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सहकारी गोदाम

31.05.2023 से सहकारिता क्षेत्र में विकेन्द्रीकृत अन्न भंडारण योजना के कार्यान्वयन के पश्चात उत्तर प्रदेश राज्य से ऐसी कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है I

गोदामों के समुचित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS)/सहकारी समितियों के कर्मचारियों को आधुनिक वेयरहाउस प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण नाबार्ड (NABARD) तथा भांडागारण विकास एवं विनियामक प्राधिकरण (WDRA) द्वारा आयोजित किए गए हैं। तथापि, जौनपुर से आधुनिक वेयरहाउस प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण आयोजित कराने हेतु अब तक कोई विशिष्ट अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है। राज्य सरकार आवश्यकता अनुसार अपनी PACS/सहकारी समितियों के लिए ऐसे प्रशिक्षण के आयोजन हेतु नाबार्ड तथा WDRA को अनुरोध भेज सकती है।

इस संबंध में, उत्तर प्रदेश राज्य से इस प्रकार की कोई सूचना/शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। सहकारिता क्षेत्र में विकेन्द्रीकृत भंडारण योजना के अंतर्गत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS)/अन्य सहकारी समितियों के स्तर पर भारत सरकार की विभिन्न प्रचलित योजनाओं, जैसे कि एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF), एग्रीकल्चरल मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (AMI) योजना, सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (PMFME) के अभिसरण के माध्यम से गोदाम, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्रसंस्करण इकाइयाँ, उचित मूल्य की दुकानें, शीतगृह, आदि विभिन्न कृषि अवसंरचनाओं का सृजन किया जाता है।

पूर्वांचल क्षेत्र के उन्नाव एवं सोनभद्र तथा बुंदेलखंड क्षेत्र के जौनपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा, जालौन एवं झांसी जिले प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं। सहकारिता क्षेत्र में विकेन्द्रीकृत अन्न भंडारण योजना, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) के प्रमुख घटकों में से एक है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में एकीकृत कृषि अवसंरचना तथा मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य की पूरक है। इस योजना के अंतर्गत PACS/अन्य सहकारी समितियों के स्तर पर भंडारण अवसंरचना के सृजन के साथ-साथ प्राथमिक प्रसंस्करण एवं अन्य संबद्ध सुविधाओं की स्थापना से पर्याप्त रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर सृजित होंगे। जिला सहकारी विकास समिति (DCDC) की स्वीकृति प्राप्त होने पर जौनपुर जिला भी सहकारिता क्षेत्र में विकेन्द्रीकृत भंडारण योजना के अंतर्गत भाग लेकर इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकता है। योजना के अंतर्गत विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) का अनुमोदन संबंधित जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCB) द्वारा सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच के उपरांत किया जाता है और अग्रिम सब्सिडी दावा (Advance Subsidy Claim) प्राप्त करने हेतु DPR का सत्यापन नाबार्ड (NABARD) द्वारा अपने समर्पित पोर्टल के माध्यम से किया जाता है। परियोजना पूर्ण होने के पश्चात संबंधित बैंक एवं नाबार्ड द्वारा परियोजना का भौतिक सत्यापन किया जाता है।

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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