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संसद प्रश्न: मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन

गगनयान मिशन के मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक मानकों को प्रमाणित करने वाली विकास गतिविधियों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • मानव रेटेड प्रक्षेपण यान : प्रपल्शन चरणों और संरचनाओं का विकास तथा जमीनी परीक्षण पूरा कर लिया गया है।
  • ऑर्बिटल मॉड्यूल: क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के लिए प्रपल्शन प्रणालियों का विकास, परीक्षण और प्रमाणीकरण पूरा हो चुका है। पर्यावरण नियंत्रण  और जीवन रक्षक प्रणाली का इंजीनियरिंग मॉडल तैयार किया गया है। अवरोहण प्रणाली, क्रू मॉड्यूल को सीधा रखने वाली प्रणाली, ताप सुरक्षा प्रणाली और एंड-टू-एंड एवियोनिक्स का विकास और परीक्षण किया जा चुका है।
  • क्रू एस्केप सिस्टम : पांच प्रकार की मोटर विकसित कर उनका स्थैतिक परीक्षण किया गया है। क्रू एस्केप सिस्टम की सभी संरचनाएं तैयार कर प्रमाणित की जा चुकी हैं।
  • अवसंरचना तैयार: ऑर्बिटल मॉड्यूल तैयारी सुविधा, गगनयान नियंत्रण केंद्र, गगनयान नियंत्रण सुविधा, अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा और दूसरे प्रक्षेपण परिसर में आवश्यक संशोधन पूरे कर लिए गए हैं।
  • परीक्षण मिशन: क्रू एस्केप सिस्टम के उड़ान के दौरान परीक्षण के लिए पहला टेस्ट व्हीकल मिशन (टीवी – डी1) सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। अवरोहण प्रणाली के सत्यापन के लिए सिम्युलेटेड क्रू मॉड्यूल के साथ इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट-01 (आई ए डी टी-01) और आई ए डी टी-02 सफलतापूर्वक पूरे किए गए हैं। टीवी – डी2 मिशन की तैयारियां जारी हैं।
  • उड़ान संचालन और संचार नेटवर्क: ग्राउंड नेटवर्क का कॉन्फिगरेशन पूरा कर लिया गया है। आईडीआरएसएस-1 फीडर स्टेशनों और टरेस्ट्रीअल लिंक की स्थापना की जा चुकी है। अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • क्रू रिकवरी ऑपरेशन: रिकवरी से जुड़े संसाधनों को अंतिम रूप दे दिया गया है और रिकवरी योजना तैयार कर ली गई है।

गगनयान के लिए विकसित नई प्रणालियों के प्रदर्शन हेतु विभिन्न जमीनी योग्यता परीक्षण भी समानांतर रूप से जारी हैं।

गगनयात्रियों ने रूस के ग्लावकोसमॉस में सामान्य प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। बेंगलुरु में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र में गगनयान मिशन से संबंधित विशेष प्रशिक्षण जारी है। पहला टेस्ट मिशन टीवी – डी1 पूरा हो चुका है और दूसरे टेस्ट मिशन टीवी – डी2 की गतिविधियां जारी हैं। मानव रेटेड प्रक्षेपण यान एचएलवीएम3 के सभी प्रणोदन चरणों और संरचनाओं का विकास तथा जमीनी परीक्षण पूरा हो चुका है।

भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन वर्ष 2027 में भेजे जाने का लक्ष्य है।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बी ए एस) को वर्ष 2035 तक संचालन में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसरो ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए पांच मॉड्यूल वाली समग्र संरचना तैयार की है। सरकार ने बी ए एस-01 के पहले मॉड्यूल के विकास और प्रक्षेपण को मंजूरी दे दी है। बी ए एस-01 मॉड्यूल की प्रणाली इंजीनियरिंग और विभिन्न उप-प्रणालियों की तकनीकी विकास गतिविधियां इसरो के केंद्रों और इकाइयों में जारी हैं।

मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए कई महत्वपूर्ण तकनीकों की पहचान की गई है। इनमें फ्लाइट सूट, व्यूपोर्ट, क्रू सीट और डॉकिंग तकनीक शामिल हैं। केंद्र  सरकार ने इन महत्वपूर्ण तकनीकों के स्वदेशी विकास को मंजूरी दे दी है। इनके प्रोटोटाइप हार्डवेयर का डिजाइन और विकास कार्य जारी है।

यह जानकारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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