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वित्तीय कठिनाइयों से कॉर्पोरेट नेतृत्व तक: मृत्युंजय सिंह की सफलता में उच्च शिक्षा योजना सहायक बनी

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने से जीवन बदल जाता है। इससे बेहतर करियर अवसर और आर्थिक उन्नति के द्वार खुल जाते हैं। हालांकि, सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े समुदायों के कई मेधावी छात्रों के लिए, वित्तीय कठिनाइयां प्रायः देश के प्रमुख संस्थानों में शिक्षा हासिल करने में बड़ी बाधा होती हैं।

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग – ईबीसी और विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों – डीएनटी के विद्यार्थियों हेतु उच्च शिक्षा योजना – टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम के परिवर्तनकारी प्रभाव दर्शाते हुए, ओबीसी वर्ग के छात्र मृत्युंजय सिंह, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान से सफलतापूर्वक एमबीए करने के बाद आज वीट्रांस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वीएक्सप्रेस प्रभाग में वरिष्ठ प्रबंधक पद पर कार्यरत हैं।

सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद, शिक्षा का महत्व समझने वाले परिवार के मृत्युंजय की आकांक्षा सफल पेशेवर करियर और समाज में सार्थक योगदान देने की थी। एमबीए पाठ्यक्रम में दाखिले के समय, उनके परिवार की वार्षिक आय करीब दो लाख रुपये थी, जिससे प्रबंधन शिक्षा का शुल्क वहन करना अत्यंत कठिन था। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मृत्युंजय शैक्षणिक उत्कृष्टता और पेशेवर विकास के प्रति समर्पित रहे।

मृत्युंजय सिंह की प्रतिभा को पहचानते हुए, टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम के तहत उच्च शिक्षा के लिए उन्हें छात्रवृत्ति सहायता प्रदान की गई। मार्च 2025 में एमबीए के पहले वर्ष में उन्हें 7.85 लाख रुपये और जनवरी 2026 में दूसरे वर्ष में 7.66 लाख रुपये मिले। छात्रवृत्ति से उनके परिवार पर वित्तीय बोझ काफी कम हो गया और वे अपनी पढ़ाई, कौशल विकास और करियर की तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सके।

छात्रवृत्ति सहायता से व्यावसायिक सफलता तक

बिना किसी बाधा के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने से मृत्युंजय ने आईआईएम सिरमौर से सफलतापूर्वक एमबीए पूरा कर लिया और उन्हें वीट्रांस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वीएक्सप्रेस में वरिष्ठ प्रबंधक की नौकरी मिल गई। उनकी वार्षिक आय में लगभग 12 लाख रुपये की वृद्धि हुई है, जो उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार और योजना के परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाता है।

मृत्युंजय सिंह ने अपनी इस यात्रा के बारे में कहा:

छात्रवृत्ति से मेरे परिवार पर आर्थिक बोझ कम हुआ और मुझे अपनी शिक्षा और करियर पर ध्यान केंद्रित करने का आत्मविश्वास मिला। मैं बिना किसी आर्थिक बोझ के एमबीए करने में सक्षम हुआ और अधिक मेहनत से पेशेवर लक्ष्यों की ओर बढ़ने को प्रेरित हो सका। आजमुझे अपने सफल करियर पर गर्व है और मैं इसे संभव बनाने वाले समर्थन के लिए हमेशा आभारी रहूंगा।

मृत्युंजय सिंह की सफलता की कहानी दर्शाती है कि अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग और घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातीय छात्रों के लिए बनाई गई उच्च शिक्षा योजना किस प्रकार वंचित पृष्ठभूमि के योग्य विद्यार्थियों को उच्च संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने, व्यावसायिक कौशल विकसित करने और सार्थक रोजगार पाने में सक्षम बना रही है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय वंचित समाज के विद्यार्थियें को शिक्षा सुलभ बनाकर, प्रतिभाशाली युवाओं को सशक्त बनाने, सामाजिक उत्थान और समावेशी तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में निरंतर योगदान दे रहा है।

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