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भ्रामक एडटेक प्लेटफॉर्म और फर्जी विश्वविद्यालय

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पाया है कि कुछ एडटेक कंपनियां समाचार पत्रों / सोशल मीडिया / टेलीविजन पर यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त/अधिकार प्राप्त कुछ विश्वविद्यालयों/संस्थानों के सहयोग से ओडीएल/ऑनलाइन माध्यमों में डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रम उपलब्ध कराने के संबंध में विज्ञापन दे रही हैं। यूजीसी ने एक सार्वजनिक सूचना जारी कर सभी छात्रों/हितधारकों को सूचित किया है कि इस प्रकार की फ्रेंचाइजी व्यवस्था अनुमेय नहीं है और ऐसे किसी भी कार्यक्रम/डिग्री को यूजीसी की मान्यता प्राप्त नहीं है। यूजीसी ने कहा है कि लागू कानूनों/नियमों/विनियमों के तहत दोषी एडटेक कंपनियों और उच्चतर शिक्षण संस्थानों (एचईआई) के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। यूजीसी ने सभी छात्रों/हितधारकों को सार्वजनिक सूचना के माध्यम से यह भी सलाह दी है कि किसी भी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने से पहले यूजीसी (डीईबी) वेबसाइट पर कार्यक्रमों की मान्यता/अधिकार प्राप्त स्थिति की जांच कर लें।

जब भी किसी अनधिकृत संस्था द्वारा डिग्री कार्यक्रम संचालित किए जाने के संबंध में शिकायत प्राप्त होती है, तो यूजीसी उस संस्था को नोटिस जारी कर सूचित करता है कि वह डिग्री प्रदान करने के लिए अधिकृत नहीं है और उससे स्पष्टीकरण मांगा जाता है। यदि प्राप्त स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं होता है, तो संस्था का नाम यूजीसी की फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल कर दिया जाता है। फरवरी 2026 में प्रकाशित नवीनतम सूची के अनुसार, 32 संस्थानों को फर्जी विश्वविद्यालयों के रूप में चिन्हित किया गया है। फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची यूजीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

फर्जी विश्वविद्यालयों और अनधिकृत संस्थानों की समस्या पर रोक लगाने के लिए यूजीसी ने 30 मई 1996 को एंटी-माल-प्रैक्टिस सेल (एएमपीसी) की स्थापना की थी। एएमपीसी देश में फर्जी या गैर-मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों/संस्थानों के अस्तित्व और संचालन से संबंधित मामलों को देखता है, जो यूजीसी अधिनियम, 1956 के उल्लंघन में कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं या डिग्री प्रदान कर रहे हैं।

इसके अलावा, छात्रों और आम जनता में जागरूकता लाने के लिए यूजीसी ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

i. अमान्य डिग्री प्रदान करने वाले अनधिकृत संस्थानों को स्पष्टीकरण/टिप्पणी के लिए कारण बताओ नोटिस/चेतावनी नोटिस/पत्र जारी किए गए हैं।

ii. यूजीसी की वेबसाइट पर समय-समय पर राज्यवार फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची प्रकाशित और अपलोड की जाती है।

iii. आम जनता, छात्रों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों में फर्जी विश्वविद्यालयों के संबंध में जागरूकता पैदा करने के लिए यूजीसी की वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समय-समय पर सार्वजनिक सूचनाएं जारी की जाती हैं। छात्रों को प्रवेश लेने से पहले यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से उच्चतर शिक्षण संस्थानों (एचईआई) की प्रमाणिकता जांचने की सलाह दी जाती है।

iv. सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया जाता है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में संचालित फर्जी विश्वविद्यालयों/संस्थानों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करें तथा आवश्यकता पड़ने पर ऐसे संस्थानों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराएं।

यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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