LIVE

भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने 20% से अधिक इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को प्रोत्साहन देने के लिए कोई अलग से चरणबद्ध राष्ट्रीय नीति तैयार नहीं की है

ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई-ऑटो योजना) अखिल भारतीय स्तर पर लागू है। पीएलआई-ऑटो योजना के कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति निम्न प्रकार है:-

पैरामीटर31.03.2026 तक संचयी
     निवेश (करोड़ रुपये में)44,326
बिक्री में वृद्धि (आधार वर्ष वित्त वर्ष 2019-20) (करोड़ रुपये में)52,414
सृजित रोजगार (संख्या)67,820
वितरित प्रोत्साहन राशि (करोड़ रुपये में)2,386.36

घरेलू उत्पादन और एएटी उत्पादों के स्थानीयकरण को बढ़ावा देने के लिए, पीएलआई-ऑटो योजना के तहत प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने हेतु न्यूनतम 50% का घरेलू मूल्यवर्धन (डीवीए) अनिवार्य है। 28.07.2026 तक, 18 आवेदकों को 155 एएटी उत्पादों/वेरिएंट के लिए डीवीए प्रमाणपत्र प्राप्त हो चुके हैं।

भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने 20% से अधिक इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए कोई अलग से चरणबद्ध राष्ट्रीय नीति तैयार नहीं की है।

एमएचआई ने फ्लेक्स-फ्यूल और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने के संबंध में कोई अध्ययन नहीं किया है।

सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें जल संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा गया है। जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति के तहत, गन्ने से प्राप्त कच्चे माल, मक्का, खराब अनाज, टूटे चावल, मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त अनाज, राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति (एनबीसीसी) द्वारा अनुमोदित अतिरिक्त अनाज और अन्य अनुमोदित कृषि कच्चे माल सहित कई अनुमोदित कच्चे माल से एथेनॉल का उत्पादन किया जाता है।

सरकार मक्का जैसी अपेक्षाकृत कम जल खपत वाली फसलों की ओर फसल विविधता को भी बढ़ावा दे रही है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 2024 में गठित एक विशेषज्ञ समिति ने विभिन्न इथेनॉल उत्पादन फसलों की जल आवश्यकता का अध्ययन किया और कार्यक्रम के कार्यान्वयन के दौरान इसकी सिफारिशों पर विचार किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ घटक के तहत सूक्ष्म सिंचाई, ड्रिप सिंचाई और अन्य जल संरक्षण उपायों के माध्यम से जल उपयोग दक्षता को भी बढ़ाया जा रहा है। कई चीनी मिलें भी किसानों को जल-कुशल खेती पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।

भस्मीकरण बॉयलर वाली गुड़-आधारित डिस्टलरी और अनाज-आधारित डिस्टलरी को ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) इकाइयों के रूप में संचालित करना आवश्यक है, जिससे प्रक्रिया जल का पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग संभव हो सके और तरल अपशिष्ट डिस्चार्ज समाप्त हो सके।

Comments

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »