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पंचायत विकास सूचकांक


मंत्रालय ने सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण के विषयों पर ग्राम पंचायतों/ग्राम पंचायतों के समकक्ष के क्रमिक प्रदर्शन सुधार को मापने के लिए एक समग्र मूल्यांकन ढांचे के रूप में पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पीएआई) विकसित किया है, जिसे पहले पंचायत डेव्लपमेंट इंडेक्स (पीडीआई) के रूप में जाना जाता था। पीएआई स्कोरकार्ड और डैशबोर्ड के माध्यम से विषय-वार और समग्र स्कोर प्रदान करता है, जिससे पंचायत स्तर पर निष्पादन में कमियों, सापेक्ष मज़बूती और उन क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है जिन पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए पीएआई 2.0 के कार्य में 33 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के कुल 2.59 लाख ग्राम पंचायतों/जीपी के समकक्ष को ऑनबोर्ड किया गया है। 2.0 में समग्र पीएआई ग्रेड के आधार पर जीपी की राज्य/संघ राज्य क्षेत्र वार संख्या अनुलग्नक-I में दी गई है। सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण के किसी भी विषय, जिसमें विषय 3: बाल-अनुकूल गांव और विषय 4: जल-पर्याप्त पंचायत शामिल है, के तहत “फ्रंटरनर” पंचायतों के लिए वर्ष 2026-27 बजट में विशेष प्रोत्साहन निधि नहीं बनाई गई है।

मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2022-23 से सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और अन्य हितधारकों के नेतृत्व कौशल को बढ़ाने और पंचायत शासन में सुधार के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण (सीबी एंड टी) के प्रमुख उद्देश्य के साथ संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) की केंद्र प्रायोजित योजना को लागू किया है। आरजीएसए की योजना के तहत, मंत्रालय विभिन्न श्रेणियों में पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और अन्य हितधारकों के सीबी एंड टी के लिए सहायता प्रदान करता है, अर्थात बुनियादी अभिमुखीकरण और रिफ्रेशर प्रशिक्षण, विषयगत प्रशिक्षण, विशेष प्रशिक्षण, पंचायत विकास योजना प्रशिक्षण आदि। योजना के तहत वित्त वर्ष 2022-23 से वित्त वर्ष वर्ष 2026-27 तक (10 जुलाई 2026 की स्थिति के अनुसार) सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (एलएसडीजी) के विषयों पर पंचायती राज संस्थाओं के कुल 36,81,750 निर्वाचित प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षित किया गया था। वित्त वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक विषयगत प्रशिक्षण का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र वार विवरण अनुलग्नक-II में दिया गया है।

पंचायती राज मंत्रालय सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (एलएसडीजी) के नौ विषयों के अनुरूप, विषय-आधारित योजना बनाने के तरीके से ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को तैयार करने में मदद करता है। ग्राम पंचायतों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी जीपीडीपी तैयार करने से पहले विकास के मुख्य क्षेत्रों की पहचान करें और उन्हें प्राथमिकता दें; इन क्षेत्रों को “संकल्प” कहा जाता है।

जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों से संबंधित क्षेत्र जैसे ड्रिप सिंचाई और छिड़काव (स्प्रिंकलर) प्रणाली के माध्यम से कुशल जल प्रबंधन, वाटरशेड विकास, कृषि वानिकी और अन्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों को विषय 4: जल पर्याप्त पंचायत और विषय 5: स्वच्छ और हरित पंचायत के तहत एकीकृत किया गया है।

वित्त वर्ष 2026-27 (29.07.2026 की स्थिति के अनुसार) के लिए, कुल 1,56,019 ग्राम पंचायतों ने जीपीडीपी तैयार करने का संकल्प लिया है। इनमें से 31,789 ग्राम पंचायतों ने ‘विषय 4: जल-पर्याप्त पंचायत’ और 32,806 ग्राम पंचायतों ने ‘विषय 5: स्वच्छ और हरित पंचायत’ को मुख्य रूप से ध्यान दिये जाने वाले क्षेत्रों के रूप में चुना है। मंत्रालय द्वारा पीएआई के तहत संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के साथ ऐसा कोई सहयोग स्थापित नहीं किया गया है।

सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) सतत और समावेशी विकास के लिए एक वैश्विक रूप से स्वीकृत रूपरेखा प्रदान करते हैं। पंचायती राज मंत्रालय ने सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (एलएसडीजी) के नौ विषयों का एक फ्रेमवर्क विकसित करके पंचायतों के लिए सतत विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण किया है, जिससे वैश्विक विकास एजेंडा जमीनी स्तर पर अधिक प्रासंगिक और क्रियान्वयन योग्य बन गया है। इन नौ एलएसडीजी विषयों, जिन्हें पीएआई फ्रेमवर्क से सहायता प्राप्त होती है, के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण प्रभावी ग्रामीण शासन, बेहतर सेवा प्रदायगी और परिणाम-उन्मुख पंचायत विकास को सुगम बनाता है।

अनुलग्नक-I

पीएआई 2.0 के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में समग्र स्कोर के आधार पर राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार जीपी की संख्या

क्र. स.राज्य/संघ राज्य क्षेत्रकुलए+एबीसीडी
1अंडमान और निकोबार700021490
2आंध्र प्रदेश13,310059110,1782,46873
3अरुणाचल प्रदेश2,10800721,718318
4असम2,1920251,20988474
5बिहार8,053027716,862418
6छत्तीसगढ़11,6430303,9365,9411,736
7गोवा18800801071
8गुजरात14,53407511,9632,47125
9हरियाणा6,225073,3422,77997
10हिमाचल प्रदेश3,615011,7061,82880
11जम्मू और कश्मीर4,291011,4592,79239
12झारखंड4,345061,9932,31135
13कर्नाटक5,9460363,7072,17231
14केरल94109584060
15लद्दाख19300621292
16लक्षद्वीप1000550
17मध्य प्रदेश23,01103311,15411,514310
18महाराष्ट्र27,894031510,04916,909621
19मणिपुर3,04100571,2311,753
20मेघालय3,06900182,292759
21मिज़ोरम8400345492534
22नागालैंड1,27700331,040204
23ओडिशा6,79405554,5661,62746
24पुदुच्चेरी1080077310
25पंजाब13,233013,2759,464493
26राजस्थान11,037085,4375,389203
27सिक्किम19901163350
28तमिलनाडु12,482019710,5201,74619
29तेलंगाना12,556062410,0561,85323
30दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव420129120
31त्रिपुरा1,176094323300
32उत्तराखंड7,766032,3595,203201
33उत्तर प्रदेश57,67805118,90532,5986,124
कुल259,86703,635118,824123,71913,689

अनुलग्नक-II

विषयगत प्रशिक्षण में प्रशिक्षित कुल प्रतिभागी 2022-23 से 2026-27 तक (10.07.2026 की स्थिति के अनुसार)

क्र. स.राज्य/संघ राज्य क्षेत्र2022-232023-242024-252025-262026-27 (10.07.2026 की स्थिति के अनुसार )
1अंडमान और निकोबार द्वीप समूह5361,3962,3052,457–
2आंध्र प्रदेश406,61715896,589307,5915,254
3अरुणाचल प्रदेश–1,363798568–
4असम25,2551,36920,49120,758–
5बिहार14,07343,19298,70959,553–
6छत्तीसगढ़2,80910,5974,382327–
7गोवा–43430286–
8गुजरात–3240,020266–
9हरियाणा–151–––
10हिमाचल प्रदेश–1233,023332–
11जम्मू और कश्मीर189,327171,419–20,413–
12झारखंड27323113––
13कर्नाटक30150,46256,22650,82910
14केरल98,59283,30754,1294,923–
15लद्दाख–––4,368–
16मध्य प्रदेश30,35510,81325,21417,450313
17महाराष्ट्र270,470130,8517,38534,992173
18मणिपुर–34142––
19मेघालय4,08367,60059,56961,360–
20मिज़ोरम1,2608464,424150–
21नागालैंड––91224–
22ओडिशा6472,932103,882130,74571
23पुदुच्चेरी–––––
24पंजाब24,14310,2132,56721,540–
25राजस्थान1,1084,2117,8709,524–
26सिक्किम8,9994,5652,8904,039–
27तमिलनाडु8,56838,76531,2201,195–
28तेलंगाना7626086457–
29दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव457250335800–
30त्रिपुरा10051,64327,93724,400–
31उत्तर प्रदेश2,3677625,76711,383–
32उत्तराखंड72,93721,764141159–
33पश्चिम बंगाल27,41025,391101,08828,585–
34केंद्र2,516137471––
 कुल11928659060187577728192745821

यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने 04 अगस्त 2026 को लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।

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