विशेष संवाददाता

शिवसेना के साथ एनसीपी और कांग्रेस ने हाथ मिला कर जब महाराष्ट्र मे सरकार बनायी थी तभी इस सरकार की स्थिरता को लेकर सवालिया निशान उठ गये थे। दो विपरीत विचारधाराओं मे मतभेद लाजिमी था भी। एक महीना भी नहीं बीता होगा कि दरार दिखायी देने लगी। 

नागरिकता संशोधन बिल पर लोकसभा मे सरकार का साथ देने वाली सेना को कांग्रेस की पहली घुडकी मिलने का ही असर था कि राज्यसभा मे मत विभाजन के समय उसके सांसद बाहर चले गए थे। लेकिन सावरकर के मामले मे शिवसेना राहुल के बयान के बाद पिछले पांव पर नजर आ रही है। सवाल यह कि क्या सेना सरकार चलाने की खातिर राहुल गांधी के बोल को पचा जाएगी ?

ज्यादा नही पिछले अगस्त महीने में ही शिवसेना प्रमुख और सम्प्रति महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने चुनावी रैली मे ललकारा था कि जो भी सावरकर के खिलाफ बोले उसको पीटो। क्या अब वो और उनके समर्थक राहुल गांधी की पिटाई नहीं  करेगे ? 

दिल्ली के रामलीला मैदान से कांग्रेस की भारत बचाओ रैली में शनिवार को राहुल गांधी ने अपने ‘रेप इन इंडिया’ वाले बयान पर माफी न मांगने को लेकर कहा कि उनका नाम राहुल गांधी है राहुल सावरकर नहीं। उनके इस बयान से शिवसेना का असहज होना स्वाभाविक है क्योंकि वह विनायक दामोदर सावरकर को अपना हीरो मानती है। यह शिवसेना के उस नायक का अपमान है जिसके नाम पर पार्टी सालों से राजनीति कर रही है। 

राहुल ने सावरकर का नाम इसलिए लिया क्योंकि अंडमान की सेलुलर जेल में कैद हिंदूवादी नेता ने 14 नवंबर, 1913 को ब्रिटिश सरकार को कथित रूप से माफीनामा लिखा था। भाजपा द्वारा रेप इन इंडिया पर माफी मांगने को लेकर उन्होंने कहा कि उनका नाम सावरकर नहीं बल्कि गांधी है। मर जाएंगे लेकिन कभी माफी नहीं मांगेगे।

भाजपा को पिछले दिनो काफी कोस चुुुुके शिवसेना के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा है कि राहुल का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं से अनुरोध करता हूं कि वह सावरकर का बलिदान समझने के लिए राहुल को उनकी कुछ किताबें गिफ्ट करें। उन्होंने कहा, ‘हम पंडित नेहरू, महात्मा गांधी को भी मानते हैं, आप वीर सावरकर का अपमान ना करें। समझने वाले समझ गए है। जय हिंद!!’ दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘आप आज भी यदि सावरकर का नाम लेते हैं तो देश के युवा उत्तेजित और उद्वेलित हो जाते हैं, आज भी सावरकार देश के नायक हैं और आगे रहेंगे, वह हमारे देश का गर्व हैं।’

सेना के मुखपत्र सामना की इस मुद्दे पर चुप्पी समझ से परी रही। क्या वो राहुल द्वारा सावरकर पर अपमानजनक टिप्पणी पर संपादकीय लिखेगी ? 

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