सरकार संबंधित मंत्रालयों/विभागों के क्षेत्र-विशिष्ट कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न उपयोग क्षेत्रों में विद्युतीकरण तथा दक्ष विद्युत-आधारित प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा दे रही है। परिवहन क्षेत्र में, विद्युत मंत्रालय ने देशभर में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग अवसंरचना के विकास को सुगम बनाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना की स्थापना एवं संचालन संबंधी दिशा-निर्देश, 2024 तथा बैटरी स्वैपिंग और चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना एवं संचालन संबंधी दिशा-निर्देश, 2025 जारी किए हैं। भारी उद्योग मंत्रालय की पीएम ई-ड्राइव योजना तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की पीएम-ईबस सेवा योजना के माध्यम से भी इलेक्ट्रिक गतिशीलता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
औद्योगिक क्षेत्र में, ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड (पीएटी), कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (सीसीटीएस) तथा उद्योगों एवं प्रतिष्ठानों में ऊर्जा दक्ष प्रौद्योगिकियों की तैनाती हेतु सहायता (ADEETIE) योजना जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता तथा ऊर्जा-दक्ष प्रौद्योगिकियों और प्रक्रियाओं को अपनाने को बढ़ावा देता है।
कृषि क्षेत्र में, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) के अंतर्गत कृषि पंपों के विद्युतीकरण तथा सौरकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ई-कुकिंग सहित ऊर्जा-दक्ष विद्युत उपकरणों और प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता एवं प्रसार गतिविधियां भी संचालित करता है।
सरकार संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के अंतर्गत राज्यों तथा विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को वितरण अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण में सहायता प्रदान कर रही है। इसके साथ ही क्षमता निर्माण तथा डिमांड साइड मैनेजमेंट (डीएसएम) कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
औद्योगिक क्षेत्र, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए, विद्युत मंत्रालय ने जुलाई 2025 में “उद्योगों एवं प्रतिष्ठानों में ऊर्जा दक्ष प्रौद्योगिकियों की तैनाती हेतु सहायता (ADEETIE)” योजना प्रारंभ की, जिसका कुल परिव्यय 1,000 करोड़ रुपये है। यह योजना 14 ऊर्जा-गहन क्षेत्रों के 60 क्लस्टरों को आच्छादित करती है। योजना के अंतर्गत निवेश-ग्रेड ऊर्जा लेखा-परीक्षण (आईजीईए) की सुविधा प्रदान की जाती है तथा इकाइयों में ऊर्जा दक्षता उपायों के कार्यान्वयन के लिए सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को 5 प्रतिशत तथा मध्यम उद्यमों को 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।
ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में, विद्युत मंत्रालय 13.8 गीगावाट-घंटा (जीडब्ल्यूएच) क्षमता वाली बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बीईएसएस) की स्थापना के लिए 3,760 करोड़ रुपये के बजटीय समर्थन के साथ व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) योजना का कार्यान्वयन कर रहा है। इसके अतिरिक्त, विद्युत प्रणाली विकास निधि (पीएसडीएफ) के अंतर्गत 5,400 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के साथ 15 राज्यों तथा एनटीपीसी लिमिटेड के लिए 30 गीगावाट-घंटा (जीडब्ल्यूएच) क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बीईएसएस) के विकास हेतु एक व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) योजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।
विद्युत मंत्रालय ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग विद्युतीकरण लक्ष्य निर्धारित नहीं किए हैं। अंतिम उपयोग वाले क्षेत्रों का विद्युतीकरण संबंधित मंत्रालयों/विभागों की नीतियों और कार्यक्रमों के माध्यम से किया जाता है, जबकि विद्युत मंत्रालय विश्वसनीय विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित करने, पारेषण एवं वितरण अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने, ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने तथा उभरती हुई विद्युत-आधारित प्रौद्योगिकियों के लिए अनुकूल ढांचा उपलब्ध कराने के माध्यम से इस परिवर्तन को सुगम बनाता है।
बढ़ती विद्युत मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ावा देने, पारेषण क्षमता को सुदृढ़ करने तथा ग्रिड की विश्वसनीयता में सुधार के उद्देश्य से विभिन्न उपाय अपनाए हैं। इनमें अंतर्राज्यीय तथा राज्य के भीतर की पारेषण प्रणालियों का विस्तार, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (जीईसी) का विकास, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बीईएसएस) तथा पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं (पीएसपी) की स्थापना, नवीकरणीय ऊर्जा के पूर्वानुमान एवं निर्धारण के लिए नवीकरणीय ऊर्जा प्रबंधन केंद्र (आरईएमसी) की स्थापना, ग्रिड के प्रभावी संतुलन के लिए सहायक सेवाओं तथा रियल टाइम मार्केट (आरटीएम) का कार्यान्वयन तथा ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा के अधिक समावेशन को सुगम बनाने के लिए तापीय विद्युत उत्पादन इकाइयों के लचीले संचालन को सक्षम बनाना शामिल है।
देश की कुल ऊर्जा खपत में विद्युत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा कोई पृथक लक्ष्य अधिसूचित नहीं किया गया है। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) द्वारा प्रकाशित भारत ऊर्जा परिदृश्य रिपोर्ट, 2024-25 के अनुसार, देश की कुल अंतिम ऊर्जा खपत में विद्युत की हिस्सेदारी लगभग 23 प्रतिशत है। सरकार उपयुक्त अंतिम-उपयोग अनुप्रयोगों में विद्युत के अधिक उपयोग को बढ़ावा दे रही है। साथ ही, वह वहनीयता, विश्वसनीयता तथा ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत उत्पादन में वृद्धि तथा पारेषण, वितरण और ऊर्जा भंडारण अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में भी कार्य कर रही है।
यह जानकारी विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाईक ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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