विशेष संवाददाता 


महाराष्ट्र की राजनीति को समझने वाले मानते हैं कि जिस तरह शिव सेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे किंग मेकर की भूमिका मे रह कर रिमोट कंट्रोल से शिवसेना के मुख्यमंत्री को अपनी धुुुन नचाते थे, आज ठीक वैसी ही भूमिका शरद पवार की हो चुकी है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई मे महाविकास अघाडी  की सत्तसीन होने जा रही तीन दलों की सरकार किंग मेकर शरद पवार की मर्जी पर ही चलेगी और टिकी भी रहेगी। इस मराठा सरदार के बगैर महाराष्ट्र की नई सरकार में कुछ भी नहीं हो सकता क्योंकि शरद पवार ही इस सरकार की नींव हैं

मुंबई: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री की कुर्सी तो हासिल कर ली है। लेकिन अब तक रिमोट कंट्रोल हाथ में रखने वाले उद्धव ठाकरे की सरकार का रिमोट कंट्रोल उनके हाथ में नहीं रहने वाला। महा विकास अघाड़ी सरकार का केंद्र मातोश्री नहीं बल्कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार का घर सिल्वर ओक होगा और शरद पवार इस सरकार के बड़े फैसलों पर अपना असर डालेंगे।

उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री होंगे। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की महाविकास अघाड़ी सरकार के किंग हों लेकिन जो महाराष्ट्र की राजनीति को समझते हैं वो ये भी जानते हैं कि इस सरकार के किंग मेकर शरद पवार की मर्जी के बगैर महाराष्ट्र की नई सरकार में कुछ भी नहीं हो सकता क्योंकि शरद पवार ही इस सरकार की नींव हैं और कांग्रेस और शिवसेना को जोड़ने वाले फेवीकोल भी। उनको नाराज़ करने का मतलब है सरकार की कहानी खत्म करना।

उद्धव ठाकरे पिता बाला साहेब ठाकरे के चित्र के सामने नतमस्तक। पवार के आगे भी ऐसे ही झुके रहना होगा उनको।

इस पूरे गणित को आप इस तरह से समझिए | 

मंगलवार को दो तस्वीरें सामने आईं। पहली में मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार उद्धव ठाकरे अपने पिता बाल ठाकरे के कमरे में जाकर उनको नमन करते हैं और दूसरी तस्वीर में शरद पवार के सामने नतमस्तक नजर आते हैं। ये तस्वीरें बताती हैं कि उद्धव ठाकरे भी जानते हैं कि पांच साल के लिए वो सीएम तो बनाए जा रहे हैं। लेकिन उनकी कुर्सी उस वक्त तक कायम है जब तक शरद पवार चाहेंगे । इसीलिए कहा जा रहा है कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार चलाना उद्धव के लिए इतना आसान नहीं होगा।

अब यह तो तय है कि महाराष्ट्र की सत्ता का केंद्र मातोश्री नहीं बल्कि सिल्वर ओक होगा। जहां शरद पवार रहते हैं. और सरकार के सारे दरबार पवार के घर पर ही लगने वाले हैं। शरद पवार सरकार बनाने से पहले भी अपने बयानों से शिवसेना को चौंका चुके हैं।

उधर, राजनीति के जानकारों की मानें तो अजित पवार की बगावत के बाद शरद पवार अपने अनुभव और राजनीतिक कुशलता से महा विकास अघाड़ी की सरकार को पटरी पर ले आए। लेकिन शरद पवार चाहेंगे तो सरकार को पटरी से उतारने में भी वक्त नहीं लगने वाला। 

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