राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने बताया कि कांग्रेस का मन शिवसेना के साथ जाने का नहीं था. फिर मैंने सोनिया गांधी को पुरानी सियासी घठनाओं की जानकारी दे कर मनाया। कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने  ‘एबीपी न्यूज़’ से खास बातचीत की। उन्होंने महाराष्ट्र में पिछले दिनों के पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की सिलसिलेवार जानकारी दी और बताया कैसे उन्होंने उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनने के लिए राजी किया और कैसे कांग्रेस के समर्थन को सुनिश्चित किया. यहां पढ़िए शरद पवार का पूरा इंटरव्यू

सवाल- अगर आप बीजेपी के साथ चले गए होते तो आपका कद और बढ़ गया होता लेकिन आप वो विकल्प छोड़कर शिवसेना के साथ क्यों चले गए ?

शरद पवार- हमारे उनके साथ पहले भी रिश्ते अच्छे रहे हैं कल भी थे और आगे भी रहेंगे क्योंकि जब तक वो देश के हित की बात करेंगे तो राजनीति में उसका विरोध करने की कोई जरूरत नहीं. जहां तक राजनीतिक मुद्दों पर जो असहमति रहती है वो तो रहेगी. इसमें कोई बदलाव नहीं आएगा. लेकिन जब बात राष्ट्रीय हित की होगी तो मेरा सहयोग उनके साथ रहेगा. वो ये कभी नहीं चाहते थे कि हम उनकी पार्टी में जाएं न ही मेरे मन में ऐसी सोच थी न है न रहेगी.

सवाल- जब नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम थे तब आपने उनको हाथ पकड़कर राजनीति सिखाई थी, आपको याद है ?

शरद पवार- जब मेरे पास 10 साल देश के कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी थी, तब मेरा ये फर्ज था कि देश में किसानों का उत्पादन कैसे बढ़े, देश में जो अनाज की आवश्यकता है वो देश में ही कैसे पूरी हो जाए… इतना बड़ा देश, इतनी बड़ी जमीन, इतनी बड़ी जमीन होने के बाद देश की अनाज की आवश्यकता पूरी करने के बाद दुनिया के कई देशों में हम निर्यात कैसे करें इस पर ध्यान देने की जरूरत थी… और ये दिल्ली में कृषि मंत्रालय के ऑफिस में बैठकर पूरा नहीं हो सकता था, और ये करने के लिए हर राज्य में जा कर वहां को जो भी सीएम हो, उनकी मदद करने की जरूरत थी उसके लिए सीएम कहीं का भी हो ये मैंने कभी देखा नहीं… सभी की मदद की… और गुजरात एक ऐसा राज्य है जहां नरेंद्र मोदी सीएम थे… आप विश्वास कीजिए हमने कृषि विकास के लिए जो भी सुझाव दिए उस पर अमल करने के लिए वो सबसे ज्यादा ध्यान देते थे, और इसलिए मैंने उनकी हमेशा मदद की.

सवाल- साल 2014 में आपने बीजेपी की सरकार बनवा दी थी… तो लोगों के मन में ये सवाल है कि जब शिवसेना तैयार नहीं हो रही थी तो शरद पवार बीजेपी के साथ चले जाएंगे और सरकार बन जाएगी, तो क्या ऐसा कोई ऑफर आपको मिला था ?

जवाब- साल 2014 में महाराष्ट्र में उनकी सरकार बनी थी और शिवसेना अलग थी और हम ये चाहते थे कि बीजेपी और शिवसेना एक न हों, क्योंकि राजनीति के लिहाज से ये लोग एक हो जाते तो हमारी राजनीति पर बहुत असर होगा… इसीलिए साल 2014 में हम फडणवीस सरकार को बाहर से समर्थन देने के लिए तैयार हो गए… हमको मालूम था कि इसका कोई ज्यादा फायदा नहीं होगा वो कभी ना कभी एक हो जाएंगे… और बाद में वो एक हो भी गए.

सवाल- क्या आपने 2014 में ही सोच लिया था कि बीजेपी शिवसेना दोनों एकसाथ बहुत दिनों तक रहेंगे तो आपका नुकसान हो जाएगा?

शरद पवार- बाला साहेब ठाकरे की सोच और बीजेपी की सोच और राजनीति में काफी अंतर था… बाला साहेब जिंदा थे तो ये दोनों पार्टी एक साथ थी, लेकिन लीडरशिप बाला साहेब के हाथों में थी, शिवसेना दूसरे स्तर पर नहीं थी, और शिवसेना के नेतृत्व में सरकार चलाना आसान है, लेकिन जब बीजेपी अपने साथियों से लीडरशिप ले लेती है तब एक अलग स्थिति होती है.

सवाल- क्या शिवसेना के साथ सरकार में शामिल होने के लिए सोनिया गांधी तैयार हो गई थीं?

शरद पवार- कांग्रेस का मन शिवसेना के साथ जाने का नहीं था, बिल्कुल नहीं था… फिर मैंने सोनिया गांधी को जाकर कई घटनाएं बताई कि जब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं और देश में इमरजेंसी लागू हुई तब देश के सारे राजनीतिक दलों ने कांग्रेस का विरोध किया तब बाला साहेब अकेले थे, जिन्होंने इंदिरा गांधी का समर्थन किया… फिर बाद में जब विधानसभा चुनाव हुए तब इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी को समर्थन करने के लिए कोई तैयार नहीं था तब शिवसेना इकलौती ऐसी पार्टी थी जिसने चुनाव में अपना एक भी उम्मीदवार खड़ा नहीं किया और कांग्रेस की मदद की और जब राष्ट्रपति का चुनाव होना था तब प्रतिभा पाटिल राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी थीं, प्रणब मुखर्जी प्रत्याशी थे…तब मुझे कांग्रेस की ओर से बताया गया कि इनके वोटों का समर्थन हमें मिलना चाहिए आप जाकर उनसे बात करिए… एनडीए में होने के बाद भी शिवसेना ने प्रणब दा और प्रतिभा पाटिल को वोट दिया… और जब कांग्रेस को इनकी जरूरत थी तब हमेशा कांग्रेस की मदद की गई… और आज इनके साथ में जाने में विचारधारा की बात सोचना ये मुझे पसंद नहीं.

सवाल- फिर सोनिया गांधी आपकी बात से सहमत हो गईं ?

शरद पवार- सोनिया गांधी को कांग्रेस पार्टी के कई विधानसभा के सदस्यों और नेताओं ने बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए शिवसेना के साथ जाने की सलाह दी होगी तभी सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने ये कदम उठाया.

सवाल- क्या शिवसेना अब यूपीए का हिस्सा बनेगी क्योंकि एनडीए का हिस्सा तो वो रही नहीं ?

शरद पवार- मुझे नहीं लगता… यूपीए की बाकी पार्टियों के साथ हमने बात भी नहीं की ये राज्य स्तर का गठबंधन है… और महाराष्ट्र में कांग्रेस राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना का गठबंधन है.

सवाल- आपने एक नामुमकिन चीज को मुमकिन कर दिया तो क्या आप मोदी और शाह की जोड़ी के खिलाफ बाकी पार्टियों को एकजुट करेंगे ?

शरद पवार- हमने तो बात की नहीं पर इस पर बातचीत शुरू करने की जरूरत है.. देश के सामने जैसे बीजेपी एक सक्षम विकल्प है ठीक उसी तरह एक मजबूत विकल्प खड़ा करने की जरूरत है… इस बात पर लोग बहस कर रहे हैं लेकिन इस मुद्दे पर अभी तक हम लोग आगे नहीं बढ़े हैं.

सवाल- क्या आपको लगता है कि आज की तारीख में सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस में बीजेपी से मजबूती से लड़ने की ताकत है ?

शरद पवार- एक बात तो माननी होगी कि बहुत से राज्यों में कई राजनीतिक दल शक्तिशाली नहीं हैं लेकिन जहां हम मिलकर ताकतवर बन सकते हैं वहां ऐसा करने की जरूरत है… कांग्रेस पार्टी देश के सभी हिस्सों में पहुंचने वाली और मजबूत बेस वाली पार्टी है और इसमें कांग्रेस पार्टी का रोल काफी अहम है.

सवाल- इतना लंबा अनुभव आपका है,जब 24 नवंबर को पता चला कि फडणवीस सीएम और अजित पवार डिप्टी सीएम, आपको बिल्कुल पता नहीं चला कि ये होने जा रहा है और ये हो गया?

शरद पवार- कोई सवाल ही नहीं था,ये फैसला नहीं लेना है तय हुआ था. जब सुबह उठकर मुझे बताया गया तो मुझे शॉक हो गया, खासतौर से अजित पवार शामिल हो गए इससे मुझे और शॉक हो गया. तुरंत हमने कदम उठाया कि उसको जल्दी से जल्दी ठीक करो. मैंने शिवसेना के लीडर को स्थिति बताई और उस दिन दोनों पार्टियों ने महाराष्ट्र और पूरे देश को संदेश दिया कि इसमें शरद पवार की एनसीपी नहीं है. 24 घंटे में बगावत तोड़ने का काम हमने किया. विधानसभा के जो विधायक अजित पवार के साथ गए थे वो वापिस आ गए.

सवाल- आपने दिल से माफ कर दिया अजित पवार को?

शरद पवार- जब सरकार में शपथ लेने की बात आ गई, किसको शपथ लेनी है इसपर बहस की. हम सब की राय बनी और सबका यही कहना था कि अजित पवार को थोड़ा दूर रहना चाहिए. जयंत पाटिल और छगन भुजबल को शपथ लेने के लिए भेजा. पार्टी ने संदेश दिया कि ऐसे वक्त में जो पार्टी के साथ खड़े रहते हैं पार्टी उनका ध्यान रखती है.

सवाल- चर्चा थी कि बाद में डिप्टी सीएम बना देंगे अजित पवार को?

शरद पवार- बाद में राजनीति में क्या होगा आज कैसे कह सकते हैं. आज तो नहीं हुआ.

सवाल- क्या ये बात सही है कि उद्धव ठाकरे शुरुआत में हिचकिचा रहे थे सीएम बनने के लिए ?

शरद पवार- नहीं, उद्धव ठाकरे जी ने बाला साहेब ठाकरे को वचन दिया था कि शिवसेना का सीएम यहां बिठाऊंगा. वो चाहते थे कि शिवसेना का सीएम बने. उनका कहना था कि इस जगह पर मैं नहीं बैठना चाहता हूं, शिवसैनिक को बिठाना चाहता हूं. पर जब तीन पार्टियों को मिलाकर राज चलाने की बात आ गई तब ऐसा व्यक्ति चाहिए था जिसके नाम पर राय बन सके और ये राय बनी कि उद्धव जी सीएम बनें. सबने कहा कि ये जिम्मेदारी उद्धव जी आपको ही लेनी चाहिए. आखिर में वो मान गए.

सवाल- एक चर्चा ये है कि जस्टिस लोया कि जो मौत हुई थी महाराष्ट्र में उस केस की फिर से जांच हो? ऐसा कुछ आप चाहते हैं?

शरद पवार- मैं जानता नहीं हूं, मैंने अखबार में पढ़ा. इसपर मैंने कुछ लेख देखे, लेख पढ़ने के बाद इसकी गहराई में जाकर जांच करने की जरूरत है. ये बात महाराष्ट्र में लोगों के बीच चर्चा का विषय है. मेरे पास इसकी पूरी जानकारी नहीं है.

सवाल- आप चाहते हैं कि ये हो, अगर मांग उठती है?

शरद पवार- मांग है तो सरकार को इसके बारे में सोचना चाहिए. मांग करने वाले किस आधार पर मांग कर रहे हैं, इसमें क्या तथ्य है इसकी जांच करनी चाहिए. कुछ हो तो फिर से जांच करनी चाहिए लेकिन अगर कुछ नहीं हो तो किसी किरदार पर आरोप लगाना ये भी ठीक नहीं है.

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