काशी में धनतेरस पर खुलने वाले जगत का पालनहारिणी स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दरबार की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। धन तेरस की सुबह महाआरती के बाद मंदिर की पहली मंजिल पर मां के कपाट खोल दिए जाएंगे।

देवाधिदेव महादेव काशीपुराधिपति को भी अन्नदान देने वाली अन्नपूर्णेश्वरी कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी यानी धनतेरस से लेकर चार दिन सुबह से शाम तक भक्तों में अन्न-धन का खजाना बांटेंगी। दुखों के बादल छांटेंगी और दारिद्रय की रेखाओं को आशीषों से काटेंगी। बाबा काशी विश्वनाथ के आंगन में विराजमान अन्नपूर्णा दरबार की शान यह कि यहां बाबा स्वयं याचक की भूमिका में खड़े हैैं। मान्यता है कि काशी नगरी के पालन-पोषण को देवाधिदेव मां की कृपा पर ही आश्रित हैं।

अन्नदात्री मां की ममतामय छवि सहेजे ठोस स्वर्ण प्रतिमा कमलासन पर विराजमान और रजत शिल्प में ढले भगवान शिव की झोली में अन्नदान की मुद्रा मेंं। दायीं ओर मां लक्ष्मी और बायीं तरफ भूदेवी का स्वर्ण विग्रह है। इस अनूठे और अलौकिक दरबार के दर्शन वर्ष में सिर्फ चार दिन धनतेरस से अन्नकूट तक ही होते हैं। इसमें पहले दिन धान का लावा, बताशा के साथ मां का खजाना (सिक्का) वितरण की पुरानी परंपरा है। इसमें काशी ही नहीं, अन्य जिलों व देशों से भी आस्थावानों का रेला उमड़ता है। अन्य दिनों में मंदिर गर्भगृह में स्थापित सामान्य प्रतिमा की दैनिक पूजा होती है।

महंत ने बताई मंदिर की मान्यता

महंत रामेश्वर पुरी ने बताया, ”पुराणों में वर्णित है कि एक बार जब काशी में अकाल पड़ा था, चारों ओर त्राही-त्राही मची थी। लोग भूखों मर रहे थे, उस समय शिव को भी समझ ने नहीं आ रहा था कि इस नगरी में ये क्या हो गया।” – ”ध्यान मग्न होने पर भगवान शिव को राह दिखी कि मां अन्नपूर्णा ही बचा सकती है। तब शिव खुद मां के पास जाकर भिक्षा मांगते हैं। माता ने उसी वक्त शिव को वचन दिया कि आज के बाद कोई भी इस नगरी में भूखा नहीं रहेगा और मेरा खजाना पाते ही लोगो के दुख दूर हो जाएंगे।

सुबह से रात तक मिलेगा दर्शन
इस बार 25 अक्टूबर को प्रात: पांच से रात 11 बजे तक भक्तगण स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा का दर्शन व अन्न-धन का खजाना पाएंगे। इस बीच भोग आरती के लिए दोपहर 12 से 12.30 बजे तक पट बंद होंगे। विशिष्टजन शाम पांच से सात बजे तक स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन कर सकेंगे। इसके अलावा 26, 27 व 28 को सुबह चार से रात 11 बजे तक दर्शन किया जा सकेगा।

सज गया माता का दरबार
चार दिनी दर्शन-पूजन के लिए तैयारियां बुधवार को पूरी कर ली गईं। अस्थायी सीढिय़ां लगाने के साथ ही परिसर विद्युत झालरों से सजा दिया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा-सुरक्षा के लिहाज से वाटर ब्वाय, डाक्टर दल व कैमरे लगाए गए हैैं। दिव्यांग जन व बुजुर्गों के लिए सहायक तैनात किए गए हैैं। महंत रामेश्वर पुरी ने अफसरों के साथ तैयारियों की समीक्षा भी की।

बांसफाटक गेट से प्रवेश
अन्नपूर्णा दरबार में प्रवेश बांसफाटक के गेट नंबर एक (ढूंढिराज गणेश) से मिलेगा। परिसर में घुसते ही बाएं हाथ की सीढ़ी से प्रथम तल पर और दाहिनी ओर सीढ़ी से उतरकर कालिका गली से निकास।

प्रतिबंधित वस्तुएं : श्रद्धालु, परिसर में पेन, मोबाइल, कैमरा, धारदार हथियार, बड़ा बैग, बीड़ी, पान, गुटखा, लाइटर आदि नहीं ले जा सकेंगे।

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