गई किस्मों के प्रजनक बीजों के उत्पादन हेतु 60 सीड हब तथा 50 विशेषीकृत बीज भंडारण इकाइयों को स्वीकृति दी गई हैं। तिलहन का उत्पादन वर्ष 2022-23 में 413.55 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 430.59 लाख टन (तीसरा अग्रिम अनुमान, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग) हो गया है।

चीनी और वनस्पति तेल निदेशालय, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य तेलों की घरेलू उपलब्धता वर्ष 2022–23 में 124.23 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 126.30 लाख टन हो गई और खाद्य तेलों का आयात वर्ष 2022–23 में 165.00 लाख टन से घटकर वर्ष 2024–25 में 160.72 लाख टन हो गया है।

दलहन मिशन के तहत, राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से दलहन किसानों को विभिन्न गतिविधियों हेतु सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें बीज उत्पादन, उच्च उत्पादकता एवं जलवायु-अनुकूल प्रमाणित बीजों का वितरण, नवीनतम फसल उत्पादन तकनीकों के प्रदर्शन, क्षमता निर्माण, बीज किट वितरण तथा कटाई उपरांत अवसंरचना को सुदृढ़ करना शामिल है। किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के तहत राज्यों की मांग के आधार पर पंजीकृत एवं इच्छुक किसानों से तूर, उड़द एवं मसूर की सुनिश्चित खरीद राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) तथा राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) के माध्यम से की जाती है।

वर्ष 2025–26 के दौरान, दलहन मिशन के तहत 4.79 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नवीनतम फसल उत्पादन एवं संरक्षण तकनीकों के प्रदर्शन आयोजित किए गए, 4.33 लाख क्विंटल गुणवत्तापूर्ण बीजों का उत्पादन, 3.10 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का वितरण तथा किसानों को 9.25 लाख बीज किट निःशुल्क वितरित किए गए। दलहन का उत्पादन वर्ष 2023–24 में 242.46 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2025–26 में 274.09 लाख टन (तीसरा अग्रिम अनुमान, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग) हो गया है। दलहन आयात वर्ष 2024–25 में 72.56 लाख टन से घटकर वर्ष 2025–26 में 59.64 लाख टन हो गया है, जो घरेलू उपलब्धता में सुधार को दर्शाता है।

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