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केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राम मोहन नायडू की उपस्थिति में पवन हंस ने नॉर्वे की नोएमी एयरोस्पेस के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए


विद्युत चालित सी-प्लेन प्रौद्योगिकी और सतत विमानन सहयोग की संभावनाओं का संयुक्त रूप से किया जाएगा अन्वेषण

पवन हंस लिमिटेड (पीएचएल), जो नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन भारत सरकार का एक उपक्रम है, ने आज नॉर्वे की नोएमी एयरोस्पेस (एलफ्लाई एएस) के साथ विद्युत चालित सी-प्लेन समाधानों सहित अगली पीढ़ी की सतत विमानन प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग के अवसरों का पता लगाने के लिए एक गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौता ज्ञापन पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राम मोहन नायडू किंजरापु तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव श्री समीर कुमार सिन्हा की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

इस समझौते पर पवन हंस लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री सुनील कुमार नागदौने तथा नॉर्वे की नोएमी एयरोस्पेस (एलफ्लाई एएस) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री एरिक फ्रांस्वा लिथुन ने हस्ताक्षर किए।

प्रस्तावित सहयोग का उद्देश्य विद्युत चालित सी-प्लेन प्रौद्योगिकियोंकौशल विकास और क्षमता निर्माणतकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान एवं कार्यशालाओं तथा व्यवहार्यता अध्ययनों जैसे क्षेत्रों में संभावित सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए एक रूपरेखा स्थापित करना है।

यह पहल भारत सरकार के क्षेत्रीय संपर्कहरित विमानननवाचार-आधारित विकासद्वीप संपर्क तथा उभरती विमानन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के विजन के अनुरूप है।

इस अवसर पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने कहा, यह सहयोग नागरिक उड्डयन क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और उभरती प्रौद्योगिकियों की संभावनाओं का पता लगाने की हमारी व्यापक सोच को दर्शाता है।”

श्री राम मोहन नायडू ने आगे कहा, हमारा विजन केवल भारत में सी-प्लेन संचालित करने तक सीमित नहीं हैबल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ विजन के अनुरूप उनका निर्माण भी भारत में करना है। इसके अलावाकेंद्रीय बजट 2026 में सी-प्लेन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की सोच को स्पष्ट रूप से सामने रखा गया है। इसमें सी-प्लेन के स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। साथ हीपरिचालन को समर्थन देने के लिए एक सी-प्लेन वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) योजना भी शुरू की जाएगी। यदि हम वैश्विक प्रौद्योगिकी साझेदारियों को भारत की विनिर्माण क्षमता के साथ जोड़ेंतो हम सी-प्लेन की स्थानीय और क्षेत्रीय मांग को पूरा कर सकते हैं।”

मंत्री ने आगे कहा, पिछले दो वर्षों में भारत सरकार ने देश में सी-प्लेन को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। हमने सी-प्लेन परिचालन के लिए समर्पित दिशा-निर्देश जारी किएनियामकीय ढांचे को सरल बनाया और हितधारकों को प्रोत्साहित करने के लिए देशभर में एक प्रदर्शन उड़ान भी संचालित की।”

नॉर्वे के बर्गेन मुख्यालय वाली नोएमी एयरोस्पेस (एलफ्लाई एएस) अगली पीढ़ी की विद्युत चालित सी-प्लेन प्रौद्योगिकी के विकास में कार्यरत है और इसके विकास कार्यक्रम को नॉर्वे सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त है।

यह समझौता ज्ञापन (एमओयू) खोजपरक प्रकृति का है और इसमें किसी प्रकार की वित्तीय प्रतिबद्धताखरीद संबंधी प्रतिबद्धतानिवेश दायित्व या विशेष व्यवस्था शामिल नहीं है। इन चर्चाओं से भविष्य में होने वाला कोई भी सहयोग अलग से किए जाने वाले औपचारिक समझौतों तथा लागू कानूनों और भारत सरकार की प्रक्रियाओं के अनुरूप सक्षम प्राधिकारियों की आवश्यक स्वीकृतियों के अधीन होगा।

यह पहल पवन हंस लिमिटेड की नवाचार, परिचालन उत्कृष्टता तथा रणनीतिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से भारत के विकसित हो रहे विमानन पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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