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एनआईसी के कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रभाग और ई-न्यायालयों के उत्कृष्टता केंद्र ने एआई-आधारित विधि शोध विश्लेषण सहायक उपकरण विकसित किया

विधि विभाग द्वारा उच्चतम न्यायालय की ई-समिति के समन्वय से राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के अंतर्गत ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना का कार्यान्वयन किया जा रहा है। परियोजना के तीसरे चरण के अंतर्गत न्यायिक दक्षता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने का प्रावधान है, जिसके लिए भविष्य की तकनीकी प्रगति घटक के तहत 53.57 करोड़ रूपये की राशि आवंटित की गई है।

उच्चतम न्यायालय की ई-समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार माननीय न्यायाधीशों को विधि शोध और दस्तावेज़ विश्लेषण में सहायता करने के लिए नेशनल इन्फोरमेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रभाग और ई-न्यायालयों के उत्कृष्टता केंद्र (सीओईई) द्वारा एक एआई-आधारित उपकरण, लीगल रिसर्च एनालिसिस असिस्टेंट विकसित किया गया है। पुणे स्थित एनआईसी के ई-न्यायालयों के उत्कृष्टता केंद्र (सीओईई) द्वारा एक एकीकृत डिजिटल केस प्रबंधन मंच के रूप में एक अन्य एआई-आधारित उपकरण, डिजिटल कोर्ट्स 2.1 विकसित किया गया है। यह केस संबंधी जानकारी के लिए एक एकल-विंडो इंटरफ़ेस प्रदान करता है और माननीय न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को आदेशों और निर्णयों को लिखने में सहायता करने के लिए वॉयस-टू-टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद जैसी एआई-सक्षम सुविधाओं को शामिल करता है। दोनों उपकरण शुरुआती परीक्षण चरण में हैं।

एआई-आधारित समाधानों को अपनाने और भविष्य में उनके उपयोग को नियंत्रित करने वाला परिचालन ढांचा, व्यापार नियमों और उच्चतम न्यायालय और संबंधित उच्च न्यायालयों की नीतियों के अनुसार तय किया जाता है।

विधि एवं न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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