न्यूयॉर्क से विशेष संवाददाता अनिता चौधरी

अमेरिका में “डॉट ब्लास्ट” से “मेगा शो” तक का भारत का सफ़र। पीएम मोदी के शुक्रगुज़ार हैं अमेरिकी भारतीय। 30 साल पहले भारतीय महिला यूएस में नहीं लगा सकती थी बिंदी। आज पूरा विश्व कर रहा है इसका अनुसरण। मोदी की अगुवाई में विश्व गुरु बनेगा भारत। 

बदल रहा है विश्व में भारत को लेकर नज़रिया , एक वो दिन भी था जब अमेरिका में प्रवासी भारतीय अपनी संस्कृति के साथ नही रह सकते थे। लेकिन आज दूसरे लोग हमारी संस्कृति को अपना रहे हैं। ये कहना है पिछले 30 साल से ज्यादा समय से अमेरिका में रह बीजेपी के ओवरसीज फ्रेंड एंड स्पोक्सपर्सन टी बालगुरु का। उनका कहना है कि उन्हें याद है कि भारत के उस समय के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी भी जब यूएस आते थे तब भी अमेरिकी मीडिया में शायद ही कोई चर्चा होती थी । बाजपेयी के बाद भी कई प्रधानमंत्री आये मगर भारत का सर इतना ऊंचा कभी नहीं हुआ जो 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद हुआ है। 

आज पूरा विश्व भारत की तरफ देख रहा है। विदेशों में रह रहे भारतीय जो कभी कई तरह की अवहेलना झेलते थे, आज हर तरफ उनकी काबिलियत की स्वीकार्यता पूरी गरमाहट के साथ हो रही है। भारत के लगातार शीर्ष की तरफ बढ़ते कदम को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में विश्व के राजनीतिक पटल पर भारत की भूमिका बेहद अहम होगी और भारत विश्व गुरु बनने को पूरी तरह से तैयार है। 

भारत के लिए वैश्विक बाजार को भुनाने का समय

इसी पूरी बात-चीत में बालागुरु का यह भी कहना है कि भारत के लिए वैश्विक बाजार को भुनाने का समय आ गया है। आज पूरा कॉरपोरेट जगत भारत के विशाल बाजार की तरफ देख रहा है। यैसे में हिंदुस्तान को अपने मैनुफैक्चरिंग और प्रोडक्शन सेक्टर को बढ़ावा देना चाहिए। ये बाजार का वो क्षेत्र है जिसमें भारत के लिए सबसे ज्यादा संभावना है साथ ही ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जिसमें भारत पूरी दुनियां के लिए रोल मॉडल नहीं बन सकता। भारत के इस आयाम को देख कर आज हर भारतीय गौरवान्वित महसूस कर रहा है और विदेशों में रह रहे हम सभी भारतीय मूल के लोग उनके शुक्रगुज़ार हैं। 

यूएन के सामने दुनिया “वेलकम मोदी” की लहर भी देखेगी

2014 के मेडिसन स्क्वायर, अमेरिकन कांग्रेस में मोदी का जादू देखने के बाद 2019 में सारी दुनिया ने ह्यूस्टन में मोदी का जलवा देखा है अब 27 सितंबर शुक्रवार को भारतीय मूल के लोगों की यही कोशिश है कि “हाऊडी मोदी” के बाद, यूएन के सामने वेलकम मोदी की लहर भी पूरी दुनिया देखे ताकि जब प्रधानमंत्री मोदी भारत जाएं तो न्यूयॉर्क से न्यू दिल्ली तब यहां रह रहे भारतीयों की तरफ से एक नई उम्मीद और अहसास भी साथ लेकर जाएं।

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