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विभाग-संबंधित गृह कार्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की 259वीं, 260वीं, 261वीं रिपोर्ट पर प्रेस विज्ञप्ति

डा. राधा मोहन दास अग्रवाल, संसद सदस्य, राज्य सभा की अध्यक्षता में विभाग-संबंधित गृह कार्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने आज आज दिनांक  7 अगस्त, 2026 को संसद में निम्नलिखित प्रतिवेदन प्रस्तुत किए:-

  1. ‘साइबर  अपराध – जटिलताएँ, सुरक्षा और रोकथाम पर समिति के दो सौ चौवनवें प्रतिवेदन में अंतर्विष्ट सिफारिशों/ समुक्तियों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई’  संबंधी  259वां प्रतिवेदन;
  2. ‘जम्मू और कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र में प्रशासनिक  व्यवस्था, सामाजिक-आर्थिक विकास और आंतरिक सुरक्षा; तथा लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र में सीमा सुरक्षा प्रबंधन और तैयारी की समीक्षा’ संबंधी 260वां प्रतिवेदन; और
  3. ‘आपदा प्रबंधन’ संबंधी 261वां प्रतिवेदन।

समिति ने 5 अगस्त, 2026 को आयोजित अपनी बैठक में प्रारूप प्रतिवेदनों पर विचार किया और इन्हें स्वीकार किया। इन प्रतिवेदनों में समिति द्वारा की गई सिफारिशें/समुक्तियाँ संलग्न हैं।

ये प्रतिवेदन राज्य सभा सचिवालय की वेबसाइट- http://sansad.in/rs/hi/committees/departmentally-related-standing-committees →गृह कार्य संबंधी समिति →प्रतिवेदन पर भी उपलब्ध हैं।

समुक्तियाँ / सिफ़ारिशें एक नज़र में

विभाग-संबंधित गृह कार्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति

साइबर अपराध –  जटिलताएँ सुरक्षा और रोकथाम पर समिति के दो सौ चौवनवें प्रतिवेदन में अंतर्विष्ट सिफारिशों/समुक्‍तियों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई संबंधी 259वां प्रतिवेदन

समिति सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहितानियम2021‘ के नियम 3(2) और 3क के तहत मध्यवर्तियों की शिकायत-निवारण जिम्मेदारियों (जैसे शिकायतों के निपटारे के लिए तय समय-सीमा और शिकायत अपीलीय समितियों का गठन) के बारे में मंत्रालय के उत्तर को नोट करती है। हालांकिसमिति समुक्ति करती ​​है कि मंत्रालय का उत्तर उसकी कुछ खास सिफारिशों का  ठीक से समाधान नहीं करता हैजैसे कि शिकायत दर्ज करने का एक जैसा तरीका अपनानाशिकायतों के आंकड़ों को सार्वजनिक करना और शिकायत-निवारण तंत्र को नए डेटा-सुरक्षा ढांचे के साथ जोड़ना। इसलिएसमिति पुनः दोहराती है कि मंत्रालय को सभी मध्यवर्तियों के लिए एक स्टैंडर्डआसानी से इस्तेमाल होने वाला और कई भाषाओं वाला शिकायत-निवारण तंत्र बनाना चाहिए। इसमें यूनिक शिकायत नंबरट्रैकिंग की सुविधातय समय-सीमाठोस वजहों के साथ निपटारा और बिना हल हुई शिकायतों को अपने-आप आगे बढ़ाने (ऑटोमैटिक एस्केलेशन) की व्यवस्था होनी चाहिए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि बिना पहचान उजागर किए शिकायतों के आंकड़ों को समय-समय पर प्रकाशित किया जाए और तंत्र को लागू डेटा-सुरक्षा नियमों के अनुरूप बनाने के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाएसाथ हीइसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक सुदृढ निगरानी तंत्र भी स्थापित किया जाए।

(पैरा 3.1.8)

समिति ने मंत्रालय के  उत्तर को नोट किया। सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता)  नियम2021 के अंतर्गत उठाए गए कदमों की सराहना करते हुएसमिति समुक्ति करती है कि मौजूदा व्यवस्था अभी भी काफी हद तक ओटीटी प्लेटफॉर्म्स द्वारा अपनाए जाने वाले स्व-नियमन पर निर्भर है। इसलिएसमिति अपनी इस सिफ़ारिश को दोहराती है कि सरकार को एक स्वतंत्र पोस्ट-रिलीज़ समीक्षा  पैनल‘ बनाने की संभावना पर तेज़ी से विचार करना चाहिए। इस पैनल में बाल विकासशिक्षाकानूनसामाजिक विज्ञान और नागरिक समाज के विशेषज्ञ शामिल होने चाहिएजो चिह्नित कंटेंट की समीक्षा कर सकें और ज़रूरी सुधार के उपाय सुझा सकें। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि ओटीटी सामग्री के विनियमन हेतु प्रस्तावित व्यापक वैधानिक ढांचे में प्रौद्योगिकी-सक्षम सुदृढ आयु सत्यापन तंत्रप्रभावी अभिभावकीय नियंत्रण और नियमों का पालन न करने पर उचित दंड का प्रावधान शामिल होना चाहिए। समिति इस मामले में हुई प्रगति के बारे में जानकारी चाहती है।

(पैरा 3.2.9)

समिति यह नोट करती है कि ऑनलाइन विज्ञापनों के विनियमन हेतु तंत्र वर्तमान में निर्माणाधीन है। इसलिएसमिति सिफ़ारिश करती है कि नीति को अंतिम रूप देते समय मंत्रालय विदेशी विज्ञापनदाताओं के लिए सुदृढ सत्यापन संबंधी प्रावधानों को समुचित रूप से सम्मिलित करे। इन नियमों में डिजिटल दस्तावेज़ सत्यापनवास्तविक समय में पहचान प्रमाणीकरण तथा ज़ीरो-ट्रस्ट सिद्धांतों पर आधारित लगातार निगरानी की व्यवस्था शामिल होनी चाहिएताकि भारतीय उपयोगकर्ताओं को लक्षित करने वाले धोखाधड़ी और गुमराह करने वाले विज्ञापनों को रोका जा सके। समिति इस मामले में की गई कार्रवाई के बारे में भी जानकारी चाहती है।

(पैरा 3.3.2)

            समिति MuleHunter.ai के दायरे का विस्तार कर अतिरिक्त बैंकों तक इसकी पहुँच सुनिश्चित किए जाने की दिशा में हुई प्रगति की सराहना करती है। हालाँकिसमिति पुनः दोहराती है कि प्रस्तावित केंद्रीय भुगतान धोखाधड़ी सूचना रजिस्ट्री को शीघ्र परिचालन में लाया जाए तथा इसकी पूर्ण क्षमता का प्रभावी ढंग से उपयोग सुनिश्चित किया जाए। इसे एक ऐसे व्यापकवास्तविक समय आधारित तथा परस्पर-संचालित धोखाधड़ी संबंधी डेटा भंडार के रूप में विकसित किया जाएजिसका इस्तेमाल बैंक और दूसरे संबंधित हितधारकों के लिए सुलभ होताकि समूचे क्षेत्र के स्तर पर विश्लेषणसमन्वित कार्रवाई तथा उभरते हुए धोखाधड़ी के खतरों की समय रहते पहचान सुनिश्चित की जा सके।

(पैरा 3.4.2)

            समिति ने मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत उत्तर को नोट करती है। साइबर अपराध के मामलों की जांच के लिए राज्य सरकारों की सहमति प्राप्त करने के संबंध में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए तथा इस संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का संज्ञान लेते हुए समिति यह समुक्ति करती ​​है कि कुछ राज्यों द्वारा सामान्य सहमति वापस लेने का मुद्दाएक से ज़्यादा राज्यों और देशों से जुड़े साइबर अपराधों की बिना रुकावट और समय पर होने वाली जांच में बाधा डाल रहा है। इसलिएसमिति अपनी इस सिफ़ारिश को दोहराती है कि गृह मंत्रालय को संबंधित राज्य सरकारों के साथ मिलकर साइबर अपराध के मामलों में सीबीआई जांच को आसान बनाने के लिए एक स्थायी तरीका निकालना चाहिए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 में आवश्यकतानुसार उपयुक्त संशोधन किए जाने की व्यवहार्यता का परीक्षण करेताकि राष्ट्रीय एवं अंतर्राज्यीय महत्व के साइबर अपराधों की प्रभावी जाँच करने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सक्षम बनाया जा सके।

(पैरा 3.5.9)

समिति मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत उत्तर को नोट करती है। अनेक राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में ई-एफआईआर प्रणाली के कार्यान्वयन तथा इस सुविधा को अन्य राज्यों तक विस्तारित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए समिति का विचार है कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों को स्वतः ई-एफआईआर में परिवर्तित करने हेतु एक समान एवं निर्बाध तंत्र की स्थापना अत्यंत आवश्यक है। इससे मामलों की त्वरित जाँच सुनिश्चित होगी तथा पीड़ितों को धोखाधड़ी से हड़पी गई राशि की समयबद्ध वसूली एवं वापसी में सुविधा होगी। इसलिए समिति सिफ़ारिश करती है कि गृह मंत्रालयभारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सीके माध्यम सेसभी राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए पूरे देश में ई-एफआईआर प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करे।

(पैरा 3.6.4)

            समिति उच्चतर शिक्षा संस्थानों के लिए विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत उत्तर को नोट करती है तथा विद्यालयी शिक्षा में साइबर अपराध की रोकथाम एवं साइबर स्वच्छता संबंधी शिक्षा को समाविष्ट किए जाने संबंधी अपनी पूर्व सिफ़ारिश को पुनः दोहराती है। समिति सिफ़ारिश करती है कि संबंधित मंत्रालयएनसीईआरटीसीबीएसई तथा राज्य शिक्षा प्राधिकरणों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सभी केंद्रीय एवं राज्य शिक्षा बोर्डों के अंतर्गत प्रारम्भिक कक्षाओं से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर तक आयु-उपयुक्तक्रमिक एवं अनिवार्य साइबर सुरक्षा पाठ्यक्रम विकसित एवं लागू करे। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि इसके अनुरूप शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूलबहुभाषी शिक्षण सामग्रीसाइबर अपराध एवं ऑनलाइन दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराने की व्यावहारिक जानकारी तथा सभी विद्यालयों में इसके एकरूप एवं प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक समयबद्ध निगरानी तंत्र भी विकसित किया जाए।

(पैरा 3.7.33)

            समिति मंत्रालय द्वारा हित धारकों के साथ किए जा रहे परामर्शात्मक प्रयासों को नोट करती है तथा इस तथ्य की सराहना करती है कि इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाईसाइबर अपराध से संबंधित विधिक ढाँचे को सुदृढ बनाने के उद्देश्य से विभिन्न हितधारकों के साथ निरंतर संवाद एवं परामर्श कर रहा है। तथापिसमिति यह समुक्ति करती है कि जैसा कि उसकी पूर्व सिफ़ारिश में उल्लेख किया गया थाएक औपचारिक एवं आवधिक समीक्षा तंत्र की स्थापना इस दिशा में अधिक लाभकारी सिद्ध होगी। इसलिए,समिति पुनः दोहराती है कि गृह मंत्रालयइलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई), विधि और न्याय मंत्रालय तथा अन्य संबंधित नियामक संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर एक समयबद्ध एवं बहुविषयक तंत्र की स्थापना करेजो उभरती प्रौद्योगिकियोंनिरंतर विकसित हो रहे साइबर खतरों तथा उनके राष्ट्रीय सुरक्षा एवं नागरिकों के अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभावों के आलोक में साइबर अपराध संबंधी विधिक ढाँचे की समय-समय पर समीक्षा एवं अद्यतन करने का काम करेगा।

(पैरा 3.8.2)

            समिति नोट करती है कि मंत्रालय ने साइबर अपराध के विनियमन से संबंधित वर्तमान वैधानिक ढाँचे का विवरण प्रस्तुत किया है। तथापिसमिति स्पष्ट परिभाषाओंप्रौद्योगिकी-तटस्थ प्रावधानों तथा उभरते हुए साइबर अपराधों के लिए प्रभावी दण्डात्मक प्रावधानों से युक्त एक व्यापक एवं एकीकृत साइबर अपराध कानून की आवश्यकता संबंधी अपनी पूर्व सिफ़ारिश को पुनः दोहराती है। समिति आगे सिफ़ारिश करती है कि जटिल तथा अंतरराष्ट्रीय स्वरूप के साइबर अपराधों की प्रभावी जाँच के लिए राष्ट्रव्यापी अधिकार-क्षेत्रउच्च तकनीकी विशेषज्ञता तथा विभिन्न एजेंसियों के मध्य प्रभावी समन्वय से युक्त एक विशेषीकृत एकीकृत साइबर अपराध कार्यबल की स्थापना की जाए।

(पैरा 3.9.3)

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समुक्तियाँ / सिफ़ारिशें एक नज़र में

विभाग-संबंधित गृह कार्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति

जम्मू और कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्थासामाजिक-आर्थिक विकास और आंतरिक सुरक्षातथा लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र में सीमा सुरक्षा प्रबंधन और तैयारी की समीक्षा’ संबंधी 260वां प्रतिवेदन

1.   समिति सराहना के साथ नोट करती है कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन में आपदा प्रबंधन तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया रूपरेखा एक सुदृढएकीकृत तथा प्रौद्योगिकीसंचालित प्रणाली के रूप में विकसित हुई हैजिसमें समन्वित संस्थागत व्यवस्थाएँउन्नत निगरानी तंत्रप्रभावी भीड़ प्रबंधन नयाचारव्यापक चिकित्सा तैयारियाँ तथा त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताएँ सम्मिलित हैं। समिति प्रतिवर्ष श्राइन में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षासंरक्षा तथा कल्याण सुनिश्चित करने में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्डसंघ राज्य क्षेत्र प्रशासनपुलिसआपदा प्रबंधन प्राधिकरणोंस्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य हितधारक एजेंसियों के मध्य घनिष्ठ समन्वय की सराहना करती है।

(पैरा 2.5.2)

2.   समिति आगे यह भी नोट करती है कि आरएफआईडीसक्षम श्रद्धालु अनुरेखणकृत्रिम बुद्धिमत्ताआधारित निगरानी प्रणालियों तथा एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र सहित उन्नत प्रौद्योगिकीय हस्तक्षेपों के प्रभावी उपयोग से वास्तविक समय की स्थितिजन्य जागरूकताभीड़ विनियमन तथा घटना प्रतिक्रिया में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यद्यपि समिति प्राप्त उच्च स्तर की तैयारियों की सराहना करती हैतथापि उसका सुविचारित मत है कि आपदा प्रबंधन एक गतिशील प्रक्रिया हैजिसके लिए उभरते जोखिमोंविकसित होती प्रौद्योगिकियों तथा श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के अनुरूप निरंतर अनुकूलन अपेक्षित है। अतः समिति सिफारिश करती है कि विद्यमान आपदा प्रबंधन रूपरेखा की समयसमय पर समीक्षा तथा उन्नयन किया जाएजिसमें विशेष रूप से पूर्वानुमानआधारित जोखिम आकलन तथा पूर्व चेतावनी प्रणालियों को सुदृढ करनेउभरती प्रौद्योगिकियों का समावेशन करनेआपातकालीन चिकित्सा तथा निकासी अवसंरचना का संवर्धन करनेअग्रिम पंक्ति के कार्मिकों की क्षमता को नियमित प्रशिक्षण के माध्यम से बढ़ाने तथा विभिन्न आपातकालीन परिदृश्यों में सतत तैयारीसुदृढता तथा परिचालनगत प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए बहुएजेंसी मॉक अभ्यासों का नियमित आयोजन करने पर बल दिया जाए।

(पैरा 2.5.3)

3. समिति सराहना के साथ नोट करती है कि रेल मंत्रालय तथा जम्मू और कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र के प्रशासन द्वारा रेलवे अवसंरचना को क्रमिक रूप से सुदृढ बनाने तथा पूरे संघ राज्य क्षेत्र में यात्री सुविधाओं के संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। समिति यह देखकर प्रोत्साहित है कि श्रीनगर रेलवे स्टेशन तथा बनिहालबारामूला खंड के अन्य स्टेशनों का आधुनिक यात्री सुविधाओं के सृजनस्टेशन पुनर्विकास कार्योंपर्यावरणीय अवसंरचनापरिचालन सुधारों तथा दिव्यांगजनों के लिए उन्नत अभिगम्यता के माध्यम से व्यवस्थित रूप से उन्नयन किया जा रहा है। समिति यात्री सुविधापरिचालन दक्षता तथा समग्र यात्रा अनुभव में सुधार के उद्देश्य से विभिन्न प्रचलित परियोजनाओं के कार्यान्वयन में हुई उल्लेखनीय प्रगति तथा अतिरिक्त कार्यों की समयबद्ध स्वीकृति की भी सराहना करती है।

(पैरा 3.2.7)

4.   उल्लेखनीय प्रगति को स्वीकार करते हुए भी समिति का सुविचारित मत है कि जम्मू और कश्मीर में रेलवे संपर्कता का सामरिक महत्त्व केवल परिवहन तक सीमित नहीं हैबल्कि यह आर्थिक विकासपर्यटनक्षेत्रीय एकीकरण तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्त्वपूर्ण उत्प्रेरक के रूप में भी कार्य करती है। अतः समिति सिफारिश करती है कि सभी प्रचलित तथा स्वीकृत अवसंरचना परियोजनाओं का कार्यान्वयन निर्धारित समयसीमा के भीतर सुदृढ़ गुणवत्ता आश्वासन तथा समयसमय पर निगरानी के साथ सुनिश्चित किया जाए। समिति आगे सिफारिश करती है कि क्षेत्र की विशिष्ट भूवैज्ञानिक तथा भूकंपीय विशेषताओं को दृष्टिगत रखते हुए सतत भूतकनीकी निगरानीउन्नत संरचनात्मक स्वास्थ्य निगरानी प्रणालियोंपूर्वानुमानआधारित अनुरक्षण प्रौद्योगिकियों तथा जलवायुअनुकूल अभियांत्रिकी पद्धतियों को रेलवे परिचालन तथा अवसंरचना प्रबंधन में समेकित किया जाए। समिति यह भी सिफारिश करती है कि पर्यावरणीय सुरक्षा उपायोंढाल स्थिरीकरण उपायों तथा आपदा तैयारी तंत्र की समयसमय पर समीक्षा तथा सुदृढ़ीकरण किया जाएताकि क्षेत्र में रेलवे अवसंरचना की दीर्घकालिक सुरक्षासुदृढ़ता तथा धारणीयता सुनिश्चित की जा सके।

(पैरा 3.2.8)

5.   समिति सराहना के साथ नोट करती है कि आर्थिक कार्य संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईएद्वारा 1,667 करोड़ की अनुमानित लागत से श्रीनगर में सिविल एन्क्लेव के विकास के लिए अनुमोदन प्रदान किया गया है। समिति का मत है कि प्रस्तावित एकीकृत टर्मिनल भवनअपनी उन्नत यात्री प्रबंधन क्षमता तथा आधुनिक अवसंरचना के साथसंघ राज्य क्षेत्र की विमानन अवसंरचना को महत्त्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ करेगायात्री सुविधा में सुधार करेगापर्यटन को सुगम बनाएगाक्षेत्रीय संपर्कता को बढ़ाएगा तथा जम्मू और कश्मीर के सामाजिकआर्थिक विकास में योगदान देगा। समिति नागर विमानन मंत्रालयभारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण तथा संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा इस सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करती है तथा अपेक्षा करती है कि कार्य उच्चतम गुणवत्तासुरक्षा तथा धारणीयता मानकों का पालन करते हुए समयबद्ध रूप से निष्पादित किया जाएगा।

(पैरा 3.2.10)

 

6.   समिति आगे श्री माता वैष्णो देवी श्राइन में आने वाले श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती संख्या तथा जम्मू क्षेत्र में बढ़ते पर्यटक आगमन को ध्यान में रखते हुए कटरा क्षेत्र में हवाई अड्डा अथवा उपयुक्त विमानन सुविधा स्थापित करने की व्यवहार्यता का पता लगाने की आवश्यकता को पुनः दोहराती है। समिति का सुविचारित मत है कि ऐसी सुविधा से यात्रा समय में पर्याप्त कमी आनेअभिगम्यता में सुधार होनेवर्तमान परिवहन नेटवर्क पर दबाव कम होने तथा तीर्थयात्रापर्यटन एवं क्षेत्रीय आर्थिक विकास को महत्त्वपूर्ण प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। तदनुसारसमिति सिफारिश करती है कि नागर विमानन मंत्रालयभारतीय विमानपत्तन प्राधिकरणजम्मू और कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र सरकार तथा अन्य संबंधित हितधारकों के परामर्श से कटरा क्षेत्र में हवाई अड्डा अथवा वैकल्पिक विमानन सुविधा विकसित करने के लिए व्यापक तकनीकीआर्थिक तथा पर्यावरणीय व्यवहार्यता अध्ययन कराए।

(पैरा 3.2.11)

 

7.   समिति सराहना के साथ नोट करती है कि भारत सरकारसंघ राज्य क्षेत्र प्रशासन तथा कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा विभिन्न केंद्रीय तथा संघ राज्य क्षेत्र कार्यक्रमों के अंतर्गत सतत निवेश के माध्यम से जम्मू और कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र में सड़क अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में पर्याप्त प्रगति की गई है। समिति सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालयभारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई)राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल)सीमा सड़क संगठन (बीआरओ)लोक निर्माण विभाग तथा अन्य कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा सामरिक राजमार्गोंसुरंगोंपुलों तथा ग्रामीण सड़क नेटवर्क के विस्तार के लिए किए गए समन्वित प्रयासों की सराहना करती हैजिससे दूरस्थसीमावर्ती तथा हिमपातप्रभावित क्षेत्रों में संपर्कता में सुधार हुआ है। समिति विशेष रूप से सभी मौसमों में संपर्कता सुनिश्चित करनेबाढ़ तथा भूस्खलन से प्रभावित सड़कों की पुनर्बहाली तथा अवसंरचना विकास में जलवायुअनुकूल अभियांत्रिकी पद्धतियों के समावेशन पर दिए गए बल से प्रोत्साहित है।

(पैरा 3.2.29)

 

8.   समिति भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी)भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटीतथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सहयोग से जलवायुअनुकूल सड़क विनिर्देश विकसित करनेसामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण सुरंग परियोजनाओं में तेजी लानेश्रीनगर में शहरी यातायात भीड़ कम करने संबंधी उपायों को कार्यान्वित करने तथा तैयारतैनाती योग्य बेली पुलों की खरीद के माध्यम से आपदा तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए प्रशासन द्वारा की गई दूरदर्शी पहलों की सराहना करती है। समिति के विचार मेंये पहल क्षेत्र की विशिष्ट जलवायु तथा भूवैज्ञानिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम सुदृढ़ तथा भविष्य के लिए तैयार अवसंरचना के निर्माण की दिशा में एक व्यापक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती हैं।

(पैरा 3.2.30)

 

9.   उल्लेखनीय प्रगति को स्वीकार करते हुए समिति इस बात पर बल देती है कि पूर्ण की गई परिसंपत्तियों तथा प्रचलित परियोजनाओं के अनुरक्षण के लिए पर्याप्त संसाधन निर्धारित किए जाएँ। समिति को विश्वास है कि सतत संस्थागत सहयोग तथा समन्वित कार्यान्वयन से जम्मू और कश्मीर एक सुदृढदक्ष तथा समावेशी परिवहन नेटवर्क स्थापित करने में सक्षम होगाजो लोगों की विकासात्मक आकांक्षाओं को पूरा करने के साथसाथ राष्ट्र के सामरिक हितों को भी सुदृढ करेगा।

(पैरा 3.2.31)

10. समिति सराहना के साथ नोट करती है कि रूफटॉपउपयोगितास्तरीय तथा विकेंद्रीकृत सौर पहलों को समाहित करने वाली संतुलित रणनीति के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। समिति विशेष रूप से सरकारी भवनों के सौरकरण तथा पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में हुई पर्याप्त प्रगति की सराहना करती हैजिसके परिणामस्वरूप जम्मू और कश्मीर रूफटॉप सौर ऊर्जा के अंगीकरण के क्षेत्र में अग्रणी संघ राज्य क्षेत्रों में से एक के रूप में उभरा है। समिति आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक स्वच्छ ऊर्जा के लाभों का विस्तार करने के उद्देश्य से प्रस्तावित उपयोगिताआधारित समूहीकरण (यूएलएमॉडल का भी स्वागत करती है। समिति सिफारिश करती है कि सभी सरकारी भवनों के सौरकरण के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करनेघरेलू रूफटॉप सौर स्थापनाओं में तेजी लाने तथा अभिनव एवं समावेशी मॉडलों के माध्यम से दूरस्थ एवं अल्पसेवित क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा की पहुँच का विस्तार करने के लिए सतत प्रयास किए जाएँजिससे संघ राज्य क्षेत्र को सतत तथा ऊर्जासुरक्षित विकास की दिशा में संक्रमण को और सुदृढ किया जा सके

(पैरा 3.3.5)

11. समिति सराहना के साथ नोट करती है कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत संघ राज्य क्षेत्र में ग्रामीण पेयजल कवरेज के विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति हुई है तथा इस संबंध में संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों की प्रशंसा करती है। इन उपलब्धियों को स्वीकार करते हुए समिति यह समुक्ति करती है कि वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण कार्यान्वयन की गति प्रभावित हुई हैजिसके परिणामस्वरूप अवसंरचना के निर्माण तथा शेष ग्रामीण परिवारों तक कवरेज के विस्तार में कुछ विलंब हुआ है। अतः समिति सिफारिश करती है कि जल जीवन मिशन की सभी लंबित योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने के लिए पर्याप्त एवं समयबद्ध वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से शेष वंचित परिवारों को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध करानेपुरानी जलापूर्ति प्रणालियों के उन्नयनजल गुणवत्ता निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने तथा हर घर जल प्रमाणन की प्रक्रिया को पूर्ण करने पर विशेष बल दिया जाए। समिति आगे सिफारिश करती है कि सभी जलापूर्ति योजनाओं का अभिकल्पन एवं कार्यान्वयन दीर्घकालिक संधारणीयताजल स्रोतों के संवर्धन तथा जलवायुअनुकूलता को ध्यान में रखकर किया जाएताकि संघ राज्य क्षेत्र के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सुरक्षितविश्वसनीय एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।

(पैरा 3.4.18)

12.      समिति जम्मू और कश्मीर में संस्थागत ऋण वितरण को मजबूत करनेवित्तीय समावेशन का विस्तार करने और कृषि क्षेत्र के लिए जोखिम न्यूनीकरण को बढ़ाने में संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनबैंकिंग क्षेत्र और अन्य हितधारकों के निरंतर प्रयासों की सराहना करती है। समिति विशेष रूप से संघ राज्य क्षेत्र के सभी जिलों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना‘ (पीएमएफबीवाईके विस्तारकिसान क्रेडिट कार्ड योजना के स्थिर विस्तारग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग आउटलेटों और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स में उल्लेखनीय वृद्धिप्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के ऋण के तहत मजबूत प्रदर्शन और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लक्ष्यों की निरंतर प्राप्ति की सराहना करती है। समिति संघ राज्य क्षेत्र के विशिष्ट कृषि और बागवानी उत्पादों के लिए भौगोलिक संकेत (जीआईपंजीकरण प्राप्त करने के लिए की गई पहलों की भी सराहना करती हैजिससे उनकी बाजार पहचान मजबूत होगीमूल्य संवर्धन बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होगा।

(पैरा 3.5.25)

13. इन उपलब्धियों को स्वीकार करते हुएसमिति समुक्ति करती है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पात्र किसानोंविशेष रूप से किसान क्रेडिट कार्डधारकों के कवरेज में और सुधार की आवश्यकता है। इसलिएसमिति सिफारिश करती है कि फसल बीमा योजना के तहत अधिक से अधिक कवरेज प्राप्त करने के लिए जागरूकता बढ़ानेनामांकन प्रक्रियाओं को सरल बनाने और डिजिटल प्लेटफॉर्मों तथा बैंकिंग नेटवर्क का लाभ उठाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएं। समिति यह भी सिफारिश करती है कि छोटे और सीमांत किसानोंमहिला किसानोंकिसान उत्पादक संगठनों (एफपीओऔर कृषि तथा संबद्ध क्षेत्रों में लगे उद्यमियों को संस्थागत ऋण के विस्तार पर अधिक जोर दिया जाए। समिति यह भी सिफारिश करती है कि लंबित जीआई आवेदनों की शीघ्र स्वीकृति प्राप्त करने और जीआई-टैग वाले उत्पादों की ब्रांडिंगप्रसंस्करणमूल्य संवर्धन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंताकि जम्मू और कश्मीर की कृषि अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सके और इसके किसान समुदाय के लिए स्थायी आजीविका के अवसर सुनिश्चित हो सकें।

(पैरा 3.5.26)

14. समिति नई केंद्रीय क्षेत्र योजना (एनसीएसएस-2021) के तहत संघ राज्य क्षेत्र में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने में हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति को नोट करती है। समिति प्रोत्साहनों की समय पर स्वीकृति और वितरण के माध्यम से एक अनुकूल औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में सरकार और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के प्रयासों की सराहना करती हैजिसने पर्याप्त निवेश को आकर्षित किया हैनई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना को सुगम बनाया है और रोजगार के अत्यधिक अवसर पैदा किए हैं। समिति स्थानीय और गैरस्थानीय दोनों उद्यमियों की सक्रिय भागीदारी को देखकर प्रोत्साहित हैजो जम्मू और कश्मीर में बढ़ते निवेशक विश्वास को दर्शाता है। हालांकिसमिति का यह विचार है कि औद्योगिक विकास की गति को बनाए रखने के लिए निरंतर नीतिगत सहायता और योजना का कुशल कार्यान्वयन महत्वपूर्ण होगा। इसलिएसमिति सिफारिश करती है कि एनसीएसएस-2021 के तहत स्थानीय उद्यमिताएमएसएमईस्टार्टअप्स और रोजगारउन्मुख उद्योगों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देते हुएसमयबद्ध और पारदर्शी तरीके से प्रोत्साहनों की स्वीकृति और वितरण जारी रखा जाए। समिति यह भी सिफारिश करती है कि औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करनेव्यापार करने में आसानी को सुगम बनानेउद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास को बढ़ाने और मूल्यवर्धित निर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्रित प्रयास किए जाएंताकि औद्योगिक विकास संघ राज्य क्षेत्र में व्यापक और सतत सामाजिकआर्थिक विकास में परिवर्तित हो सके।

(पैरा 3.6.5)

15. समिति जम्मू और कश्मीर के समृद्ध और विविध खनिज संसाधनों का व्यवस्थित अन्वेषण करने में संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनखान मंत्रालय और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई), खनिज अन्वेषण एवं परामर्श लिमिटेड (एमईसीएलतथा ओएनजीसी सहित संबंधित अन्वेषण एजेंसियों के प्रयासों को नोट करती हैजिसके परिणामस्वरूप लिथियमनीलमचूना पत्थरग्रेफाइटलिग्नाइट और संगमरमर जैसे रणनीतिक और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ये खनिज संघ राज्य क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देनेनिवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजित करने की अपार क्षमता रखते हैं। समिति का विचार है कि जम्मू और कश्मीर की विशाल खनिज संपदा का दोहन वैज्ञानिकपर्यावरण के अनुकूल और आर्थिक रूप से लाभदायक तरीके से किया जाना चाहिए। इसलिएसमिति सिफारिश करती है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों और स्थानीय समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुएसमयबद्ध वैधानिक और वन मंजूरियोंबुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण और उन्नत अन्वेषण प्रौद्योगिकियों को अपनाकर अन्वेषण गतिविधियों में तेजी लाई जाए। समिति इस बात पर भी जोर देती है कि संघ राज्य क्षेत्र के भीतर मूल्य संवर्धनखनिजआधारित उद्योगों और कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि खनिज विकास का लाभ बढ़े हुए रोजगारऔद्योगिक विकास और सतत सामाजिकआर्थिक विकास के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्राप्त हो सके।

(पैरा 3.7.3)

16. समिति 2019 के बाद से जम्मू और कश्मीर में स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए पर्याप्त निवेश की सराहना करती है और एम्सनए सरकारी मेडिकल कॉलेजोंविशिष्ट स्वास्थ्य संस्थानोंनर्सिंग कॉलेजों और क्रिटिकल केयर सुविधाओं की स्थापना के माध्यम से स्वास्थ्य परिदृश्य को बदलने में भारत सरकार और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के ठोस प्रयासों की सराहना करती है। समिति यह नोट करके प्रोत्साहित है कि इन पहलों नेविभिन्न केंद्रीय और संघ राज्य क्षेत्र की योजनाओं के तहत निवेश के साथ मिलकरविशेष रूप से दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों में तृतीयक स्वास्थ्य देखभालचिकित्सा शिक्षाआपातकालीन तैयारियों और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को काफी मजबूत किया है। समिति जेकेसेहत प्लेटफॉर्मटेलीमेडिसिन और टेलीरेडियोलॉजी सेवाओं सहित डिजिटल स्वास्थ्य पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन को भी नोट करती हैजो भौगोलिक बाधाओं को दूर कर रही हैं और विशेषज्ञ स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच में सुधार कर रही हैं। इन पहलों और हासिल की गई प्रगति को नोट करते हुएसमिति का यह विचार है कि दूरस्थसीमावर्ती और कठिन क्षेत्रों में योग्य डॉक्टरों और विशेषज्ञों की उपलब्धता समान स्वास्थ्य सेवा वितरण सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है। इसलिएसमिति सिफारिश करती है कि प्रशासन नियमित भर्ती में और तेजी लाएस्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ प्रशिक्षण का विस्तार करेजिला रेजीडेंसी कार्यक्रम को मजबूत करे और कठिन क्षेत्रों में सेवा देने वाले चिकित्सा पेशेवरों के लिए उपयुक्त वित्तीय और करियर संबंधी प्रोत्साहन  प्रदान करना जारी रखे। समिति यह भी सिफारिश करती है कि डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचेटेलीमेडिसिन नेटवर्क और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मजबूत इंटरनेट कनेक्टिविटीआवधिक क्षमता निर्माण और निरंतर निगरानी के माध्यम से और मजबूत किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भौगोलिक बाधाओं से परे गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा हर नागरिक तक पहुंचे।

(पैरा 3.8.37)

17. समिति संघ राज्य क्षेत्र में मातृ एवं प्रजनन स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार को भी नोट करती हैविशेष रूप से 1.5 की कुल प्रजनन दर (टीएफआरकी प्राप्तिजो राष्ट्रीय औसत से कम है और सार्वजनिक स्वास्थ्य में निरंतर प्रगति को दर्शाती है। समिति मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करनेलगभग शतप्रतिशत संस्थागत प्रसव हासिल करनेपरिवार नियोजन सेवाओं तक पहुंच का विस्तार करनेमहिला साक्षरता को बढ़ावा देने और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओंविशेष रूप से आशाओं और एएनएम को सशक्त बनाने के लिए प्रशासन की सराहना करती हैजिनका सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा में योगदान सराहनीय रहा है। समिति सिफारिश करती है कि किशोरावस्था के स्वास्थ्यमहिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरणमातृ पोषणप्रजनन स्वास्थ्य जागरूकता और गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य देखभाल  परिवार नियोजन सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच पर निरंतर बल देकर इन उपलब्धियों को बनाए रखा जाएविशेष रूप से जनजातीयसीमावर्ती और अन्य वंचित क्षेत्रों में।

(पैरा 3.8.38)

18. समिति नोट करती है कि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) सेहत योजना के सफल कार्यान्वयन ने लाखों लाभार्थियों को कैशलेस उपचार प्रदान करके स्वास्थ्य देखभाल के वित्तीय बोझ को काफी कम कर दिया है। समिति गोल्डन कार्ड जारी करने, अस्पतालों को सूचीबद्ध करने और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से हासिल किए गए व्यापक कवरेज पर संतोष व्यक्त करती है। समिति सिफारिश करती है कि योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने, वंचित जिलों में सूचीबद्ध अस्पतालों और विशिष्ट उपचार सुविधाओं के नेटवर्क का विस्तार करने, और सेवा की गुणवत्ता व लाभार्थी संतुष्टि की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लाभ पूरे संघ राज्य क्षेत्र में समान रूप से सुलभ हों।

(पैरा 3.8.39)

 

19. समिति राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 और नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत शिक्षा तक पहुंच का विस्तार करनेस्कूल के बुनियादी ढांचे में सुधार करनेडिजिटल शिक्षणअध्ययन सुविधाओं को शुरू करने और छात्रों के प्रतिधारण को बढ़ाने के लिए प्रशासन द्वारा किए गए उपायों को नोट करती है। समिति विशेष रूप से प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर में 2023-24 में 8.97 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 1.50 प्रतिशत और इसी अवधि के दौरान उच्चप्राथमिक स्तर स्तर पर 4.30 प्रतिशत से घटकर 3.20 प्रतिशत होने की उल्लेखनीय गिरावट का स्वागत करती है। समिति का विचार है कि 2030 तक सार्वभौमिक नामांकन के लिए रोडमैप तैयार करना और महिलाओंजनजातीय समुदायोंदूरस्थ क्षेत्रोंव्यावसायिक शिक्षा और डिजिटल शिक्षा से संबंधित प्रस्तावित हस्तक्षेप भी सकारात्मक कदम हैं।

(पैरा 3.9.6)

 

20. हालाँकि, समिति चिंता व्यक्त करती है कि माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 2024-25 में बढ़कर 12.60 प्रतिशत हो गई है। यह आगे नोट करती है कि सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) प्राथमिक स्तर पर 114.2 से गिरकर उच्च-प्राथमिक स्तर पर 77.0, माध्यमिक स्तर पर 65.4 और उच्च-माध्यमिक स्तर पर 53.7 हो गया है। ये आंकड़े विशेष रूप से प्रारंभिक चरण के बाद छात्रों के प्रतिधारण और अगली कक्षाओं में प्रवेश में बनी हुई कमी को दर्शाते हैं। इसलिए, समिति सिफारिश करती है कि सार्वभौमिक नामांकन प्राप्त करने के रोडमैप को स्पष्ट रूप से परिभाषित वार्षिक, जिला-वार और चरण-वार लक्ष्यों के माध्यम से मिशन मोड में लागू किया जाए और मुख्य सचिव के स्तर पर वर्ष में कम से कम दो बार प्रगति की समीक्षा की जाए, तथा निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहने वाले जिलों और शैक्षणिक क्षेत्रों में सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।

(पैरा 3.9.7)

21. समिति आगे माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट में वृद्धि को दूर करने के लिए एक केंद्रित माध्यमिक स्कूल प्रतिधारण कार्यक्रम तैयार करने की सिफारिश करती है। इस कार्यक्रम के तहत लक्षित छात्रवृत्तिमुफ्त या रियायती परिवहनछात्रावास  आवासीय सुविधाएंडिजिटल उपकरणउपचारात्मक और ब्रिज कोर्सकरियर परामर्श और व्यावसायिक अनुभव प्रदान किया जाना चाहिए। लड़कियोंआर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चोंजनजातीय और प्रवासी समुदायोंदिव्यांग बच्चों और सीमावर्तीपर्वतीय  बर्फबारी वाले क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रत्येक स्कूल को लंबे समय तक अनुपस्थितिखराब शैक्षणिक प्रदर्शनवित्तीय संकट या अन्य कमजोरियों के आधार पर ड्रॉपआउट के जोखिम वाले छात्रों की पहचान करनी चाहिएऔर समय पर परामर्श तथा घर के स्तर पर फॉलोअप करना चाहिए।

(पैरा 3.9.8)

22. मानव संसाधनों और बुनियादी ढांचे के प्रस्तावित युक्तीकरण को नोट करते हुएसमिति सिफारिश करती है कि शिक्षकों की तैनाती नामांकनरिक्तियों और भौगोलिक आवश्यकताओं के पारदर्शीडेटा-संचालित और विषय-वार मूल्यांकन के माध्यम से की जानी चाहिए। ग्रामीणसीमावर्ती और कठिन क्षेत्रों के स्कूलों को मुख्य विषयों के शिक्षकों के बिना नहीं छोड़ा जाना चाहिए। ऐसे क्षेत्रों में योग्य शिक्षकों को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए उपयुक्त प्रोत्साहनआवास और न्यूनतम कार्यकाल के प्रावधान लागू किए जा सकते हैं। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटीके चरणबद्ध कार्यान्वयन के साथ पर्याप्त तैयारी का समयप्रशिक्षण के अवसर और सुरक्षा उपाय होने चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मौजूदा शिक्षण व्यवस्था बाधित न हो।

(पैरा 3.9.9)

23. समिति स्कूल से कॉलेज में निर्बाध संक्रमण, संस्थानों के विस्तार, डिजिटल और दूरस्थ शिक्षा, व्यावसायिक एकीकरण, महिला-केंद्रित हस्तक्षेपों और जनजातीय व दूरस्थ क्षेत्रों में आउटरीच के लिए उच्च शिक्षा विभाग के प्रस्तावों की सराहना करती है। समिति सिफारिश करती है कि इन प्रस्तावों को एक समयबद्ध कार्यान्वयन योजना में परिवर्तित किया जाए, जिसमें कम उच्च-माध्यमिक और उच्च-शिक्षा भागीदारी वाले जिलों को प्राथमिकता दी जाए। समिति यह भी समुक्ति करती है कि किसी भी प्रस्तावित डिजिटल विश्वविद्यालय को विश्वसनीय डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी लागू नियामक और गुणवत्ता-आश्वासन आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए और इसे भौतिक संस्थानों के स्थान पर होने के बजाय उनका पूरक होना चाहिए।

(पैरा 3.9.10)

24. समिति यह भी सिफारिश करती है कि व्यावसायिक और कौशलआधारित कार्यक्रमों को पर्यटनआतिथ्यबागवानीकृषिहस्तशिल्पस्वास्थ्य देखभालसूचना प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा सहित जम्मू और कश्मीर की आर्थिक और रोजगार क्षमता के साथ जोड़ा जाए। उद्योग और स्थानीय उद्यमों के साथ संरचित साझेदारी के माध्यम से छात्रों को शिक्षुताइंटर्नशिपउद्यमिता सहायता और  “कमाएं भीसीखें भी” अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। समिति का विचार है कि प्रशासन को नामांकनसमाप्तिशिक्षुताप्लेसमेंट और औसत आय पर कार्यक्रमवार आंकड़े बनाए रखना चाहिए ताकि ऐसी पहलों के वास्तविक रोजगार परिणामों का मूल्यांकन किया जा सके।

(पैरा 3.9.11)

25. समिति समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के कल्याण तथा सामाजिक समावेशन के लिए संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्न प्रकार की सामाजिक कल्याण योजनाओं एवं उपायों को नोट करती है। समिति विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकोंविधवाओंदिव्यांगजनोंमहिलाओंबच्चोंट्रांसजेंडर व्यक्तियोंअनुसूचित जातियोंअनुसूचित जनजातियोंअन्य पिछड़ा वर्गअल्पसंख्यकों तथा अन्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आच्छादित करने वाली 37 केंद्र प्रायोजित योजनाओं तथा 9 संघ राज्य क्षेत्र वित्तपोषित योजनाओं के कार्यान्वयन का स्वागत करती है। समिति जनसुगम पोर्टलप्रस्तावित एकीकृत सामाजिक सुरक्षा योजना पेंशन पोर्टलआधारआधारित सत्यापन तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) तंत्र के माध्यम से कल्याणकारी लाभों के वितरण के डिजिटलीकरण की भी सराहना करती हैजिनमें पारदर्शिता बढ़ानेविलंब को कम करने तथा लाभों के अधिक प्रभावी वितरण को सुनिश्चित करने की पर्याप्त क्षमता निहित है।

(पैरा 3.10.26)

26. समिति संतोष के साथ यह नोट करती है कि एकीकृत सामाजिक सुरक्षा योजना तथा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के अंतर्गत आच्छादित लाभार्थियों की संख्या वर्ष 2023–24 में 8.76 लाख से बढ़कर वर्ष 2025–26 में 10.49 लाख से अधिक हो गई है। समिति सिफ़ारिश  करती है कि प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि कवरेज में हुई इस वृद्धि के साथसाथ पेंशन की समयबद्ध स्वीकृतिनियमित वितरण तथा लाभार्थियों की मूलभूत जीवनयापन आवश्यकताओं और मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए पेंशन राशि का समयसमय पर पुनरीक्षण भी किया जाए। साथ ही, एकीकृत पेंशन पोर्टल को एक निश्चित समयसीमा के भीतर परिचालित किया जाए तथा उसमें आवेदन की प्रगति का पता लगानेआवेदन अस्वीकृत किए जाने के कारणों की जानकारीकमियों संबंधी चेतावनीभुगतान की स्थिति तथा जिला एवं प्रखंड स्तर पर सुलभ शिकायतनिवारण तंत्र की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

(पैरा 3.10.27)

27. समिति राज्य विवाह सहायता योजना (एसएमएएस) तथा लाडली बेटी योजना के अंतर्गत प्रदान की जा रही पर्याप्त वित्तीय सहायता की सराहना करती है तथा सिफ़ारिश करती है कि प्रशासन समयसमय पर यह मूल्यांकन करे कि वर्तमान पात्रता मानदंड तथा आयसीमाएँ प्रचलित सामाजिकआर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप हैं या नहीं। इसके अलावा, राज्य विवाह सहायता योजना के अंतर्गत शैक्षणिक पात्रता में हाल ही में दी गई छूट की सावधानीपूर्वक निगरानी की जाएताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इससे बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने अथवा विवाह की वैधानिक आयु के अनुपालन संबंधी प्रयास अनजाने में कमजोर  पड़ें। साथ हीलाडली बेटी योजना के परिणामों का आकलन केवल खोले गए खातों अथवा जमा की गई धनराशि की संख्या के आधार पर ही नहींबल्कि बालिकाओं की शिक्षाउनकी शैक्षणिक निरंतरताविवाह में विलंब तथा वित्तीय सशक्तिकरण जैसे परिणामआधारित मानकों के आधार पर भी किया जाना चाहिए।

(पैरा 3.10.28)

28. समिति मिशन पोषण के अंतर्गत 28,199 क्रियाशील आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्राप्त व्यापक कवरेज तथा मिशन शक्ति एवं मिशन वात्सल्य के अंतर्गत प्रदान की जा रही संरक्षणात्मक एवं पुनर्वास संबंधी सेवाओं की सराहना करती है। समिति सिफ़ारिश करती है कि सरकार पोषण संबंधी परिणामों तथा आंगनवाड़ी केंद्रों में उपलब्ध अवसंरचनाकार्मिकों की उपलब्धतापेयजलस्वच्छता सुविधाओं एवं वृद्धिनिगरानी उपकरणों की पर्याप्तता का नियमित आकलन कर किसी भी प्रकार की कमी को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि वन स्टॉप सेंटरोंमहिला हेल्पलाइन–181 तथा बाल हेल्पलाइन सेवाओं के कार्यनिष्पादन का समयसमय पर मापनीय मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएजिनमें प्रतिक्रिया समयमामलों के निस्तारणपुनर्वास उपायों की प्रभावशीलता तथा लाभार्थियों की संतुष्टि जैसे मानदंड शामिल हों।

(पैरा 3.10.29)

29. समिति अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण में की गई वृद्धिइसका स्थानीय निकायों तक विस्तारछात्रवृत्ति योजनाओं के कार्यान्वयन तथा सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े समुदायों से संबंधित विद्यार्थियों के लिए छात्रावास सुविधाओं के निर्माण का स्वागत करती है। साथ हीसमिति यह भी सिफारिश करती है कि सभी अपूर्ण छात्रावास परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण किया जाए तथा टाली जा सकने वाली देरी एवं लागत वृद्धि के लिए उत्तरदायित्व भी निर्धारित किया जाए।

(पैरा 3.10.30)

30. समिति प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत हुई प्रगति को नोट करती हैजिसके तहत चिन्हित 357 ग्रामों में से 259 ग्रामों को आदर्श ग्राम घोषित किया जा चुका है। समिति सिफ़ारिश  करती है कि शेष ग्रामों को भी शीघ्रता से इस योजना के अंतर्गत शामिल  किया जाए तथा किसी ग्राम को आदर्श ग्राम घोषित किए जाने का आधार पेयजलस्वच्छताशिक्षास्वास्थ्य सेवाएँसड़कआवासविद्युत तथा आजीविका के अवसरों से संबंधित आवश्यक विकास पैमानों को हासिल करने की सत्यापित उपलब्धि होनी चाहिए। इसके अलावा, किसी ग्राम को आदर्श ग्राम घोषित किए जाने के उपरांत उसका घोषणोपरांत लेखापरीक्षण कराया जाएताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सृजित अवसंरचना कार्यशील है तथा विकास संबंधी कमियाँ पुनः उत्पन्न  हों।

(पैरा 3.10.31)

31. समिति वन अधिकार अधिनियम, 2006 के कार्यान्वयन हेतु उठाए गए कदमों को नोट करती है। तथापिसमिति यह देखती है कि प्राप्त 46,242 व्यक्तिगत एवं सामुदायिक दावों में से केवल 6,172 दावों को स्वीकृत किया गया हैजबकि 39,898 दावों को अस्वीकृत कर दिया गया है। समिति का विचार है कि अस्वीकृत दावों की यह अत्यधिक संख्या गंभीर परीक्षण की अपेक्षा करती है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि प्रशासन अस्वीकृत दावों की समयबद्ध समीक्षा करेताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किया गया थादावेदारों को साक्ष्य प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर प्रदान किया गया थाग्राम सभाओं की समुचित सहभागिता सुनिश्चित की गई थी तथा कारणयुक्त आदेश दावेदारों को उनकी समझ में आने वाली भाषा में उपलब्ध कराए गए थे। इसके अलावा,समीक्षा के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए स्वीकृत अधिकारपत्रों का वितरण बिना किसी विलंब के किया जाए। साथ हीवास्तविक दावेदारोंविशेषकर प्रवासी एवं जनजातीय समुदायों के सदस्यों को आवश्यक विधिक एवं प्रशासनिक सहायता भी प्रदान की जाए।

(पैरा 3.10.32)

32. समिति सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत सार्वभौमिक कवरेजआधारआधारित प्रमाणीकरणस्मार्ट सार्वजनिक वितरण प्रणाली (स्मार्ट पीडीएस) के कार्यान्वयन तथा वन नेशनवन राशन कार्ड (ओएनओआरसी) प्रणाली के सफल परिचालन की उपलब्धि की सराहना करती है। समिति पात्र विधवाओं एवं तलाकशुदा महिलाओं के लिए पृथक राशन कार्ड जारी करनेछूट गए बच्चों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली में शामिल करने तथा अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) एवं प्राथमिकता प्राप्त परिवार (पीएचएच) के लाभार्थियों को अतिरिक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने जैसे लक्षित उपायों का भी स्वागत करती है।

(पैरा 3.10.33)

33. समिति प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई3.0 के अंतर्गत हुई प्रगति को नोट करती है तथा यह समुक्ति करती है कि प्राप्त 12,033 केवाईसी आवेदनों के मुकाबले 11,652 आवेदनों को स्वीकृति प्रदान की गई, 8,286 सदस्यता वाउचर (एसवी) जारी किए गएजबकि केवल 6,713 एलपीजी कनेक्शन स्थापित किए जा सके। समिति सिफ़ारिश करती है कि स्वीकृत आवेदनोंजारी किए गए सदस्यता वाउचरों तथा स्थापित एलपीजी कनेक्शनों के बीच विद्यमान अंतर के कारणों की जिलावार पहचान की जाए तथा उनका निर्धारित समयसीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

(पैरा 3.10.34)

34. समिति 48,451 पंजीकृत प्रवासी परिवारों को राहत एवं पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में हुई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना करती हैविशेष रूप से 6,000 स्वीकृत पदों के विरुद्ध 5,875 प्रवासी युवाओं को नियुक्ति प्रदान किए जाने तथा 4,648 पारगमन आवास इकाइयों का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए। समिति सिफारिश करती है कि शेष भर्ती प्रक्रिया तथा निर्माण कार्यों को शीघ्रतापूर्वक पूर्ण किया जाए तथा निर्मित सभी आवास इकाइयों का पात्र लाभार्थियों को बिना विलंब आवंटन सुनिश्चित किया जाए।

(पैरा 3.11.9)

35. समिति समुक्ति करती है कियद्यपि प्रारंभ में 6,510 परिवारों ने कश्मीर घाटी में वापस लौटने की इच्छा व्यक्त की थीतथापि केवल तीन परिवार ही स्थायी रूप से वहाँ पुनर्वासित हो सके हैं। इसलिएसमिति सिफ़ारिश करती है कि वापसी में बाधा उत्पन्न करने वाले सुरक्षाआवासआजीविकाशिक्षा तथा सामाजिक संबंधी कारकों का व्यापक आकलन किया जाए। इस उद्देश्य से संघ राज्य क्षेत्र के बाहर निवास कर रहे प्रवासी परिवारों का एक संरचित सर्वेक्षण भी कराया जाएताकि पुनर्वास पैकेज की उपयुक्त समीक्षा की जा सके तथा उनकी सुरक्षितस्वैच्छिक एवं गरिमापूर्ण वापसी को सुगम बनाया जा सके। समिति यह भी नोट करती है कि सरकार ने प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के कार्यान्वयन के माध्यम से कश्मीरी प्रवासियों को राहतपुनर्वास एवं कल्याणकारी सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है। इस पैकेज में आवास सहायतारोजगार के अवसरपारगमन आवासनकद राहत की निरंतरताशैक्षिक सहायताआजीविका सहायता तथा प्रवासी संपत्तियों के संरक्षण एवं पुनर्बहाली संबंधी उपाय शामिल हैं।

(पैरा 3.11.10)

36. समिति संघ राज्य क्षेत्र में खेल अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने तथा खेल एवं गैरखेल गतिविधियों के माध्यम से युवाओं की सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन द्वारा किए गए प्रयासों को नोट करती है। समिति इस बात की सराहना करती है कि जम्मू और कश्मीर में 7,828 विद्यालयी खेल मैदान उपलब्ध हैं तथा वर्ष 2025–26 के दौरान 51.91 लाख से अधिक युवाओं ने खेल एवं युवा विकास संबंधी कार्यक्रमों में भाग लियाजो इस दिशा में व्यापक पहुँच एवं उल्लेखनीय सहभागिता को परिलक्षित करता है। समिति सिफारिश करती है कि प्रशासन जिलावार अवसंरचनात्मक कमियों का आकलन करे तथा विशेष रूप से उन जिलों मेंजहाँ तुलनात्मक रूप से खेल सुविधाएँ कम उपलब्ध हैंखेल मैदानों के विकास एवं उन्नयन को प्राथमिकता प्रदान करे।

 (पैरा 3.12.5)

37. समिति युवाओं की सहभागिता में निरंतर बनी हुई गति पर संतोष व्यक्त करती है तथा सिफ़ारिश करती है कि प्रशासन विशेष रूप से ग्रामीणसीमावर्ती एवं पर्वतीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण खेल मैदानोंबहुउद्देशीय खेल परिसरों तथा प्रशिक्षण अवसंरचना का विकास कर खेल अवसंरचना को और सुदृढ़ बनाए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमोंयोग्य प्रशिक्षकों की बेहतर उपलब्धता तथा राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अधिक अवसर उपलब्ध कराकर जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान एवं उनके संवर्धन पर विशेष बल दिया जाए। समिति आगे यह भी सिफ़ारिश करती है कि शैक्षणिक संस्थानों एवं स्थानीय निकायों के साथ साझेदारी को और सुदृढ़ किया जाएताकि खेलकूद एवं शारीरिक गतिविधियों में युवाओं की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके तथा इसके माध्यम से संघ राज्य क्षेत्र के युवाओं में स्वास्थ्यअनुशासन एवं रचनात्मक सहभागिता को प्रोत्साहन मिल सके।

(पैरा 3.12.6)

 38. समिति संघ राज्य क्षेत्र मेंविशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों मेंअतिरिक्त बैंक शाखाओं तथा बैंकिंग संवाददाता आउटलेट्स की स्थापना के माध्यम से बैंकिंग नेटवर्क के उल्लेखनीय विस्तार पर संतोष व्यक्त करती है। समिति गैरबैंकिंग सुविधा से वंचित ग्राम पंचायतों को बैंकिंग सेवाओं के दायरे में लाने तथा दूरस्थ एवं सेवावंचित क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं का विस्तार कर वित्तीय पहुँच में सुधार हेतु किए गए प्रयासों की सराहना करती है। समिति कृषि ऋण में हुई उत्साहजनक वृद्धि को भी नोट करती हैजो कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए संस्थागत वित्त को सुदृढ़ करने पर निरंतर दिए जा रहे बल को परिलक्षित करती है।

(पैरा 3.13.10)

39. समिति सिफारिश करती है कि प्रशासनभारतीय रिज़र्व बैंकसंघ राज्य क्षेत्र स्तरीय बैंकर्स समिति (यूटीएलबीसीतथा बैंकिंग संस्थानों के समन्वय से शेष गैरबैंकिंग सुविधा से वंचित ग्राम पंचायतों एवं ग्रामीण केन्द्रों तक बैंकिंग सेवाओं का विस्तार शीघ्र सुनिश्चित करे तथा साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि दूरस्थसीमावर्ती एवं पर्वतीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण बैंकिंग सेवाएँ उपलब्ध हों। समिति यह भी सिफारिश करती है कि कृषिबागवानीपशुपालन तथा अन्य संबद्ध गतिविधियों के लिए संस्थागत ऋण सहायता को और सुदृढ़ किया जाएजिसमें लघु एवं सीमांत किसानोंपट्टेदार कृषकोंकिसान उत्पादक संगठनों तथा ग्रामीण उद्यमियों पर विशेष बल दिया जाएताकि संघ राज्य क्षेत्र में सतत कृषि विकासवित्तीय समावेशन तथा ग्रामीण आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके।

(पैरा 3.13.11)

40. समिति संतोष के साथ यह भी नोट करती है कि संघ राज्य क्षेत्र में प्राथमिकता क्षेत्र ऋण भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित नियामकीय मानक से अधिक है। समिति सिफारिश करती है कि प्राथमिकता क्षेत्र ऋण पर निरंतर विशेष ध्यान दिया जाएविशेषकर कृषिसूक्ष्म एवं लघु उद्यमोंस्वयं सहायता समूहोंग्रामीण उद्यमियों तथा समाज के अन्य कमजोर एवं वंचित वर्गों के लिए ऋण उपलब्धता को और सुदृढ़ किया जाए।

(पैरा 3.13.12)

41. समिति संतोष के साथ यह नोट करती है कि महामारी काल के दौरान उत्पन्न चुनौतियों के उपरांत संघ राज्य क्षेत्र की अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय सुदृढ़ता का परिचय देते हुए निरंतर आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। समिति सिफ़ारिश करती है कि प्रशासन विविधीकृत एवं समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करनेसतत रोजगार के अवसर सृजित करने तथा संघ राज्य क्षेत्र के सभी क्षेत्रों में आय स्तर में सुधार लाने हेतु अपनी नीतिगत पहलों को निरंतर आगे बढ़ाए। इस संबंध में विशेष ध्यान ग्रामीणसीमावर्ती तथा आर्थिक दृष्टि से अपेक्षाकृत कम विकसित क्षेत्रों के समग्र विकास पर दिया जाना चाहिए। 

(पैरा 3.14.5)

42. समिति संघ राज्य क्षेत्र मेंविशेषकर युवाओं के बीचनशीली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करती है तथा यह नोट करती है कि यह समस्या सामाजिकजनस्वास्थ्यआर्थिक एवं सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती है। समिति प्रशासन द्वारा किए गए सुदृढ़ प्रवर्तन उपायों की सराहना करती हैजिनमें एनडीपीएस अधिनियम एवं पीआईटी एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई में तीव्रता लानासंपत्तियों की कुर्कीमादक पदार्थों के तस्करी नेटवर्कों का ध्वस्तीकरणअवैध खेती के विरुद्ध कार्रवाईअपराधियों के लाइसेंसों का निलंबन तथा ‘नशामुक्त जम्मूकश्मीर अभियान’ का शुभारंभ शामिल है।

(पैरा 3.15.4)

43. समिति का विचार है कि केवल प्रवर्तन संबंधी उपाय इस समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि रोकथामप्रारंभिक हस्तक्षेपनशामुक्तिपुनर्वास तथा प्रभावित व्यक्तियों के सामाजिक पुनर्समावेशन पर समान रूप से विशेष बल दिया जाए। समिति यह भी सिफारिश करती है कि सीमापार मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध खुफिया सूचनाओं पर आधारित अभियानों को और सुदृढ़ किया जाएविधि प्रवर्तन एजेंसियोंशैक्षणिक संस्थानोंस्वास्थ्य विभागों तथा सामुदायिक संगठनों के मध्य समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाया जाएजिला स्तर पर नशामुक्ति एवं परामर्श सुविधाओं का विस्तार किया जाएतथा विद्यार्थियोंअभिभावकों एवं संवेदनशील समुदायों को लक्षित करते हुए जनजागरूकता अभियानों को और अधिक व्यापक बनाया जाए। समिति यह भी सिफारिश करती है कि नशाविरोधी अभियान की प्रगति की समयसमय पर समीक्षा की जाएताकि उसकी प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके तथा पूरे संघ राज्य क्षेत्र में नशीली दवाओं के दुरुपयोग में निरंतर कमी सुनिश्चित की जा सके।

(पैरा 3.15.5)

44. समिति जम्मू एवं कश्मीर में बहुआयामी गरीबी में आई उल्लेखनीय कमी पर संतोष व्यक्त करती है। समिति नोट करती है कि वर्ष 2015–16 से 2019–21 के मध्य हेडकाउंट अनुपात 12.56 प्रतिशत से घटकर 4.80 प्रतिशत हो गयाजिसके परिणामस्वरूप 10 लाख से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। समिति यह भी नोट करती है कि आजीविका सृजनमजदूरी आधारित रोजगारआवासकौशल विकास तथा ग्रामीण अवसंरचना से संबंधित कार्यक्रमों का एक व्यापक ढाँचा कमजोर एवं वंचित परिवारों की सामाजिकआर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से क्रियान्वित किया जा रहा है। समिति सिफारिश करती है कि गरीबी उन्मूलन संबंधी हस्तक्षेपों को उच्च गरीबी वाले जिलों पर अधिक गहनता से केंद्रित किया जाए तथा जिलाविशिष्ट विकास रणनीतियों के माध्यम से उनका प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए। इस संदर्भ में आजीविका के विविधीकरणग्रामीण अवसंरचना के विकासकृषि उत्पादकता में वृद्धिकौशल विकास तथा रोजगार सृजन पर विशेष बल दिया जाना चाहिए। समिति यह भी सिफारिश  करती है कि प्रशासन विभिन्न गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के बीच तालमेल को मजबूत करे, बहुआयामी गरीबी सूचकांक पर आधारित प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित एवं लागू करे तथा गरीबी के सभी आयामों के उन्मूलन संबंधी सतत विकास लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अपने केंद्रित प्रयास निरंतर जारी रखे।

(पैरा 3.15.13)

45. समिति ने नोट किया कि संघ राज्य क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि बेहतर संपर्क सुविधासुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्थाओंउन्नत पर्यटन अवसंरचना तथा पर्यटकों के बीच पुनर्स्थापित विश्वास के कारण संभव हो सकी है। इस संदर्भ में पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा प्रबंधन का विशेष महत्व हैक्योंकि इसका पर्यटकों की सुरक्षा संबंधी धारणाउनके अनुभव की गुणवत्ता तथा पर्यटन क्षेत्र के सतत विकास पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।

(पैरा 4.2.4)

46. समिति गुलमर्ग तथा संघ राज्य क्षेत्र के अन्य प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन तथा जम्मू एवं कश्मीर पुलिस द्वारा की गई व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाओं की सराहना करती है। समिति सुरक्षा कर्मियों की तैनातीनिगरानी तंत्रभीड़ प्रबंधन उपायों तथा पुलिसपर्यटन विभागजिला प्रशासनविकास प्राधिकरणों एवं अन्य संबंधित एजेंसियों के मध्य स्थापित समन्वय पर संतोष व्यक्त करती है। तथापिसमिति सिफ़ारिश करती है कि सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए एक एकीकृत सुरक्षा एवं निगरानी ढाँचा विकसित किया जाएजिसमें व्यापक सीसीटीवी कवरेजकेंद्रीकृत निगरानी सुविधाएँनियमित जोखिम मूल्यांकन तथा समयसमय पर सुरक्षा लेखापरीक्षण सम्मिलित हों। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि प्रत्येक पर्यटन के चरम मौसम से पूर्व विभिन्न एजेंसियों के मध्य स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएँ तय की जाएँ और उनकी समीक्षा की जाएताकि किसी भी सुरक्षासंबंधी घटना की स्थिति में समन्वित एवं त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

(पैरा 4.2.5)

47. समिति प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की स्थापना तथा चिकित्सीय तैयारी सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करती है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियोंप्रतिकूल मौसम तथा पर्यटन के मौसम में बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए समिति सिफ़ारिश करती है कि सभी अधिक भीड़भाड़ वाले  पर्यटन स्थलों पर समर्पित आपातकालीन प्रतिक्रिया इकाइयाँपर्याप्त रूप से सुसज्जित एम्बुलेंसट्रॉमा उपचार सुविधाएँ तथा स्पष्ट रूप से चिन्हित निकासी मार्ग  उपलब्ध कराए जाएँ। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि आपातकालीन संपर्क नंबर तथा सुरक्षा संबंधी निर्देश होटलोंपरिवहन केन्द्रों तथा पर्यटन सुविधाओं वाले स्थानों पर बहुभाषीय स्वरूप में प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएँ।

(पैरा 4.2.6)

48. समिति सोनमर्ग तथा संघ राज्य क्षेत्र के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर जम्मू एवं कश्मीर पुलिसकेंद्रीय रिज़र्व पुलिस बलकेंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों की समन्वित तैनाती की सराहना करती है। समिति श्री अमरनाथ जी यात्रा के लिए की जा रही बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्थाओंनिगरानी तंत्रक्षेत्र पर नियंत्रण के उपायों तथा प्रवेश नियंत्रण प्रणालियों पर भी संतोष व्यक्त करती है। समिति सिफारिश करती है कि वर्तमान अंतरएजेंसी समन्वय तंत्र को एक एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण ढाँचेस्पष्ट रूप से परिभाषित उत्तरदायित्वों तथा वास्तविक समय की सूचनासाझाकरण व्यवस्था के माध्यम से और अधिक संस्थागत स्वरूप प्रदान किया जाए। विशेष रूप से पर्यटन मौसम तथा श्री अमरनाथ जी यात्रा के प्रारंभ होने से पूर्व संयुक्त सुरक्षा लेखापरीक्षण तथा संवेदनशीलता आकलन नियमित रूप से किए जाएँताकि उभरती सुरक्षा चुनौतियों की समय रहते पहचान कर उनका प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

(पैरा 4.4.4)

49. समिति नियंत्रण रेखा (एलओसीतथा अन्य संवेदनशील उच्च हिमालयी क्षेत्रों में राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा हेतु भारतीय सेना द्वारा प्रदर्शित अद्वितीय साहसउच्च स्तर की व्यावसायिक दक्षता तथा उत्कृष्ट परिचालन तत्परता के प्रति अपनी गहन सराहना व्यक्त करती है। समिति उन्नत आयुध प्रणालियोंमानवरहित हवाई प्रणालियोंड्रोनरोधी प्रौद्योगिकियोंआधुनिक निगरानी उपकरणोंविशेषीकृत गतिशीलता प्लेटफॉर्मों तथा सर्वभूभाग वाहनों के समावेशन पर भी संतोष व्यक्त करती है। सुरक्षा चुनौतियों की निरंतर बदलती प्रकृति को ध्यान में रखते हुए समिति सिफारिश करती है कि एकीकृत खुफियानिगरानी एवं टोही (आईएसआरक्षमताओंड्रोनरोधी प्रणालियोंसुरक्षित संचार नेटवर्कों तथा स्वदेशी उच्च हिमालयी प्रौद्योगिकियों के विकास एवं सुदृढ़ीकरण हेतु निरंतर निवेश किया जाए। समिति यह भी सिफारिश करती है कि रक्षा मंत्रालय इन प्रणालियों की सभी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समयबद्ध खरीदतैनाती तथा समयसमय पर तकनीकी उन्नयन सुनिश्चित करे।

(पैरा 4.5.6)

50. समिति अत्यंत दुर्गम भूभाग एवं प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में भारतीय सेना द्वारा बनाए रखी गई व्यापक रसद व्यवस्थाओं तथा भूमिगत रक्षा अवसंरचना की सराहना करती है। समिति यह समुक्ति करती है कि द्रासकारगिल तथा अन्य अग्रिम क्षेत्रों में वर्षभर परिचालन तत्परता बनाए रखना विश्वसनीय परिवहन व्यवस्थापर्याप्त भंडारणसुदृढ़ संचार संपर्कों तथा सैनिकों के लिए उपयुक्त आवासीय सुविधाओं पर काफी हद तक निर्भर करता है। इसलिएसमिति यह सिफ़ारिश  करती है कि सभी मौसमों में उपयोग योग्य सड़कोंसुरंगोंपुलोंउन्नत भंडारण सुविधाओंअग्रिम रसद केंद्रों तथा वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों के विकास में तेजी लाई जाए।

(पैरा 4.5.7)

51. समिति कारगिल बैटल स्कूल तथा पोस्ट43 में प्रदर्शित कठोर सामरिक प्रशिक्षणबल सुरक्षा उपायों तथा आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने हेतु किए जाने वाले अभ्यासों की सराहना करती है। समिति वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान राष्ट्र की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है।

(पैरा 4.5.8)

समापन संबंधी समुक्तियाँ

52. समिति इस अध्ययन दौरे के दौरान उत्कृष्ट समन्वयसहयोग तथा रसद संबंधी सहायता प्रदान करने के लिए गृह मंत्रालयजम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासनश्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्डभारतीय सेनाजम्मू एवं कश्मीर पुलिसकेंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा इस अध्ययन दौरे से संबद्ध सभी अन्य प्राधिकरणों एवं संगठनों के प्रति अपनी हार्दिक सराहना व्यक्त करती है।

(पैरा 4.5.9)

53. समिति समुक्ति करती है कि इस अध्ययन दौरे ने उसे क्षेत्र के समक्ष विद्यमान विकासात्मकप्रशासनिकसुरक्षा तथा सामरिक चुनौतियों के साथसाथ उनके समाधान के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का प्रत्यक्ष एवं व्यापक अवलोकन करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। अधिकारियोंसुरक्षा बलों के कार्मिकों तथा अन्य हितधारकों के साथ हुई विस्तृत विचारविमर्श प्रक्रियाओं तथा समिति द्वारा किए गए स्थल पर प्रत्यक्ष आकलनों ने इन विषयों के संबंध में समिति की समझ को और अधिक समृद्ध एवं व्यापक बनाया है।

(पैरा 4.5.10)

*****

समुक्तियाँ / सिफ़ारिशें एक नज़र में

विभाग-संबंधित गृह कार्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति

आपदा प्रबंधन’ संबंधी 261वां प्रतिवेदन

अध्याय II: आपदा प्रबंधन के लिए नीतियोजनाएंदिशानिर्देश और कानूनीसंस्थागत ढांचा

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति, 2009

            समिति नोट करती है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति 2009 में लागू की गई थीलेकिन तब से आपदा जोखिम के परिदृश्य में काफी बदलाव आया है। जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि हुई हैतीव्र शहरीकरण ने नए जोखिम संकेंद्रण उत्पन्न किए हैंतथा तकनीकी प्रगति ने तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए नई क्षमताएं प्रदान की हैं। समिति सिफ़ारिश करती है कि गृह मंत्रालय को 2009 के बाद के घटनाक्रमों को प्रतिबिंबित करने के लिए आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति, 2009 की समीक्षा की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। इसमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावोंशहरीकरण के जोखिमोंमौसम के पूर्वानुमानचक्रवात ट्रैकिंगक्षति के आकलनप्रारंभिक चेतावनी के प्रसार आदि के लिए एआई और भूस्थानिक प्रौद्योगिकी की भूमिका तथा 2009 के बाद से प्रमुख आपदा घटनाओं से सीखे गए सबकों का अध्ययन व विश्लेषण शामिल हो सकता है। समीक्षा के इस कार्य के अंतर्गत आपदा प्रबंधन के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने के लिए सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रोंवैज्ञानिक एजेंसियों और नागरिक समाज के साथ व्यापक परामर्श भी शामिल होना चाहिए।

(पैरा 2.6.7)

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना

            समिति नोट करती है कि संशोधित राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (एनडीएमपी) 2019 में प्रकाशित हुई थी। आपदा प्रबंधन (संशोधनअधिनियम, 2025 के लागू होनेराष्ट्रीय आपदा शमन कोष (एनडीएमएफके संचालनआपदा प्रबंधन के संबंध में सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों और 2019 के बाद से एआईसहायता प्राप्त पूर्वानुमान क्षमताओं के महत्त्वपूर्ण विकास के बादवर्तमान विधिक और संस्थागत संदर्भ के अनुरूप एनडीएमपी के आगे के संशोधन को गति देने की आवश्यकता है।

(पैरा 2.5.7)

   आकस्मिकता योजना और तैयारी ढांचा

            समिति नोट करती है कि योजनाओं की गुणवत्ता और व्यापकता राज्यों और जिलों के बीच काफी भिन्न होती है और आगे सुदृढ़ीकरण की गुंजाइश बनी हुई हैविशेष रूप से संचालननियमित अद्यतन और जलवायु परिवर्तनशहरीकरण व तकनीकी खतरों से उत्पन्न होने वाले नए जोखिमों के एकीकरण के संदर्भ में। इसलिएसमिति सिफ़ारिश करती है कि एनडीएमए को सभी राज्यों और जिलों में गुणवत्ता में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए आपदा प्रबंधन योजनाओं के लिए एक मानकीकृत टेम्पलेट और बेंचमार्किंग ढांचा विकसित करना चाहिए। जलवायु परिवर्तनशहरीकरण और तकनीकी खतरों से उत्पन्न होने वाले नवीनतम जोखिम मूल्यांकनों को शामिल करते हुए सभी योजनाओं की समीक्षा की जानी चाहिए और उन्हें कम से कम दो वर्ष में एक बार अद्यतन किया जाना चाहिए। इस संबंध में अनुपालन की निगरानी एनडीएमए द्वारा की जा सकती है ताकि सभी स्तरों पर जवाबदेही और समय पर अद्यतन सुनिश्चित किया जा सके।

(पैरा 2.10.5)

            समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि मॉक ड्रिल और सिमुलेशन अभ्यासों की आवृत्ति में काफी वृद्धि की जाएजिसके तहत राज्य और जिला स्तर पर वार्षिक रूप से कम से कम दो बहुएजेंसी अभ्यास आयोजित किए जाएं। कमियों की व्यवस्थित रूप से पहचान करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि एक निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधारात्मक कार्रवाई की जाएसभी स्तरों पर एक संरचित अभ्यासपश्चात् मूल्यांकन तंत्र‘ भी शुरू किया जा सकता है।

(पैरा 2.10.6)

अग्निशमन सेवाएं

            समिति इस तथ्य को नोट करती है कि अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं के अनुरक्षण के संबंध में एक संशोधित मॉडल विधेयक‘ तैयार किया गया था और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उनके अग्नि और आपातकालीन सेवा अधिनियम/नियमों को तैयार करने/अद्यतन करने के लिए सितंबर 2019 में राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को परिचालित किया गया थाहालांकिअब तक केवल 10 राज्यों ने ही इस मॉडल विधेयक को अपनाया है। समिति समुक्ति करती है कि भीड़भाड़ वाले शहरी नियोजन के कारण विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में आग की घटनाओं को नियंत्रित और प्रबंधित करना कभीकभी बहुत कठिन हो जाता हैएक छोटी सी आग की घटना और मानवीय लापरवाही एक भीषण अग्निकांड को जन्म दे सकती है और इसके परिणामस्वरूप संपत्ति और जीवन का भारी नुकसान हो सकता है। इसलिएसमिति सिफ़ारिश करती है कि गृह मंत्रालय एक निश्चित समय सीमा के भीतर शेष राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को संशोधित मॉडल विधेयक के साथ अपने मौजूदा अग्निशमन सेवा कानूनों को अपनाने या उपयुक्त रूप से संरेखित करने के लिए राजी करने और समर्थन देने के लिए सक्रिय कदम उठाए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि इन्हें अपनाने में हुई प्रगति पर नज़र रखनेबाधाओं की पहचान करने और आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए एक समयबद्ध निगरानी और समीक्षा तंत्र स्थापित किया जाए ताकि पूरे देश में अधिक आधुनिकएकसमान और प्रभावी अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा ढांचा सुनिश्चित किया जा सके।

(पैरा 2.11.21)

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए)

            समिति का विचार है कि रोकथामशमनतैयारी और प्रतिक्रिया की संस्कृति को विकसित कर बढ़ावा देना राष्ट्र को आपदा के प्रभावों का सामना करने में सक्षम बनाने के मिशन को पूरा करने के लिए एक पूर्वशर्त है। इसे हासिल करने के लिए विशेषज्ञ आपदा मोचन बल‘ की स्थापना बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि ऐसा बल राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में किसी भी आपदा के समय प्राथमिक प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समिति सिफ़ारिश करती है कि गृह मंत्रालय शेष सात राज्यों/संघ राज्य क्षेत्र (तेलंगानागोवादिल्लीपुडुचेरीलक्षद्वीपचंडीगढ़ और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूहको किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए अपने विशेषज्ञ मोचन बल के गठन हेतु परामर्श जारी करे।

(पैरा 2.11.27)

            समिति नोट करती है कि आपदा प्रबंधन (संशोधनअधिनियम, 2025 के तहत प्रावधान किए जाने के बावजूदकेवल एक राज्य ने ही अब तक यूडीएमए का गठन किया है। समिति सिफ़ारिश करती है कि गृह मंत्रालय सभी राज्य सरकारों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपनी संबंधित राज्य की राजधानियों और नगर निगम शहरों के लिए यूडीएमए गठित करने के लिए परामर्श जारी करे। एनडीएमए को यूडीएमए के प्रभावी संचालन के लिए राज्यों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन और एक मानकीकृत ढांचा भी प्रदान करना चाहिए और देश भर में हुई प्रगति पर नज़र रखने के लिए एक आवधिक अनुपालन निगरानी तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।

(पैरा 2.11.28)

आपदा प्रबंधन के लिए नोडल मंत्रालयों और विभागों का नांमाकन

            समिति नोट करती है कि 22 सितंबर 2025 की अधिसूचना भारत के आपदा प्रबंधन संस्थागत ढांचे के विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। आपदाओं की विशिष्ट श्रेणियों के लिए नोडल मंत्रालयों का औपचारिक नामांकनपूरे आपदा प्रबंधन स्पेक्ट्रम में फैले जनादेश के साथआपदा रोकथामतैयारी और प्रतिक्रिया में विशेषज्ञताजवाबदेही और प्रभावशीलता को महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की क्षमता रखता है। हालांकिसमिति यह भी नोट करती है कि कई नामित मंत्रालयों ने ऐतिहासिक रूप से अपने मुख्य विकासात्मक और नियामक जनादेशों पर ध्यान केंद्रित किया है और उन्हें अपनी विस्तारित आपदा प्रबंधन जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए संस्थागत क्षमतातकनीकी विशेषज्ञता और मानव संसाधनों के महत्त्वपूर्ण संवर्धन की आवश्यकता हो सकती है। अधिसूचना को प्रत्येक नोडल मंत्रालय के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधानों और मजबूत अंतरमंत्रालयी समन्वय तंत्र द्वारा भी समर्थित किया जाना चाहिएविशेष रूप से उन खतरों के लिए जिनमें कई मंत्रालयों के जनादेश शामिल हैं। समिति सिफ़ारिश करती है कि प्रत्येक नामित नोडल मंत्रालय एक समयबद्ध ढांचे के भीतर एक खतराविशिष्ट आपदा प्रबंधन योजना तैयार करे और उसे लागू करे। संचालन संबंधी अनुभवों के आलोक में शक्तियों की पहचान करनेकमियों को दूर करने और संस्थागत व्यवस्थाओं को परिष्कृत करने के लिए एक उपयुक्त अवधि के बाद नई व्यवस्था की प्रभावशीलता की समीक्षा की जा सकती है।

(पैरा 2.12.3)

लू और वज्रपात : राष्ट्रीय अधिसूचना

            समिति नोट करती है कि 16वें वित्त आयोग ने एसडीआरएफ ढांचे के तहत राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित आपदाओं की सूची में लू और वज्रपात को जोड़ने की सिफ़ारिश की है। यह सिफ़ारिश उन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करेगी जो लू और वज्रपात से संबंधित घटनाओं के प्रति संवेदनशील हैं। समिति सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय 16वें वित्त आयोग की सिफ़ारिश का अनुपालन करे और लू तथा वज्रपात को राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित आपदाओं की सूची में शामिल करेक्योंकि इससे ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए वर्तमान ढांचे की अपर्याप्तता दूर होगी।

(पैरा 2.13.26)

एनडीएमआईएस अनुपालन संबद्धता

            समिति नोट करती है कि 16वें वित्त आयोग ने पारदर्शिताजवाबदेही और साक्ष्यआधारित निर्णय लेने को सुनिश्चित करने के लिए राज्यों द्वारा अनिवार्य डाटा रिपोर्टिंग के साथआपदा प्रबंधन के सभी चरणों में डाटा को एकीकृत करने वाले एक व्यापक राष्ट्रीय मंच में एनडीएमआईएस के रूपांतरण की सिफ़ारिश की है। समिति इसे आपदा प्रबंधन (संशोधनअधिनियम, 2025 के तहत राष्ट्रीय आपदा डाटाबेस की स्थापना के लिए एक महत्त्वपूर्ण तंत्र मानती है। समिति सिफ़ारिश करती है कि एनडीएमए सभी राज्यों के लिए पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु दिशानिर्देश और एक समय सीमा जारी करेसाथ ही डिजिटल बुनियादी ढांचे वाले राज्यों को मंच के साथ निर्बाध एकीकरण की सुविधा के लिए पर्याप्त तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण प्रदान करे।

(पैरा 2.13.29)

            समिति 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों की भारत के आपदा वित्तपोषण ढांचे में हुई एक व्यापक प्रगति के रूप में सराहना करती हैजो वैज्ञानिक सटीकतापरिचालन जवाबदेही और अभिनव जोखिम हस्तांतरण तंत्र के साथ वित्तीय पर्याप्तता को जोड़ती है। समिति सिफ़ारिश करती है कि मंत्रालय इस सिफ़ारिश के कार्यान्वयन में तेजी लाए ताकि आपदा प्रबंधन में परिकल्पित सुधारों को मूर्त परिणामों में बदला जा सके।

(पैरा 2.13.30)

            समिति नोट करती है कि देश ने आपदा प्रबंधन के लिए एक व्यापक ढांचा विकसित किया है जो विधिक प्रावधानोंनीतिगत दिशासंस्थागत तंत्र और वित्तीय व्यवस्थाओं को एकीकृत करता है। हालांकि मौजूदा आपदा प्रबंधन ढांचा एक मजबूत आधार प्रदान करता हैलेकिन इसकी प्रभावशीलता राज्यों में असमान कार्यान्वयनक्षेत्रीय स्तरों पर सीमित संस्थागत व तकनीकी क्षमताओंआबंटित निधियों के उपयोग में देरी और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय की कमियों के कारण सीमित है। जलवायु परिवर्तन और तीव्र शहरीकरण से उत्पन्न आपदा जोखिमों की बढ़ती जटिलता आपदा प्रबंधन प्रणाली के निरंतर सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता को और उजागर करती है। समिति सिफ़ारिश करती है कि सुदृढ निगरानी तंत्रआवधिक कार्यनिष्पादन मूल्यांकनसर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसारअंतरएजेंसी समन्वय को बढ़ावा देने और वित्तीय संसाधनों के समय पर व प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने तथा दीर्घकालिक आपदासहनशीलता के निर्माण के माध्यम से कार्यान्वयन दक्षता में सुधार करनेराज्यों में आपदा प्रबंधन ढांचों के कार्यान्वयन में अधिक एकरूपता सुनिश्चित करने को शीर्ष प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

(पैरा 2.13.31)

अध्याय III – आपदा जोखिम न्यूनीकरण

समिति नोट करती है कि वैज्ञानिक जोखिम आकलन एक प्रभावी आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) ढाँचे की आधारशिला है। तथापिदेशभर में जोखिम मानचित्रण को पूर्ण करनेउसके मानकीकरण तथा उसकी प्रवर्तनीयता सुनिश्चित करने के संबंध में अभी भी उल्लेखनीय कमियाँ विद्यमान हैं। इसलिए, समिति सिफ़ारिश करती है कि बाढ़भूस्खलनभूकम्प तथा हिमनदीय झीलों से उत्पन्न जोखिमों सहित बहु-आपदा जोखिम मानचित्रण को समयबद्ध तरीके से पूर्ण किया जाए तथा इन आपदाओं के प्रति संवेदनशील सभी राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों में इसे वैधानिक रूप से प्रवर्तनीय बनाया जाएताकि योजना निर्माण एवं विकास प्रक्रियाओं में इसका प्रभावी एकीकरण सुनिश्चित किया जा सके।

(पैरा 3.9.9)

             समिति आगे यह भी सिफ़ारिश करती है कि भूकम्पीय सूक्ष्म-क्षेत्रीकरण तथा भूस्खलन संवेदनशीलता मानचित्रों को नगर नियोजन विनियमों एवं भवन उपविधियों में अनिवार्य रूप से समाहित किया जाए। साथ हीउच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में निर्माण एवं विकासात्मक गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएँताकि नई संवेदनशीलताओं के सृजन को रोका जा सके। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि जोखिमसुभेद्यता एवं आपदा जोखिम संबंधी आँकड़ों का एक व्यापक राष्ट्रीय भंडार स्थापित किया जाएजिसमें जिला एवं उप-जिला स्तर तक की जानकारी उपलब्ध हो। इससे साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रियाविभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय तथा सभी हितधारकों द्वारा प्रभावी नीति-निर्माण को सुगम बनाया जा सकेगा।

(पैरा 3.9.10)

            समिति नोट करती है कि यद्यपि नीतिगत ढाँचे में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) को विकास योजना का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया गया हैतथापि विभिन्न क्षेत्रों में इसका कार्यान्वयन अभी भी असमान है तथा इसे पर्याप्त रूप से संस्थागत स्वरूप नहीं दिया गया है। इसलिए, समिति सिफ़ारिश करती है कि सभी प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं तथा प्रमुख शहरी विकास परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान किए जाने से पूर्व आपदा जोखिम प्रभाव आकलन (डीआरआईएकराना अनिवार्य किया जाएताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी परियोजनाएँ आपदा-सहनशील हों तथा वे नए आपदा जोखिम उत्पन्न न करें अथवा विद्यमान जोखिमों को और अधिक न बढ़ाएँ।

(पैरा 3.9.11)

                        समिति आगे यह भी सिफ़ारिश करती है कि बाढ़-मैदान क्षेत्रीकरण तथा नदी विनियमन संबंधी उपायों को सभी आपदा-संवेदनशील राज्यों में एकरूपता के साथ लागू किया जाएताकि अतिक्रमणअव्यवस्थित विकास तथा बार-बार होने वाली बाढ़ से होने वाली क्षति जैसी समस्याओं का प्रभावी समाधान किया जा सके। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि पर्वतीय क्षेत्रों एवं तटीय क्षेत्रों सहित पारिस्थितिकीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों  में विकासात्मक गतिविधियों का कड़ाई से विनियमन किया जाए तथा उल्लंघनों के लिए उत्तरदायित्व निर्धारित करने हेतु स्पष्ट जवाबदेही तंत्र स्थापित किया जाएजिससे पर्यावरणीय दृष्टि से असंधारणीय ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकेजो आपदा संबंधी संवेदनशीलताओं को और अधिक बढ़ाती हैं।

(पैरा 3.9.12)

            समिति नोट करती है कि सटीक पूर्वानुमान तथा समय पर चेतावनियों का प्रसार प्रभावी आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि उन्नत पूर्वानुमान प्रौद्योगिकियों में निवेश को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया जाए। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग आधारित पूर्वानुमान मॉडलडॉप्लर मौसम रडारउच्च-विभेदन संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान प्रणालियाँ तथा उपग्रह-आधारित निगरानी प्रौद्योगिकियों का व्यापक उपयोग शामिल होताकि मौसम एवं आपदा संबंधी पूर्वानुमानों की सटीकता तथा विश्वसनीयता में सुधार किया जा सके।

(पैरा 3.9.13)

             समिति सिफ़ारिश करती है कि एक आपदापश्चात् सुदृढ सत्यापन तंत्र  प्रारंभ किया जाएजिसके अंतर्गत पूर्वानुमानित प्रभावों की वास्तविक परिणामों के साथ व्यवस्थित रूप से तुलना की जाए तथा प्राप्त निष्कर्षों का उपयोग पूर्वानुमान मॉडलमापदंडों एवं कार्यप्रणालियों के निरंतर परिष्कार के लिए किया जाए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि विशेष रूप से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए क्षेत्र-विशिष्ट तथा प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान प्रणालियाँ विकसित की जाएँताकि पवन की गतिवर्षा तथा अन्य आपदा संबंधी मानकों के आधार पर फसल हानि के संभावित आकलन जैसी कार्रवाई योग्य सूचनाएँ उपलब्ध कराई जा सकेंजिससे संवेदनशील समुदाय समय रहते उचित निर्णय लेकर संभावित क्षति को कम करने में सक्षम हो सकें।

(पैरा 3.9.14)

            समिति सिफ़ारिश करती है कि राष्ट्रीय स्तर पर एक पूर्णतः एकीकृत बहु-आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित की जाएजिसमें भारत मौसम विज्ञान विभागकेंद्रीय जल आयोगभारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्रराष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र तथा राज्य स्तरीय प्राधिकरणों जैसी प्रमुख एजेंसियों को एक एकीकृत एवं परस्पर-संगत मंच पर जोड़ा जाएताकि निर्बाध आँकड़ा साझाकरणवास्तविक समय में समन्वय तथा समयबद्ध चेतावनियों का प्रसार सुनिश्चित किया जा सके।

(पैरा 3.9.15)

            समिति आगे यह भी सिफ़ारिश करती है कि वर्तमान जिला-स्तरीय व्यवस्था के स्थान पर ग्रामशहरी वार्ड तथा आपदा-संवेदनशील बस्तियों के स्तर पर अत्यंत स्थानीय पूर्वानुमान एवं संचार तंत्र विकसित कर पूर्व चेतावनी प्रसार प्रणाली को सुदृढ बनाया जाएताकि स्थानीय प्राधिकरणों एवं समुदायों के लिए चेतावनियों की सटीकताप्रासंगिकता तथा उपयोगिता में वृद्धि हो सके।

(पैरा 3.9.16)

            समिति नोट करती है कि आपदाओं से संबंधित व्यय अभी भी मुख्यतः राहत-केंद्रित हैजबकि शमन एवं जोखिम न्यूनीकरण संबंधी उपायों पर अपेक्षाकृत कम बल दिया जाता हैजबकि दीर्घकालिक आपदा हानियों को कम करने के लिए ये अत्यंत आवश्यक हैं। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि राहत-उन्मुख व्यय से क्रमिक किन्तु स्पष्ट रूप से शमन-केंद्रित निवेश की ओर परिवर्तन किया जाए तथा जोखिम न्यूनीकरणआपदा सहनशीलता के निर्माण एवं निवारक अवसंरचना के लिए पर्याप्त बजटीय प्राथमिकता सुनिश्चित की जाए।

(पैरा 3.9.17)

            समिति आगे यह सिफ़ारिश करती है कि शमन संबंधी गतिविधियों के लिए आबंटित निधियों के उपयोगप्रभावशीलता एवं परिणामों की निगरानी के लिए एक समर्पित निगरानी एवं मूल्यांकन ढाँचा स्थापित किया जाएताकि जवाबदेहीपारदर्शिता तथा साक्ष्य-आधारित नीतिगत सुधार सुनिश्चित किए जा सकें।

(पैरा 3.9.18)

            समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि जोखिम वित्तपोषण तंत्र को सुदृढ एवं विस्तारित किया जाएजिसमें परिवारोंकृषि क्षेत्र तथा सूक्ष्मलघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए बीमा कवरेज का विस्तार भी शामिल होताकि वित्तीय सहनशीलता को बढ़ाया जा सके तथा समाज के कमजोर वर्गों पर आपदाओं से पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम किया जा सके।

(पैरा 3.9.19)

            समिति नोट करती है कि अनुसंधाननवाचार एवं जानकारी-साझाकरण आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) को सुदृढ करने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण आधार हैं तथा नीतिगत उद्देश्यों को व्यावहारिक परिणामों में परिवर्तित करने के लिए निरंतर संस्थागत समर्थन आवश्यक है। इसलिए, समिति सिफ़ारिश करती है कि विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों के राष्ट्रीय नेटवर्क को और अधिक सुदृढ एवं विस्तारित किया जाएताकि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में बहुविषयक अनुसंधाननवाचार तथा क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जा सके।

(पैरा 3.9.20)

             समिति आगे यह भी सिफ़ारिश करती है कि विशेष रूप से पूर्वानुमान प्रणालियोंअग्निशमन सेवाओं के उपकरणों तथा आपदा प्रतिक्रिया उपकरणों के क्षेत्र में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों एवं क्षमताओं को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित एवं विकसित किया जाएजिससे बाह्य निर्भरता में कमी आए तथा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके।

(पैरा 3.9.21)

             समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि आपदाउपरांत अध्ययन तथा प्राप्त अनुभवों एवं सीखे गए पाठों के प्रलेखन को एक मानक प्रक्रिया के रूप में अपनाया जाए। साथ हीऐसे अध्ययनों से प्राप्त निष्कर्षों को व्यवस्थित रूप से नीति-निर्माणयोजना-निर्माण तथा क्षमता निर्माण संबंधी पहलों में समाहित किया जाएताकि आपदा जोखिम प्रबंधन प्रणालियों में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सके।

(पैरा 3.9.22)

अध्याय-IV – जोखिम का आकलनशमन उपाय और तैयारी

चक्रवात

            समिति नोट करती है कि चक्रवात संबंधी पूर्वानुमान एवं चेतावनी प्रणालियों में उल्लेखनीय सुधार होने के बावजूदक्षेत्र-विशिष्ट प्रभाव आकलन तथा स्थानीय स्तर पर पूर्व तैयारीविशेषकर कृषिमत्स्य पालन एवं तटीय आजीविकाओं के संबंध में अभी भी चिंताएँ विद्यमान हैं। इसलिए,  समिति सिफ़ारिश करती है कि प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान को विभिन्न क्षेत्रों के स्तर पर और अधिक प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जाए। इसमें फसल-विशिष्ट हानि का आकलनअवसंरचना की सुभेद्यता का आकलन तथा आजीविका जोखिम संबंधी परामर्श को सम्मिलित किया जाएताकि किसानमछुआरे तथा स्थानीय प्रशासन लक्षित एवं समयबद्ध पूर्व तैयारी संबंधी उपाय कर सकें। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि द्वीपीय क्षेत्रों तथा दूरस्थ तटीय क्षेत्रोंविशेष रूप से लक्षद्वीप एवं अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के लिए उनकी भौगोलिक पृथकता तथा सीमित निकासी अवधि को ध्यान में रखते हुए निकासीआश्रय एवं पुनर्वास संबंधी समर्पित अवसंरचना सहित एक व्यापक आपदा प्रबंधन ढाँचा विकसित किया जाएताकि ऐसे अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में प्रभावी आपदा प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

(पैरा 4.2.19)

बाढ़

             समिति नोट करती है कि देश के अनेक भागों में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या बाढ़-मैदानी क्षेत्रों पर अतिक्रमणनदी तल में अनियमित गतिविधियों तथा नदी बेसिन-स्तरीय योजना के अभाव के कारण और अधिक गंभीर हो जाती हैजिससे जन-धन एवं संपत्ति की टाली जा सकने वाली क्षति होती है। इसलिए, समिति सिफ़ारिश करती है कि नदी तल एवं बाढ़-मैदानी क्षेत्रों में अतिक्रमण की निगरानी एवं उन्हें हटाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढाँचा  विकसित किया जाए। इस व्यवस्था के अंतर्गत अतिक्रमित क्षेत्रों का समय-समय पर मानचित्रण भी किया जाएताकि उत्तरदायित्व सुनिश्चित हो तथा भविष्य में होने वाले अतिक्रमण एवं अन्य उल्लंघनों को रोका जा सके।

(पैरा 4.3.17)

            समिति आगे यह भी सिफ़ारिश करती है कि नदी बेसिन-स्तरीय बाढ़ प्रबंधन योजनाएँ  तैयार कर उनका प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए। इन योजनाओं में जलाशयों के संचालनऊपरी एवं निचले प्रवाह क्षेत्रों के मध्य समन्वय तथा अंतर-राज्यीय परामर्श तंत्र  को समेकित किया जाएविशेष रूप से बाँधों से जल छोड़े जाने के संदर्भ मेंताकि अचानक आने वाली बाढ़ तथा उसके निचले क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को रोका जा सके। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि बाँधों के संचालन के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल निर्धारित किए जाएँजिनमें प्रभावित राज्यों के बीच पूर्व सूचना का अनिवार्य आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाएताकि समन्वित निर्णय-निर्माण को बढ़ावा मिले तथा अनियंत्रित जल छोड़े जाने से उत्पन्न आपदा जोखिमों को न्यूनतम किया जा सके।

(पैरा 4.3.18)

            समिति नोट करती है कि अव्यवस्थित शहरीकरणअपर्याप्त वर्षा जल निकासी प्रणालियों तथा प्राकृतिक जल निकायों पर अतिक्रमण के कारण शहरी बाढ़ देशभर के अनेक शहरी स्थानीय निकायों के समक्ष एक गंभीर चुनौती के रूप में उभरकर सामने आई है। इसलिए,  समिति सिफ़ारिश करती है कि शहरी बाढ़ प्रबंधन को शहरी स्थानीय निकायों के एक प्रमुख दायित्व के रूप में सम्मिलित किया जाए तथा प्रत्येक नगर के लिए नगर-स्तरीय बाढ़ प्रबंधन योजनाएँ तैयार करना एवं उनका समय-समय पर अद्यतन करना अनिवार्य किया जाए। इन योजनाओं में जल निकासी मास्टर प्लान तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल को भी सम्मिलित किया जा सकता है।

(पैरा 4.3.19)

            समिति आगे यह भी सिफ़ारिश करती है कि वर्षा जल निकासी प्रणालियोंआर्द्रभूमियोंझीलों तथा प्राकृतिक जल निकासी मार्गों का पुनर्स्थापन एवं रखरखाव प्राथमिकता के आधार पर किया जाए तथा इन प्रणालियों पर किए गए अतिक्रमणों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध ढंग से हटाया जाएताकि जल के प्राकृतिक प्रवाह को पुनर्स्थापित किया जा सके तथा बाढ़ के जोखिम को कम किया जा सके। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि सड़कोंआवासीय परियोजनाओं एवं जल निकासी प्रणालियों से संबंधित शहरी अवसंरचना योजना को क्षेत्र की प्राकृतिक स्थलाकृति तथा जल-प्रवाह के तरीकों के अनुरूप तैयार किया जाएजिससे जलभराव एवं शहरी बाढ़ की स्थितियों को प्रभावी रूप से रोका जा सके।

(पैरा 4.3.20)

भूकम्प

             समिति नोट करती है कि देश का एक बड़ा भाग मध्यम से उच्च भूकंपीय जोखिम क्षेत्रों में स्थित है तथा विशेष रूप से शहरी एवं घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भवनों की संरचनात्मक सुभेद्यता एक प्रमुख जोखिम कारक बनी हुई है। इसलिए, समिति सिफ़ारिश करती है कि सभी राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों में भूकम्प-रोधी भवन संहिताओं का कठोरता से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ हीसमय-समय पर निरीक्षण तथा प्रमाणीकरण प्रणाली के माध्यम से अनुपालन तंत्र को और अधिक सुदृढ बनाया जाएताकि असुरक्षित निर्माण पद्धतियों को रोका जा सके।

(पैरा 4.4.11)

            समिति नोट करती है कि देश की व्यापक भूकंपीय संवेदनशीलता के कारण भूकम्प देश को प्रभावित करने वाली सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में से एक हैं। भूकम्प की स्थिति में जन-धनसंपत्ति तथा महत्त्वपूर्ण अवसंरचना की क्षति को न्यूनतम करने के लिए जोखिम मानचित्रण एवं भूमि उपयोग योजना अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। समिति सिफ़ारिश करती है कि भूकम्प प्रबंधन के लिए तैयार किए जाने वाले रोडमैप में भूकंपीय जोखिम मानचित्रों की तैयारी एवं उनके नियमित अद्यतनभूकंपीय निगरानी नेटवर्क तथा भूकम्प प्रेक्षण केंद्रों के विस्तारउच्च भूकंपीय जोखिम क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंधतथा वैज्ञानिक जोखिम आकलनों पर आधारित सुरक्षित शहरी नियोजन को विशेष प्रोत्साहन दिया जाए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि भूकम्प पूर्वानुमानजोखिम आकलन तथा भूकम्प-प्रतिरोधी निर्माण प्रौद्योगिकियों  से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया जाए।

(पैरा 4.4.12)

            भूकंप से बचाव और प्रबंधन के लिए सरकारी संगठनोंस्थानीय अधिकारियोंआपातकालीन सेवाओं और आम जनता के बीच तालमेल की ज़रूरत है। समिति सिफ़ारिश करती है कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल को मज़बूत करने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैंजैसे कि दफ़्तरोंस्कूलोंअस्पतालों और सार्वजनिक संस्थानों में नियमित रूप से भूकंप से बचाव का अभ्यास करनालोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजनाएँ बनाना और सुरक्षित इकट्ठा होने की जगहों की पहचान करनाआपातकालीन आश्रय स्थलों पर भोजनपानीदवाइयाँ और ज़रूरी सामान का स्टॉक रखनाभूकंप से सुरक्षा और तैयारी के बारे में जागरूकता अभियान चलानाआपदा के समय काम करने वाली एजेंसियों को आधुनिक बचाव उपकरणों और संचार प्रणालियों से लैस करनाऔर ऐसी नीतियाँ बनाना जो मज़बूत विकास और आपदा के बाद तेज़ी से उबरने में मदद करें।

(पैरा 4.4.13)

             समिति का विचार ​​है कि भूकंप के संभावित असर को कम करने और ज़रूरी सेवाओं को लगातार चालू रखने के लिए मौजूदा अहम बुनियादी ढांचे को मज़बूत बनाना ज़रूरी है। समिति सिफ़ारिश करती है कि स्कूलोंअस्पतालोंबिजली संयंत्रोंपानी की सप्लाई सिस्टमसंचार सुविधाओं और आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्रों जैसे अहम बुनियादी ढांचे को मज़बूत बनाने के लिए एक समय-सीमा वाला कार्यक्रम शुरू किया जाए। इसमें ज़्यादा जोखिम वाले इलाकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिएक्योंकि भूकंप के दौरान और उसके बाद ये बहुत अहम होते हैं और भूकंप से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने के लिए भी ये ज़रूरी हैं। समिति समुक्ति करती है कि एक व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से मज़बूतीकरण की रणनीति अपनाकरसरकारी एजेंसियां ​​और बुनियादी ढांचे के मालिक संरचनात्मक विफलता के जोखिम को काफी कम कर सकते हैंलोगों की जान बचा सकते हैंआर्थिक नुकसान कम कर सकते हैं और भूकंप के दौरान अहम सेवाओं को बिना रुकावट चालू रख सकते हैं। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि ज़्यादा जोखिम वाले इलाकों में असुरक्षित और संरचनात्मक रूप से कमज़ोर इमारतों की पहचान की जाए और आपदा के प्रति जोखिम को कम करने के लिए उचित कार्रवाई की जाएजिसमें उन्हें मज़बूत बनाना या गिराना शामिल है।

(पैरा 4.4.14)

सुनामी

             समितिभारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएसद्वारा सुनामी की चेतावनी समय पर देने के लिए भूकंप की निगरानी, ​​समुद्र की जानकारी और एडवांस्ड मॉडलिंग को मिलाकर एक मज़बूत सुनामी की पूर्व-चेतावनी प्रणाली बनाने की सराहना करती है। हालाँकिसमिति का विचार  ​​है कि किसी भी चेतावनी प्रणाली की प्रभावशीलता आखिरकार इस बात पर निर्भर करती है कि चेतावनी अंतिम छोर तक कितनी सफलतापूर्वक पहुँचती है और जोखिम वाले समुदायों की तुरंत प्रतिक्रिया देने की तैयारी कैसी है। इसलिएसमिति सरकार से सिफ़ारिश करती है कि वह सुनामी की चेतावनी पहुँचाने की लास्ट-माइल कनेक्टिविटी‘ को मज़बूत करे। इसके लिए बहुभाषी अलर्ट सिस्टम का विस्तार करनातटीय सायरन नेटवर्क का दायरा बढ़ानासभी प्रमुख मोबाइल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म के साथ चेतावनी को जोड़ना और सुनामी के जोखिम वाले हर तटीय ज़िले और द्वीप क्षेत्र में समय-समय पर समुदाय-आधारित निकासी अभ्यास आयोजित करना ज़रूरी है। मछुआरोंपर्यटकोंस्कूली बच्चों और अन्य जोखिम वाले समूहों को लगातार जागरूकता अभियानों और अनिवार्य मॉक एक्सरसाइज़ के ज़रिए जागरूक करने पर विशेष ज़ोर दिया जाना चाहिए।

(पैरा 4.5.8)

            समिति समुक्ति करती ​​है कि बिना योजना के तटीय विकास और प्राकृतिक तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के नष्ट होने से सुनामी के असर के प्रति तटीय आबादी का जोखिम काफी बढ़ जाता है। तटीय खतरों वाले क्षेत्रों की पहचान और ज़मीन के इस्तेमाल की योजना बनाने की चल रही कोशिशों की सराहना करते हुएसमिति सिफ़ारिश करती है कि सुनामी-संभावित क्षेत्रों में सभी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और शहरी विकास योजनाओं को मंज़ूरी देने से पहले सुनामी के जोखिम का व्यापक आकलन किया जाए। समिति सुनामी की लहरों के खिलाफ़ कम खर्चीलेटिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल प्राकृतिक सुरक्षा कवच के तौर पर मैंग्रोवतटीय वनस्पतिकोरल रीफ़ और रेत के टीलों के बड़े पैमाने पर पुनर्स्थापन और संरक्षण की भी सिफ़ारिश करती है। इकोसिस्टम पर आधारित ऐसे बचाव उपायों को तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेडकी योजना के साथ जोड़ा जाना चाहिए और तटीय राज्यों व संघ राज्य क्षेत्रों को इसके लिए खास वित्तीय सहायता दी जानी चाहिए।

(पैरा 4.5.9)

भूस्खलन एवं हिमस्खलन

            समिति नोट करती है कि पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाले भूस्खलनों का संबंध दिन-प्रतिदिन अनियंत्रित निर्माणढालों की अस्थिरता तथा पर्यावरणीय क्षरण से बढ़ता जा रहा हैजिसके परिणामस्वरूप बार-बार आपदाएँ आती हैं तथा जनहानि होती है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों की पहचान जोखिम मानचित्रण के माध्यम से की जाए तथा उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में निर्माण कार्यों से यथासंभव बचा जाए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि भूमि उपयोग नियोजन तथा भवन निर्माण मानकों के संबंध में स्पष्ट नियामक दिशानिर्देश तैयार किए जाएँ और उनका प्रभावी ढंग से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएताकि विशेष रूप से पर्वतीय जिलों एवं पर्यटन क्षेत्रों में अत्यधिक संवेदनशील ढालों पर निर्माण एवं विकास संबंधी गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जा सके।

(पैरा 4.6.10)

            समिति यह भी नोट करती है कि वनों की कटाई तथा पर्वतीय ढालों पर अनियंत्रित खुदाई भी ढालों को अस्थिर बनाती हैजिसके परिणामस्वरूप भूस्खलन की घटनाएँ बढ़ती हैं। समिति का मत है कि पर्वतीय क्षेत्रों में गहरी जड़ों वाले पौधों का रोपण कर मिट्टी को सुदृढ रूप से बाँधा जा सकता हैजिससे ढालों की स्थिरता में सुधार होगा। साथ हीअवरोधक दीवारों तथा शैल अवरोधों के निर्माण से भी ढालों को अधिक स्थिर बनाया जा सकता है। अतः समिति की सिफ़ारिश है कि ऐसे उपायों को प्राथमिकता दी जाए। समिति यह भी महसूस करती है कि संवेदनशील क्षेत्रों में खननपत्थर उत्खनन तथा निर्माण गतिविधियों को विनियमित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएँताकि भूस्खलन की संभावना को कम किया जा सकेजिससे अन्यथा व्यापक क्षति हो सकती है।

(पैरा 4.6.11)

             समिति सिफ़ारिश करती है कि पर्वतीय क्षेत्रों में प्रस्तावित सभी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए भू-तकनीकी तथा पर्यावरणीय आकलन अनिवार्य किए जाएँ तथा उनके क्रियान्वयन के दौरान इन मानकों के अनुपालन की कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जाएताकि ढालों की अस्थिरता तथा उससे जुड़े जोखिमों को रोका जा सके। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि चिन्हित भूस्खलन संभावित स्थलों पर स्थल-विशिष्ट ढाल स्थिरीकरण एवं जल निकासी संबंधी उपायों के क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएजिससे संवेदनशील क्षेत्रों में तात्कालिक जोखिम को प्रभावी ढंग से कम किया जा सके।

(पैरा 4.6.12)

लू

            समिति नोट करती है कि लू एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट के रूप में उभर रही हैजिसका प्रभाव विशेष रूप से शहरी एवं अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले संवेदनशील वर्गों पर अधिक पड़ता है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि लू कार्ययोजनाओं को और अधिक सुदृढ बनाया जाए तथा सभी लू-प्रवण राज्यों एवं नगरों में उनका समान रूप से प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। साथ हीसंबंधित सभी विभागों की भूमिकाओं एवं उत्तरदायित्वों का स्पष्ट निर्धारण भी किया जाए।

(पैरा 4.7.7)

            समिति आगे यह भी सिफ़ारिश करती है कि शहरी नियोजन में लू के प्रभावों का सामना करने में सक्षम उपायों को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जाएजिनमें हरित क्षेत्र का विस्तारशीतल छतों का निर्माणसार्वजनिक स्थलों पर पर्याप्त छायादार स्थानों की व्यवस्था तथा पेयजल की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल होताकि ऊष्मीय तनाव को कम किया जा सके और संवेदनशील आबादी की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि लू से निपटने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ बनाया जाएजिसमें शीतलन केंद्रों की स्थापनाचिकित्सा व्यवस्था की समुचित तैयारी तथा लक्षित जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जाएँ।

(पैरा 4.7.8)

रासायनिक एवं औद्योगिक आपदाएँ

            समिति नोट करती है कि रासायनिक एवं औद्योगिक आपदाएँ यद्यपि अपेक्षाकृत कम होती हैंतथापि विशेष रूप से घनी आबादी वाले औद्योगिक क्षेत्रों में इनके कारण बड़े पैमाने पर जनहानि तथा पर्यावरणीय क्षति होने की संभावना रहती है। इसलिए, समिति सिफ़ारिश करती है कि परिसंकटमय उद्योगों में सुरक्षा संबंधी नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा उनका समय-समय पर सुरक्षा लेखा-परीक्षण कराया जाए। साथ हीसुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों की स्पष्ट जवाबदेही भी निर्धारित की जाए।

(पैरा 4.8.12)

            समिति आगे यह भी सिफ़ारिश करती है कि स्थल-आधारित एवं स्थल-बाह्य आपातकालीन योजनाओं को नियमित रूप से अद्यतन किया जाए तथा उनकी प्रभावशीलता का परीक्षण मॉक ड्रिलों के माध्यम से किया जाएजिनमें जिला प्रशासन एवं स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएताकि औद्योगिक दुर्घटनाओं की स्थिति में समुचित पूर्व तैयारी बनी रहे। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि परिसंकटमय उद्योगों एवं आवासीय क्षेत्रों के बीच निर्धारित सुरक्षित बफर क्षेत्र का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा भूमि उपयोग नियोजन को औद्योगिक जोखिमों के अनुरूप बनाया जाएजिससे आबादी का औद्योगिक जोखिमों के प्रति अनावश्यक संपर्क न्यूनतम किया जा सके।

(पैरा 4.8.13)

            समिति नोट करती है कि परिसंकटमय पदार्थों का परिवहन विशेष रूप से घनी आबादी वाले तथा अधिक यातायात वाले मार्गों पर जनसुरक्षामानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न करता है। समिति यह भी नोट करती है कि परिवहन के दौरान निगरानीविनियमन तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया से संबंधित वर्तमान व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ किए जाने की आवश्यकता है। इसलिए, समिति सिफ़ारिश करती है कि परिसंकटमय पदार्थों के सुरक्षित परिवहन के लिए एक समग्र नियामक एवं निगरानी ढाँचा स्थापित किया जाएजिसमें परिवहन वाहनों की वैश्विक स्थान-निर्धारण प्रणाली आधारित अनिवार्य निगरानीमार्ग-जोखिम का पूर्व आकलन तथा वास्तविक समय की निगरानी प्रणाली सम्मिलित होताकि उनका सुरक्षित एवं संरक्षित परिवहन सुनिश्चित किया जा सके। समिति आगे सिफ़ारिश करती है कि प्रमुख परिवहन मार्गों पर जिला प्रशासन तथा आपातकालीन सेवाओं को विशेष प्रतिक्रिया कार्यविधियोंआवश्यक विशेषीकृत उपकरणों तथा परिसंकटमय पदार्थों से संबंधित घटनाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित विशेष प्रतिक्रिया दलों से सुसज्जित किया जाएताकि रासायनिक रिसाव अथवा अन्य दुर्घटनाओं का प्रभावी ढंग से प्रबंधन किया जा सके। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि परिवहन के दौरान परिसंकटमय पदार्थों (हैज़मैट) से संबंधित दुर्घटनाओं के लिए मानकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया दिशानिर्देश जारी किए जाएँजिनमें सभी संबंधित एजेंसियों की भूमिकाएँ एवं उत्तरदायित्व स्पष्ट रूप से निर्धारित होंताकि समयबद्ध प्रतिक्रियाप्रभावी नियंत्रण तथा संभावित क्षति को न्यूनतम करना सुनिश्चित किया जा सके।

(पैरा 4.8.14)

अध्याय V – अनुक्रियाराहत एवं पुनर्वास

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ)

            समिति नोट करती है कि यद्यपि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) एक अत्यधिक विशिष्ट बल हैतथापि देशभर में एक साथ अनेक आपदाओं की स्थिति में इसकी अनुक्रिया क्षमता पर दबाव पड़ सकता है। समिति यह भी नोट करती है कि सभी राज्यों एवं संघ राज्यक्षेत्रों में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की स्थापना नहीं की गई है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि विशेष रूप से आपदा-प्रवण क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की संख्याभौगोलिक तैनाती तथा विशिष्ट क्षमताओं की समय-समय पर समीक्षा कर उन्हें आवश्यकतानुसार सुदृढ किया जाएताकि समयबद्ध एवं प्रभावी अनुक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

(पैरा 5.2.7)

            समिति सिफ़ारिश करती है कि सभी राज्यों तथा संघ राज्यक्षेत्रों में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बलों की स्थापना एवं उन्हें क्रियाशील बनाने का कार्य समयबद्ध रूप से सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक वित्तीय एवं तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

(पैरा 5.2.8)

            समिति महसूस करती  है कि देश में प्रभावी आपदा प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल तथा राज्य आपदा मोचन बल के मध्य समन्वय अत्यंत आवश्यक हैक्योंकि आपदा की स्थिति में राज्य आपदा मोचन बल प्रथम अनुक्रियाकर्ता के रूप में कार्य करता हैजबकि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल बड़ी आपदाओं के दौरान विशिष्ट सहायता प्रदान करता है। समिति सिफ़ारिश करती है कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल तथा राज्य आपदा मोचन बल की इकाइयों के मध्य संयुक्त प्रशिक्षणमॉक अभ्यास तथा पारस्परिक प्रचालन-संगतता (इंटरऑपरेबिलिटी) पर अधिक बल दिया जाएताकि बचाव कार्यों एवं आपदा प्रबंधन के दौरान इन सभी बलों के बीच समन्वित अनुक्रिया को और अधिक सुदृढ बनाया जा सके। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि प्रक्रियागत तथा संचार संबंधी अंतरालों को न्यूनतम करने के लिए मानक प्रचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) तथा साझा संचार मंचों का उपयोग किया जाए।

(पैरा 5.2.9)

पूर्व चेतावनी एवं जोखिम संचार

            समिति नोट करती है कि एकीकृत आपातकालीन अनुक्रिया नियंत्रण कक्ष (आईसीआर-ईआर) तथा आपातकालीन अनुक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस) (डायल 112) जैसी व्यवस्थाओं ने समन्वय को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ किया है। तथापिवास्तविक समय में आँकड़ों के एकीकरणनिर्णय-सहायता प्रणालियों तथा विभिन्न एजेंसियों के मध्य संचार व्यवस्था को और अधिक सुदृढ किए जाने की आवश्यकता है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि सभी आपातकालीन अनुक्रिया मंचों को केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय एजेंसियों से प्राप्त वास्तविक समय के आँकड़ों के साथ पूर्णतः एकीकृत किया जाए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि उन्नत आँकड़ा विश्लेषण तथा दृश्यांकन उपकरणों का उपयोग करते हुए निर्णय-सहायता प्रणालियों को और अधिक सुदृढ बनाया जाएताकि आपदाओं के दौरान समयबद्ध एवं सूचित निर्णय लिए जा सकें। समिति आगे यह भी सिफ़ारिश करती है कि आपातकालीन अनुक्रिया प्रणालियों तथा जिला प्रशासनों एवं अनुक्रिया बलों सहित क्षेत्रीय स्तर की एजेंसियों के मध्य निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करने के लिए मानक प्रचालन प्रक्रियाएँ (एसओपी) निर्धारित की जाएँ।

(पैरा 5.7.7)

भारत आपदा संसाधन नेटवर्क (आईडीआरएन)

            समिति नोट करती है कि भारत आपदा संसाधन नेटवर्क (आईडीआरएन)गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान द्वारा प्रबंधित आपदा अनुक्रिया उपकरणोंकुशल मानव संसाधनों तथा आपातकालीन आपूर्तियों का एक राष्ट्रव्यापी इलेक्ट्रॉनिक सूचीकरण तंत्र है। समिति सिफ़ारिश करती है कि आईडीआरएन की पहुँच एवं प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकीय उन्नयन तथा सरकारी एजेंसियोंस्थानीय समुदायों एवं आपातकालीन अनुक्रिया एजेंसियों के मध्य अधिक सुदृढ समन्वय पर विशेष बल दिया जाए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि संसाधनों के वास्तविक समय में अद्यतन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएक्योंकि पुराने आँकड़े आपदा अनुक्रिया गतिविधियों को बाधित कर सकते हैं। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि जिलाराज्य तथा राष्ट्रीय स्तर के विभागों एवं एजेंसियों द्वारा संसाधनों का अनिवार्य रूप से मासिक अथवा त्रैमासिक अद्यतन किया जाए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि आपातकालीन सेवाओं के साथ बेहतर एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए इस नेटवर्क को पुलिस आपातकालीन प्रणालियोंअग्निशमन विभागोंअस्पतालोंचिकित्सा सुविधाओं तथा एम्बुलेंस सेवाओं से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ा जाए।

(पैरा 5.9.3)

आपदा प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की सहभागिता

            समिति नोट करती है कि आपदा अनुक्रिया एवं पुनर्वास में स्थानीय समुदायों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। तथापिउनकी सहभागिता के और अधिक प्रभावी एकीकरण तथा उनकी क्षमताओं के और अधिक सुदृढ़ीकरण की पर्याप्त आवश्यकता है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि आपदा मित्र तथा युवा आपदा मित्र जैसी योजनाओं सहित समुदाय-आधारित आपदा अनुक्रिया व्यवस्थाओं का विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण किया जाए तथा उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षणउपकरण एवं संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि ग्राम आपदा प्रबंधन योजनाओं (वीडीएमपी) तथा स्थानीय स्तर की आपदा तैयारी योजनाओं का नियमित रूप से अद्यतन किया जाए तथा उन्हें जिला एवं राज्य स्तरीय योजनाओं के साथ एकीकृत किया जाएताकि जमीनी स्तर पर प्रभावी आपदा अनुक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

(पैरा 5.10.5)

राहत एवं पुनर्वास

            समिति सिफ़ारिश करती है कि राहत के न्यूनतम मानकों की उभरती आवश्यकताओं एवं सर्वोत्तम प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर समीक्षा एवं अद्यतन किया जाए तथा सभी राज्यों एवं संघ राज्यक्षेत्रों में उनका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि संवेदनशील वर्गों के लिए लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से विशेष प्रावधान किए जाएँजिनमें राहत शिविरों में समर्पित सुविधाएँआजीविका सहायता तथा सामाजिक संरक्षण संबंधी उपाय सम्मिलित हों।

(पैरा 5.11.4)

पुनर्बहाली प्रक्रिया

            समिति नोट करती है कि आपदा-पश्चात् आवश्यकता आकलन (पीडीएनए) पुनर्बहाली योजना निर्माण का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। तथापिइसकी समयबद्धतामानकीकरण तथा पीडीएनए के निष्कर्षों का वास्तविक वित्तीय सहायता एवं पुनर्निर्माण प्रयासों के साथ समुचित सामंजस्य सुनिश्चित किए जाने के संबंध में अभी भी चिंताएँ विद्यमान हैं। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि विभिन्न राज्यों में पीडीएनए की प्रक्रिया का स्पष्ट समय-सीमाकार्यप्रणाली तथा क्षेत्रवार प्रारूपों के साथ मानकीकरण किया जाएताकि क्षति एवं हानि के आकलन में एकरूपता तथा विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि पुनर्बहाली एवं पुनर्निर्माण के लिए प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता को पीडीएनए के निष्कर्षों के साथ अधिक निकटता से संबद्ध किया जाए तथा किसी भी विचलन की स्थिति में उसका समुचित औचित्य अभिलिखित किया जाएजिससे हितधारकों के मध्य पारदर्शिता एवं विश्वास को सुदृढ किया जा सके।

(पैरा 5.12.6)

प्रारंभिकमध्यमकालिक एवं दीर्घकालिक पुनर्बहाली

            समिति यह नोट करती है कि यद्यपि “बेहतर पुनर्निर्माण” (बिल्ड बैक बेटर) के सिद्धांत को नीतिगत स्तर पर मान्यता प्रदान की गई हैतथापि इसके जमीनी क्रियान्वयन हेतु मापन योग्य मानदंडों का अभाव है। अतः समिति सिफ़ारिश करती है कि विशेष रूप से आवासअवसंरचना तथा आजीविका की पुनर्बहाली के क्षेत्रों में ठोस परिणाम सुनिश्चित करने के उद्देश्य से “बेहतर पुनर्निर्माण” (बिल्ड बैक बेटर) दृष्टिकोण के क्रियान्वयन हेतु स्पष्ट परिचालन दिशा-निर्देश एवं क्षेत्र-विशिष्ट मानक विकसित किए जाएँताकि पुनर्निर्माण प्रयासों में प्रत्यास्थता सुनिश्चित की जा सके। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि पुनर्निर्माण परियोजनाओं द्वारा प्रत्यास्थता एवं सततता संबंधी मानकों के अनुपालन का आकलन करने हेतु निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए तथा उसका समय-समय पर उच्च प्राधिकारियों द्वारा पुनर्विलोकन किया जाए।

(पैरा 5.13.3)

राज्यवार प्रतिक्रियाराहत और पुनर्वास

                 समिति ने समुक्ति की है कि ओडिशा राज्य ने चक्रवात तैयारी और व्यापक निकासी के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहलें की हैं। इसी प्रकारकेरल राज्य ने बाढ़ संबंधी चेतावनी प्रसार तथा स्थानीय शासन के विकेंद्रीकरण में सफलता प्राप्त की है। तमिलनाडु राज्य ने बेहतर पुनर्निर्माण” दृष्टिकोण अपनाया है तथा विकास नियोजन में आपदा जोखिम न्यूनीकरण का एकीकरण किया है। समिति का मत है कि बेहतर तैयारी उपाय तथा संस्थागत मोचन व्यवस्था किसी भी आपदा की स्थिति में क्षति को न्यूनतम करने का एक प्रभावी तंत्र है। समिति सिफ़ारिश करती है कि सभी राज्यों द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं तथा समाविष्ट मोचन तंत्रों का व्यापक रूप से संकलन एवं प्रलेखन किया जाए तथा उन्हें समान प्रकार की आपदाओं के प्रति संवेदनशील अन्य राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लिए दिशानिर्देशों के रूप में उपलब्ध कराया जाए।

(पैरा 5.17.64)

                 समिति का मत है कि आपदा प्रबंधन के संपूर्ण आयाम के लिए रोकथामजोखिम न्यूनीकरणतैयारीमोचनपुनर्बहाली और पुनर्निर्माण को समाहित करने वाला एक समन्वितएकीकृत तथा बहुविषयक दृष्टिकोण अपेक्षित है। देश में आपदाएँ न केवल बारंबार आती हैंबल्कि उनका स्वरूप भी विविध प्रकार का है। इससे यह आवश्यक हो जाता है कि संवेदनशील राज्य/संघ राज्य क्षेत्र किसी भी आपदा की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अपने जोखिम न्यूनीकरणतैयारीमोचन और पुनर्बहाली संबंधी उपायों की निरंतर समीक्षा तथा अद्यतन करते रहें ताकि वे सदैव एक कदम आगे रहें। इसके अतिरिक्तउभरते बहुविध आपदा जोखिमों का समाधान करनेअंतिम छोर तक संपर्कता को सुदृढ करने तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों का जमीनी स्तर की प्रणालियों के साथ एकीकरण बढ़ाने के लिए सतत प्रयास अपेक्षित हैंजिससे प्रतिक्रियाराहत और पुनर्बहाली उपायों की प्रभावशीलता में और वृद्धि हो सके।

(पैरा 5.17.65)

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