देशभर में प्याज की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में प्याज की खुदरा कीमतें 100 रुपये प्रतिकिलो के पार पहुंच गई हैं। इस बीच बिहार सरकार की तरफ से कम कीमत पर लोगों को प्याज बेचा जा रहा है।

राज्य में बिहार स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग यूनियन लिमिटेड  35 रुपये प्रति किलो प्याज बेच रहा है। रोचक बात है कि यहां कर्मचारी हेलमेट बेचकर प्याज बेच रहे हैं। इस बाबत पूछे जाने पर कर्मचारियों का कहना है कि प्याज की कीमतों के लिए लोगों के बीच इतनी मारामारी है कि कई बार पत्थरबाजी और भगदड़ की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में यहीं विकल्प बचता है। सरकार की तरफ से हमारे लिए किसी भी तरह की सुरक्षा उपलब्ध नहीं है।

राजधानी पटना के अलावा आरा में भी प्याज खरीदने के लिए लोग लंबी-लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। लोगों के प्याज खरीदने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कोऑपरेटिव यूनियन के कर्मचारियों लोगों को जानकारी दे रहे हैं कि प्याज की कोई कमी नहीं है। प्याज का स्टॉक लगातार आ रहा है। ऐसे में लोग कतार ना तोड़ें।

कर्मचारियों का कहना है कि आप लोग भीड़ को देख सकते हैं। हमारे वाहन लोगों की प्याज की जरूरतों को पूरा करने के लिए कॉलोनियों में जाकर प्याज बेच रहे हैं। कर्मचारियों ने बताया कि लोग प्याज खरीदने के लिए अल सुबह से ही लाइनों में लग जा रहे हैं। प्याज की कीमतों के मामले में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय का कहना है कि पिछले 10 दिनों में प्याज की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ प्याज की कीमतों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

विपक्ष का कहना है कि प्याज की कीमतें बढ़ने के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेता मनोज झा ने कहा कि सरकार प्याज की कीमतों पर अंकुश लगाने में असफल हो गई है। दूसरी तरफ मंत्रालय का कहना है कि प्याज की पैदावार इस बार पिछले साल के मुकाबले 26 फीसदी कम हुई है। इसके पीछे मानसून, भारी बारिश और तूफान को बताया जा रहा है। केंद्र सरकार तुर्की, नीदरलैंड और मिस्र से प्याज आयात करने की तैयारी में है।

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