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उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में बाढ़ शमन उपाय

बाढ़ प्रबंधन और कटाव-रोधी योजनाएं संबंधित राज्य सरकारों द्वारा उनकी संबंधित प्राथमिकताओं के अनुसार तैयार और कार्यान्वित की जाती हैं। केंद्र सरकार बाढ़ प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम नामक केंद्रीय प्रायोजित योजना के माध्यम से गंभीर क्षेत्रों में तकनीकी दिशानिर्देश और प्रोत्साहनात्मक वित्तीय सहायता प्रदान कर राज्यों के प्रयासों में सहायता करती है। यह योजना बाढ़ नियंत्रण, कटाव-रोधी, जल निकासी का विकास, समुद्र कटाव-रोधी आदि से संबंधित कार्यों के लिए राज्यों को केंद्रीय सहयता प्रदान करती है। इस कार्यक्रम की शुरुआत से मार्च 2026 तक, सिक्किम सहित पूर्वोत्तर राज्यों में 263 बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं के लिए एफएमबीएपी के तहत 2,536.96 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता प्रदान की गई है।

केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) पहचान किए गए स्थानों पर संबंधित राज्य सरकारों को 24 घंटे तक के लीड टाइम के साथ कम दूरी के बाढ़ पूर्वानुमान जारी करता है। केन्द्रीय जल आयोग उचित जलाशय विनियमन सुगम बनाने के लिए पहचान किए गए जलाशयों के लिए अंतर्वाह पूर्वानुमान भी जारी करता है। वर्तमान में, मानक प्रचालन प्रक्रिया के अनुसार केन्द्रीय जल आयोग द्वारा 360 केंद्रों (159 अंतर्वाह पूर्वानुमान केंद्र और 201 स्तरीय पूर्वानुमान केंद्र) पर बाढ़ पूर्वानुमान जारी किए जाते हैं। इसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र के 53 केंद्र (15 अंतर्वाह पूर्वानुमान केंद्र और 38 स्तर पूर्वानुमान केंद्र) शामिल हैं। इन पूर्वानुमानों को समर्पित वेबसाइट नामतः https://ffs.india-water.gov.in के माध्यम से प्रसारित किया जाता है। लोगों को निकालने की योजना बनाने और अन्य उपचारात्मक उपाय करने के लिए स्थानीय अधिकारियों को अधिक समय प्रदान करने के लिए, सीडब्ल्यूसी ने सभी पूर्वानुमान केंद्रों के लिए 7 दिनों की अग्रिम बाढ़ पूर्वानुमान एडवाइजरी के लिए वर्षा-अपवाह गणितीय मॉडलिंग के आधार पर एक बेसिन-वार बाढ़ पूर्वानुमान मॉडल विकसित किया है। इस एडवाइजरी को समर्पित वेबसाइट नामतः https://aff.india-water.gov.in के माध्यम से प्रसारित किया जाता है। सीडब्ल्यूसी की बाढ़ पूर्वानुमान सेवाओं को संबंधित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) को जारी किए गए एकीकृत चेतावनी प्रसार मंच कॉमन अलर्ट प्रोटोकॉल (सीएपी) के साथ भी एकीकृत किया गया है। बाढ़ की सूचना विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, एक्स और फ्लड वॉच इंडिया मोबाइल ऐप आदि पर भी अपलोड की जाती है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्रभावी नदी बेसिन प्रबंधन और बाढ़ पूर्वानुमान के लिए, पड़ोसी देशों द्वारा जल विज्ञान और मौसम विज्ञान संबंधी डेटा साझा किए जाते हैं।

जल शक्ति मंत्रालय ने देश में बाढ़ प्रबंधन के गैर-संरचनात्मक उपाय के रूप में बाढ़ मैदान क्षेत्रीकरण (एफपीजेड) को अपनाने की आवश्यकता पर राज्यों पर लगातार बल दिया जा रहा है। राज्यों को बाढ़ कम करने के गैर-संरचनात्मक उपाय के रूप में बाढ़ क्षेत्रीकरण का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने में सक्षम बनाने हेतु, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा बाढ़ के मैदानों के क्षेत्रीकरण पर एक तकनीकी दिशानिर्देश तैयार किया गया है और अगस्त, 2025 में राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को परिचालित किया गया है।

ब्रह्मपुत्र बोर्ड ने पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 52 मास्टर प्लान तैयार किए हैं, जिनमें बाढ़ प्रबंधन के लिए संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक दोनों तरह के लघु, मध्यम और दीर्घकालिक उपाय शामिल हैं।

राज्य सरकारें वर्षा और बाढ़ सहित 12 अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं से हुई क्षति का आकलन करती हैं और भारत सरकार के अनुमोदित मानदंडों के अनुसार पहले से ही मौजूद राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) से राहत सहायता प्रदान करती हैं। गंभीर प्रकृति की आपदाओं के मामले में, जिसमें अंतर-मंत्रालयी केन्द्रीय दल (आईएमसीटी) द्वारा मूल्यांकन शामिल है, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

यह सूचना जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राज भूषण चौधरी द्वारा राज्यसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई है।

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