नितिन गडकरी की आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से बातचीत इसी परिप्रेक्ष्य में तो नहीं ?

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली: महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव नतीजे आए 14 दिन हो गए हैं और विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने में अब सिर्फ 48 घंटे का वक्त बचा है लेकिन बीजेपी और शिवसेना में जारी खींचतान को लेकर वहां अब तक सरकार नहीं बन पाई है। सरकार बनना तो दूर शिवसेना और बीजेपी के बीच आधिकारिक तौर पर बातचीत भी शुरू नहीं हुई है। शिवसेना आज भी फिफ्टी-फिफ्टी फॉर्मूले पर अड़ी है। आज महाराष्ट्र में एक्शन का दिन है, बैठकों का दौर चलने वाला है। 

एक तरफ जहां टूट से घबराए उद्धव ठाकरे ने मातोश्री में अपने विधायकों को इमरजेंसी मीटिंग के लिए बुलाया है, वहीं बीजेपी के नेता भी आज गवर्नर से मुलाकात करने वाले हैं। कांग्रेस भी आज बैठक कर रही है लेकिन इन सबके बीच आज नागपुर पर भी सबकी नजरें रहेंगी जब नितिन गडकरी संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलेंगे। यानी आज महाराष्ट्र से कोई ख़बर निकल कर आ सकती है।

मंगलवार को पहली बार शिवसेना और बीजेपी के बड़े नेता मिले तो लगा कुछ रास्ता निकलेगा लेकिन मुख्यमंत्री के सवाल पर 13 दिन पहले जैसी पर्देदारी थी, अब भी वैसी ही है। एक खबर ये भी है कि शिवसेना के विधायक आज किसी गुप्त जगह पर या होटल में शिफ्ट हो सकते हैं। शिवसेना को डर है कि बीजेपी उसके विधायकों को तोड़ सकती है। इस डर ने शिवसेना को बेचैन कर दिया है लेकिन पार्टी अड़ी है कि 50-50 से कम कुछ भी मंजूर नहीं।

महाराष्ट्र की जनता ने सोचा था कि गठबंधन को वोट किया तो बीजेपी-शिवसेना की सरकार बनेगी, लेकिन गठबंधन में हजार दरार हैं ये वोट देने के बाद पता चला। सरकार के लिए माकूल माहौल बनाने की कवायद में हर कोई लगा रहा लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। शिवसेना नेता कांग्रेस से मिलने पहुंचे, शिवसेना नेता एनसीपी चीफ शरद पवार के पास पहुंचे। कांग्रेस के कुछ नेता मातोश्री आए लेकिन सबको डर सता रहा है कि सियासी भूल कौन करे।

24 अक्टूबर को आए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। कोई पार्टी 145 के जादुई आंकड़े को हासिल नहीं कर सकी थी। हालांकि बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के पास कुल मिलाकर 161 सीटें हैं। बीजेपी ने जहां 105 सीटें जीतीं हैं वहीं शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीट मिली हैं। अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं और उसके बाद सारे फैसले राज्यपाल लेंगे। इस दौरान अगर सरकार नहीं बनी तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है। सबको सियासत की चाशनी तो चाहिए लेकिन चुनाव नहीं। 

राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर दिल्ली में सोच-विचार जारी है। बुधवार को अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। पशोपेश यह है कि अगर शिवसेना की जिद मानी जाए, तो चुनाव प्रचार के दौरान मोदी-शाह की तरफ से फडणवीस को ही मुख्यमंत्री बनाने के वादे का क्या होगा/ और अगर न मानी जाए, तो शिवसेना के एनडीए से छिटकने का बुरा असर अन्य सहयोगियों पर भी पड़ने का खतरा है। इस स्थिति में बीजेपी या तो राष्ट्रपति शासन का विकल्प अपना सकती है अथवा गडकरी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा कर शिवसेना को अड़ियल रुख से हटने पर मजबूर कर सकती है। गडकरी की संघ प्रमुख भागवत से मुलाकात को इसी संदर्भ मे देखा जा रहा है

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