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एसएचई-एलईएपीएस का प्रचालन


स्वयं सहायता उद्यमी-आजीविका एवं उद्यम कार्यान्वयन के माध्यम से समृद्धि और स्थिरता (एसएचई-एलईएपीएस) को क्रियान्वित किया गया है और इसमें एसएचई-एलईएपीएस के माध्यम से ऑनबोर्ड किए गए उद्यमों की निगरानी का प्रावधान है। इस एप्लिकेशन का शुभारंभ ग्रामीण विकास मंत्रालय के राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के अवसर पर 29 जून, 2026 को किया गया था। एसएचई-एलईएपीएस एप्लिकेशन को डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) उद्यमियों की उद्यम-संबंधी जानकारी प्राप्त करने हेतु लोकोस डिजिटल प्लेटफॉर्म के तहत विकसित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म उद्यमों की ऑनबोर्डिंग में सहायता प्रदान करता है और उद्यमों के प्रबंधन एवं निगरानी को सुगम बनाने हेतु वास्तविक समय में उद्यम-डेटा प्राप्त करता है। इसे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों के माध्यम से 34 राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों में क्रियान्वित किया जा रहा है तथा यह उद्यमों की निगरानी और योजना एवं निर्णय लेने में सहायता प्रदान करता है।

एसएचई-एलईएपीएस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत एसएचजी उद्यमों का राज्यवार ब्यौरा अनुबंध-I में दिया गया है।

एसएचई-एलईएपीएस डिजिटल प्लेटफॉर्म डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत संवर्धित उद्यमों का ब्यौरा प्राप्त करता है। इस प्लेटफॉर्म में अनुबंध-I में दर्शाए गए सभी उद्यमों के वार्षिक कारोबार एवं उद्यमों की निरंतरता से संबंधित जानकारी को बनाए रखने का प्रावधान है।

कर्नाटक राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (केएसआरएलएम) द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में विगत तीन वर्षों के दौरान डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) सहायता के माध्यम से स्थापित एसएचजी उद्यमों का ब्यौरा तथा एसएचजी उद्यमों की संख्या निम्नानुसार है:

क्रम सं.वर्षएसएचजी उद्यमों की संख्या
 2023-202421,438
 2024-202527,173
 2025-202631,246
 कुल79,857

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) उद्यमों की स्थिरता एवं बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने हेतु कई उपाय किए हैं। मंत्रालय ने एसएचजी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए “सरस”, “सरस आजीविका” और “आजीविका” ब्रांडों का पंजीकरण कराया है। पच्चीस राज्यों ने भी एसएचजी उत्पादों की बिक्री को सुगम बनाने हेतु राज्य-स्तरीय ब्रांड बनाए हैं, जैसे उमेद (महाराष्ट्र), पलाश एवं अदिवा (झारखंड), हिम ईरा (हिमाचल प्रदेश) और माठी (तमिलनाडु) आदि। एसएचजी उत्पादों को बढ़ावा देने हेतु राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर सरस मेलों का आयोजन किया जाता है, जिसमें प्रतिवर्ष दो राष्ट्रीय-स्तरीय सरस मेले, एक खाद्य महोत्सव तथा 50 से अधिक राज्य-स्तरीय सरस मेले शामिल हैं। चयनित एसएचजी उत्पादों की बिक्री हेतु सेंट्रल दिल्ली में सरस आजीविका गैलरी नामक एक खुदरा दुकान संचालित की जाती है, जबकि राज्य भी अपने-अपने ब्रांडों के अंतर्गत खुदरा दुकानें संचालित करते हैं। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय चयनित एसएचजी उत्पादों की बिक्री हेतु ई-सरस ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का संचालन करता है तथा उनकी व्यापक बाजार पहुंच को सुगम बनाने के लिए जीईएम, ओएनडीसी, अमेज़न, फ्लिपकार्ट, मीशो और जियोमार्ट के साथ साझेदारी की गई है।

क्र. सं.राज्य/संघ राज्य क्षेत्रएसएचजी उद्यमों की संख्या
 अंडमान और निकोबार115
 आंध्र प्रदेश1,56,851
 अरुणाचल प्रदेश522
 असम1,19,715
 बिहार3,908
 छत्तीसगढ4,018
 दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव136
 गोवा246
 गुजरात14,866
 हरियाणा174
 हिमाचल प्रदेश15,586
 जम्मू और कश्मीर21,038
 झारखंड1,61,212
 कर्नाटक57,731
 केरल38
 लद्दाख11
 लक्षद्वीप0
 मध्य प्रदेश44,540
 महाराष्ट्र3,68,795
 मणिपुर372
 मेघालय8,412
 मिजोरम1,243
 नागालैंड1,871
 ओडिशा8,425
 पुदुचेरी346
 पंजाब384
 राजस्थान5,473
 सिक्किम684
 तमिलनाडु36,060
 तेलंगाना54,632
 त्रिपुरा19,235
 उत्तर प्रदेश7,815
 उत्तराखंड410
 पश्चिम बंगाल8,007
 कुल11,22,871

यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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