भावना पांडेय

बेंगलुरु। 1 अक्टूबर यानी कल से देश के सभी राज्यों में कई नए नियम लागू होगे वहीं कुछ पुराने नियमों में बदलाव किए गए हैं। जिसका आपकी जेब पर सीधा असर पड़ेगा। केन्‍द्र सरकार द्वारा कल से लागू किए गए नए नियम बैंकिंग, ट्रांसपोर्टिंग, जीएसटी रेट, कॉर्पोरेट टैक्स, प्लास्टिक के प्रयोग समेत अन्‍य चीजों से जुड़े हुए हैं। यह नए नियम और कुछ नियमों के बदलने से देश की अर्थव्‍यवस्‍था के साथ साथ आपकी जेब पर भी सीधा असर होगा। अगर आपने समय रहते इन नियमों पर ध्यान नहीं दिया तो आपका नुकसान होना निश्चित है। कुछ क्षेत्रों में जहां आम इंसान को राहत मिलेगी वहीं अधिकांश नियम आपकी जेब पर बोझ और बढ़ाने वाले हैं। आइये जानते हैं उन नए नियमों और बदलावों के बारे में जो आपसे सीधे जुड़े हैं।

ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी बदलाव

सबसे पहले बात ट्रांसपोर्टिंग सिस्टम की करें तो बदलते ट्रैफिक नियमों के साथ अब 1 अक्टूबर 2019 से आपका ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने का नियम बदल जाएगा। नए नियम के तहत आपको अपना ड्राइविंग लाइसेंस अपडेट कराना होगा। हालांकि इसके लिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। साथ में गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) के साथ ड्राइविंग लाइसेंस कानूनी रूप से जरूरी है, नए नियम के लागू होने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का का रूप-रंग बदल जाएगा। नए नियम के लागू होने क बाद ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी में माइक्रोचिप के अलावा क्यूआर कोड दिए जाएंगे। इन नियमों के लागू हो जाने के बाद सभी लोगों को अपना डीएल बदलवाना पड़ेगा। नए नियमों के अनुसार अब डीएल और आरसी पंजीकरण प्रमाण-पत्र एक ही रंग के हो जाएंगे। यही नहीं अब ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी में माइक्रोचिप के अलावा क्यूआर कोड होंगे।

पेट्रोल-डीजल पर नहीं मिलेगा कैशबैक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसीबीआई) के क्रेडिट कार्ड से पेट्रोल और डीजल की खरीदारी पर अब आपको कैशबैक नहीं मिलेगा। पहली अक्‍टूबर से बंद हो रही इस सुविधा के बारे में एसबीआई अपने ग्राहकों को मैसेजों के जरिए सूचित कर रहा है। अभी तक एसबीआई के क्रेडिट कार्ड से पेट्रोल और डीजल की खरीदारी पर ग्राहकों को 0.75 फीसदी तक कैशबैक का लाभी मिल जाता था। बताया जाता है कि एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी ने कैशबैक योजना को वापस लेने का सुझाव दिया था जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।

सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन

2 अक्टूबर 2019 (150वीं गांधी जयंती) से सरकार देशभर में प्लास्टिक से बने प्रोडक्ट के इस्तेमाल पर पाबंदी से जुड़ा अभियान शुरू करेगी। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। सरकार के इस कदम से कई नए बिजनेस शुरू करने के ऑप्शन्स भी खुलेंगे।

इन चीजों पर बढ़ जाएगा जीएसटी

रेलगाड़ी के सवारी डिब्बे और वैगन पर जीएसटी की दर को 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया है। पेय पदार्थों पर जीएसटी की वर्तमान 18 फीसदी की दर की जगह 28 फीसदी की दर से टैक्‍स और 12 फीसदी का अतिरिक्त सेस लगाया गया है।

एसबीआई इस जुर्माने में कर रहा कमी

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 1 अक्टूबर से निर्धारित मंथली एवरेज बैलेंस को नहीं बनाए रखने पर लगने वाले जुर्माने में 80 फीसदी तक कमी करने जा रहा है। इससे आप सीधे प्रभावित होंगे। यदि आप मेट्रो सिटी में रहते हैं और एसबीआई के खाता धारक हैं तो आपके खाते में 01 अक्टूबर से मंथली एवरेज बैलेंस (एएमबी) की सीमा को तीन हजार रुपये बनाए रखना होगा।

शहरी इलाके की एसबीआई बैंक शाखाओं पर भी ये नियम लागू होंगे। खाते में निर्धारित रकम से यदि बैलेंस 75 फीसदी से कम रहता है तो जुर्माने के तौर पर 80 रुपये प्‍लस GST देना होगा। खाते में 50 से 75 फीसदी तक बैलेंस रखने वालों को 12 रुपये और जीएसटी देना होगा। 50 फीसद से कम बैलेंस होने पर 10 रुपये जुर्माना प्‍लस जीएसटी अदा करना होगा।

होम और ऑटो लोन होंगे सस्ते

भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो रेट में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए एसबीआई, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक समेत निजी क्षेत्र के फेडरल बैक ने 1 अक्टूबर 2019 से अपनी खुदरा कर्ज की ब्याज दरों को रेपो रेट से जोड़ने का फैसला किया है। इससे बैंक ग्राहकों को करीब 0.30 प्रतिशत तक सस्ती दरों पर होम और ऑटो लोन मिल सकेगा। बता दें कि अभी तक सभी बैंक एमसीएलआर पर आधारित ब्याज दर से कर्ज देते हैं।

ओबीसी में होगा ये बदलाव

ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) ने रेपो रेट से लिंक्ड नए रिटेल व एमएसई लोन प्रॉडक्ट लॉन्च किए हैं। ये लोन 1 अक्टूबर 2019 से उपलब्ध होंगे। एमएसई और रिटेल लोन के तहत ओबीसी द्वारा दिए जाने वाले सभी नए फ्लोटिंग रेट लोन रेपो रेट से जुड़ी ब्याज दर पर मिलेंगे। इन नए प्रॉडक्ट्स में रेपो रेट से लिंक्ड होम लोन की ब्याज दर 8.35 फीसदी से शुरू होगी, जबकि एमएसई के लिए लोन की ब्याज दर 8.65 फीसदी से शुरू होगी।

कम होगी जीएसटी दर

जीएसटी काउंसिल की गोवा में 20 सिंतबर को हुई 37वीं बैठक में कई वस्‍तुओं पर टैक्स कम किया गया है। 01 अक्टूबर 2019 से ये नियम प्रभावी हो जाएंगे। नए बदलावों के अनुसार, अब 1000 रुपए तक के किराए वाले होटलों पर टैक्स नहीं लगेगा। यही नहीं 7500 रुपए तक टैरिफ वाले कमरे के किराए पर केवल 12 फीसदी जीएसटी देना होगा। छोटे वाहन मालिकों को राहत दी गई है और 10 से 13 सीटों तक के पेट्रोल और डीजल वाले वाहनों से सेस घटा दिया गया है। साथ ही स्लाइड फास्टनर्स (जिप) पर जीएसटी 12 फीसदी कर दिया है।

जीएसटी रिटर्न का नया तरीका होगा लागू

जीएसटी काउंसिल के फैसले के मुताबिक, पांच करोड़ सालाना से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए जीएसटी रिटर्न का फॉर्म 1 अक्टूबर से बदल जाएगा। ऐसे कारोबारियों को अनिवार्य रूप से जीएटी एएनएक्स-1 फॉर्म भरना होगा, जो जीएसटीआर-1 की जगह लेगा। छोटे कारोबारियों के लिए इस फॉर्म को जनवरी 2020 से अनिवार्य बनाया जाएगा। बड़े करदाता फिलहाल अक्टूबर और नवंबर माह के लिए जीएसटीआर 3बी फॉर्म भरते रहेंगे।

बदल जाएगी पेंशन पॉलिसी

केंद्र सरकार 01 अक्टूबर से कर्मचारियों के पेंशन पॉलिसी में भी बदलाव करने जा रही है। नए नियम के तहत यदि किसी कर्मचारी की नौकरी के सात साल पूरे होने के बाद मृत्यू हो जाती है तो उसके आश्रितों को बढ़ी हुई पेंशन का फायदा मिलेगा। अभी तक ऐसी स्थिति में आखिरी वेतन के 50 फीसदी के हिसाब से ही पेंशन मिलती थी। नए नियम को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। सरकार का इस फैसले को कर्मचारियों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है।

कॉरपोरेट टैक्स में कटौती

बीते 20​ सितंबर को केंद्रीय वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉरपोरेट टैक्स में बड़ी कटौती की घोषणा करते हुए इसको 30 फीसदी से घटाकर 22 फीसदी कर दिया था। घोषणा के मुताबिक, 01 अक्टूबर 2019 के बाद मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के पास 15 फीसदी टैक्स भरने का विकल्प होगा। इसके बाद कंपनियों पर सरचार्ज और टैक्स समेत कुल चार्ज 17.01 फीसदी हो जाएगा। इसके पहले भारतीय कंपनियों को 30 फीसदी टैक्स के अलावा सरचार्ज भी देना पड़ता था। विदेशी कंपनियों को 40 फीसदी टैक्स देना पड़ता था। माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से कारोबार में तेजी आएगी और आर्थिक सुस्‍ती से उबरने में मदद मिलेगी।

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