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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में स्कूली छात्रों के खतरनाक तरीके से बेतवा नदी पार करने की मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया

खबरों के मुताबिक, वे इस खतरनाक रास्ते को इसलिए चुनते हैं क्योंकि इससे सड़क मार्ग से 13 किलोमीटर की दूरी घटकर मात्र 1.5 किलोमीटर रह जाती है

आयोग ने कहा ​​है कि बच्चों के स्कूल पहुंचने के लिए सुरक्षित परिवहन साधन का अभाव उनके गरिमापूर्ण शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है

आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के काकरौआ गांव के स्कूली बच्चों द्वारा जान जोखिम में डालकर बेतवा नदी के स्टॉप डैम के खंभों को फांद कर स्कूल जाने से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है।                                                    वे यह खतरनाक रास्ता इसलिए अपनाते हैं क्योंकि इससे सड़क मार्ग से 13 किलोमीटर की दूरी घटकर मात्र 1.5 किलोमीटर रह जाती है। खबरों के अनुसार, गांव के नौ विद्यार्थी प्रतिदिन इसी तरह नदी पार करते हैं, जिनमें पांच छात्राएं शामिल हैं।

आयोग ने कहा है कि यदि यह जानकारी सही है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला बनता है। आयोग ने यह भी कहा है कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 21ए 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को राज्य द्वारा निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने की गारंटी देता है। बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 भी 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है। इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय ने अविनाश मेहरोत्रा ​​बनाम भारत संघ (2009) मामले में यह माना है कि शिक्षा के अधिकार में सुरक्षित विद्यालय और सुरक्षित बुनियादी ढांचे का अधिकार भी अनिवार्य रूप से शामिल है।

इस आधार पर आयोग ने यह माना है कि बच्चों के विद्यालय पहुंचने के लिए सुरक्षित परिवहन साधन का अभाव उनके गरिमापूर्ण शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। इसलिए आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है।

4 अगस्त 2026 की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बांध के खुले खंभों को फांद कर स्कूल जाते बच्चों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में काम करने के कारण वे अपने बच्चों को दूर के स्कूल में नहीं छोड़ सकते। उनके पास दो ही विकल्प हैं- या तो बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दें या बच्चे इसी तरह स्कूल जाते रहें।

एक छात्रा अपनी कम लंबाई के कारण खंभों को पार न कर पाने की वजह से स्कूल नहीं जा पाई और फाइलन परीक्षा में फेल हो गई। जिला शिक्षा अधिकारी ने उस जगह का दौरा किया और जिला कलेक्टर को इस मामले की जानकारी दी। हालांकि, नदी पार करने के लिए सुरक्षित मार्ग के निर्माण की कोई समयसीमा नहीं बताई गई है।

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